• हिं

कुत्तों में आंख की समस्याएं

कुत्ते अपने पंजों का इस्तेमाल खोदने, चीजों को पकड़ने, खेलने, अटेंशन पाने और खुजली करने के लिए करते हैं। इनके पैरों के पंजों में खाली जगह होने की वजह से गंदगी और कीटाणुओं के फंसने का जोखिम रहता है, यही वजह है इनके पैरों के जरिए संक्रमण का खतरा भी अधिक रहता है। इसमें कोई चौंकने वाली बात नहीं है कि यह संक्रमण अक्सर इनकी आंखों को भी प्रभावित कर सकता है।

कुत्ते में आंख से जुड़ी कुछ आम समस्याएं पलकों और आंख के लेंस को प्रभावित कर सकती हैं। इसके लक्षणों में आंखों में जलन से लेकर अंधेपन तक की समस्या शामिल है।

कुत्तों में आंख से जुड़ी समस्या का इलाज 'आर्टिफिशियल टियर' नामक दवा से आसानी से किया जा सकता है। इसके अलावा गुनगुने पानी से आंख की धुलाई की जा सकती है। हालांकि, कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

आंख की समस्या किसी भी ब्रीड या कुत्ते में हो सकती है, लेकिन कुछ ऐसी भी नस्ले हैं, जिनमें इस स्थिति का जोखिम अधिक रहता है। उदाहरण के लिए, पग नामक ब्रीड में एंट्रोपियन (जिसमें पलकें आंख की ओर मुड़ी होती हैं) और कंजेक्टिवाइटिस जैसी स्थितियों का खतरा बना रहता है। आंख से जुड़ी इन समस्याओं के कारणों में आनुवंशिक और पहले कभी किसी चोट का ट्रिगर होना या चिकित्सा स्थिति शामिल है।

आंखों से संबंधित सबसे आम समस्याओं में कुत्ते में पलकों से जुड़ी समस्याएं, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद, कुत्तों में चेरी आंख, कुत्तों में केराटोकोनजंक्टिवाइटिस और कुत्तों में कंजेक्टिवाइटिस शामिल है।

  1. कुत्तों में एंट्रोपियन - Kutton me entropion
  2. कुत्तों में एक्ट्रोपियन - Kutton me ectropion
  3. कुत्तों में लेगोफथेल्मोस - Kutton me Lagophthalmos
  4. कुत्तों में कंजक्टिवाइटिस (आंख आना) - Kutton me Conjunctivitis
  5. कुत्तों में ब्लेफेराइटिस - Kutton me blepharitis
  6. कुत्तों में डिस्टिचियासिस - Kutton me distichiasis
  7. कुत्तों में ट्रायचियासिस - Kutton me Trichiasis
  8. कुत्तों में एक्टोपिक सिलिया - Kutton me Ectopic cilia
  9. कुत्तों में ग्लूकोमा - Kutton me Glaucoma

यह एक ऐसी समस्या है जिसमें पलकों की त्वचा अंदर की ओर मुड़ने लगती है। 

एंट्रोपियन के लक्षण : एंट्रोपियन के संकेत या लक्षणों में शामिल हैं :

  • कॉर्निया पर पलकों के बाल छूने से बेचैनी या दर्द
  • पलकों की त्वचा अंदर की ओर मुड़ने से आंखों में लालिमा और आंसू बहना
  • भेंगापन या ज्यादातर समय अपनी आंख बंद रखना
  • आंखों से असामान्य डिस्चार्ज होना

कुछ मामलों में, कोई समस्या या दर्द नहीं होता है इसलिए पशुचिकित्सक के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। लेकिन कुछ कुत्तों को इससे बहुत असुविधा और दर्द हो सकता है, जिस वजह से वे बार-बार अपनी आंखों को रगड़ते हुए दिखाई दे सकते हैं। आंखों में जलन की स्थिति होने पर वे लगातार झपकी लेने की कोशिश कर सकते हैं। कुछ मामलों में, आंखों से बलगम जैसा डिस्चार्ज हो सकता है। इसके अलावा पलकों के आसपास के बाल सामान्य से अधिक नम और उलझे हुए दिखाई दे सकते हैं।

