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स्किन कैंसर क्या है?

त्वचा की कोशिकाओं का असामान्य तरीके से बढ़ना स्किन कैंसर कहलाता है, जो अक्सर धूप के संपर्क में रहने वाली त्वचा में होता है। लेकिन स्किन कैंसर कई बार त्वचा के उन हिस्सों में भी हो जाता है, जो सामान्य रूप से धूप के संपर्क में नहीं आते या कम आते हैं।

स्किन कैंसर के मुख्यतः तीन प्रकार का होता हैं - बेसल सेल कार्सिनोमा (Basal cell carcinoma), स्कवैमस सेल कार्सिनोमा (Squamous cell carcinoma) और मेलेनोमा (Melanoma)।

आप पराबैंगनी विकिरणों (Ultraviolet Radiation) से बचाव करके स्किन कैंसर के जोखिम को कम कर सकते हैं। इसके साथ ही साथ त्वचा में संदेहजनक बदलावों की जांच करके शुरूआती चरणों में ही स्किन कैंसर की पहचान की जा सकती है, जिससे इसके सफल इलाज का एक बेहतरीन मौका मिल सकता है।

जैसा की ऊपर बताया गया, स्किन कैंसर मुख्य रूप से सूरज के संपर्क में आनी वाली त्वचा पर ही होता है, जैसे खोपड़ी,  चेहरा,  होंठ,  कान, गर्दन,  छाती,  भुजाएं और हाथ इत्यादि।  इसके अलावा महिलाओं में टांगों पर भी यह विकसित हो सकता है।

शरीर के उपरोक्त स्थानों के साथ ही साथ स्किन कैंसर शरीर के उन हिस्सों में भी हो जाता है जो सूरज़ के संपर्क में बहुत ही कम आते हैं, जैसे हथेलियां,  हाथों और पैरों की उंगलियों के नीचे का भाग और जननांग आदि।

स्किन कैंसर हर प्रकार के रंग वाले व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है। ‘मेलेनोमा’ जब आमतौर पर सांवले रंग के लोगों को होता है, तो ज्यादातर उनके उन स्थानों पर होने की संभावना होती है, जो सूरज के संपर्क में नहीं आते।

(और पढ़ें - कैंसर के प्रकार)

  1. स्किन कैंसर के प्रकार - Types of Skin Cancer in Hindi
  2. स्किन कैंसर के लक्षण - Skin Cancer Symptoms in Hindi
  3. स्किन कैंसर के कारण और जोखिम कारक - Skin Cancer Causes & Risk Factors in Hindi
  4. स्किन कैंसर से बचाव - Prevention of Skin Cancer in Hindi
  5. स्किन कैंसर का परीक्षण - Diagnosis of Skin Cancer in Hindi
  6. स्किन कैंसर का इलाज - Skin Cancer Treatment in Hindi
  7. स्किन कैंसर की दवा - Medicines for Skin Cancer in Hindi
  8. स्किन कैंसर के डॉक्टर

स्किन कैंसर के कितने प्रकार हैं?

स्किन कैंसर के मुख्यतः तीन प्रकार होते हैं, जो निम्न हैं:-

  • बेसल सेल कार्सिनोमा (Basal cell carcinoma)
    यह सबसे सामान्य प्रकार का स्किन कैंसर है, जो त्वचा की कोशिकाओं में से उत्पन्न होता है।
     
  • स्कैवम सेल कार्सिनोमा (Squamous cell carcinoma)
    इसको दूसरा सबसे सामान्य स्किन कैंसर माना जाता है, यह भी त्वचा की कोशिकाओं में से ही उत्पन्न होता है।
     
  • मेलानोमा (Melanoma)
    यह त्वचा में रंग उत्पादन करने वाली कोशिकाओं (Melanocytes) में शुरू होता है। इसकी होने की दर काफी कम है, लेकिन उपरोक्त दोनों त्वचा कैंसर के प्रकार की तुलना में यह काफी खतरनाक होता है।

स्किन कैंसर के लक्षण व संकेत क्या होते हैं?

