myUpchar सुरक्षा+ के साथ पुरे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

इन्सेफेलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन​) क्या है?

दिमाग में सूजन या मस्तिष्क में सूजन या इंसेफेलाइटिस एक असाधारण लेकिन गंभीर स्थिति है जिसमें मस्तिष्क में सूजन आने लगती है। इस स्थिति के अधिकतर मामले या तो वायरल इन्फेक्शन के कारण होते हैं या फिर तब होते हैं जब प्रतिरक्षा प्रणाली असाधारण रूप से मस्तिष्क के ऊतकों पर हमला करने लगती है।

इन्सेफेलाइटिस अक्सर हल्के फ्लू जैसे लक्षण ही पैदा करता है, जैसे कि बुखार या सिरदर्द या फिर किसी प्रकार के लक्षण पैदा नहीं करता है। कभी-कभी फ्लू जैसे होने वाले लक्षण अत्यधिक गंभीर हो जाते हैं। मस्तिष्क में सूजन के कारण मिर्गी के दौरे, भ्रमित सोच या हिलने-ढुलने की प्रक्रिया या इंद्रियों संबंधी समस्याएं आदि भी हो सकती हैं।दिमाग में सूजन की स्थिति की जांच करने के लिए डॉक्टर आपके लक्षणों का पता करेंगे और आपको हाल ही में हुई किसी बीमारी या वायरस संबंधी स्थिति के बारे में भी पूछेगें। परीक्षण के लिए खून टेस्ट और मस्तिष्क के लिए कुछ इमेजिंग टेस्ट करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है।

मस्तिष्क में सूजन अभी तक इतनी गंभीर बहुत ही कम मामलों में हुई है जो जीवन के लिए घातक हो सकती है। यदि आपको इंसेफेलाइटिस के लक्षण महसूस हो रहे हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए। कुछ गंभीर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। इसके उपचार में ओरल (मुंह द्वारा खाई जाने वाली) दवाएं और इंट्रावेनस (नसों के द्वारा ली जाने वाली दवाएं) आदि शामिल हैं, जिनकी मदद से सूजन और जलन को कम किया जाता है और संक्रमण का इलाज किया जाता है। जिन मरीज़ों को सांस लेने में तकलीफ होती है उनको एक कृत्रिम श्वसन दिया जाता है। बीमारी ठीक होने के बाद कुछ लोगों को फिजिकल, स्पीच और ऑक्यूपेशनल थेरेपी की आवश्यकता पड़ सकती है।

 

  1. मस्तिष्क में सूजन के प्रकार - Dimag me sujan ke prakar
  2. इंसेफेलाइटिस के लक्षण - Mastishk me sujan ke lakshan
  3. इन्सेफेलाइटिस के कारण - Encephalitis Causes in Hindi
  4. मस्तिष्क (दिमाग) में सूजन से बचाव - Prevention of Encephalitis in Hindi
  5. इन्सेफेलाइटिस का परीक्षण - Diagnosis of Encephalitis in Hindi
  6. इंसेफेलाइटिस का इलाज - Encephalitis Treatment in Hindi
  7. इंसेफेलाइटिस की जटिलताएं - Encephalitis Risks & Complications in Hindi
  8. इन्सेफेलाइटिस के डॉक्टर

इन्सेफेलाइटिस कितने प्रकार का होता है?

इंसेफेलाइटिस के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं:

  • प्राइमरी इंसेफेलाइटिस (Primary encephalitis) - यह तब होता है जब वायरस सीधे मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है। 
  • सेकेंडरी इंसेफेलाइटिस (Secondary encephalitis) - यह तब होता है जब संक्रमण शरीर के किसी अन्य हिस्से में होता है और फिर फैल कर मस्तिष्क तक पहुंच जाता है।

इसको कारण के अनुसार भी वर्गीकृत किया जाता है:

अलग-अलग प्रकार के इंसेफेलाइटिस के अलग-अलग कारण हो सकते हैं।

  • जापानी इंसेफेलाइटिस मच्छरों के द्वारा फैलाया जाता है।
  • टिक-बॉर्न इन्सेफेलाइटिस (Tick-borne encephalitis) कीटों (Ticks) के द्वारा फैलाया जाता है।
  • रेबीज किसी कुत्ते या किसी अन्य जानवर के काटने से फैलता है।

 

इन्सेफेलाइटिस में कौन से लक्षण महसूस होते हैं?