कारण और जोखिम कारक : एंट्रोपियन की समस्या जीन से जुड़ी है। यदि यह बीमारी कुत्ते के माता-पिता से उनके बच्चों में पारित हुई है तो मात्र एक वर्ष की आयु से ही लक्षणों को नोटिस किया जा सकता है। अक्सर कम ही ऐसा होता है कि एंट्रोपियन का कारण कुछ और बने। ये आंख, आंख में संक्रमण, कॉर्निया में ऐंठन या न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के लिए खतरनाक हो सकता है।

निदान : एंट्रोपियन का परीक्षण आमतौर पर आसानी से होता है। यदि चेहरे की असामान्यताएं या गंभीर अंतर्निहित कारणों का पता नहीं है, तो ऐसे में पशु चिकित्सक आंख की जांच कर सकते हैं।

उपचार : किसी भी संक्रमण से निपटने के लिए आमतौर पर एंटीबायोटिक्स निर्धारित की जाती हैं लेकिन गंभीर स्थिति में, सर्जरी (जिसे ब्लेफेरोप्लास्टी के रूप में जाना जाता है) की जरूरत पड़ सकती है।

जटिलताएं : यदि स्थिति खराब हो जाती है, तो कॉर्निया (आई लेंस) पर अल्सर बन सकते हैं जिसकी वजह से कुत्ते की आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा आंखों में संक्रमण और निशान पड़ना भी संभव है।

(और पढ़ें - कुत्तों में कीड़े मारना)

एक्ट्रोपियन कुत्तों की आंख में होने वाली एक सामान्य समस्या है। इसमें निचली पलक बाहर की ओर मुड़ जाती है जिस कारण आंख का निचला हिस्सा लाल और खूनी दिखाई देता है। आमतौर पर, पलक गंदगी को आंख में जाने से रोकती है, इसलिए इस विकृति की वजह से कुत्ते में कंजेक्टिवाइटिस या अन्य संक्रमण होने का खतरा अधिक रहता है।

एक्ट्रोपियन के लक्षण

  • लटकी हुईं आंखें
  • आंख के निचले हिस्से में लालिमा
  • आंखों से मवाद जैसा डिस्चार्ज
  • आंखों में जलन, जिसके कारण कुत्ते को बार-बार आंखों को रगड़ना पड़ सकता है।
  • एक्ट्रोपियन कुत्ते के लिए दर्दनाक हो सकता है। अधिक गंभीर मामलों में कॉर्निया पर निशान पड़ सकते हैं। 

कारण : माना जाता है कि इसके पीछे कोई आनुवंशिक घटक हो सकता है, जो आंखों के आसपास की मांसपेशियों को थोड़ा कमजोर बनाता है। कभी-कभी अंतर्निहित कारण की वजह से भी यह समस्या हो सकती है। इसे एक्वायर्ड एक्ट्रोपियन भी कहा जाता है, जिसमें चेहरे पर लकवा, हाइपोथायरायडिज्म या न्यूरोमस्कुलर डिसीज (जो मांसपेशियों और उन्हें नियंत्रित करने वाली तंत्रिका तंत्र का प्रभावित होना) के लक्षण दिखाई देते हैं।

जटिलताएं : इस स्थिति से ग्रस्त कुत्तों में कंजेक्टिवाइटिस और केराटाइटिस का जोखिम रहता है। गंभीर मामलों में, कुत्ते के अंधे होने का खतरा हो सकता है।

निदान : आमतौर पर इस बीमारी का निदान जन्म के बाद एक वर्ष के अंदर ​कर लिया जाता है। जिन कुत्तों में इस समस्या का पता एक साल के बाद लगता है, उनमें इसके पीछे माध्यमिक कारण हो सकता है। यदि अन्य कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं, तो शारीरिक जांच के जरिए निदान किया जा सकता है। यदि कॉर्निया को नुकसान हुआ है या आंखों में अल्सर का संदेह है तो धुंधला दिखाई पड़ सकता है। 

इलाज : कुछ हल्के, नेत्र संबंधी एंटीबायोटिक दवाओं को संक्रमण से बचने के लिए दिया जा सकता है। आंख को नम रखने के लिए 'आर्टिफिशिल टियर' का प्रयोग किया जा सकता है। ऐसे में ठंडा या गर्म पानी से सिकाई की जा सकती है।

(और पढ़ें - कुत्तों में डायबिटीज)

लेगोफथेल्मोस : इस स्थिति में कुत्ता पूरी तरह से अपनी पलकें बंद नहीं कर पाता है। यह काफी हद तक आनुवंशिक कारणों से होता है।

