नीलगिरी तेल के स्वास्थ्य लाभों ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी और आकर्षित किया है और इसका उपयोग परंपरागत चिकित्सा के साथ-साथ अरोमाथेरेपी में किया जा रहा है।

नीलगिरी का तेल लम्बे, सदाबहार नीलगिरी पेड़ के ताजे पत्तों से प्राप्त किया जाता है। इस वृक्ष को वैज्ञानिक रूप से नीलगिरी ग्लोब्यूलस (Eucalyptus Globulus) के रूप में जाना जाता है।

नीलगिरी का पेड़ सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में पाया गया था पर पिछले कुछ शताब्दी में यह भारत, यूरोप और दक्षिण अफ्रीका समेत दुनिया के अन्य हिस्सों में भी पाया जाने लगा है। हालांकि कई देशों में छोटी मात्रा में नीलगिरी तेल का उत्पादन होता है पर अभी भी दुनिया में नीलगिरी तेल का मुख्य स्रोत ऑस्ट्रेलिया ही है।

नीलगिरी तेल के औषधीय उपयोग और नीलगिरी में मौजूद यौगिक के कारण इसका उपयोग दवाओं में किया जा रहा है जिनमें बाम, इनहेलर, मरहम, रैश क्रीम (rash creams), माउथवॉश शामिल हैं।

तो चलिए नीलगिरी तेल के स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानते हैं -

  1. नीलगिरी तेल के फायदे - Nilgiri tel ke fayde in hindi
  2. नीलगिरी का तेल कैसे बनाया जाता है? - How to make Eucalyptus Oil in Hindi
  3. नीलगिरी तेल के नुकसान - Nilgiri tel ke nuksan in hindi

नीलगिरी तेल के फायदे घाव पर - Eucalyptus oil can be used on wounds in hindi

नीलगिरी तेल के रोगाणुरोधक गुण होने के कारण यह एंटीसेप्टिक के रूप में काम करता है। इसलिए नीलगिरी तेल का उपयोग घाव, अल्सर, जलन, कटने, खरोच और फोड़े के उपचार के लिए किया जाता है। यह कोड़ों के काटने और उनके डंक के प्रभाव को कम करने में लेप के रूप में कम करता है। प्रभावित क्षेत्र पर सुखदायक एहसास देने के अलावा यह खुले या कुपित घाव के क्षेत्र को जीवाणु संक्रमण से बचाता है।

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नीलगिरी तेल के औषधीय उपयोग ब्रोंकाइटिस के लिए - Eucalyptus oil to treat bronchitis in hindi

नीलगिरी तेल सर्दी की समस्याओं के इलाज के लिए भी लाभदायक है। यह सर्दी, खांसी, नाक बहना, गले में खराश, अस्थमा, नाक में कफ, ब्रोंकाइटिस और साइनसाइटिस के इलाज में मदद करता है। नीलगिरी तेल में जीवाणुरोधी, कवकरोधी, रोगाणुरोधी, एंटीवायरल, सूजन रोधी और सर्दी खाँसी रोधक गुण होते हैं जो श्वसन समस्याओं के इलाज की दवाओं के लिए अच्छे घटक होते हैं। 2004 में लरिंगोस्कोपे में प्रकाशित एक अध्ययन में देखा गया कि जब नीलगिरी तेल युक्त दवा नॉन-बैक्टीरियल साइनस से पीड़ित रोगियों को दी गई तो उनकी साइनस की समस्या में तेजी से सुधार हुआ। गले में जख्म के उपचार के लिए गर्म पानी में नीलगिरी तेल के मिश्रण से गलगला करने से बहुत लाभ मिलता है। 

नीलगिरी आवश्यक तेल की 1-3 बूंदों से छाती पर मालिश करने से इसकी सुखदायक, सुगन्धित भाप गले को साफ करती है और रक्त वाहिकाओं में फैलती है, जिससे फेफड़ों में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक जाती है और आसानी से श्वास ली जा सकती है। अस्थमा के लक्षणों से राहत पाने के लिए इसमें मौजूद सूजन रोधी गुण बहुत लाभदायक हैं।

