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प्रकृति ने हमें कई सारे फलों का वरदान दिया है। सभी फलों में कोई न कोई विशेष गुण होते हैं। ऐसा ही एक फल है- मैंगोस्टीन। स्वाद में मीठा और खट्टा यह उष्णकटिबंधीय फल कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर है। इस फल की पैदावार मूल रूप से दक्षिण पूर्व एशिया में होती है। हालांकि, इसके स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए दुनिया के कई देशों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। मैंगोस्‍टीन फल का वैज्ञानिक नाम गार्सिनिया मैंगोस्टाना है। कई स्थानों पर इसे बैंगनी मैंगोस्टीन के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि पकने के बाद इसका आवरण गहरे बैंगनी रंग का हो जाता है। फल का अंदरूनी हिस्सा सफेद रसदार होता है।

मैंगोस्टीन कई सारे गुणों से भरपूर होता है। कई पोषक तत्वों, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट से समृद्ध होने के कारण यह कई प्रकार से स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है। मैंगोस्टीन फल की उपलब्धता थोड़ी कठिन है। इसी को देखते हुए कई कंपनियों ने इसके जूस और पाउडर को सप्लीमेंट के तौर पर बाजार में उतारा है। ब्लड प्रेशर और रक्त संचार को ठीक करने के साथ पाचन की समस्या को सुधारने, वजन कम करने और कैंसर जैसे कई प्रकार के रोगों के लक्षण कम करने में भी यह फल काफी कारगर माना जाता है।

इस लेख में हम आपको मैंगोस्टीन फल के फायदों के बारे में बताएंगे।

  1. कई पोषक तत्वों से भरपूर है मैंगोस्टीन - Nutrition se bharpoor hai Mangosteen
  2. मैंगोस्टीन के फायदे - Mangosteen ke laabh
  3. मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद है मैंगोस्टीन का सेवन - Diabetes Patients ke liye faydemand hai Mangosteen ka sevan
  4. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती देता है मैंगोस्टीन का सेवन - Immune system ke majbooti deta hai mangosteen ka sevan
  5. मैंगोस्टीन के सेवन से त्वचा होती है स्वस्थ - Mangosteen ke sevan se skin health sahi hoti hai
  6. मैंगोस्टीन के अन्य लाभ - Mangosteen ke other benefits
  7. मैंगोस्टीन के दुष्प्रभाव - Mangosteen ke side effects

मैंगोस्टीन में फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और कई प्रकार के विटामिन पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं। इसे ऐसे समझा जा सकता है। एक कप मैंगोस्टीन (करीब 196-ग्राम) जूस या पाउडर से निम्नलिखित पोषक तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं।

  • कार्ब्स : 35 ग्राम
  • फाइबर : 3.5 ग्राम
  • प्रोटीन : 1 ग्राम
  • कैलोरी : 143
  • फैट : 1 ग्राम
  • मैंगनीज : आरडीआई का 10 प्रतिशत
  • कॉपर : आरडीआई का 7 प्रतिशत
  • मैग्नीशियम : आरडीआई का 6 प्रतिशत
  • विटामिन सी : आरडीआई का 9 प्रतिशत
  • विटामिन बी9 (फोलेट) : आरडीआई का 15 प्रतिशत
  • विटामिन बी 1 (थायमिन) : आरडीआई का 7 प्रतिशत
  • विटामिन बी 2 (राइबोफ्लेविन) : आरडीआई का 6 प्रतिशत

शरीर के लिए आवश्यक कई प्रकार के विटामिन और खनिज, मैंगोस्टीन से प्रचुर मात्रा में प्राप्त किए जा सकते हैं। जोकि मांसपेशियों को शक्ति देने, घाव को भरने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और तंत्रिका के कार्यों को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक होते हैं।

मैंगोस्टीन में मौजूद कई पोषक तत्व शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इस फल में कई ऐसे यौगिक मौजूद होते हैं जो कैंसर, मोटापा और मधुमेह जैसे रोग में काफी लाभदायक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मैंगोस्टीन का सेवन प्रतिरक्षा प्रणाली को सुधारने में भी काफी फायदेमंद है। इतना ही नहीं त्वचा को स्वस्थ्य बनाए रखने के साथ यह संक्रमण से भी शरीर को बचाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मैंगोस्टीन का सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित कर सकता है। इसे समझने के लिए टेस्ट-ट्यूब और पशुओं पर अध्ययन किए गए। इन अध्ययनों के परिणामस्वरूप पाया गया कि मैंगोस्टीन में पाया जाने वाला रासायनिक यौगिक एक्सथोन, ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित बनाए रखता है।

