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जो लोग मीट का सेवन नहीं करते, खासकर वे लोग जो वीगन डाइट को फॉलो करते हैं उन लोगों में बोन फ्रैक्चर होने यानी हड्डी टूटने का खतरा अधिक होता है। इंग्लैंड की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने एक रिपोर्ट दी है जिसमें बताया गया है कि वीगन डाइट अपनाने वाले लोगों में शरीर के किसी भी हिस्से में हड्डी फ्रैक्चर होने का खतरा 43 प्रतिशत अधिक होता है। खासकर हिप यानी कुल्हे के हिस्से में फ्रैक्चर का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

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वीगन वालों में हिप फ्रैक्चर का खतरा 2.3 गुना अधिक
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड में नफफील्ड डिपार्टमेंट ऑफ पॉप्यूलेशन हेल्थ में न्यूट्रिशनल एपिडेमियोलॉजिस्ट और इस स्टडी के लीड ऑथर टैमी टॉन्ग ने इस स्टडी के बारे में बताया, "हमने पाया कि वीगन डाइट वाले लोगों में टोटल फ्रैक्चर का खतरा अधिक था, जिसके परिणामस्वरूप मीट खाने वाले लोगों की तुलना में 10 साल की अवधि में प्रति 1 हजार व्यक्ति में 20 से अधिक फ्रैक्चर के मामले सामने आए। सबसे बड़ा अंतर हिप फ्रैक्चर के लिए था, जहां वीगन डाइट वाले लोगों में कुल्हे की हड्डी टूटने का जोखिम 2.3 गुना अधिक था उन लोगों की तुलना में जो मांस खाते हैं।"

स्टडी में शामिल 54 हजार लोगों के आंकड़ों की जांच की गई
इस स्टडी को बीएमसी मेडिसिन नाम के जर्नल में प्रकाशित किया गया जिसमें epic-ऑक्सफोर्ड स्टडी में शामिल 54 हजार लोगों के आंकड़ों की जांच की गई थी। यह यूके के महिलाओं और पुरुषों का एक बड़ा समूह या दस्ता था जिन्हें 1993 से 2001 के बीच इस स्टडी में शामिल किया गया था। स्टडी में शामिल प्रतिभागियों में से करीब 30 हजार लोग मीट का सेवन करने वाले लोग थे, 8 हजार लोग ऐसे थे जो मीट नहीं खाते थे लेकिन मछली खाते थे, करीब 15 हजार वेजिटेरियन यानी शाकाहारी थे और 2 हजार प्रतिभागी वीगन थे।

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18 साल तक प्रतिभागियों को फॉलोअप किया गया
साल 2016 तक यानी करीब 18 साल तक स्टडी में शामिल प्रतिभागियों को फॉलोअप किया गया और इस समय के दौरान करीब 3 हजार 941 फ्रैक्चर के मामले सामने आए। इसमें सबसे अधिक मामले हिप यानी कुल्हे के फ्रैक्चर के थे। इसके बाद कलाई, बाजू और पैर में फ्रैक्चर के मामले थे। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि शाकाहारी और वे लोग जो मांस नहीं खाते लेकिन मछली खाते हैं उनमें हिप फ्रैक्चर का खतरा अधिक था उन प्रतिभागियों की तुलना में जो मांस खाते थे। हालांकि यह खतरा आंशिक रूप से तब कम हो गया जब बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), कैल्शियम और प्रोटीन इनटेक के सेवन को ध्यान में रखा गया।

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लो बीएमआई हिप फ्रैक्चर के अधिक जोखिम से जुड़ा है
स्टडी के ऑथर टॉन्ग ने कहा, "पिछले अध्ययनों से पता चला है कि लो बीएमआई हिप फ्रैक्चर के अधिक जोखिम से जुड़ा हुआ है और कैल्शियम और प्रोटीन का कम सेवन करना भी हड्डियों की खराब सेहत के साथ जुड़ा हुआ है। इस स्टडी ने दिखाया कि वीगन डाइट फॉलो करने वाले लोग जिनका औसतन बीएमआई कम था और साथ ही वे कैल्शियम और प्रोटीन का भी सेवन कम कर रहे थे उनमें शरीर के कई हिस्सों में फ्रैक्चर का जोखिम अधिक था उन लोगों की तुलना में मीट का सेवन करते हैं।"

वीगन डाइट वालों को फ्रैक्चर का खतरा अधिक क्यों है?
यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ फ्लोरिडा में न्यूट्रिशन और डायटेटिक्स के असिस्टेंट प्रोफेसर लॉरी राइट कहती हैं, "स्टडी के परिणाम पिछले अध्ययनों के अनुरूप हैं जिसमें यह बताया गया है कि मांस न खाने वालों में फ्रैक्चर का खतरा अधिक था और इसे प्रोटीन और कैल्शियम का सेवन और बीएमआई के बारे में बताकर आंशिक रूप से समझाया भी गया है। हालांकि, जब इन कारकों को कंट्रोल कर लिया गया उसके बाद भी वीगन डाइट फॉलो करने वालों में फ्रैक्चर का अधिक जोखिम बरकरार था। यह हड्डी के स्वास्थ्य में उन प्रमुख पोषक तत्वों की जैव उपलब्धता से संबंधित हो सकता है।"

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प्लांट बेस्ड सोर्स बहुत अधिक जैव उपलब्ध नहीं हैं
वीगन डाइट को फॉलो करने वालों ने भले ही पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम का सेवन किया होगा, लेकिन कैल्शियम का प्लांट बेस्ड सोर्स जैसे पालक उतना जैव उपलब्ध नहीं है जितना डेयरी प्रॉडक्ट्स हैं। प्रोटीन की गुणवत्ता भी इसका एक और उदाहरण है। वीगन वालों ने भले ही पर्याप्त मात्रा में प्लांट प्रोटीन का सेवन किया होगा, लेकिन प्लांट प्रोटीन में मौजूद एमिनो एसिड का अनुपात पुनःशोषण (रीअब्जॉर्प्शन) और इसे दोबारा बनाने (रीमॉडलिंग) का समर्थन नहीं करता जिस अनुपात में जानवरों में मौजूद प्रोटीन करता है। हालांकि वीगन डाइट का सेवन करने वाले लोग साबुत सोया, बीन्स, दालें और फलियां, सूखे मेवे और बीज आदि का सेवन कर प्रोटीन को प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा विटामिन बी12 और विटामिन डी सप्लिमेंट का सेवन करना भी उनकी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। 

वीगन डाइट वाले इन चीजों का करें सेवन
लिहाजा बेहद जरूरी है कि वीगन डाइट फॉलो करने वाले लोग अपनी डाइट में सोय मिल्क, आमंड मिल्क या कैश्यू मिल्क का सेवन करें जो कैल्शियम और विटामिन डी के अलावा कई और न्यूट्रिएंट्स से फोर्टिफाइड होता है। इसके अलावा साबुत अनाज, फल, सब्जियां, दालें और ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें।

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