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नीलगिरी के तेल का उपयोग मस्तिष्क पर - Eucalyptus oil mental benefits in hindi

नीलगिरी तेल का ठंडा और ताज़ा प्रभाव आम तौर पर सुस्ती से पीड़ित लोगों में शक्ति बढ़ा कर थकान और मानसिक सुस्ती को दूर करता है। यह तनाव और मानसिक विकार के उपचार में भी लाभदायक है। मानसिक थकावट के अलावा नीलगिरी का तेल मानसिक गतिविधि को बढ़ा कर मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है। चूंकि आवश्यक तेल को कई लोगों द्वारा वाहिकाविस्‍फारक माना गया है इसका मतलब है कि यह रक्त वाहिकाओं को आराम देकर शरीर के चारों ओर रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है और अधिक रक्त को संचारित करने में मदद करता है। असल में मस्तिष्क में अधिक रक्त प्रवाह मस्तिष्क की शक्ति को बढ़ाता है।

नीलगिरि आयल के औषधीय गुण मांसपेशियों के दर्द में - Eucalyptus essential oil for muscle pain in hindi

यदि आप जोड़ो और मांसपेशियों के दर्द से पीड़ित हैं तो नीलगिरी के तेल की मालिश करने से तनाव और दर्द को दूर करने में मदद मिलती है। नीलगिरी के तेल में पीड़ा harne और सूजन-रोधी गुण होते हैं। इसलिए गठियाकमर दर्द, मोच, कठोर मांसपेशियों, लगातार दर्द, फाइब्रोसिस और तंत्रिका दर्द से पीड़ित लोगों के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। शरीर के प्रभावित क्षेत्रों पर इस तेल से गोलाकार गति में मालिश की जानी चाहिए।

नीलगिरी का तेल रखे दूर दातों की समस्या - Eucalyptus oil for dental care in hindi

नीलगिरी तेल के रोगाणुरोधी गुण के कारण यह अनेक प्रकार की दातों की समस्या जैसे दातों में छेद, दातों में गंदगी, मसूड़े में सूजन और अन्य प्रकार के दातों के संक्रमण के लिए बहुत लाभदायक है। यही कारण है कि नीलगिरी का तेल आमतौर पर माउथवॉश, टूथपेस्ट और अन्य दंत स्वास्थ्य उत्पादों में एक सक्रिय घटक के रूप में पाया जाता है।

नीलगिरी तेल मारे जूँ को - Eucalyptus oil can kill lice in hindi

नीलगिरी तेल के कीट विकर्षक और प्राकृतिक कीटनाशक गुणों के कारण यह अक्सर जूँ के प्राकृतिक उपचार के रूप में प्रयोग किया जाता है। जूँ की दवाइयों से उपचार बालों के लिए हानिकारक हो सकता हैं, साथ ही साथ ये दवाइयां खतरनाक रसायनों से बनी होती हैं। इसलिए जूँ-पीड़ित सिर से छुटकारा पाने के लिए नीलगिरी तेल की कुछ बूंदें बेहतर और स्वस्थ समाधान हैं।

नीलगिरी तेल का उपयोग दूर करे पेट के कीड़े - Eucalyptus oil good for killing germs in hindi

नीलगिरी का तेल पेट के कीड़ों को दूर करने की दवा के रूप में काम करता है और अक्सर आंत से रोगाणुओं को हटाने में मदद करता है। अध्ययनों से पता चला है कि नीलगिरी तेल का सेवन करने से शरीर के कई हिस्सों में उत्पन्न बैक्टीरिया, माइक्रोब्स और परजीवीयों को हटाने में मदद मिलती है। विशेष रूप से यह अतिसंवेदनशील क्षेत्रों जैसे बृहदान्त्र और आंत से बैक्टीरिया, माइक्रोब्स और परजीवियों को जल्दी हटाता है।