मोटापे से ग्रस्त महिलाओं पर 26 सप्ताह तक किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं ने रोजाना 400 मिलीग्राम मैंगोस्टीन सप्लीमेंट का सेवन किया उनके इंसुलिन प्रतिरोध यानी इंसुलिन रेजिस्टेंस में काफी कमी आई है। इंसुलिन प्रतिरोध के बढ़ने से मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। यह फल फाइबर का भी अच्छा स्रोत है। फाइबर, ब्लड शुगर को स्थिर करने के साथ शरीर की मधुमेह पर नियंत्रण क्षमता को बढ़ाता है। इतना ही नहीं मैंगोस्टीन में पाए जाने वाले एक्सथोन और फाइबर का संयोजन शुगर को नियंत्रित करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, अभी इस संबंध में और विस्तृत शोध की आवश्यकता है।

मैंगोस्टीन में पाया जाने वाला फाइबर और विटामिन सी स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। फाइबर आपके आंतों में मौजूद स्वस्थ बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है जो प्रतिरक्षा के लिए अनिवार्य घटकों में से एक है। वहीं दूसरी ओर विटामिन सी एंटीऑक्सिडेंट गुणों से भरपूर होता है और यह प्रतिरक्षा कोशिकाओं को मजबूती देने का काम करता है। इसके अलावा कई शोध बताते हैं कि मैंगोस्टीन में कुछ यौगिक जीवाणुरोधी गुणों से भरपूर होते हैं जो संक्रमण का मुकाबला करके आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती देने का काम करते हैं।

मैंगोस्टीन की इस क्षमता का पता लगाने के लिए एक अध्ययन किया गया। 30 दिनों के इस अध्ययन में 59 ऐसे लोगों को शामिल किया गया जो मैंगोस्टीन युक्त सप्लीमेंट का सेवन कर रहे थे। इस अध्ययन के परिणामस्वरूप पाया गया कि प्लेसबो लेने वालों की तुलना में इन लोगों में इंफ्लामेशन मार्कर में कमी आई है साथ ही इनके स्वस्थ प्रतिरक्षा कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि हुई है।

धूप में बहुत ज्यादा समय बिताने वालों को त्वचा संबंधी कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह उम्र संबधी कई सारी परेशानियों को बढ़ाने के साथ त्वचा कैंसर का भी एक प्रमुख कारण हो सकता है। मैंगोस्टीन का सेवन आपको धूप से होने वाली इन समस्याओं से बचा सकती है।

इसी संबंध को समझने के लिए विशेषज्ञों ने चूहों को कुछ समय के लिए मैंगोस्टीन अर्क दिया। इस अध्ययन के परिणामस्वरूप विशेषज्ञों ने पाया कि मैंगोस्टीन अर्क की वजह से चूहों की त्वचा ने सूरज की रोशनी से निकलने वाले पराबैंगनी-बी (यूवीबी) विकिरण के खिलाफ एक सुरक्षात्मक लेयर बना ली थी। इसी तरह मनुष्यों पर भी किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि मैंगोस्टीन अर्क पराबैंगनी किरणों के खिलाफ त्वचा को सुरक्षित रखने में सहायक है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि मैंगोस्टीन में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट और एंटीइंफ्लामेटरी गुण त्वचा को सुरक्षित रखने में सहायक होते हैं। हालांकि, इसके प्रभावों को जानने के लिए अभी और विस्तार से अध्ययन की आवश्यकता है।

पाचन को बढ़ाता है : मैंगोस्टीन में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। सिर्फ 1 कप (196 ग्राम) मैंगोस्टीन से आपको दैनिक आवश्यकताओं का लगभग 14 फीसद फाइबर प्राप्त हो सकता है। फाइबर पाचन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। हाई फाइबर युक्त आहार आंतों के लिए फायदेमंद होते हैं।

मस्तिष्क को स्वस्थ बनाए रखता है : कई अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि मैंगोस्टीन अर्क मस्तिष्क की सूजन को कम करने के साथ मांसपेशियों को स्वस्थ्य रखने में मदद करता है। चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि यह अवसाद के लक्षणों में सुधार करने में भी सहायक है।

कैंसर से दे सकती है सुरक्षा : मैंगोस्टीन में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट कैंसर से भी हमें बचा सकते हैं। टेस्ट-ट्यूब अध्ययनों से पता चलता है कि इसमें पाया जाना वाला रासायनिक यौगिक एक्सथोन, पेट,  स्तन और फेफड़ों के कैंसर को बढ़ावा देने वाली कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है।

मैंगोस्टीन का सेवन वैसे तो बहुत सुरक्षित है। हालांकि, कुछ लोगों में इसके दुष्प्रभाव भी देखने को मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ताजे मैंगोस्टीन फलों से तो कोई नुकसान नहीं है, लेकिन बाजार में मिलने वाले सप्लीमेंट जैसे जूस और पाउडर को 100 फीसदी जोखिम रहित नहीं कहा जा सकता है।

कुछ शोध से पता चला है कि हर्बल सप्लीमेंट्स में पाए जाने वाले एक्सथोन्स रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं। चूंकि, मैंगोस्टीन में जैन्थोन्स भरपूर मात्रा में पाया जाता है, ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप खून को पतला करने वाली दवाइयां ले रहे हैं तो मैंगोस्टीन के सेवन से बचना चाहिए।

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