वायरल इंसेफेलाइटिस से ग्रस्त ज्यादातर लोगों में हल्के फ्लू जैसे लक्षण महसूस होते हैं जैसे कि:

कभी -कभी इसके कारण कुछ गंभीर लक्षण भी पैदा हो जाते हैं जैसे:

शिशुओं व किशोरों में निम्न संकेत व लक्षण भी शामिल हो सकते हैं:

  • शिशु की खोपड़ी में ऊपर नरम जगह (Fontanels) में उभार आना
  • मतली और उल्टी
  • शरीर में अकड़न
  • उचित रूप से ना खाना या खाने के लिए ना जागना
  • चिड़चिड़ापन

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको इन्सेफेलाइटिस से जुड़े कुछ गंभीर लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तत्काल डॉक्टर से मदद प्राप्त करें। गंभीर रूप से सिरदर्द, बुखार और चेतना या होश में किसी प्रकार का बदलाव आदि की स्थिति को तुरंत मेडिकल सहायता की आवश्यकता होती है।

शिशु और किशोरों को अगर इंसेफेलाइटिस के लक्षण महसूस हो रहे हैं तो उनको तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं

मस्तिष्क (दिमाग) में सूजन के कारण क्या होते हैं?

मस्तिष्क में वायरस, बैक्टीरिया या फंगस द्वारा हुए सीधे संक्रमण के परिणामस्वरूप इंसेफेलाइटिस विकसित हो सकता है। इसके अलावा जब प्रतिरक्षा प्रणाली किसी संक्रमण पर प्रतिक्रिया देती है तो प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से मस्तिष्क के ऊतकों पर हमला कर देती है, जिस कारण से भी इंसेफेलाइटिस विकसित हो सकता है।

(और पढ़ें - मस्तिष्क संक्रमण के लक्षण)

प्राइमरी (प्राथमिक) इंसेफेलाइटिस:

प्राइमरी इन्सेफेलाइटिस को वायरस की तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: 

सेकेंडरी (माध्यमिक​) इंसेफेलाइटिस:

दिमाग में सूजन का यह प्रकार वायरल इन्फेक्शन की वजह से विकसित हो सकता है। इन्फेक्शन की शुरूआत होने के बाद लक्षण दिखाई देने में दिनों से लेकर हफ्तों तक का समय भी लग सकता है। इसमें मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क के स्वस्थ ऊतकों के साथ बाहरी जीवों (वायरस-बैक्टीरिया आदि) जैसा व्यवहार करने लग जाती है और उनपर हमला करने लग जाती है। हालांकि अब तक इस बात का पता नहीं लग पाया है कि प्रतिरक्षा प्रणाली आखिर क्यों स्वस्थ ऊतकों के साथ ऐसा करती है।

(और पढ़ें - दिमागी बुखार के लक्षण)

दिमाग (मस्तिष्क) में सूजन होने का जोखिम क्यों बढ़ जाता है?

निम्न स्थितियों में इन्सेफेलाइटिस पैदा होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं:

  • उम्र - कुछ आयु वर्ग के लोगों में इंसेफेलाइटिस के कुछ प्रकार अधिक आम और गंभीर होते हैं। सामान्य तौर पर किशोरों और वृद्ध व्यक्तियों में कुछ प्रकार के वायरल इन्सेफेलाइटिस होने के अधिक जोखिम होते हैं। 
  • जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक कमजोर होती है। जिन लोगों को एचआईवी-एड्स या कोई अन्य बीमारी होती है जो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को दबा देती है ऐसे लोगों में इन्सेफेलाइटिस विकसित होने के अत्यधिक जोखिम होते हैं। 
  • जो लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां पर यह विशिष्ट वायरस फैलाने वाले मच्छर और अन्य कीट आम हैं।
  • मौसम - मच्छर से होने वाले रोग गर्मियों के दिनों में और अधिक आम हो जाता है।

इंसेफेलाइटिस की रोकथाम कैसे की जाती है?

कई प्रकार की बचपन की सामान्य बीमारियों को टीकाकरण (Immunization) की मदद से काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए बच्चे के डॉक्टर द्वारा दिए गए टीकाकरण के शेड्यूल का पालन करना चाहिए:

चेचक का इलाज करना और गलसुआ (मम्प्स), खसरा और रूबेला वायरस के खिलाफ टीकाकरण करवाने से भी इन्सेफेलाइटिस की संभावनाओं को कम किया जा सकता है:

  • बच्चों को ऐसे व्यक्तियों के संपर्क से दूर रखना चाहिए जिनको पहले ही इन्सेफेलाइटिस हो
  • अच्छी स्वच्छता बनाए रखने का अभ्यास करना चाहिए। विशेष रूप से टॉयलेट का उपयोग करने के बाद और खाना खाने से पहले अपने हाथों को साबुन और पानी के साथ अच्छे से धोना चाहिए। 
  • मेज पर रखे व खाने वाले बर्तनों को किसी के साथ शेयर ना करें और ना ही अपने पेय पदार्थों को दूसरों के साथ शेयर करें। 

