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शादी के बाद हर महिला प्रेग्नेंट होने का सपना देखती है। प्रेग्नेंसी को लेकर कई महिलाओं में डर होता है, तो कई में उत्सुकता होती है। प्रेग्नेंसी महिलाओं के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। कुछ महिलाएं जल्द प्रेग्नेंट होना चाहती हैं, जबकि कुछ किसी निश्चित समय पर ही गर्भधारण करना चाहती है। लेकिन, प्रेग्नेंट होना आपकी इच्छा के अलावा आपके स्वास्थ की मौजूदा स्थिति व अन्य कारणों पर भी निर्भर करता है। 

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आज के वातावरण और अनियमित दिनचर्या में महिलाओं को कई तरह की समस्या होने लगी हैं, जिसमें गर्भधारण न करने की समस्या एक आम हो परेशानी हो चली है। शादी के बाद प्रेग्नेंट होने के लिए यदि आपने कोई समय निर्धारित किया हो और वह समय बीत चुका हो, तो यह आपकी किसी अंदुरूनी समस्या की ओर इशारा हो सकता है। ऐसे में आपको डॉक्टर से संपर्क करने के अलावा कुछ उपायों को भी अपनाना चाहिए ताकि आप सही समय पर प्रेग्नेंट हो सकें।

यहां महिलाओं में होती इस आम समस्या के लिए, जैसे प्रेग्नेंट होने के उपाय, गर्भवती होने के लिए क्या करें, गर्भधारण कब होता है, प्रेंग्नेट कैसे होते है, गर्भ ठहरने के तरीके और गर्भवती होने के लिए क्या करें आदि सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की जा रही है।

(और पढ़ें - प्रेग्नेंसी के महीने)

  1. प्रेग्नेंट न होने की समस्या के लक्षण - Pregnant na hone ki samasya ke lakshan
  2. प्रेग्नेंट न होने के कारण - Pregnant na hone ki samasya ke karan
  3. प्रेग्नेंट न होने की समस्या का इलाज - Pregnant na hone ki samasya ka ilaaj
  4. प्रेग्नेंट न हो पाना के डॉक्टर

प्रेग्नेंट न होने के कई तरह के लक्षण महिलाओं में दिखाई देते हैं। इसमें मुख्यतः ओवुलेशन और मासिक धर्म चक्र का अनियमित होना शामिल है। इसके अलावा होने वाले लक्षणों को निम्नतः बताया जा रहा है।

कई बार महिलाओं के गर्भधारण न करने के पीछे हार्मोन्ल समस्या भी होती है। इसमें नीचे बताए गए लक्षण शामिल होते हैं।

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प्रेग्नेंट न हो पाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इन कारणों को आप चिकित्सीय और अन्य आधार पर दो भागों में विभाजित कर सकते हैं। महिलाओं की दिन प्रतिदिन की आदतों का भी असर उनके प्रेग्नेंसी पर पड़ता है। आगे जानते हैं, इस समस्या के मुख्य कारणों के बारे में।  

चिकित्सीय कारण

  1. अनियमित महावारी –
    जिन महिलाओं के मासिक धर्म चक्र अनियमित होते हैं, उनको प्रेग्नेंसी में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अनियमित पीरियड्स आपकी ओवुलेशन चुक्र को भी अनियमित कर देते हैं। इससे आपके अंदर बनने वाला अंडा ठीक तरह से विकसित नहीं हो पाता है और आपको गर्भधारण में परेशानी आती है। (और पढ़ें - मासिक धर्म में गर्भधारण हो सकता है क्या)
     
  2. एंडोमेट्रिओसिस - 
    एंडोमेट्रिओसिस प्रजनन प्रणाली का एक विकार है, इसमें एंडोमेट्रियल (गर्भाशय की कोशिका) कोशिका गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगती है। यह कोशिका फैलोपियान ट्यूब, अंडाशय और गर्भाशय के आंतरिक और बाहरी हिस्सों में फैल जाती है। इससे मासिक धर्म के समय आपको बहुत ज्यादा दर्द होता है। यह विकार अंडे बनने और निषेचन की प्रक्रिया को बाधित करता है। (और पढ़ें - मासिक धर्म में दर्द का इलाज)
     
