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जब बात सेक्सुअल हेल्थ की आती है तो सबसे ज़्यादा चर्चा जिस चीज़ की होती है, वो है कंडोम। यह एक ऐसा छोटा सा प्रोडक्ट है जो न सिर्फ़ प्रेग्नेंसी से बचाता है बल्कि यौन रोगों से भी सुरक्षा देता है। बहुत सारे लोग अब भी कंडोम को लेकर झिझक महसूस करते हैं या फिर आधी-अधूरी जानकारी रखते हैं। इसी वजह से कभी-कभी गलत इस्तेमाल, गलत चुनाव के कारण परेशानी हो सकती है।
आज हम इस आर्टिकल में बात करेंगे कंडोम के अलग-अलग प्रकार, उनके फायदे और नुकसान, सही इस्तेमाल का तरीका और कंडोम से जुड़ी कुछ ज़रूरी सावधानियों के बारे में। आप इसे पढ़कर अपने लिए सही कंडोम चुन पाएंगे और सेक्स लाइफ को सेफ और बेहतर बना पाएंगे।

  1. कंडोम क्या है और यह कैसे काम करता है
  2. कंडोम के प्रकार
  3. कंडोम इस्तेमाल करने का सही तरीका
  4. कंडोम के फायदे
  5. कंडोम से जुड़ी सावधानियाँ और साइड इफेक्ट्स
  6. कंडोम से जुड़े मिथक और सच्चाई
  7. कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए
  8. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  9. सारांश
कंडोम कितने प्रकार के होते हैं? के डॉक्टर

कंडोम एक तरीका है जिससे गर्भधारण को रोका जा सकता है। इसका काम यह है कि यह शुक्राणुओं को महिला के अंडाणु तक पहुँचने से रोकता है। इसे संभोग के समय पुरुष के लिंग पर या महिला की योनि के अंदर लगाया जाता है। अगर इसे सही तरीके से लगाया जाए तो यह शुक्राणु और अंडाणु के मिलने से रोकता है, जिससे गर्भधारण की संभावना खत्म हो जाती है।

अनुसंधानों के अनुसार, अगर कंडोम को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह लगभग 98 प्रतिशत तक सुरक्षित माना जाता है। लेकिन असली जीवन में कई बार लोग इसे ठीक से नहीं लगाते या गलती कर देते हैं, जिसकी वजह से इसकी सुरक्षा लगभग 85 प्रतिशत तक रह जाती है। इसका मतलब यह है कि कंडोम बहुत असरदार है, बस इसे सही तरीके से इस्तेमाल करना आना चाहिए।

कंडोम का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह केवल गर्भधारण से ही नहीं बचाता, बल्कि यौन संचारित रोगों से भी सुरक्षा देता है। एचआईवी, गोनोरिया, क्लैमाइडिया और सिफलिस जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए कंडोम सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है।

(और पढ़ें - महिला कंडोम क्या है)

अब आइए मुख्य भाग पर चलते हैं, यानी कंडोम के अलग-अलग प्रकार। बाज़ार में कंडोम के कई रूप उपलब्ध हैं और हर प्रकार का उद्देश्य तथा उपयोग थोड़ा अलग होता है।

लेटेक्स कंडोम

यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला कंडोम है। इसे प्राकृतिक रबर यानी लेटेक्स से बनाया जाता है। यह गर्भधारण को रोकने के साथ-साथ यौन संक्रमणों से भी सुरक्षा देता है। शोधों के अनुसार लेटेक्स कंडोम यौन संचारित रोगों से बचाव में बहुत प्रभावी है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि कुछ लोगों को लेटेक्स से एलर्जी हो सकती है। ऐसे लोगों में खुजली, दाने या लालिमा जैसी समस्या हो सकती है। अगर आपको ऐसा लगे तो तुरंत नॉन-लेटेक्स कंडोम इस्तेमाल करें।

