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गर्भावस्था हर महिला के जीवन का एक सुंदर चरण होता है। महिलाओं के लिए मां बनना एक बहुत ही सुखद एहसास होता है। साथ ही साथ गर्भवती महिला में मां बनने को लेकर बड़ी उत्‍सुकता होती है। जो महिला गर्भ धारण (कन्सीव) करने की कोशिश कर रही हैं, उनके लिए मासिक धर्म का मिस होना गर्भावस्था के लक्षण हो सकते है। लेकिन मासिक धर्म ना आना गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण हो, यह ज़रूरी नहीं है।

सामान्यतः सेक्स के बाद जब गर्भधारण होता है उस दौरान बहुत कम महिलाओं को किसी भी तरह के लक्षण महसूस होते हैं, क्योंकि आजकल अधिकतर महिलाओं को प्रचार के माध्यम से बाजार में उपलब्ध प्रेगनेंसी टेस्ट किट की जानकारी होती है और वो सेक्स करने के हफ्ते भर बाद ही गर्भावस्था की जांच कर लेती हैं, लेकिन कुछ महिलाओं का कहना है कि उन्हें सेक्स के बाद ही, ओवुलेशन से भी पहले (10 दिनों में) कुछ लक्षण महसूस होते हैं, जैसे- थकान, लगातार पेशाब आना, शारीरिक तापमान बढ़ना, ब्रेस्ट में दर्द होना आदि। 

ऐसा माना जाता है कि निषेचित अंडे आपके शरीर को कुछ संकेत भेजते हैं, जैसे आरोपण (implantation) से पहले हार्मोन मुक्त होना आदि। लेकिन केवल यह कहना कि इस समय कोई लक्षण महसूस नहीं होते या लक्षण ज़रूर महसूस होते हैं, पूरी तरह से गलत होगा। जैसे ही आप गर्भ धारण करती हैं, आपके हार्मोन बदलने लगते हैं और आपके शरीर में कई अन्य बदलाव होने लगते हैं। हालांकि ज्यादातर महिलाएं अपने शरीर के संकेतों को नहीं पहचान पाती हैं। यदि आप शरीर पर ध्यान दें, तो इससे आपके लिए गर्भधारण का पता लगाना आसान होगा। तो आइए जानते हैं गर्भावस्था से जुड़े कुछ शुरुआती लक्षणों के बारे में -

(और पढ़ें - प्रेग्नेंट होने के उपाय)

  1. प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण क्या हर महिला में समान होते हैं? - Pregnancy ke shuruati lakshan kya har mahila me saman hote hai?
  2. गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण जो ज्यादा देखने को मिलते हैं - Garbhavastha ke prarambhik lakshan jo jyada dekhne ko milte hai
  3. प्रेग्नेंट होने के लक्षण कब शुरू होते हैं? - Pregnant hone ke lakshan kab shuru hote hai
  4. गर्भावस्था के शुरूआती लक्षण - Garbhavastha ke shuruati lakshan
  5. गर्भधारण करने के लक्षण और क्या होते हैं - Garbhdharan karne ke lakshan aur kya hote hai
  6. गर्भावस्था के लक्षण होने के अन्य कारण भी हो सकते हैं - Garbhavastha ke lakshan hone ke any karan bhi ho sakte hain
  7. गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण के डॉक्टर

प्रेग्नेंसी के शुरूआती लक्षण हर महिला में समान नहीं होते हैं। ऐसा इसलिए भी होता है, क्योंकि हर महिला के शरीर की प्रकृति अलग-अलग होती है। प्रेग्नेंसी में जैसे लक्षण एक महिला को अनुभव हो जरूरी नहीं कि वैसे ही लक्षण अन्य महिलाओं को भी महसूस हो। कई बार पीरियड्स के पहले और पीरियड्स के दौरान आप जिन संकेतों को गर्भावस्था के शुरूआती लक्षण समझ लेती हैं, सही मायने वह किसी अन्य समस्या की ओर भी इशारा कर सकते हैं। आगे आपको प्रेग्नेंसी के लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण आपके प्रेग्नेंट होने का मात्र संकेत हो सकते हैं, प्रेग्नेंसी की पुष्टि के लिए आपको प्रेग्नेंसी से संबंधी टेस्ट करवाने चाहिए।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में ध्यान रखने वाली बातें)