(और पढ़ें - शिशु टीकाकरण चार्ट)

ऐसे क्षेत्रों में जहां पर इंसेफेलाइटिस कीटों और विशेष रूप से मच्छरों के काटने से फैलता है वहां पर आपको निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचें (या उस समय जिस समय मच्छर अधिक क्रियाशील होते हैं)
  • सुरक्षात्मक कपड़े पहनें जैसे पूरी बाजू और पूरी टांगों वाले कपड़े
  • मच्छरों को भगाने वाली क्रीम या मरहम आदि का इस्तेमाल करें

इसके अलावा आपके घर के आसपास मौजूद पानी के स्त्रोतों, बाल्टी, गुलदस्ते और कूलर की टंकी आदि में भरे हुए पानी को निकाल देना चाहिए क्योंकि मच्छर पानी में ही प्रजनन करते हैं।

(और पढ़ें - मच्छर मारने के उपाय)

कीट आदि के काटने से बचने के लिए:

  • मिट्टी, पत्तों व वनस्पतियों आदि के अधिक संपर्क में ना आएं।
  • बाहर जाते समय पूरी बाजू व पूरी टांगों वाले और हल्के रंगों के कपड़े पहनें।
  • बार-बार अपने बच्चों और पालतू जानवरों में चिपके कीटों की जांच करते रहे। 

दिमाग (मस्तिष्क) में सूजन का परीक्षण कैसे किया जाता है?

इस स्थिति का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर आपके लक्षणों की जांच करेंगे और आपसे पूछेंगे की आपको हाल ही में वायरस से जुड़ी बीमारी (वायरल इन्फेक्शन आदि) तो नहीं हुई। अकेले लक्षणों की मदद से अक्सर इन्सेफेलाइटिस जैसी कई बीमारियों के बीच पूरी तरह से अंतर स्पष्ट नहीं किया जा सकता।

इसलिए डॉक्टर विभिन्न प्रकार के टेस्ट करते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं:

  • स्पाइनल टैप (कमर में छेद करना)
  • मस्तिष्क स्कैन (सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन) - कुछ प्रकार के वायरस मस्तिष्क के कुछ क्षेत्रों के प्रभावित कर देते हैं। मस्तिष्क स्कैन की मदद से यह देखना की मस्तिष्क का कौन सा हिस्सा प्रभावित हुआ है उसकी मदद ये यह निर्धारित करने में मदद मिलती है कि मस्तिष्क में कौन सा वायरस उपस्थित है। 
  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईईजी) - इस टेस्ट में इलेक्ट्रोड्स का इस्तेमाल किया जाता है, ये धातु की छोटी-छोटी डिस्क होती है जो तारों से जुड़ी होती हैं। इन इलेक्ट्रोड्स को खोपड़ी पर लगाया जाता है जिससे ये मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड करती हैं। ईईजी टेस्ट इन्सेफेलाइटिस पैदा करने वाले वायरस का पता नहीं लगाता। लेकिन ईईजी टेस्ट के कुछ पैटर्न न्यूरोलॉजिस्ट (स्नायु विज्ञानी) को आपके लक्षणों के संक्रामक स्रोत का संकेत दे सकते हैं। 
  • खून टेस्ट - खून की जांच वायरल इन्फेक्शन के संकेत व लक्षणों का संकेत देती है।  इन्सेफेलाइटिस की जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट को अकेले बहुत ही कम किया जाता है। इसका प्रयोग आमतौर पर अन्य टेस्टों के साथ किया जाता है। 
  • मस्तिष्क बायोप्सी - इस टेस्ट में आपके डॉक्टर संक्रमण की जांच करने के लिए मस्तिष्क के ऊतकों में से एक छोटा सैंपल निकाल लेते हैं। इस प्रक्रिया का उपयोग बहुत ही कम किया जाता है क्योंकि इसमें जटिलताएं विकसित होने के अत्यधिक जोखिम होते हैं। 

कभी-कभी मरीज की खराब स्थिति के कारण (जैसे मरीज उत्तेजित होना) कुछ प्रकार के टेस्ट तत्काल नहीं किए जाते। फिर भी यह जरूरी होता है कि जितना जल्दी हो सके स्थिति का परीक्षण किया जाए क्योंकि तत्काल परीक्षण रोग के परिणाम में सुधार करता है।

मस्तिष्क में सूजन (इन्सेफेलाइटिस) का उपचार क्या है?