लक्षण : नींद के दौरान भी आंखों को पूरी तरह से बंद करने में असमर्थता

निदान : यदि आप कुत्ते के सोते समय उसकी पलकों को थोड़ा खुला नोटिस करते हैं, तो यह लेगोफथेल्मोस का संकेत हो सकता है। ऐसे में पुष्टि के लिए अपने कुत्ते को पशु चिकित्सक के पास ले जाएं। यदि कोई अन्य लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, तो निदान अवलोकन द्वारा किया जा सकता है। यदि पशु चिकित्सक को अंतर्निहित कारणों पर संदेह है, तो वे इमेजिंग टेस्ट और ब्लड सैंपल की मदद ले सकते हैं।

उपचार : गर्म या ठंडी सिकाई से जलन को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इस स्थिति में पशुचिकित्सक आर्टिफिशियल टियर दवा देने की भी सलाह दे सकते हैं। डॉक्टर संक्रमण से बचने के लिए कुछ अन्य दवाएं भी लिख सकते हैं। जिन मामलों में कुत्ते में सुधार नहीं होता है, उनमें सर्जरी की जरूरत पड़ती है।

कंजक्टिवा में सूजन की स्थिति को कंजक्टिवाइटिस कहते हैं। यह समस्या अक्सर गंदगी, बैक्टीरिया या धूल कण के जाने से होती है। कंजक्टिवा का काम आंखों में धूल के कणों और कचरे को जाने से रोकना है। यह पलकों की मूवमेंट को भी सुविधाजनक बनाता है। 

लक्षण : इंसानों की तहर कुत्तों में भी कंजक्टिवाइटिस के लक्षण समान हैं :

  • आंखों में लालिमा
  • अधिक मात्रा में आंसू निलकना
  • आंखों के आसपास के हिस्से पर सूजन आना 
  • दर्द होना
  • इस स्थिति में कुत्ते अक्सर दर्द को कम करने के लिए अपनी आंखों पर पंजे मार सकते हैं।

कारण : कुत्तों में आंख आना कई कारणों की वजह से हो सकता है जिसमें किसी पदार्थ से एलर्जी, जन्मजात कारक, वायरल संक्रमण, चोट या कुछ अन्य समस्याएं शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अन्य बीमारियां जैसे सूखी आंखें, ग्लूकोमा, एंटीरियर यूवाइटिस और कुछ निश्चित कैंसर की वजह से भी आंख आ सकती है 

निदान : यह स्थिति कई अंतर्निहित कारणों की वजह से हो सकती है, इसलिए पशुचिकित्सक कुत्ते की मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों के बारे में पूछ सकते हैं। चूंकि, नाक बंद होने पर भी यह स्थिति पैदा हो सकती है इसलिए, पशुचिकित्सक नाक की भी जांच कर सकते हैं।

इलाज : इसका उपचार निदान पर निर्भर करता है। चूंकि, इसका कारण अक्सर रोगजनक होता है, इसलिए उपयुक्त एंटीबायोटिक और कुछ दवाइयां निर्धारित की जाती हैं। अगर परजीवी या वायरल कारणों का संदेह होता है तो इन दवाइयों को जारी रखा जाता है। कैंसर जैसे मामलों में अधिक उपचार की जरूरत पड़ती है। फिलहाल, डॉक्टर के अनुसार आई ड्रॉप का इस्तेमाल करने से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

जटिलताएं : इस समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अंधेपन का कारण बन सकती है। किसी भी लक्षण के साथ यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

(और पढ़ें - कुत्तों में कैनाइन पर्वो वायरस)

पलकों के बाल के आसपास व इसके अंदर सूजन की स्थिति को ब्लेफेराइटिस के रूप में जाना जाता है। यह स्थिति ऊपर और नीचे दोनों पलकों में हो सकती है।

लक्षण : यह एक दर्दनाक स्थिति है, जिसके लक्षणों में शामिल है :

  • पलकों पर सूजन, लालिमा और खुजली
  • आंखों को पंजों से खुजलाना
  • प्रभावित आंख से डिस्चार्ज