  • बेसल सेल कार्सिनोमा  
    बेसल सेल कार्सिनोमा आम तौर पर शरीर के उन हिस्सों पर होता है, जो धूप के संपर्क में आते हैं जैसे चेहरा व गर्दन।

    बेसल सेल कार्सिनोमा निम्न रूप में उत्पन्न हो सकता है –
    • त्वचा पर मोती या मोम के रंग जैसा उभार के रूप में,
    • सपाट, मांस के रंग का या भूरे रंग की घाव की तरह के निशान के रूप में।
       
  • स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा –
    स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा भी ज्यादातर धूप के संपर्क मे आने वाली शरीर के हिस्सों पर ही होता है, जैसे चेहरा, गर्दन, कान और हाथ आदि। सांवली त्वचा वाले लोगों के धूप के संपर्क में ना आने वाली त्वचा पर भी ‘स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा’ विकसित होने की संभावना होती है।

    ‘स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा’ निम्नलिखित रूप में उत्पन्न हो सकता है -
    • 1 - एक कठोर और लाल गांठ के रूप में
    • 2 - पपड़ी की परत के साथ सपाट घाव के रूप में।
       
  • मेलेनोमा –
    मेलेनोमा’ शरीर में कहीं भी विकसित हो सकता है, सामान्य त्वचा पर या शरीर के किसी हिस्से का कोई तिल या मस्सा जो स्किन कैंसर में बदल जाता है। पुरूषों में ‘मेलेनोमा’ अक्सर उनके चेहरे या ट्रंक (पेट, कमर और छाती आदि) पर ही विकसित होता है, और महिलाओं में अक्सर यह टांगों के निचले हिस्से पर विकसित होता है। पुरूषों और महिलाओं में ‘मेलेनोमा’ उनके शरीर के उन हिस्सों पर भी विकसित हो सकता है, जो धूप के संपर्क में नहीं आते।

    मेलेनोमा हर प्रकार की स्किन टोन के लोगों को प्रभावित कर सकता है। अक्सर सांवली त्वचा के लोगों में ‘मेलेनोमा’ उनकी हथेलियों और पैरों के तलवे या हाथों-पैरों के नाखूनों के नीचे विकसित होता है।
    • मेलेनोमा के संकेत:
    • गहरे रंग के बिंदू के साथ, भूरे रंग का बड़ा धब्बा।
    • एक तिल या मस्सा जिसका रंग और आकार बदलने लगा हो या उसमें से खून निकलने लगा हो।
    • अस्थायी किनारों और भागों के साथ एक छोटा घाव, जो लाल, सफेद, नीले या काले-नीले रंग का हो सकता है।
    • गहरे रंग के घाव जो शरीर में हथेलियों, पैर के तलवों, हाथों और पैरों की उंगलियों, मुंह में श्लेष्मा झिल्ली की परत, नाक और जननांगों पर हो सकता है।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए:

यदि आप अपनी त्वचा में किसी प्रकार का कोई बदलाव देख रहे हैं, जो आपको चिंता का कारण लग रहा है तो ऐसे में डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। डॉक्टर आपकी त्वचा की जांच करेंगे ताकि त्वचा में बदलाव के कारण को निर्धारित किया जा सके। जरूरी नहीं कि त्वचा का हर बदलाव स्किन कैंसर का कारण ही हो, लेकिन त्वचा में यदि कोई बदलाव आये तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

(और पढ़ें - त्वचा रोग के लक्षण)

स्किन कैंसर क्यों होता है?