गर्भ ठहरने के शुरूआती लक्षण क्या होते हैं, इस पर एक सर्वे किया गया। जिसमें महिलाओं ने कई तरह के लक्षणों को बताया। इस सर्वे के आधार पर महिलाओं के मत नीचे बताए जा रहे हैं-

  • 29 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि पीरियड्स न आना उनके लिए गर्भवती होने का पहला लक्षण था। (और पढ़ें - मासिक धर्म का बंद होना)
  • 25 प्रतिशत ने बताया कि जी मिचलाना या उल्टी आना उनके लिए गर्भ ठहरने का लक्षण था।
  • 17 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि स्तन में बदलाव होना उनके लिए गर्भाधान का प्रारंभिक लक्षण था।
  • मात्र 3 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि अंडे का गर्भाशय में स्थापित होने के दौरान रक्तस्त्राव, उनके लिए गर्भावस्था का लक्षण था।

(और पढ़ें - पीरियड से जुड़े मिथक और तथ्य)

आपको बता दें कि प्रेग्नेंसी का पहला सप्ताह महिला के अंतिम पीरियड की तारीख के आधार पर तय होता है। कुछ लोगों के द्वारा महिला के अंतिम पीरियड को ही प्रेग्नेंसी का पहला सप्ताह माना लिया जाता है, चाहे आप उस समय प्रेग्नेंट हुई हों या नहीं। डिलीवरी की संभावित तारीख को पता लगाने के लिए महिला के अंतिम पीरियड की अंतिम तारीख का प्रयोग किया जाता है। पीरियड्स के शुरूआती सप्ताह में प्रेग्नेंसी के लक्षण महसूस न होने पर भी इनको गर्भावस्था के महीनों में गिना जाता है।

निम्नतः शुरूआती लक्षणों को समय अवधि के अनुसार समझाने के प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह समय अवधि हर महिला में अलग-अलग हो सकती है। निम्न बताए जाने वाले लक्षण यदि आप देरी से महसूस करें, तो ऐसे में आप अपने डॉक्टर से परामर्श ले सकती हैं।

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी के बारे में सप्ताह के हिसाब से जानें और टेस्ट ट्यूब बेबी का खर्च)

 

 लक्षण और संकेत  संभावित समय अवधि (पीरियड न आने के बाद से)

हल्की ऐंठन (Cramping) और स्पॉटिंग (Spotting/ भ्रूण का गर्भाशय से जुड़ने के दौरान होने वाला रक्तस्त्राव ) 

गर्भावस्था का पहला सप्ताह से चौथे सप्ताह तक
महावारी ना आना    गर्भावस्था का चौथा सप्ताह
थकान होना गर्भावस्था का पांचवा सप्ताह
जी मिचलाना प्रेग्नेंसी के 4 से 6 सप्ताह
स्तनों में दर्द, संवेदनशीलता और बदलाव होना प्रेग्नेंसी के 4 से 6 सप्ताह
लगातार पेशाब आना गर्भावस्था के 4 से 6 सप्ताह
पेट में फूलापन लगना (खाने के बाद गैस की तरह) गर्भावस्था के 4 से 6 सप्ताह
मोशन सिकनेस (सफर में उल्टी आना)  प्रेग्नेंसी के सप्ताह 5 से 6
व्यवहार में तेजी से बदलाव होना (Mood swings/ मूड स्विंग्स) गर्भावस्था का छठा सप्ताह
शारीरिक तापमान में परिवर्तन      गर्भावस्था का 6  सप्ताह
हाई बीपी गर्भावस्था का आठवां सप्ताह
अत्यधिक थकान और सीने में जलन    

गर्भावस्था का नौंवा सप्ताह

दिल की धड़कने तेज होना आठवें से गर्भावस्था का दसवां सप्ताह
स्तन और निप्पल में परिवर्तन 

प्रेग्नेंसी का ग्यारहवां हफ्ता

मुंहासे होना प्रेग्नेंसी का 11 सप्ताह
लगातार वजन का बढ़ना    गर्भावस्था का 11 सप्ताह
गर्भावस्था से चेहरे पर आने वाली चमक   