  3. ओवुलेशन समस्या -
    लगभग 20 से 40 प्रतिशत महिलाओं में गर्भधारण न करने की समस्याएं अनियमित ओवुलेशन के कारण होती है। इसमें परिपक्व अंडा गर्भाशय में नहीं पहुंच पाता है। इस समस्या में कुछ महिलाओं के शरीर में अंडा नहीं बन पाता है, तो कई महिलाओं के शरीर में सिर्फ तीन महीने में मात्र एक बार ही अंडे का निर्माण होता है। हार्मोन में उतार-चढ़ाव, अधिक या कम वजन, अत्यधिक व्यायाम और तनाव, ओवुलेशन से संबंधित विकार के प्रमुख कारण होते हैं।  (और पढ़ें - वजन कम करने के लिए डाइट चार्ट)
     
  4. ट्यूब में अवरोध होना – 
    यहां पर हम पुरुषों से संबंधित कारण के बारे में बात कर रहें हैं। इसमें पुरुषों के वृषण के पीछे स्थित एपिडिडिमिस (Epididymis) ट्यूब में अवरोध उत्पन्न हो जाता है। एपिडिडिमिस ही पुरुषों के शुक्राणुओं का संग्रह करती है। इसके अलावा शुक्राणुओं को स्त्रावित करने वाली नलिका (Vas deferens) में भी रूकावट आ जाती है। किसी प्रकार के संक्रमण जैसे- गोनोरिया (Gonorrhea), जन्म दोष, किसी चोट और क्लैमाइडिया (Chlamydia) के कारण यह समस्या उत्पन्न हो जाती है। (और पढ़ें - यौन संचारित रोग)

अन्य कारण

  1. सेक्स करने की प्रक्रिया –
    शारीरिक संबंध मुख्यतः आपकी आत्म संतुष्टि और प्रजनन के लिए जरूरी होता है। कई लोगों मानते हैं कि ज्यादा सेक्स करने से वह महिला को आसानी से प्रेग्नेंट कर सकते हैं। जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, ज्यादा सेक्स करने से भले ही आपके शुक्राणुओं पर प्रभाव न पड़ें, लेकिन यह आप में थकान, चक्कर, घुटनों का कमजोर होना व बार-बार पेशाब जाने की समस्या को बढ़ा सकता है। इसके अलावा कम सेक्स करना भी गर्भधारण न करने की वजह बन सकता है। ज्यादा या कम सेक्स करने से गर्भाधारण नहीं हो सकता, इसकी जगह पर आपको ओवुलेशन के चक्र को समझकर सही समय पर प्रयास करना चाहिए। (और पढ़ें - गर्भावस्था में बार-बार पेशाब आना)
     
  2. तनाव में रहना – 
    तनाव आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। जिसका सीधा प्रभाव महिलाओं के गर्भधारण पर भी पड़ता है। इसके अलावा अधिक चिंता करना व अवसाद में रहना भी महिलाओं की प्रजनन क्षमता को कम कर देता है। इसलिए जब भी आप गर्भधारण पर विचार करें, तो अपने मन को शांत रखें। चिंता करने से हाईपोलेमस प्रक्रिया बाधित होती है। इसको मस्तिष्क में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि के द्वारा नियमित किया जाता है। इससे आपका थायराइड, अंडाशय और मासिक धर्म चक्र नियमित होता है। (और पढ़ें - तनाव दूर करने के घरेलू उपाय)
     
  3. सेक्स के तुरंत बाद योनि साफ करना –
    कई महिलाएं सेक्स के तुरंत बाद योनि को पानी से साफ करने लगती हैं, जबकि आपको सेक्स के तुरंत बाद इसको साफ नहीं करना चाहिए। सेक्स के बाद थोड़ा समय रूकने से शुक्राणु को अंडे के साथ निषेचन का समय मिल पाता है। वहीं अगर आप तुरंत उठ जाती हैं तो इससे शुक्राणुओं के बाहर आने और साफ करने के दौरान बाहर निकलने की संभावनाएं बढ़ जाती है। गर्भधारण न कर पाने का यह भी एक कारण होता है। (और पढ़ें - योनि की जानकारी)
     