जब त्वचा की कोशिकाओं के डीएनए में म्यूटेंशन (एक प्रकार की त्रुटी या असामान्यता) होती है, तब स्किन कैंसर होता है। म्यूटेंशन के कारण त्वचा की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और त्वचा में कैंसर कोशिकाओं के समूह का निर्माण करती हैं।

स्किन कैंसर त्वचा की उपरी परत पर शुरू होता है, इस परत को एपिडर्मिस (Epidermis) भी कहा जाता है। एपिडर्मिस एक पतली परत होती है, यह त्वचा की कोशिकाओं का सुरक्षात्मक कवर प्रदान करती है, जिससे शरीर में लगातार शेड बनी रहती है।

  • स्क्वैमस कोशिकाएं (Squamous cells) –
    यह त्वचा की सबसे उपरी सतह के ठीक नीचे होती है, जो त्वचा की अंदरुनी परत के रूप में कार्य करती है।
     
  • बेसल कोशिकाएं (Basal cells)
    ये कोशिकाएं त्वचा की नई कोशिकाओं का निर्माण करती हैं, जो स्क्वैमस कोशिकाओं के ठीक नीचे स्थित होती हैं।
     
  • मेलैनॉसाइटिस (Melanocytes)
    ये कोशिकाएं ‘मेलानिन’ का निर्माण करती हैं, यह एक पिगमेंट (रंग प्रदान करने वाला पदार्थ) होता है, जो त्वचा को सामान्य रंग प्रदान करता है। यह एपिडर्मिस के निचले हिस्से में स्थित होता है। जब आप धूप में होते हैं, तो आपकी त्वचा की अंदरूनी परत को सुरक्षा देने के लिए ‘मेलैनॉसाइटिस’ और अधिक मेलानिन का निर्माण करने लगता है।

    विदित हो कि जहां पर स्किन कैंसर की शुरूआत होती है, उसके आधार पर ही इसके प्रकार और उपचार के विकल्पों को निर्धारित किया जाता है।
     
  • पराबैंगनी किरणें और अन्य संभावित कारण:
    डीएनए द्वारा नष्ट की गई त्वचा की कोशिकाओं के मामले ज्यादातर पराबैंगनी विकिरणों का ही परिणाम होते हैं। ये विकिरणें सूरज की रोशनी और टेनिंग बैड के लिए इस्तेमाल की जानी वाली लाइटों में पाई जाती है। लेकिन सूरज के संपर्क में आना ही स्किन कैंसर का कारण नहीं समझा जा सकता, क्योकिं स्किन कैंसर शरीर के उन हिस्सों पर भी हो सकता है, जो सूरज के संपर्क में नहीं आते।

    डीएनए द्वारा नष्ट की गई त्वचा की कोशिकाओं के मामले स्किन कैंसर के जोखिम को बढ़ावा देने वाले अन्य कारकों के बारे में भी संकेत देता है, जैसे कि विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसी स्थिति का होना।

स्किन कैंसर होने के जोखिम कारक:

  • गोरी त्वचा
    वैसे स्किन कैंसर किसी भी स्किन टोन के लोगों को हो सकता है। लेकिन गोरी त्वचा में कम वर्णक (मेलानिन) होते हैं, जो पराबैंगनी विकिरणों से कम सुरक्षा प्रदान कर पाते हैं।
     
  • पहले कभी सनबर्न हुआ हो
    बचपन या किशोरावस्था के दौरान अगर सनबर्न के कारण कभी एक या अधिक छाले या फफोले बने हों तो  ऐसे में वयस्क होने पर स्किन कैंसर के जोखिम बढ़ जाते हैं। वयस्क होना खुद भी स्किन कैंसर का एक जोखिम है। (और पढ़ें - सनबर्न के उपाय)
     
  • धूप में ज्यादा समय रहना
    कोई भी व्यक्ति अगर अत्याधिक समय धूप में बिताता है, तो उसके लिए स्किन कैंसर के जोखिम बढ़ सकते हैं। विशेषकर जब उसने धूप से बचने के लिए कपड़े या सनस्क्रीन आदि का इस्तेमाल ना किया हो।
     