नीलगिरी के तेल के लाभ बालों के लिए - Nilgiri oil for hair growth in hindi

नीलगिरी के तेल का उपयोग आपके बालों को चमक और मोटाई देता है। यह बालों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य में भी मदद करता है। लेकिन इसका बहुत अधिक उपयोग करने से बालों की चमक कम हो जाती है और खोपड़ी चिकनी हो जाती है। इसलिए अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि स्नान से एक घंटे पहले बालों पर नीलगिरी तेल का उपयोग करके फिर अच्छी तरह शैम्पू से बालों को धो लेना चाहिए।

नीलगिरी तेल का उपयोग त्वचा पर - Skin benefits of eucalyptus oil in hindi

त्वचा के संक्रमण का इलाज करने के लिए नीलगिरी तेल का उपयोग संक्रमित त्वचा पर लगा कर किया जाता है। इसका उपयोग विशेष रूप से छाले, दाद, मुँहासे और चिकन पॉक्स में लिए भी किया जाता है। इसको सेब साइडर सिरका की संतुलित मात्रा के साथ मिलाकर समस्याग्रस्त क्षेत्रों पर लगाने से समस्या से जल्द राहत मिलती है।

नीलगिरी तेल के लाभ मधुमेह में - Eucalyptus oil benefits for diabetes in hindi

नीलगिरी तेल का सेवन रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। नीलगिरी तेल वाहिकाविस्‍फारक के रूप में काम करता है। यह पूरे शरीर के रक्त परिसंचरण में वृद्धि करता है। मधुमेह रोगियों में अच्छे रक्त परिसंचरण की कमी होती है जो उनके लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए नीलगिरी के तेल से मालिश करने से और इसे इन्हाले करने से रक्त वाहिकाओं में कसाव कम होता है और पूरे शरीरं में रक्त परिसंचरण बढ़ता है

नीलगिरी तेल से फायदा बंद नाक के लिए - Eucalyptus oil for nasal congestion in hindi

नाक में कफ जमने से राहत पाने के लिए इस तेल की कुछ बूंदों को इन्हाले करने से फ़ायद मिलता है। यह न केवल नाक के मार्ग को साफ करने में मदद करेगा बल्कि आप को अच्छा महसूस कराने में भी मदद करेगा।

नीलगिरी के तेल का लाभ फीवर में - Eucalyptus oil for hay fever in hindi

नीलगिरी के तेल का उपयोग बुखार के इलाज और शरीर के तापमान को कम करने के लिए भी किया जाता है। यही कारण है कि नीलगिरी के तेल को फीवर आयल के नाम से भी जाना जाता है। इस तेल का उपयोग पेपरमिंट तेल के साथ मिलाकर शरीर से दुर्गन्ध दूर करने और शरीर के तापमान को कम करने के लिए स्प्रे के रूप में किया जाता है। 

(और पढ़ें – बुखार का घरेलू इलाज)

नीलगिरी के तेल का फायदा गुर्दे की पथरी में - Eucalyptus oil for kidney stones in hindi

गुर्दे की पथरी वास्तव में एक व्यक्ति को कमज़ोर कर देती है और इसके दर्द के कारण पूरे शरीर में कमजोरी होती लगती है। इस तेल की 1-2 बूंदों से प्रतिदिन तीन बार दर्द वाली जगह पर मालिश करें। इससे दर्द में आराम मिलेगा। अगर दर्द फिर भी बनी रहती है तो चिकत्सक से सलाह लें।

नीलगिरी तेल से लाभ रूम फ्रेशनर के रूप में - Use eucalyptus oil as room freshener in hindi