गर्भावस्था का बारहवां सप्ताह

        

गर्भवती होने की पुष्टि प्रेगनेंसी टेस्ट और प्रेगनेंसी अल्ट्रासाउंड से ही की जा सकती है। लेकिन, ऐसे कुछ शारीरिक लक्षण और संकेत होते हैं जो आपके गर्भवती होने की ओर इशारा करते हैं। यहाँ गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण बताये गए हैं। अगर आपको ये लक्षण देखने को मिलें, तो हो सकता है कि आप गर्भवती हैं। लेकिन दो बातों का ध्यान रहे - 

  • सिर्फ प्रग्नेंसी टेस्ट के द्वार्रा ही पूरी तरह से सुनिश्चित किया जा सकता है कि आप गर्भवती हैं कि नहीं।
  • ये लक्षण और संकेत किसी अन्य कारण से भी हो सकते हैं। अगर आपको ये लक्षण हों तो ऐसा जरूरी नहीं है कि आप गर्भवती ही हैं। अगर आपको ये लक्षण दिखें तो आपके स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा कि आप अपने डॉक्टर से मिलें।
  1. प्रेग्नेंट होने के लक्षण में शामिल है स्पॉटिंग और क्रैम्पिंग (ऐंठन) - Pregnant hone ke lakshan me shamil hai spotting aur cramping
  2. गर्भावस्था के लक्षण हैं पीरियडस का ना आना - Garbhavastha ke lakshan hai periods ka na aana
  3. प्रेग्नेंट होने के लक्षण है जी मिचलाना (मॉर्निंग सिकनेस) - Pregnant hone ke lakshan hai morning sickness
  4. गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण हैं स्तनों में सूजन और दर्द होना - Garbhavastha ke shuruati lakshan hai stano me sujan aur dard hona
  5. गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण है थकान महसूस होना - Garbhavastha ke prarambhik lakshan hai thakan mehsus hona

प्रेग्नेंट होने के लक्षण में शामिल है स्पॉटिंग और क्रैम्पिंग (ऐंठन) - Pregnant hone ke lakshan me shamil hai spotting aur cramping

यह लक्षण मुख्यतः भ्रूण के शुरूआती दौर में बनते समय होने वाला हल्का रक्तस्त्राव (स्पॉटिंग) होता है। पुरूष के स्पर्म से अंडा निषेचित होने के बाद जब अंडे से भ्रूण बनना शुरू होता है, तब 6 से 12 दिनों में वह गर्भाशय से जुड़ जाता है। इस दौरान गर्भाशय से हल्का रक्तस्त्राव होता है। भ्रूण बनने के दौरान इस तरह का हल्का रक्तस्त्राव सामान्य प्रक्रिया होती है और इसको ही चिकित्सीय जगत में स्पॉटिंग (Spotting) कहा जाता है। इस प्रकार का रक्तस्त्राव आमतौर पर हानिरहित होता है। इस दौरान कुछ महिलाओं को ऐंठन (Cramping) भी महसूस होती है। जिन महिलाओं को इस तरह के लक्षण अनुभव न हों, उनको अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर घबराना नहीं चाहिए। यह आवश्यक नहीं हैं कि यह लक्षण हर महिला में दिखाई दें।

(और पढ़ें - ओवुलेशन से जुड़े मिथक और तथ्य और गर्भावस्था में पेट दर्द)

गर्भावस्था के लक्षण हैं पीरियडस का ना आना - Garbhavastha ke lakshan hai periods ka na aana

अक्‍सर प्रेग्‍नेंट होने के बाद पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं। गर्भावस्था में पीरियड्स ना आना इसके प्रारंभिक संभावित संकेतों में से एक माना जाता है। अगर आपके पीरियड्स सामान्य दिनों की तरह नियमित रूप से न आएं, तो इस स्थिति को प्रेग्नेंसी का लक्षण समझा जा सकता है।

(और पढ़ें - sex karne ka tarika)

कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के निश्चित समय के बाद बहुत कम ब्लीडिंग हो सकती है, ऐसा तब होता है जब फर्टिलाइज़्ड (निषेचित) अंडा आपके गर्भाशय की दीवार में स्वयं को स्थापित (इम्प्लान्ट) कर रहा होता है। इसके अलावा सामान्य रूप में पीरियड्स न होने पर आप खुद की प्रेग्नेंसी की पुष्टि के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट भी करवा सकती हैं।

