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जो लोग बहुत ज्यादा मांस या फिर डेयरी उत्पादों का सेवन करते हैं उनके लिए यह खबर परेशान करने वाली हो सकती है। शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने मांस और डेयरी आहार और खून में एंटीबॉडी के विकास के बीच एक प्रत्यक्ष आण्विक यानी मॉलिक्यूलर लिंक की पहचान की है जो कैंसर के विकास की संभावना को बढ़ाता है। जिस तरह से उच्च कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग के बढ़ते जोखिम के बीच लिंक है, ठीक उसी तरह से यह कनेक्शन भी डेयरी उत्पाद और रेड मीट का अधिक सेवन करने वालों और कैंसर की उच्च घटनाओं के बीच लिंक होने की बात कह रहा है। 

बीएमसी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुई स्टडी
इजरायल स्थित तेल अवीव विश्वविद्यालय के जॉर्ज एस वाइज फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज के श्मुनिस स्कूल ऑफ बायोमेडिसिन एंड कैंसर रिसर्च में सेल रिसर्च एंड इम्यूनोलॉजी विभाग के डॉ वेरेड पैडलर-करवानी ने इस स्टडी का नेतृत्व किया। स्टडी के परिणामों को 23 सितंबर, 2020 को बीएमसी मेडिसिन नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया था। 

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Neu5Gc के लिए एंटीबॉडी विकसित करता है शरीर
दरअसल, Neu5Gc एक शुगर मॉलिक्यूल (अणु) है जो मैमल्स (स्तनधारियों) के ऊतकों में पाया जाता है लेकिन मुर्गी या मछली में नहीं। जब बच्चे पहली बार डेयरी और मांस उत्पादों के संपर्क में आते हैं उनका शरीर शैशवावस्था में ही Neu5Gc के लिए एंटीबॉडी विकसित करता है। वैसे तो यह बात पहले से ही पता है कि ये एंटीबॉडीज कैंसर के खतरे को बढ़ाती हैं, विशेष रूप से कोलोरेक्टल कैंसर, लेकिन इन एंटीबॉडीज और मांस और डेयरी उपभोग के बीच कोई सीधा संबंध अब तक नहीं पाया गया था।

इस स्टडी के लेखक वेरेड पैडलर-करवानी ने कहा, "हमने अपनी स्टडी में पाया कि रेड मीट और चीज जैसे खाद्य पदार्थों के जरिए उच्च मात्रा में Neu5Gc का सेवन और उन एंटीबॉडीज का विकास जो कैंसर के खतरे को बढ़ाता है के बीच एक महत्वपूर्ण सहसंबंध है।" इस स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने उन सैंपल्स का उपयोग किया जो NutriNet-Sante, फ्रांस में आयोजित एक व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण का हिस्सा थे।

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19 हजार से अधिक वयस्कों के दैनिक सेवन की हुई गणना
अनुसंधान टीम के सदस्यों ने फ्रेंच डाइट में सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाले विभिन्न प्रकार के डेयरी और मांस खाद्य पदार्थों में Neu5Gc शुगर की मात्रा को मापा और 18 साल से अधिक उम्र के 19 हजार 621 वयस्कों के दैनिक Neu5Gc सेवन की गणना की, जिन्होंने लगातार कई दिनों तक अपने भोजन के सेवन से जुड़ी सभी जानकारियों को ऑनलाइन रिपोर्ट किया। इसके बाद अनुसंधान दल ने 120 प्रतिभागियों का सैंपल लिया और उनके खून में एंटी-Neu5Gc एंटीबॉडी के स्तर का परीक्षण किया।

जीसेमिक इंडेक्स विकसित किया गया
इन निष्कर्षों और फ्रांस के विभिन्न खाद्य उत्पादों में Neu5Gc शुगर की मात्रा को ध्यान में रखते हुए टीम ने एक सूचकांक बनाया, जिसे जीसेमिक इंडेक्स (सूचकांक) कहा जाता है। यह सूचकांक उन खाद्य पदार्थों को रैंक करता है जिनके अत्यधिक सेवन से एंटीबॉडीज के निर्माण में वृद्धि हो सकती है- और संभवतः कैंसर के खतरे में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

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इस बारे में स्टडी के लेखक पैडलर-करवानी कहते हैं, "वर्षों से इस तरह के कनेक्शन को खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन किसी को इसमें सफलता नहीं मिली। यहां, पहली बार, हमें एक मॉलिक्यूलर लिंक खोजने में सफलता हासिल हुई और इसके लिए हम धन्यवाद करना चाहते हैं, खून में एंटीबॉडीज की मात्रा का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए तरीकों की सटीकता का और फ्रांसीसी आहार प्रश्नावली से जुड़े विस्तृत डेटा का। "

कोलोरेक्टल कैंसर के साथ ही कई अन्य तरह के कैंसर का भी जोखिम
डॉ करवानी ने कहा कि तरीकों के इस संयोजन ने शोधकर्ताओं को यह अनुमान लगाने की अनुमति दी कि जो लोग बहुत अधिक मात्रा में रेड मीट और डेयरी उत्पाद जैसे चीज आदि खाते हैं उनके शरीर में उच्च स्तर और विभिन्न प्रकार के एंटीबॉडीज विकसित होंगे और इसलिए उनमें कैंसर के लिए उच्च जोखिम हो सकता है- विशेष रूप से कोलोरेक्टल कैंसर का, लेकिन अन्य कैंसर का भी जोखिम कम नहीं है।

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