इंसेफेलाइटिस का उपचार अस्पताल में करने की आवश्यकता होती है। इसका उपचार जितना जल्दी शुरू होता है उतना ही इसके सफल होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं:

इन्सेफेलाइटिस से ग्रस्त लोगों को शांत वातावरण के साथ मेडिकल केयर की आवश्यकता होती है। सामान्य देखभाल में नजदीकी द्वारा नजर रखा जाना और सिरदर्द के लिए दर्दनिवारक दवाएं दिया जाना आदि शामिल है। बुखार कम करने के लिए पंखे, गुनगुने पानी की पट्टी या दवाओं आदि का उपयोग किया जाता है।

जिन लोगों में गंभीर लक्षण विकसित हो जाते हैं उनको उपचार में इंटेंसिव केयर यूनिट (गहन देखभाल) की आवश्यकता पड़ सकती है। उपचार के दौरान मरीजों को सांस लेने में मदद (ऑक्सीजन मास्क की मदद से) और खाने-पीने में मदद (ड्रिप के द्वारा) दी जा सकती हैं। 

उपचार इसके अंदरुनी कारणों पर निर्भर करते हैं, लेकिन इनमें निम्न शामिल हो सकते हैं:

  • एंटीवायरल दवाएँ
  • स्टेरॉयड के इंजेक्शन
  • प्रतिरक्षा प्रणाली को कंट्रोल करने में मदद करने वाले उपचार
  • एंटीबायोटिक या एंटीफंगल दवाएँ
  • बुखार या अन्य शारीरिक बेचैनी को दूर करने के लिए दर्दनिवारक दवाएं
  • मिर्गी को नियंत्रित करने वाली दवाएं
  • सांस लेने में मदद करने वाले मास्क की मदद से ऑक्सीजन प्राप्त करना या ब्रिथिंग मशीन - वेंटिलेटर (Ventilator)

दिमाग में सूजन के मरीज को अस्पताल में कुछ दिन से कुछ हफ्ते और यहां तक कि कुछ महीनों तक भी रुकना पड़ सकता है।

मस्तिष्क में सूजन व लालिमा आदि कुछ दिनों से दो या तीन महीनों तक रह सकती है। इसके बाद काफी ज्यादातर लोगों में दो से तीन महीनों के भीतर उनके लक्षणों में सुधार आ जाता है।

इंसेफेलाइटिस से कौन सी समस्याएं शुरू हो सकती हैं?

गंभीर बीमारी के बाद थकान महसूस होना काफी आम स्थिति होती है और अधिकतर लोगों ने यह पाया कि रिकवरी (बीमारी से ठीक होने के बाद फिर से स्वस्थ होने की प्रक्रिया) के दौरान उनको खूब आराम करने की जरूरत है। एेसे में रोजाना की गतिविधियों को धीरें -धीरें वक्त लेते हुए ही शूरू करना बेहतर होता है। 

अधिकतर लोग जिनमें गंभीर इन्सेफेलाइटिस पाया गया है उनमें अन्य कई समस्याएं विकसित होने लगती हैं। इंसेफेलाइटिस के कारण होने वाली दिक्कतों में निम्न शामिल हो सकती हैं:

  • याददाश्त में कमी (और पढ़ें - कमजोर याददाश्त)
  • व्यवहार या व्यक्तित्व में बदलाव
  • मिर्गी
  • थकान
  • शारीरिक कमजोरी
  • बौद्धिक (बुद्धिमता) अक्षमता
  • मांसपेशियों के समन्वय में कमी
  • दृष्टि संबंधी समस्याएं
  • सुनने संबंधी परेशानी
  • बोलने संबंधी दिक्कत
  • सांस लेने में तकलीफ
  • दुर्लभ मामलों में, कोमा

निम्न लोगों के समूहों में जटिलताएं विकसित होने की संभावनाएं अधिक होती है:

  • वृद्ध लोग।
  • जो लोग जिनको पहले कभी कोमा जैसे लक्षण हुए हों या अभी भी होते हों।
  • वे लोग जो तुरंत उपचार प्राप्त नहीं करवा पाते।
Dr. Megha Tandon

Dr. Megha Tandon

न्यूरोलॉजी

Dr. Shakti Mishra

Dr. Shakti Mishra

न्यूरोलॉजी

Dr. Ashutosh Pratap

Dr. Ashutosh Pratap

न्यूरोलॉजी

क्या आप या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है? सर्वेक्षण करें और दूसरों की सहायता करें

और पढ़ें ...