(और पढ़ें – मासिक धर्म में दर्द क्यो होता है)

प्रेग्नेंट होने के लक्षण है जी मिचलाना (मॉर्निंग सिकनेस) - Pregnant hone ke lakshan hai morning sickness

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों में मॉर्निंग सिकनेस एक सामान्य लक्षण है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रेग्नेंसी में जी-मिचलाना (Morning sickness/ मॉर्निंग सिकनेस) की समस्या 70 से 85 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करती है। यह समस्या पूरे दिन में किसी भी समय हो सकती है। यह परेशानी गर्भावस्था के पहले या दूसरे महीने में शुरू होती है, जबकि दूसरी तिमाही की शुरुआत में यह अपने आप दूर हो जाती है। कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जिनको जी मिचलाने के दौरान उल्टी नहीं आती है। जी मिचलाने की समस्या बार-बार होने की स्थिति को ही मॉर्निंग सिकनेस कहा जाता है। कुछ महिलाएं अपनी पूरी गर्भावस्था के दौरान इस तरह की समस्या से परेशान रहती हैं।

(और पढ़े - अदरक और शहद के फायदे हैं मतली के उपचार में प्रभावी)

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण हैं स्तनों में सूजन और दर्द होना - Garbhavastha ke shuruati lakshan hai stano me sujan aur dard hona

गर्भधारण करने का लक्षण है स्तनों में बदलाव आना। इस समय महिलाओं को स्तनों में भारीपन, संवेदनशीलता और सूजन महसूस होती है। महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन्स के स्तर में परिवर्तन के कारण स्तनों में बदलाव आना शुरू होता है। गर्भ धारण के एक सप्ताह के बाद आप अपने स्तनों में बदलाव को अनुभव कर सकती हैं। गर्भावस्था की पहली तिमाही के बाद यह समस्या काफी कम हो जाती है। इस समय स्तनों के दर्द और संवेदनशीलता को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है आप अपनी फिटिंग के अनुसार नरम ब्रा को ही पहनें।

 (और पढ़ें - गर्भावस्था के दौरान ब्रेस्ट में परिवर्तन होने के कारण)

गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण है थकान महसूस होना - Garbhavastha ke prarambhik lakshan hai thakan mehsus hona

गर्भावस्था के शुरूआती सप्ताह में अधिकतर महिलाओं को थकान महसूस होती है। प्रेग्नेंसी के समय शरीर में कई तरह के परिवर्तन होते हैं। जिससे महिलाओं को थकान महसूस होती है। इस समय महिलाओं के शरीर में प्रोजेस्टेरोन के बढ़ते स्तर की वजह से थकान होना एक आम बात है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान लो बीपी और लो शुगर लेवल (रक्तचाप और मधुमेह का स्तर कम होना) भी आपको थका हुआ महसूस करा सकता है।

गर्भावस्था के शुरुआती दौर से ही आपका शरीर शिशु के लिए तैयार होना शुरू हो जाता है। इससे भी आपको थकान होने लगती है और ऐसे में आप अधिक बैठना या लेटना पसंद करने लगती हैं। पहली और तीसरी तिमाही में थकान सबसे आम समस्या मानी जाती है।

(और पढ़े - गर्भावस्था में थकान दूर करने के उपाय)