  4. अनियमित दिनचर्या –
    अनियमित दिनचर्या, महिलाओं में प्रेग्नेंट न होने की समस्या को बढ़ा सकती है। इसके अलावा वजन का अधिक या कम होना, कम नींद लेना व सेक्स के दौरान ल्युब्रिकेशन का प्रयोग करने से भी महिलाएं प्रेग्नेंट नहीं हो पाती हैं। इन सभी आदतों के साथ ही शराब, धूम्रपान और अन्य नशा की आदत भी महिलाओं में प्रेग्नेंसी से जुड़ी कई समस्याओं को बढ़ा सकती हैं। (और पढ़ेें - शराब की लत छुड़ाने के घरेलू उपाय)

शादी के बाद जब महिला प्रेग्नेंट नहीं हो पाती है, तो यह स्थिति हर महिला के लिए बेहद दुख और निराशा भरी होती है। इस स्थिति में महिला प्रेग्नेंट होने के लिए कई तरह के उपाय को खोजती है। महिलाओं की प्रजनन क्षमता काफी हद तक उम्र पर भी निर्भर करती है। जिन महिलाओं की उम्र 35 साल से कम है उनको अपनी प्रेग्नेंसी के लिए एक साल तक का इंतजार करना चाहिए, जबकि 35 साल से अधिक आयु की महिलाओं को यदि प्रेग्नेंसी के लिए प्रयास करते हुए 6 महीने बीत चुके हैं तो उनको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर आपको लगातार दो या दो से अधिक बार गर्भपात हो चुका है तो इस अवस्था में भी स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से मिलकर प्रेग्नेंसी न हो पाने के कारणों को जानना चाहिए। डॉक्टर कुछ टेस्ट के बाद इस समस्या का इलाज शुरु करते हैं। प्रेग्नेंट न होने पाने की स्थिति में आपको इलाज के लिए निम्न तरह की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए।