  • अत्याधिक धूप या अधिक उंचाई वाली जगह पर रहना –
    ठंडे मौसम में रहने वाले लोगों के मुकाबले जो लोग धूप और गर्म मौसम में रहते हैं, वे सूरज के संपर्क में ज्यादा आते हैं। उंचाई वाले क्षेत्रों में धूप अत्याधिक शक्तिशाली होती है, जिससे वहां पर रहने वाले लोगों के लिए पराबैंगनी विकिरणों के संपर्क मे आने के जोखिम और अधिक बढ़ जाते हैं।
     
  • मोल्स (तिल या मस्सा)
    जिन व्यक्तियों के शरीर पर ज्यादा या असामान्य मोल्स हैं, उनके लिए भी स्किन कैंसर के जोखिम हो सकते हैं। असामान्य मोल्स वे होते हैं, जो अस्थायी होते हैं, और सामान्य मोल्स के आकार से बड़े होते हैं। सामान्य मोल्स के मुकाबले इनके कैंसर युक्त बनने की संभावना ज्यादा होती है। अगर शरीर पर ऐसे असामान्य मोल्स दिखें, तो नियमित रूप से उनके बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। (और पढ़ें - मस्से हटाने के घरेलू नुस्खे)
     
  • कैंसर से पहले का घाव
    त्वचा पर घाव बनना जिसे ‘एक्टिनिक केराटोसिस’ के नाम से जाना जाता है, यह भी स्किन कैंसर के विकसित होने के जोखिम बढ़ा सकता है। ये कैंसर से पहले के घाव विशेष रूप से  रुखे और परतदार धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं, जिनका रंग भूरे से गहरे गुलाबी तक हो सकता है। (और पढ़ें - घाव ठीक करने के घरेलू उपाय)
     
  • परिवार में पहले किसी को स्किन कैंसर होना
    अगर आपके माता-पिता या भाई-बहन में किसी को पहले स्किन कैंसर हुआ हो तो आपके लिए भी स्किन कैंसर के जोखिम बढ़ जाते हैं।
     
  • पहले खुद कभी स्किन कैंसर हुआ हो
    जो व्यक्ति पहले भी कभी स्किन कैंसर से ग्रसित हुआ हो, तो उसके लिए इसके फिर से विकसित होने के जोखिम बढ़ जाते हैं।
     
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
    जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, उनमें स्किन कैंसर विकसित होने के अधिक जोखिम हो सकते हैं। जिन लोगों को एचआईवी-एड्स (HIV-AIDS) है या जो लोग किसी अंग प्रत्यारोपण के बाद इम्यूनोसुप्रीसेंट (प्रतिरक्षा दमकारी) दवाएं ले रहे हैं, अक्सर उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है।
     
  • विकिरणों के संपर्क में आना – 
    एक्जिमा या मुहांसे आदि के लिए जो लोग रेडिएशन से उपचार करवाते हैं, उनके लिए स्किन कैंसर के जोखिम बढ़ जाते हैं। विशेष रूप से उनमें ‘बेसल सेल कार्सिनोमा’ के जोखिम ज्यादा बढ़ जाते हैं।
     
  • हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आना
    आर्सेनिक जैसे कुछ हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आना, स्किन कैंसर के जोखिम को बढ़ा देता है।

स्किन कैंसर होने से कैसे रोकें?

ज्यादातर स्किन कैंसर की रोकथाम की जा सकती है, स्किन कैंसर की खुद रोकथाम करने के लिए निम्नलिखित उपायों का इस्तेमाल करना चाहिए:

  • दिन के मध्य में सूरज के संपर्क में आने से बचें
    आप पूरे साल पराबैंगनी विकिरणों को अवशोषित करते हैं, जिसमें बादल हानिकारक किरणों से थोड़ी सुरक्षा प्रदान करते हैं। धूप की अधिकता के समय उससे बचना सनबर्न और सनटान्स से बचा सकता है। दिन के मध्य में सूरज के संपर्क में सीधे आना त्वचा को क्षति पहुंचाते हैं और स्किन कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। इसके साथ ही साथ ज्यादातर समय सूरज के संपर्क में रहना भी स्किन कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।
     