  1. गर्भाधान का लक्षण है बार-बार पेशाब आना - Garbhadhan ka lakshan hai baar baar pesab aana
  2. गर्भावस्था के लक्षण है कब्ज और पेट का फूलना - Garbhavastha ke lakshan hai kabj aur pet ka phulna
  3. गर्भावस्था होने का लक्षण है पीठ में दर्द होना - Garbhavastha hone ka lakshan hai peeth me dard hona
  4. गर्भावस्था के लक्षण में सिर में दर्द होना - Garbhavastha ke lakshan me sir me dard hona
  5. प्रेगनेंसी सिम्पटम्स हैं हाई बीपी - Pregnancy symptoms hai high blood pressure
  6. गर्भावस्था का लक्षण है मूड स्विंग होना - Garbhavastha ka lakshan hai mood swing hona
  7. गर्भावस्था के लक्षण है एरियोला के रंग में बदलाव - Garbhavastha ke lakshan hai areolas ke rang me badlav
  8. प्रेगनेंसी के लक्षण है चक्कर आना और बेहोशी - Pregnancy ke lakshan hai chakkar aana
  9. प्रेग्नेंट होने के लक्षण में शामिल है शरीर के तापमान में बदलाव होना - Pregnant hone ke lakshan me shamil hai sharir ke tapmaan me badlav hona
  10. गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण में दिल की धड़कने तेज हो जाती हैं - Garbhavastha ke lakshan me dil ki dhadkane tej ho jati hai
  11. प्रेग्नेंट होने के लक्षण में शामिल है खाद्य पदार्थों के प्रति अरूचि - Pregnant hone ke lakshan me shamil hai aahar ke prati aruchi
  12. गर्भवती होने के लक्षण में एक है खुशबू के प्रति संवेदनशील होना - Garbhvati hone ke lakshan me ek hai khushboo ke prati samvedansheel hona
  13. गर्भावस्था के लक्षण है वजन बढ़ना - Garbhavastha ke lakshan hai vajan badna
  14. प्रेग्नेंट होने का लक्षण है सीने में दर्द - Pregnant hone ka lakshan hai seene me dard
  15. प्रेगनेंसी के लक्षण है मुहांसे होना और चेहरे पर चमक आना - Pregnancy ke lakshan hai muhase hona aur chehre pr chamak aana

गर्भाधान का लक्षण है बार-बार पेशाब आना - Garbhadhan ka lakshan hai baar baar pesab aana

कई महिलाओं को यह गर्भधारण के छठे या आठवें सप्ताह के बाद होता है। कभी-कभी यह समस्या मूत्र मार्ग में संक्रमण तथा मधुमेह के कारण भी होती है। लेकिन अगर आप गर्भवती हैं तो यह हार्मोन परिवर्तन के कारण हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान रक्त अधिक पंप होता है। जिससे गुर्दे को अतिरिक्त तरल फिल्टर करना पड़ता है, गुर्दे का कार्य बढ़ने से ब्लेडर पर भी दबाव उत्पन्न हो जाता है। इस दौरान महिलाओं को अधिक प्यास लगती है। बार-बार पेशाब जाना गर्भावस्था के सभी चरणों में होना आम है। इस अवस्‍था में कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन नामक हार्मोन शरीर में बनता है, जो पेल्विक भाग में रक्‍त के प्रवाह को बढ़ाता है। इसकी वजह से भी प्रेग्नेंट महिला को बार-बार पेशाब जाना पड़ता है। 

(और पढ़े - शरीर में पानी की मात्रा का असर पड़ता है पेशाब पर)

गर्भावस्था के लक्षण है कब्ज और पेट का फूलना - Garbhavastha ke lakshan hai kabj aur pet ka phulna

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के कारण भोजन आंत से धीरे-धीरे आगे बढ़ता है, जिस कारण यह समस्या होती है। इसके अलावा इस समय पेट में फूलापन महसूस होता है, जिसको कई बार महिलाएं गैस भी समझ लेती हैं। इससे भोजन की पाचन क्रिया कम होकर और कब्ज होना शुरू हो जाती है। इससे निजात पाने के लिए अधिक मात्रा में पानी पीएं, नित्य व्यायाम करें और उच्च फाइबर युक्त भोजन का अधिक मात्रा में सेवन करें।

(और पढ़े - पेट की गैस दूर करने के घरेलू उपाय और गर्भावस्था में कब्ज का इलाज)

गर्भावस्था होने का लक्षण है पीठ में दर्द होना - Garbhavastha hone ka lakshan hai peeth me dard hona

अगर आम दिनों में आपको पीठ में दर्द महसूस नहीं होता है, तो पीठ में दर्द आपके गर्भवती होने का संकेत हो सकता है, क्योंकि इस दौरान मांसपेशियां में खिंचाव होता है। यदि ऐसा है तो आपके पूरे गर्भकाल में वजन बढ़ने के दौरान यह तकलीफ बढ़ सकती है। मुख्यतः यह लक्षण गर्भावस्था के अंतिम दौर में अधिक देखने को मिलता है। 