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  1. डॉक्टर से मिलें
    अगर आप प्रेग्नेंट नहीं हो पा रहीं हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से मिलना चाहिए। इस तरह की समस्या होने पर आपको पहले ही किसी फर्टिलिटी क्लीनिक (Fertility clinic/ कई नई तकनीकों से महिलाओं को गर्भाधारण करवाने वाले क्लीनिक) पर जाने की जरूरत नहीं होती है। कई बार प्रेग्नेंट न हो पाने की वजह बेहद छोटी होती है। जिसको दवाओं से ठीक किया जा सकता है। इसलिए आपको इस समस्या में अपने डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलने से पहले आपको बीते छह माह में पीरियड्स की स्थिति को नोट करके रख लेना चाहिए। इसके अलावा बीते छह माह में आपको अपने या अपने साथी द्वारा ली जानें वाली दवाओं के बारे में भी पूरी जानकारी होनी चाहिए। इन सभी बातों से डॉक्टर को आपकी समस्या का सही आकंलन करने में सहायता मिलती है। इसके अलावा आपको डॉक्टर से जो भी प्रश्न पूछने हो उसको भी नोट करके रख लेना चाहिए। इसके साथ ही आपको बिना किसी झिझक के डॉक्टर को अपनी समस्या के बारे में विस्तार से बताना होगा। जिसमें आपको सेक्स के दौरान दर्द होना, अनचाहे बालों का उगना और कामेच्छा में कमी के बारे में खुलकर कर बात करनी होगी। महिलाओं के गर्भवती न होने के कई मामलों में पुरुष की प्रजनन क्षमता में कमी भी एक बड़ा कारण होता है। (और पढ़ें - गर्भावस्था के लक्षण
  2. बांझपन से संबंधित परीक्षण कराएं - 
    गर्भधारण न कर पाने की समस्या में महिलाओं के रक्त और पुरुष के वीर्य की जांच की जाती है। महिलाओं में प्रेग्नेंसी न हो पाने के लक्षणों के आधार पर परीक्षण किए जाते हैं। जिसमें एचएसजी (HSG), योनि का अल्ट्रासाउंड और पेट के अंदरूनी अंगों को देखने के लिए नाभि के नीचे कट लगाकर लेप्रोस्कोपी जांच (Diagnostic laparoscopy) को शामिल किया जाता है। तीस प्रतिशत से ज्यादा दम्पत्तियों को प्रेग्नेंसी न होने के सही कारणों के बारे में मालूम ही नहीं होता है। इस अवस्था में डॉक्टर द्वारा अस्पष्टिकृत बांझपन का परीक्षण करवाया जाता है। इस तरह के परीक्षण के दौरान महिलाओं को चिंता और तनाव हो सकता है। इसके लिए उनके परिवार के सदस्यों और दोस्तों को उनका पूरा सहयोग करना चाहिए। (और पढ़ें - बांझपन के घरेलू उपाय)
  3. गर्भाधारण के लिए समान्य इलाज - 
    परीक्षण के आधार पर आपके कारणों को जानने के बाद डॉक्टर आपका इलाज शुरू करते हैं। इस समस्या में डॉक्टर प्रेग्नेंट न हो पाने की समस्या को दूर करने वाली कुछ दवाओं को देकर आपका इलाज शुरू कर सकते हैं। इसमें एस्ट्रोजन के स्तर को बढ़ाने वाली ब्रेस्ट कैंसर से संबंधित दवाएं व डायबिटीज के मरीज में इंसुलिन के स्तर के सही करने वाली दवाओं से महिलाओं का इलाज किया जा सकता है। (और पढ़ें - डायबिटीज की दवा
    इसके अलावा गर्भाशय संबंधी समस्या या एंडोमेट्रिओसिस (Endometriosis/ गर्भाशय में ऊतक का बढ़ाना) में डॉक्टर आपको सर्जिकल इलाज बता सकते हैं। इसके साथ ही साथ जीवनशैली में बदलाव भी आपकी प्रेग्नेंसी के अवसर को बढ़ा देती है। शराब न पीना, धूम्रपान न करना, वजन को कम करना और मोटापे को दूर करने से आपका हार्मेन का स्तर ठीक होता है और इससे प्रेग्नेंट होने में आने वाली सामान्य बाधाएं सही हो जाती हैं। (और पढ़ें - प्रेग्नेंसी में होने वाली समस्याएं)
  4. फर्टिलिटी क्लीनिक पर कब जाएं -
    जब डॉक्टर प्रेग्नेंट न हो पाने की समस्या को दूर करने के सभी सामान्य इलाज कर चुकें हो, तब वह आपको फर्टिलिटी क्लीनिक जानें की सलाह देते हैं। इस तरह के क्लीनिक में प्रेग्नेंट न हो पाने की समस्या को दूर करने व महिलाओं की प्रेग्नेंसी की समस्या को दूर करने के लिए कई तरह की नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। यह इलाज आम इलाज के मुकाबले थोड़ा महंगा होता है। इसलिए जब भी आप किसी फर्टिलिटी क्लीनिक में जानें वाली हों तो वहां के इलाज में होने वाले खर्चों के बारे में पहले से ही जानकारी ले लें। इसके बाद जिस क्लीनिक का खर्च आपके बजट में हो उस क्लीनिक पर जाकर अपना इलाज शुरू करवा लें। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि यह क्लीनिक आपके घर के पास हो, ताकि आपको ज्यादा दूर न जाना पड़े। (और पढ़ें - प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाले आहार)