कारण : ब्लेफेराइटिस के कारणों में घुन, टिक, कुछ खाद्य पदार्थों और दवाओं से होने वाली एलर्जी, स्टैफिलोकोकस और स्ट्रेप्टोकोकस जैसे जीवाणु संक्रमण, कुछ प्रकार के कैंसर, आंख के आसपास चोट और परजीवी संक्रमण शामिल हैं।

निदान और उपचार : पशुचिकित्सक मालिक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार निदान करते हैं। डॉक्टर ऐसे में कुत्ते का ब्लड और इमेजिंग टेस्ट कर सकते हैं। बीमारी का इलाज इसके लक्षणों के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

डिस्टिचियासिस

डिस्टिचियासिस को डबल आईलैशेज भी कहा जाता है। यह एक दुर्लभ विकार है, जिसमें पलकों के बालों में असामान्य रूप से वृद्धि होने लगती है।

लक्षण : अतिरिक्त निकलने वाली पलकों के बाल अक्सर कड़े होते हैं और लगातार कुत्ते की आंखों में चुभते हैं। इसके लक्षणों में शामिल हैं :

  • अधिक मात्रा में आंसू आना
  • भेंगापन
  • पलक बार-बार झपकाना

अगर दर्द गंभीर हो जाता है तो आपका कुत्ता ज्यादातर अपनी आंखों को बंद रखेगा।

कारण : डिस्टिचियासिस एक आनुवंशिक बीमारी है। हालांकि, कुछ मामलों में यह जन्म के बाद भी विकसित हो सकती है। पशु चिकित्सकों की रिपोर्ट के अनुसार, यह कुत्तों में सबसे अधिक पाई जाने वाली आंखों की समस्याओं में से एक है।

जोखिम कारक : डिस्टिचियासिस किसी भी उम्र में और किसी भी कुत्ते को हो सकता है, लेकिन यह तीन साल से कम उम्र के छोटे कुत्तों में सबसे अधिक देखा जाता है। आमतौर पर यह कुछ नस्ल जैसे कॉकर स्पैनियल, पूडल, पग,और डैचशुंड में होता है।

निदान : डिस्टिचियासिस के लक्षण दिखने के बाद तुरंत उसे शारीरिक जांच के लिए पशु चिकित्सक के पास ले जाएं। यदि कुत्ते के पलक में निकलने वाले अतिरिक्त बाल बहुत महीन हैं, तो निदान में मुश्किल आ सकती है। लेकिन आमतौर पर, इन अतिरिक्त बालों की आसानी से जांच की जा सकती है और इस समस्या के कारण की भी पहचान की जा सकती है।

इलाज : बालों को उखाड़ना इसका स्थायी इलाज नहीं है, क्योंकि ये वापस बढ़ने लगते हैं। डिस्टिचियासिस से छुटकारा पाने के लिए सर्जरी की जरूरत होती है। 

जटिलता : अंतर्निहित कारणों की वजह से डिस्टिचियासिस की स्थिति बदतर हो सकती है। यदि ऐसा है, तो अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। अगर व्यक्ति को संदेह है कि कुत्ते की आंखों में लगातार सूजन है तो तुरंत उसे डॉक्टर से पास ले जाएं, क्योंकि डिस्टिचियासिस के लिए घरेलू उपचार बहुत प्रभावी नहीं हैं।

(और पढ़ें - कुत्तों में पिस्सू)

ट्राइचियासिस

इस स्थिति में, कुत्तों के पलक के बाल गलत दिशा में (आंख की ओर) निकलने लगते हैं। हालांकि, डिस्टिचियासिस के विपरीत ट्राइचियासिस में वृद्धि असामान्य स्थान से नहीं होती है।

लक्षण : कुत्तों में पलकों से संबंधित समस्याओं में निम्न लक्षण शामिल हैं : 

  • अधिक आंसू निकलना
  • आंख की पुतली का रंग बदलना
  • बार-बार पलकें झपकना
  • आंख का संक्रमण

कारण और जोखिम कारक : चेहरे पर लंबे बाल वाले कुत्ते जैसे शिह त्जू, त्वचा पर सिलवट वाले कुत्ते जैसे बुलडॉग और छोटी खोपड़ी वाले कुत्ते जैसे पग में इस स्थिति के विकसित होने का खतरा अधिक होता है।

निदान : शिर्मर टियर टेस्ट के जरिये इस बीमारी का निदान किया जाता है। इस टेस्ट में फिल्टर पेपर को निचली पलक के नीचे पांच मिनट तक के लिए रखा जाता है और इस दौरान आंसू निकलने के स्तर का आकलन किया जाता है।