(और पढ़ें - गर्भावस्था में पीठ में दर्द)

गर्भावस्था के लक्षण में सिर में दर्द होना - Garbhavastha ke lakshan me sir me dard hona

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों में सिर में दर्द होना एक प्रमुख लक्षण है। हालांकि सिर दर्द अन्य कारणों से भी होता है, लेकिन अगर यह दर्द गर्भावस्था के कारण ही है, तो कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से जरूर परामर्श कर लें। यह लक्षण विशेषकर प्रेग्नेंसी के अंतिम दौर में भी महिलाओं को महसूस होता है।

 (और पढ़ें – सिर दर्द के घरेलु उपाय)

प्रेगनेंसी सिम्पटम्स हैं हाई बीपी - Pregnancy symptoms hai high blood pressure

हाई बीपी भी प्रेग्नेंसी के लक्षण का एक मुख्य कारक माना जाता है। रक्त वाहिकाओं के अधिक विस्तार के कारण महिला को चक्कर आने के समस्या होने लगती है। प्रेग्नेंसी के लक्षणों में हाई बीपी को पहचान पाना मुश्किल होता है। तनाव के अधिक होने के चलते प्रेग्नेंसी के शुरूआती 20 सप्ताह में यह परेशानी उत्पन्न हो सकती है। शुरूआती प्रेग्नेंसी में होने वाली हाई बीपी की समस्या प्रेग्नेंसी के बाद के चरणों तक भी बनी रह सकती है। इसको दूर करने के लिए आपको अपने डॉकटर से सलाह लेनी चाहिए। इसके लिए भरपूर मात्रा में पानी पीएं, हाई बीपी की नियमित जांच कराएं और डॉक्टर के द्वारा बताई गई चीजों को ही आहार में शामिल करें।

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी में हाई बीपी का इलाज)

गर्भावस्था का लक्षण है मूड स्विंग होना - Garbhavastha ka lakshan hai mood swing hona

प्रारंभिक गर्भावस्था में आपकी भावनाओं पर प्रभाव पड़ता है। इस समय आपके व्यवहार में बदलाव होने लगता है। इसको ही मूड स्विंग/Mood swing कहते है। इस अवस्था में आप कभी तनाव, तो कभी खुशी महसूस करती है। हार्मोनल परिवर्तन के कारण गर्भावस्था के प्रारंभिक दिनों में ऐसा होना बहुत आम है। इस समय हार्मोन न्यूरोट्रांसमीटर (मस्तिष्क को संकेत पहुंचाने वाला तंत्र) को प्रभावित करता है। इसके अलावा आप सामान्य से ज्यादा उदास या चिंतित अनुभव करती हैं।

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी में मूड स्विंग्स)

अक्सर मूड स्विंग गर्भावस्था को निर्धारित करने का एक प्रभावी तरीका नहीं है, ऐसे में आपको अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए। योग के द्वारा आपका मन शांत होता है और आप इस समय योग के द्वारा मूड स्विंग की समस्या को दूर कर सकती हैं।

(और पढ़े - मूड को अच्छा बनाने के लिये खाएं ये सूपरफूड)

गर्भावस्था के लक्षण है एरियोला के रंग में बदलाव - Garbhavastha ke lakshan hai areolas ke rang me badlav

महिलाओं के स्तनों में निप्पल पर काले रंग के भाग को एरियोला (Areolas)  कहा जाता है। गर्भवती होने पर कई महिलाओं के निप्पल के इस भाग का रंग गहरा हो जाता है। स्तन में होने वाला यह बदलाव भी प्रेग्नेंसी की ओर ही इशारा करता है। अगर आपके निप्पल का एरियोला का रंग पहले की तरह ही है, तो ऐसे में आपको अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर किसी प्रकार की शंका नहीं करनी चाहिए, क्योंकि प्रेग्नेंसी के लक्षण की पुष्टि केवल प्रेग्नेंसी टेस्ट से ही होती है।

(और पढ़ें - निप्पल में दर्द का इलाज)

प्रेगनेंसी के लक्षण है चक्कर आना और बेहोशी - Pregnancy ke lakshan hai chakkar aana