  • पूरे वर्ष सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें
    सनस्क्रीन कुछ हानिकारक विकिरणों को फिल्टर नहीं कर पाता, विशेषकर उन विकिरणों को जो ‘मेलानोमा’ को विकसित करती हैं। लेकिन यह सूरज से संपूर्ण सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कम से कम 15 एसपीएफ़ के साथ एक ब्रोड-स्पैक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। सनसक्रीन को हल्के हल्के शरीर पर लगाएं और हर दो घंटे में लगाते रहें। अगर आप स्विमिंग कर रहे हैं या आपको पसीना आ रहा है तब भी  सनस्क्रीन लगायें। धूप के संपर्क में आने वाले हिस्से जैसे, होंठ, कान, गर्दन और हाथों के पिछले हिस्से आदि पर सनस्क्रीन उचित मात्रा मे लगाएं। (और पढ़ें - एक अच्छी सनसक्रीन कैसे चुनें)
     
  • सुरक्षात्मक कपड़े पहनें
    सनसक्रीन पराबैंगनी किरणों से पूर्ण सुरक्षा नहीं कर पाती। इसलिए धूप में जाने से पहले अपनी त्वचा और हाथों और पैरों को गहरे रंग और कसकर बुने हुए कपड़ों से ढंक लेना चाहिए। इसके साथ ही साथ सामान्य टोपी की बजाएं एक बड़ी और फैली हुई टोपी पहनें जो आपको धूप में ज्यादा सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
     
  • धूप से संवेदनशील दवाओं से सावधान रहें
    कुछ सामान्य प्रिस्क्रिप्शन (डॉक्टर की सलाह से ली गई दवा) और ऑवर-द- काउंटर (बिना सुझाव के मिलने वाली दवा) दवाएं, जैसे कि एंटीबायोटिक्स आदि। ये दवाएं धूप में त्वचा को और अधिक संवेदनशील बना देती हैं। (और पढ़ें - एंटीबायोटिक दवा लेने से पहले रखें इन बातों का ध्यान)
     
  • त्वचा की नियमित रूप सा जांच करते रहें और बदलाव दिखने पर डॉक्टर को बताएं -
    अक्सर नई त्वचा आने पर उसकी जांच करनी चाहिए और इसके अलावा तिल, मस्से, झाईयां, जन्म के दौरान के निशान आदि की भी समय-समय पर जांच करते रहना चाहिए। शीशे की मदद से अपने चेहरे, कान,गर्दन और खोपड़ी आदि की करीब से जांच करनी चाहिए। अपनी छाती, पेट और कमर आदि की जांच करते रहें ऊपरी बाजुओं के भीतर की तरफ (कांख में और आस-पास) भी अच्छे से जांच करें। अपनी पैरों और टांगों के आगे-पीछे अच्छे से जांच करते रहें, पैरों की उंगलियों की बीच की जगह समेत। अपने जननागों और नितंबों की भी जांच करते रहें।

स्किन कैंसर के निदान में डॉक्टर निम्न कार्य कर सकते हैं:

  • त्वचा की जांच करना
    डॉक्टर त्वचा की जांच कर सकते हैं, यह निर्धारित करने के लिए की क्या आपकी त्वचा में बदलाव से त्वचा कैंसर होने की संभावना है। इसके अलावा निदान की पुष्टी करने के लिए आगामी टेस्ट भी किए जा सकते हैं।
     
  • टेस्ट के लिए संदिग्ध त्वचा से एक टुकड़ा निकालना (स्किन बायोप्सी)
    इसमें डॉक्टर संदेंहजनक त्वचा से एक छोटा सा टुकड़ा नमूने के तौर पर निकालते हैं और उसे लैबोरेट्री टेस्ट के लिए भेजते हैं। बायोप्सी की मदद से निर्धारित किया जाता है कि क्या आपको स्किन कैंसर है? और अगर है तो वह किस प्रकार का स्किन कैंसर है?