लेटेक्स कंडोम का इस्तेमाल सिर्फ पानी या सिलिकॉन आधारित ल्यूब्रिकेंट के साथ ही करें। तेल या पेट्रोलियम जेली के साथ इस्तेमाल करने से यह फट सकता है।

नॉन-लेटेक्स कंडोम 

यह कंडोम उन लोगों के लिए बनाए गए हैं जिन्हें लेटेक्स से एलर्जी होती है। यह कंडोम पतले होते हैं और शरीर की गर्मी को अच्छी तरह महसूस होने देते हैं, जिससे अधिक स्वाभाविक अनुभव मिलता है।

पॉलीयूरेथेन कंडोम थोड़े कम लचीले होते हैं लेकिन संक्रमण से सुरक्षा में अच्छे माने जाते हैं। पॉलीआइसोप्रीन कंडोम अधिक मुलायम और आरामदायक होते हैं। अगर आपको लेटेक्स से एलर्जी है तो यह सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।

महिला कंडोम

यह खासतौर पर महिलाओं के लिए बनाए जाते हैं और इन्हें योनि के अंदर लगाया जाता है। इससे महिलाओं को अपनी सुरक्षा खुद नियंत्रित करने का मौका मिलता है।

महिला कंडोम गर्भधारण और यौन संक्रमण दोनों से सुरक्षा देता है। लेकिन अगर इसे सही तरीके से न लगाया जाए तो इसकी सुरक्षा थोड़ी कम हो सकती है।

फ्लेवर्ड कंडोम

स्वाद वाले कंडोम मुख्य रूप से मुखमैथुन यानी ओरल सेक्स के लिए बनाए जाते हैं। यह यौन अनुभव को मजेदार और स्वच्छ बनाते हैं और मुखमैथुन से फैलने वाले संक्रमण से भी सुरक्षा देते हैं।

ध्यान रखें कि अगर इन्हें योनि या गुदा मैथुन के लिए इस्तेमाल करें तो कभी-कभी जलन या खुजली हो सकती है। इसका कारण कंडोम पर लगे स्वाद वाले तत्व हो सकते हैं

टेक्सचर्ड और रिब्ड कंडोम

इस तरह के कंडोम पर छोटे-छोटे उभार, रेखाएँ या विशेष डिज़ाइन होते हैं। इसका मकसद यौन अनुभव को और बेहतर बनाना है। चिकित्सकीय दृष्टि से यह सामान्य कंडोम जितने ही सुरक्षित और प्रभावी होते हैं।

अति-पतले और मोटे कंडोम

अति-पतले यानी अल्ट्रा-थिन कंडोम इस तरह बनाए जाते हैं कि पहनने पर लगभग बिना कंडोम का अनुभव होता है।

मोटे यानी एक्स्ट्रा-थिक कंडोम अक्सर गुदा मैथुन के लिए पसंद किए जाते हैं क्योंकि इसमें फटने की संभावना कम होती है।

चिकनाईयुक्त और बिना चिकनाई वाले कंडोम

चिकनाईयुक्त (लुब्रिकेटेड) कंडोम घर्षण कम करते हैं और फटने की संभावना भी कम होती है।

अगर आप बिना चिकनाई वाले (नॉन-लुब्रिकेटेड) कंडोम का इस्तेमाल कर रहे हैं तो साथ में सुरक्षित ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल करना जरूरी है। सूखा संभोग यानी ड्राई सेक्स चोट, जलन और संक्रमण का कारण बन सकता है।

शुक्राणुनाशक कंडोम

इन कंडोमों पर एक रासायनिक परत होती है जिसे नॉनॉक्सिनॉल-9 कहते हैं। इसका काम शुक्राणु को मारना है।

लेकिन शोध बताते हैं कि इसका बार-बार इस्तेमाल करने से जलन, सूजन या संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ इसके नियमित इस्तेमाल की सलाह नहीं देते।