हल्का चक्कर आना गर्भावस्था का एक सामान्य संकेत है। हार्मोन प्रोजेस्टेरोन में वृद्धि के कारण रक्त वाहिकाओं का विस्तार हो जाता है, जिससे आपके रक्तचाप में कम आ जाती है। इससे आपके मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम हो जाता है और इसी कारण आपको कुछ समय के लिए चक्कर या बेहोशी की समस्या हो सकती है।

एक अध्ययन में यह बताया गया है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में हार्मोनल अनियंत्रण के कारण कई तरह के विकार पैदा हो सकते हैं, जिनकी वजह से चक्कर आना और टिनिटस (कान बजना) हो सकता है।

यह लक्षण गर्भावस्था की पहली तिमाही में होना सबसे आम है। एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को दूसरों की तुलना में अधिक चक्कर आते हैं। चक्कर आते समय आपको खड़े रहने से बचना चाहिए और चक्कर आने पर बैठने या नीचे झुक जाना चाहिए। गहरी सांस लेने से इस समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

(और पढ़ें - ladka paida karne ka tarika और bacha gora hone ke liye kya kare)

प्रेग्नेंट होने के लक्षण में शामिल है शरीर के तापमान में बदलाव होना - Pregnant hone ke lakshan me shamil hai sharir ke tapmaan me badlav hona

अगर आप गर्भवती हैं तो आपके शरीर का तापमान सामान्य से अधिक रहने लगता है। ओवुलेशन प्रक्रिया से आपके शरीर का सामान्य तापमान बढ़ने लगता है। अगर आपको माहवारी आने के दो सप्ताह बाद भी तापमान बढ़ा हुआ महसूस हो, तो यह आपके गर्भवती होने का संकेत है। इस समय ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं।

(और पढ़ें - प्रेग्नेंसी में बुखार का घरेलू उपचार)

गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण में दिल की धड़कने तेज हो जाती हैं - Garbhavastha ke lakshan me dil ki dhadkane tej ho jati hai

गर्भावस्था के आठ से दस सप्ताह हो जाने पर महिलाओं का दिल तेजी से पम्प करने लगता है। हृदय की अतालता प्रेग्नेंसी में अक्सर महिलाओं को परेशान करती है। लेकिन यह स्थिति हार्मोन में परिवर्तनों के कारण उत्पन्न होती है। प्रेग्नेंसी के अंतिम दौर में बच्चे के कारण आपके रक्त संचार में भी तेजी आ जाती है। ज्यादा समस्या न हो इसलिए आपको समय रहते ही इस परेशानी को कम करने के लिए डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

(और पढ़ें - हृदय रोग का इलाज)

प्रेग्नेंट होने के लक्षण में शामिल है खाद्य पदार्थों के प्रति अरूचि - Pregnant hone ke lakshan me shamil hai aahar ke prati aruchi

कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान खाने की खुशबू अच्छी नहीं लगती। ये स्थिति हार्मोन्स में परिवर्तन के कारण उत्पन्न होती है। कभी-कभी यह चिंता का विषय बन जाता है कि गर्भवती होने पर क्या खाना चाहिए, क्योंकि उस समय आपको न सिर्फ अपना बल्कि अपने बच्चे का भी पेट भरना जरूरी होता है। ऐसे में खाना न खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। साथ ही इस समय कोशिश कीजिये कि जितना हो सके पौष्टिक आहार खाएं, जिससे आपको और आपके विकासशील बच्चे को जरूरी पोषक तत्व मिल सकें। आप इस विषय में डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं। इस दौरान अचानक आपको खट्टे फल और अन्य खट्टी चीजें खाने की रूचि हो तो यह भी आपके गर्भवती होने का संकेत होता है।

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी डाइट चार्ट)

गर्भवती होने के लक्षण में एक है खुशबू के प्रति संवेदनशील होना - Garbhvati hone ke lakshan me ek hai khushboo ke prati samvedansheel hona