इलाज : डिस्टिचियासिस की तरह इस समस्या को ठीक करने में भी सर्जरी की आवश्यक होती है। डॉक्टर बालों को गलत दिशा में बढ़ने से रोकने के लिए बालों की जड़ या पलक के एक हिस्से को हटवाने के लिए क्रायोसर्जरी की सलाह दे सकते हैं।

जटिलताएं : भीतर की तरफ बाल उगना आंखों को परेशान कर सकता है और ऐसे में कुत्ते कॉर्निया पर खरोंच भी मार सकते हैं। अगर इस स्थिति को अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो कॉर्निया में अल्सर की समस्या हो सकती है।

इस स्थिति में बाल कंजेक्टिवा (पलक का आंतरिक भाग) के अंदर से बढ़ने लगते हैं।

लक्षण : आंखों में जलन और दर्द, अत्यधिक आंसू आना और बार-बार पलक झपकाना

कारण और जोखिम कारक : लंबे बालों वाले कुत्ते, चेहरे की त्वचा पर सिलवट वाले कुत्ते और छोटी खोपड़ी वाले कुत्तों में यह स्थिति अधिक बार होती है।

निदान और उपचार : आमतौर पर इस स्थति का निदान कुत्ते की आंख की शारीरिक जांच द्वारा किया जाता है। इसके अलावा क्रायोसर्जरी नामक सर्जरी की भी मदद ली जा सकती है।

(और पढ़ें - भारत में कुत्तों की नस्ल और प्रकार)

ग्लूकोमा की समस्या आंखों में दवाब पड़ने के कारण होती है। इंट्रोक्युलर प्रेशर (आंख के अंदर द्रव का दबाव) की वजह से रेटिना और आंख की तंत्रिका पर दबाव बढ़ता है, जिससे अंधापन भी हो सकता है। 

लक्षण : ग्लूकोमा के लक्षण शुरू में सूक्ष्म होते हैं जिस वजह से शुरुआती चरणों में इसका निदान करना मुश्किल हो जाता है। इसके लक्षणों में निम्न शामिल हैं :

  • दिखाई देना बंद हो जाना
  • आंखों में धुंधलापन
  • आईबॉल का बढ़ना
  • आंख में सूजन
  • सिरदर्द
  • सुस्ती
  • व्यवहार में बदलाव

कारण : डॉक्टरों का मानना है कि निम्न में से एक या अधिक कारक ग्लूकोमा को ट्रिगर कर सकते हैं :

  • आंखों से निकासी न हो पाना
  • कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स जैसी दवाएं
  • ऑप्टिक तंत्रिका में खून का प्रवाह कम होना
  • हाई बीपी

निदान : मेडिकल हिस्ट्री के अलावा पशुचिकित्सक टोनोमेट्री टेस्ट, पैकिमेट्री टेस्ट और पेरीमेट्री टेस्ट की मदद ले सकते हैं।

इलाज : ग्लूकोमा का इलाज दवाइयों या सर्जरी द्वारा किया जा सकता है। वास्तव में ग्लूकोमा का इलाज इसके अंतर्निहित कारण, रोग की अवस्था, वांछित परिणाम, उपलब्ध उपकरण और मालिक की वित्तीय सीमाओं के आधार पर किया जा सकता है।

संदर्भ

  1. MSD Veterinary Manual [Internet]. Merck & Co., Inc.; Eye Disorders of Dogs
  2. Tufts Now. [Internet]. Tufts University. Massachusetts; Spotting Eye Problems in Pets
  3. Cathryn Mellersh. The genetics of eye disorders in the dog. Canine Genet Epidemiol. 2014; 1: 3. PMID: 26401320.
  4. Veterinary Partner. [Internet]. Veterinary Information Network. Davis, California; Entropion in Dogs
  5. Canine Lens: Cataract, Luxation, and Surgery. In Essentials of Veterinary Ophthalmology, K.N. Gelatt (Ed.), August 2014.
  6. Vestre W.A. Use of cyclocryotherapy in management of glaucoma in dogs.. Modern Veterinary Practice, February 1984; 65(2): 93-7.
ऐप पर पढ़ें
cross
डॉक्टर से अपना सवाल पूछें और 10 मिनट में जवाब पाएँ