  5. कुछ अन्य टेस्ट कराएं - 
    फर्टिलिटी क्लीनिक में मौजूद विशेषज्ञ आपको कुछ नए टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा वह आपके द्वारा पहले करवाए गए टेस्ट्स को भी दोबारा कराने के लिए कह सकते हैं। इसके साथ ही डॉक्टर ओवेरियन रिज़र्व परीक्षण (Ovarian reserve test/ ओव्यूलेशन के लिए उपलब्ध अंडे की गुणवत्ता और मात्रा की जांच) भी कराने का निर्णय ले सकते हैं। यदि महिला को पहले गर्भपात हुआ हो तो फर्टिलिटी सेंटर के डॉक्टर आपकी स्त्री रोग विशेषज्ञ से गर्भपात के ऊतकों को जांच के लिए मांग सकते हैं। इन सभी के साथ डॉक्टर गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब रोग को देखने के लिए हिस्टोरोस्कोपी (Hysteroscopy) टेस्ट भी करते हैं। (और पढ़ें - गर्भाशय फाइब्रॉएड के लक्षण
  6. आगे की तैयारी करना - 
    सभी तरह के टेस्ट हो जाने के बाद फर्टिलिटी क्लीनिक के डॉक्टर आपके लिए इलाज की रूपरेखा तैयार करते हैं। टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद और इलाज शुरू होने से पहले आपको एक बार फिर से डॉक्टर के द्वारा बताए जाने वाले इलाज का समय और खर्चों पर विचार विमर्श कर लेना चाहिए। डॉक्टर आपके बजट के अनुसार इलाज का सुझाव भी दे सकते हैं। (औरऔर पढ़ें - प्रेग्नेंसी में सोने का सही तरीका)
  7. गर्भधारण के बाद की मुश्किलों पर ध्यान देना - 
    कई महिलाएं इलाज शुरू करने के तुरंत बाद ही गर्भधारण कर लेती है, जबकि कई महिलाओं को इलाज शुरू करने के बाद भी गर्भधारण करने में कई महीनों का समय लग जाता है। अगर इलाज शुरू होने के बाद भी आपकी प्रेग्नेंसी न हो पा रही हो तो इस स्थिति में आपको घबराना नहीं चाहिए। स्वस्थ महिलाओं को भी गर्भधारण में कई बार दो से तीन महीनों का समय लग जाता है।
    इलाज के बाद पहली बार में प्रेग्नेंट न हो पाने की अवस्था में डॉक्टर इसके कारणों के बारे में बारीकी से अध्ययन करते हैं। इसके बाद वह आपके इलाज में जरूरी बदलाव करते हैं। इस तरह के इलाज में आपका मानसिक रूप से स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। गर्भाधारण में देरी से आपको हताश नहीं होना चाहिए। (और पढ़ें - गर्भावस्था में हेल्दी जूस
  8. प्रेग्नेंसी के बाद भी सही देखरेख - 
    इलाज के बाद सफलतापूर्वक गर्भधारण करने के पश्चात भी आपको शुरूआती महीनों में सही देखरेख की आवश्यकता होती है। इस दौरान डॉक्टर आपको नियमित तौर पर हार्मोनल उपचार व इंजेक्शन के रूप में कुछ दवा देते हैं। प्रेग्नेंट होने के बाद गर्भावस्था की स्थिति में आपका बांझपन किसी अन्य समस्या का कारण न बनें, डॉक्टरों के द्वारा इस बात का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। सामान्य तौर पर महिलाओं के प्रेग्नेंट होने के मुकाबले बांझपन के बाद प्रेग्नेंट होने में कई तरह की मुश्किलें सामने आ सकती है और यह स्थिति सामान्य से काफी अलग होती है। 

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यह जरूरी नहीं हैं कि प्रेग्नेंट न हो पाने की समस्या से पीड़ित सभी महिलाएं इलाज के बाद गर्भधारण कर पाने के लिए सक्षम हो पाएं। यदि कोई महिला पैसों के अभाव में या इलाज के बाद भी गर्भधारण न कर पाएं, तो उनको निराश होने की आवश्यकता नहीं है। सभी तरह की समस्याओं के उपाय और विकल्प मौजूद होते हैं। केवल महिला ही इसके लिए दोषी नहीं होती हैं। इस दौरान परिवार के सभी लोगों को महिला का साथ देते हुए उनको अवसाद और निराशा से बाहर लाने के प्रयास करना चाहिए और घर में बच्चे की कमी को दूर करने के  अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

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