शरीर में एस्ट्रोजेन स्तर में हो रहे हार्मोनल परिवर्तन गंध संबंधी प्रणाली को प्रभावित करते हैं, जो गर्भवती महिला को उनके आसपास के माहौल की खुशबू के प्रति अधिक संवेदनशील और प्रतिक्रियाशील बनाते हैं। गर्भावस्था में आपकी सूंघने की शक्ति बढ़ जाती है। आपको हर चीज की गंध जल्द ही महसूस होती है। सूंघने के शक्ति बढ़ने से जी मिचलाना और उल्टी की समस्या में भी बढ़ोतरी होती है। एक अध्ययन में पाया गया कि महिलाएं गर्भवास्था की पहली तिमाही में किसी भी वस्तु की गंध को सामान्य अवस्था के मुकाबले आसानी से पहचान पाती हैं।

(और पढ़ें - गर्भवती महिला के लिए भोजन)

गर्भावस्था के लक्षण है वजन बढ़ना - Garbhavastha ke lakshan hai vajan badna

अगर आप गर्भधारण कर चुकी हैं, तो धीरे-धीरे आपका वजन भी बढ़ने लगता है। अक्सर गर्भास्था की प्रथम तिमाही के अंत तक महिलाओं का वजन बढ़ना शुरु हो जाता है। शुरुआती कुछ महीनों में आपका वज़न 1-2 किलो तक बढ़ जाता है। शुरुआत में आपको खान पान में बढ़ोतरी करने की इतनी आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन जैसे-जैसे आप गर्भावस्था के अन्य चरणों में पहुंचती हैं आपको अपने आहार में भी पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने की जरूरत होती है। 

(और पढ़ें - गर्भावस्था में वजन बढ़ना)

प्रेग्नेंट होने का लक्षण है सीने में दर्द - Pregnant hone ka lakshan hai seene me dard

इस समय हार्मोन्स के बदलाव की वजह से आपके पेट और ग्रासनली में जुड़ाव होता है। इसी वजह से पेट में एसिड स्त्रावित होने लगता है और इससे सीने में जलन होने लगती है। इस समय एक बार में अधिक भोजन करने की अपेक्षा थोड़ा-थोड़ा खाने पर जोर देना चाहिए। कम से कम एक घंटा सीधे बैठे इससे महिला की पाचन क्रिया सही रहेगी। अगर आपको ज्यादा परेशानी हो तो डॉक्टर से मिलकर इस समस्या का निदान करें।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में सीने में जलन से बचने के उपाय)

प्रेगनेंसी के लक्षण है मुहांसे होना और चेहरे पर चमक आना - Pregnancy ke lakshan hai muhase hona aur chehre pr chamak aana

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के चेहरे में चमक आ जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हार्मोन शरीर में रक्त संचार को बढ़ा देते हैं। इस वजह से तेलीय ग्रंथियां तेजी से काम करने लगती है। इससे आपके शरीर व चेहरे पर चमक आ जाती है। इतना ही नहीं प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं की त्वचा में कई अन्य परिवर्तन भी होते हैं और इस समय मुंहासे होना भी एक सामान्य लक्षण माना जाता है।

(और पढ़ें - मुंहासे हटाने के घरेलू उपाय और गर्भावस्था के दौरान त्वचा की देखभाल)

प्रेग्नेंसी के लिए बताए गए लक्षण मात्र गर्भावस्था की ओर ही इशारा नहीं करते हैं। कई बार यह लक्षण महिलाओं के शरीर में अन्य वजह से भी हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर आपका पीरियड समय से नहीं आया है तो इसका मतलब केवल ये नहीं कि ये प्रेगनेंसी का लक्षण है - ऐसा भी हो सकता है कि कुछ हार्मोनल असंतुलन के कारण पीरियड देर से आएगा। ऐसे ही मुख्य लक्षणों के बारे में नीचे विस्तार से बताया जा रहा है। 

पीरियड न आना या देरी से आना वैसे तो प्रेग्नेंसी की ओर ही इशारा करता है, लेकिन इसके अलावा भी इसके निम्न कारण हो सकते हैं।

जी मिचलाना और मॉर्निंग सिकनेस के अन्य कारण

स्तन में होने वाले बदलाव के अन्य कारण

  • हार्मोनल असंतुलन
  • हार्मोनल जन्म नियंत्रण में परिवर्तन
  • माहवारी का अधिक होना (और पढ़ें - माहवारी का अधिक होना)

थकान होने के अन्य कारण

Dr. Dhavan Patel

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सामान्य चिकित्सा

Dr. Priya Patel

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