पता लगाना कि स्किन कैंसर कितना बढ़ चुका है:

अगर डॉक्टर निर्धारित कर लेते हैं कि आपको स्किन कैंसर है, तो उसकी सीमा को निर्धारित करने के लिए डॉक्टर अतिरिक्त टेस्ट कर सकते हैं।

‘बेसल सेल कार्सिनोमा’ जैसे सतही स्किन कैंसर बहुत ही कम फैलते हैं, इसलिए स्किन बायोप्सी की मदद से त्वचा के बढ़े हुऐ हिस्से को हटा दिया जाता है। अक्सर यह कैंसर की स्टेज को निर्धारित करने का एकमात्र टेस्ट होता है। लेकिन अगर आपके स्क्वैमस, मेर्केल सेल कार्सिनोमा या मेलेनोमा का आकार बड़ा है, तो आपके डॉक्टर स्किन कैंसर की सीमा का पता करने के लिए आगामी टेस्ट कर सकते हैं।

कैंसर के चरण को इंगित करने के लिए डॉक्टर (I) से (IV) तक रोमन अंकों का इस्तेमाल करते हैं। चरण (I) में कैंसर जिस जगह पर विकसित होता है, उसी तक सीमित रहता है। स्किन कैंसर का चरण (IV) इसका सबसे गंभीर रूप होता है, जिसमें यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल चुका होता है।

स्किन कैंसर के चरण उसके लिए प्रभावी और उचित दवाओं का चयन करने में मदद करते हैं।

स्किन कैंसर का उपचार कैसे किया जाता है?

स्किन कैंसर या कैंसर से पहले बनने वाले घाव (एक्टिनिक केराटिसिस) के उपचार उसके आकार-प्रकार, गहराई और जगह पर निर्भर करते हैं। छोटे स्किन कैंसर जो त्वचा की सतह पर सीमित होते हैं, उनको स्किन बायोप्सी के बाद अन्य उपचार की जरूरत नहीं पड़ती। स्किन बायोप्सी की मदद से कैंसर कोशिकाओं के हिस्सों को बाहर निकाल दिया जाता है।

(और पढ़ें - स्किन कैंसर की सर्जरी)

उपरोक्त के बाद भी अगर अतिरिक्त उपचार की जरूरत पड़ती है, तो उसमें निम्नलिखित विकल्प शामिल हो सकते हैं -

  • फ्रीजिंग (Freezing)
    इस प्रक्रिया में डॉक्टर एक्टिनिक केराटोस और कुछ छोटे, प्रारंभिक कैंसर के हिस्सों को तरल नाइट्रोजन से फ्रीज़ करके नष्ट कर देते हैं। नष्ट हो चुके त्वचा के ऊतक गलने के बाद बाहर निकल जाते हैं।
     
  • एक्सिज्नल सर्जरी (Excisional surgery)
    यह हर प्रकार के स्किन कैंसर के लिए एक उचित उपचार होता है। इसमें डॉक्टर कैंसर ग्रस्त हिस्सों को स्वस्थ त्वचा के आस-पास से काट कर बाहर निकाल देते हैं। कुछ मामलों में गंभीर स्थिति होने पर घाव के आस-पास की कुछ स्वस्थ त्वचा को भी निकालना पड़ सकता है।
     
  • मोह्स सर्जरी (Mohs surgery)
    इस प्रक्रिया का इस्तेमाल अत्याधिक बड़े एवं बार-बार होने वाले स्किन कैंसर या जिनका इलाज करना कठिन हो, आदि के लिए किया जाता है, जैसे ‘बेसल’ और ‘स्क्वैमस कार्सिनोमा’। अक्सर इसका इस्तेमाल शरीर के उन भागों के लिए किया जाता है, जिनका संभव रूप से जितना हो सके संरक्षण करना जरूरी होता है, जैसे की नाक।
     