नॉवेल्टी कंडोम

ये कंडोम मनोरंजन या मज़े के लिए बनाए जाते हैं। इनमें अंधेरे में चमकने वाले, अलग-अलग डिज़ाइन या अनोखी आकृतियों वाले कंडोम शामिल होते हैं। हालाँकि, सुरक्षा की दृष्टि से ये हमेशा भरोसेमंद नहीं होते।

(और पढ़ें - पहली बार सेक्स)

कंडोम दिखने में तो साधारण लगता है, लेकिन इसे सही तरीके से पहनना और निकालना बहुत ज़रूरी है। अगर ज़रा-सी भी गलती हो जाए तो इसका असर कम हो सकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इसे कैसे इस्तेमाल करना चाहिए।

  1. सबसे पहले कंडोम का पैकेट सावधानी से खोलें। इसे दाँत या नाखून से फाड़ने की कोशिश न करें, वरना कंडोम फट सकता है।
  2. कंडोम हमेशा तभी पहनें जब लिंग पूरी तरह खड़ा (इरेक्ट) हो।
  3. कंडोम के सिरे को हल्के से दबाएँ ताकि उसमें हवा न भर सके। इसी हिस्से में वीर्य  इकट्ठा होता है।
  4. अब कंडोम को धीरे-धीरे लिंग के सिरे से लेकर जड़ तक रोल करें।
  5. संभोग ( खत्म होने के बाद, लिंग को निकालते समय कंडोम को नीचे से पकड़कर बाहर निकालें ताकि वीर्य बाहर न गिरे।
  6. कंडोम केवल एक बार इस्तेमाल करने के लिए होता है। इसे दोबारा कभी न पहनें। इस्तेमाल के बाद इसे अच्छे से बाँधकर कूड़ेदान में फेंक दे। (और पढ़ें - सेक्स करने के तरीके)

कंडोम कई तरह से आपकी सेहत और सुरक्षा के लिए फायदेमंद है। आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं:

  1. कंडोम गर्भधारण से बचाता है और साथ ही यौन संचारित रोगों (STI) से भी सुरक्षा देता है।
  2. इसे इस्तेमाल करना बहुत आसान है और यह मेडिकल स्टोर या ऑनलाइन कहीं भी आसानी से मिल जाता है।
  3. इसमें कोई हार्मोनल दवा या इंजेक्शन शामिल नहीं होता, इसलिए इसके इस्तेमाल से शरीर पर कोई हार्मोनल साइड इफेक्ट नहीं होता।
  4. कंडोम इस्तेमाल करने से इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोलियों की ज़रूरत कम हो जाती है।
  5. कंडोम लगाने से मन में एक तरह का आत्मविश्वास और सुरक्षा का एहसास रहता है, जिससे यौन जीवन और भी स्वस्थ और निश्चिंत बनता है।   (और पढ़ें – शीघ्र स्खलन के कारण)

कंडोम सुरक्षित तरीका है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है।

  1. अगर आपको लेटेक्स से एलर्जी है तो लेटेक्स वाले कंडोम न इस्तेमाल करें। इसके बजाय नॉन-लेटेक्स कंडोम (जैसे पॉलीयूरीथेन या पॉलीआइसोप्रीन) का इस्तेमाल करें।
  2. कंडोम पर तेल आधारित लुब्रिकेंट (जैसे नारियल तेल, बेबी ऑयल या वैसलीन) न लगाएँ। इससे कंडोम फट सकता है। हमेशा पानी आधारित या सिलिकॉन आधारित लुब्रिकेंट ही चुनें।
  3. कंडोम का एक्सपायरी डेट ज़रूर देखें। एक्सपायरी के बाद कंडोम कमजोर हो सकता है और आसानी से फट सकता है।
  4. कुछ कंडोम में स्पर्मिसाइड (शुक्राणु मारने वाला केमिकल) होता है। इसे लंबे समय तक बार-बार इस्तेमाल करने से जलन या खुजली जैसी समस्या हो सकती है।
  5. कभी भी एक साथ दो कंडोम न पहनें। ऐसा करने से दोनों के बीच रगड़ होती है और कंडोम फटने का खतरा बढ़ जाता है।     (और पढ़ें - सेक्स एजुकेशन)