  • क्योराटेज और इलैक्ट्रोडेसिकेश्न या क्रायोथेरेपी (Curettage and electrodesiccation or cryotherapy)
    स्किन कैंसर के ज्यादातर हिस्से सर्जरी की मदद से निकाल दिए जाते हैं। उसके बाद डॉक्टर एक ब्लेड वाले उपकरण की मदद से कैंसर कोशिकाओं की परत को खुरच कर उन्हें साफ कर देते हैं। एक इलेक्ट्रिक सुई की मदद से बची हुई कैंसर कोशिकाओं को भी नष्ट कर दिया जाता है। इसी प्रक्रिया के एक भिन्नरूप में तरल नाइट्रोजन का प्रयोग भी किया जा सकता है। इसकी मदद से उपचार किए गए क्षेत्रों के आधार और किनारों को फ्रीज करके उन्हें स्थिर कर दिया जाता है।
     
  • विकिरण थेरेपी (Radiation therapy)
    कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए विकिरण थेरेपी में ‘एक्स-रे’ जैसे हाई-पावर वाले एनर्जी बीम का इस्तेमाल किया जाता है। सर्जरी के दौरान अगर कैंसर कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट ना हो पाएं तब भी विकिरण थेरेपी का विकल्प बचता है।
     
  • किमोथेरेपी (Chemotherapy)
    इस प्रक्रिया में कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए दवाओं का प्रयोग किया जाता है और जो कैंसर कोशिकाएं त्वचा की ऊपरी परत तक ही सीमित होते हैं, उनके लिए क्रीम और लोशन का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें एंटी-कैंसर एजेंट्स होते हैं और इनको सीधे प्रभावित त्वचा पर लगाया जा सकता है। इसके साथ ही साथ शरीर के दूसरे भागों में फैल सकने वाले स्किन कैंसर के लिए ‘सिस्टेमिक कीमोथेरेपी’ का उपयोग किया जाता है। (और पढ़ें - कीमो क्या है)
     
  • फोटोडायनेमिक थेरेपी (Photodynamic therapy)
    इस थेरेपी में लेजर लाइट और दवाएं दोनो का संयोजन होता है। इसमें दवाओं की मदद से कैंसर कोशिकाओं को लेजर लाइट के प्रति संवेदनशील बनाया जाता है और लेजर लाइट की मदद से उन्हें नष्ट किया जाता है।
     
  • बायोलोजिकल थेरेपी (Biological therapy)
    यह थेरेपी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए  शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करती है।
Dr. Ashutosh Gawande

Dr. Ashutosh Gawande

ऑन्कोलॉजी

Dr. C. Arun Hensley

Dr. C. Arun Hensley

ऑन्कोलॉजी

Dr. Sanket Shah

Dr. Sanket Shah

ऑन्कोलॉजी

स्किन कैंसर के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
CeldazCeldaz 100 Mg Injection190.47
DabazDabaz 200 Mg Injection311.9
DacarbaDacarba 200 Mg Injection238.09
DacarexDacarex 100 Mg Injection416.66
DacarolDacarol 500 Mg Injection1000.0
DacarzineDacarzine 200 Mg Injection262.5
DecarbDecarb 200 Mg Injection476.19
DecarexDecarex 200 Mg Injection434.0
OncodacOncodac 200 Mg Injection476.19
PegihepPegihep 100 Mcg Injection16470.0
PegvirPegvir 100 Mcg Injection15000.0
ReliferonReliferon 3 Miu Injection500.0
EglitonEgliton 3 Miu Injection380.95
IntalfaIntalfa 3 Miu Injection547.61
ShanferonShanferon 3 Miu Injection892.85
ZavinexZavinex 3 Miu Injection1175.0
BleocelBleocel 15 Iu Injection364.28
BleochemBleochem 15 Iu Injection687.74
BleocinBleocin 15 Mg Injection595.23
BleocipBleocip 15 Iu Injection694.33
Bleomycin 15 Mg InjectionBleomycin 15 Mg Injection600.67
Bleomycin SulphateBleomycin Sulphate Injection654.76
BlominBlomin 15 Iu Injection850.0
OncobleoOncobleo 15 Iu Injection1039.28

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