कंडोम को लेकर बहुत सी गलतफहमियाँ होती हैं। इन्हें जानना और समझना बहुत ज़रूरी है।

मिथक 1: कंडोम इस्तेमाल करने से सेक्स का मज़ा कम हो जाता है।
सच्चाई: अब मार्केट में ultra-thin, ribbed और dotted जैसे कई प्रकार के कंडोम उपलब्ध हैं। ये न केवल सुरक्षा देते हैं बल्कि सेक्स का आनंद भी बढ़ाते हैं।

मिथक 2: अगर दो कंडोम एक साथ पहनें तो सुरक्षा ज्यादा बढ़ जाएगी।
सच्चाई: दो कंडोम पहनने से कंडोम के बीच रगड़ (friction) बढ़ जाती है, जिससे फटने का खतरा ज्यादा हो जाता है। इसलिए हमेशा सिर्फ एक कंडोम ही इस्तेमाल करें।

मिथक 3: कंडोम हमेशा 100% सुरक्षित होते हैं।
सच्चाई: कोई भी तरीका पूरी तरह foolproof नहीं होता। लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करने पर कंडोम सबसे सुरक्षित और आसान तरीका है, जो गर्भधारण और यौन संक्रमण से बचाव करता है।

(और पढ़ें - लिंग को बड़ा करने के तरीके)

कुछ मामलों में कंडोम इस्तेमाल करते समय डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है। इन संकेतों पर ध्यान दें:

  1. अगर कंडोम बार-बार फट रहा है या टूट रहा है।
  2. अगर यौन अंग में लगातार जलन, खुजली या लालिमा (rash) हो रही हो।
  3. अगर आपको लेटेक्स से एलर्जी के लक्षण दिखाई दें, जैसे चकत्ते, सूजन या खुजली।
  4. अगर आपको किसी यौन रोग (STI) के संपर्क में आने का डर हो।

इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। सही जानकारी और समय पर इलाज से आप सुरक्षित रह सकते हैं।

(और पढ़ें - हस्तमैथुन के नुकसान)

आपके सवालों के जवाब यहाँ पाएं। 

सबसे सुरक्षित कंडोम कौन सा है?

लेटेक्स और नॉन-लेटेक्स दोनों ही सुरक्षित हैं, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करना सबसे ज़्यादा मायने रखता है।

क्या कंडोम 100% सुरक्षित होता है?

नहीं, लेकिन सही इस्तेमाल करने पर इसकी इफेक्टिवनेस 98% तक रहती है।

क्या महिलाएं कंडोम इस्तेमाल कर सकती हैं?

हाँ, फीमेल कंडोम इसके लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

क्या कंडोम से कोई साइड इफेक्ट होता है?

आमतौर पर नहीं, लेकिन latex allergy या spermicide irritation हो सकती है।

एक कंडोम कितनी बार इस्तेमाल किया जा सकता है?

एक कंडोम केवल एक बार इस्तेमाल के लिए होता है।

कंडोम न केवल गर्भधारण से बचने का आसान और किफायती तरीका है, बल्कि यह यौन संचारित रोगों से सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद तरीका भी है। बाज़ार में कई तरह के कंडोम उपलब्ध हैं, जिससे आप अपनी ज़रूरत और आराम के अनुसार सही कंडोम चुन सकते हैं। सही कंडोम का चुनाव, इसे सही तरीके से इस्तेमाल करना और पूरी जानकारी होना आपकी यौन जीवन को सुरक्षित और सुखद बनाता है।

(और पढ़ें - पहली बार सेक्स कैसे करें)

Dr. Hakeem Basit khan

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