नीलगिरी तेल के एंटीसेप्टिक और दुर्गन्ध नाशक गुण के कारण अस्पतालों में इसका उपयोग रूम फ्रेशनर के रूप में किया जाता है। यह हवा में मौजूद बैक्टीरिया और रोगाणुओं को मारता है और कमरे के वातावरण को साफ और रोगाणुहीन रखता है।

नीलगिरि आयल फॉर सोप - Eucalyptus oil in soap in hindi

नीलगिरी तेल के दुर्गन्ध नाशक, जीवाणुरोधी, रोगाणुरोधक और सूक्ष्मजीवीरोधक गुण के कारण इसका उपयोग साबुन, डिटर्जेंट और घरेलू क्लीनर में किया जाता है।

नीलगिरि आयल बेनिफिट्स फॉर निमोनिया - Eucalyptus oil for pneumonia in hindi

नीलगिरी के तेल में जीवाणुरोधी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। इसके तेल से छाती पर मालिश करने से यह फेफड़ों को साफ और सूजन को कम करके क्षय रोग (tuberculosis) के हानिकारक लक्षणों से मुक्त करता है। अच्छे परिणाम के लिए छाती और पीठ पर अच्छी तरह इस तेल से मालिश करें। 

(और पढ़ें – निमोनिया से बचने के उपाय)
 

नीलगिरी आयल के फायदे माउथवॉश में - Nilgiri tel ke fayde for mouthwash in hindi

नीलगिरी तेल का उपयोग कई माउथवॉश और टूथपेस्ट में किया जाता है। आवश्यक तेलों के रोगाणुरोधी गुणों पर महत्वपूर्ण संख्या में अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन से पता चला कि नीलगिरी आवश्यक तेल माइक्रोबियल विकास को रोकने में मदद करता है जो शरीर में विभिन्न प्रकार के रोगों को जन्म देते हैं।

नीलगिरी आयल का उपयोग सोना बॉथ के लिए - Eucalyptus oil for sauna in hindi

नीलगिरी के तेल के ताज़गी दायक और एंटीसेप्टिक गुण के कारण बहुत से लोग इसका उपयोग स्नान, स्पा और सोना बॉथ में करते हैं। नीलगिरी का तेल वाष्प के माध्यम से, मालिश के माध्यम से और इसके सेवन के माध्यम से हमें लाभ पहुँचाता है। इसलिए अरोमाथेरापी में स्पा उपचार के लिए इसका उपयोग किया जाता है। नीलगिरी के तेल का उपयोग मौसमी एलर्जी, मुँहासे, एंडोमेट्रियोसिस और हरपीज सिंप्लेक्स वायरस (herpes simplex virus) के इलाज में भी किया जा सकता है।

नीलगिरी के तेल को घर पर ही आसानी से बनाया जा सकता है। इसके लिए हम आपको एक बेहद आसान रेसिपी के बारे में बता रहे हैं जिसे आप ट्राई कर सकते हैं :

क्या चाहिए :

  • नीलगिरी की पत्तियां (सूखी हुई)
  • अपनी पसंद अनुसार नारियल तेल, जैतून का तेल या अंगूर के बीज का तेल कैरियर ऑयल के रूप में (कैरियर ऑयल का इस्तेमाल गंध वाले इसेंशल ऑयल को पतला करने के लिए किया जाता है, ताकि वह आसानी से त्वचा के अंदर पहुंच सके)
  • कांच का एक साफ बर्तन या मरतबान (ध्यान रहे कि इस बर्तन का ढक्कन टाइट से बंद होता हो)
  • एक साफ चम्मच

कैसे बनाएं :

  • सबसे पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से धोकर सुखा लें
  • अब कांच के बर्तन के एक-चौथाई हिस्से को नीलगिरी की सूखी हुई पत्तियों से भर दें
  • अब इसमें हल्का गर्म या कमरे के तापमान वाला अपनी पसंद का कैरियर ऑयल डालें। आपको इतना तेल डालना है कि सारी पत्तियां तेल में डूब जाएं और पत्तियों के 1 इंच ऊपर तक बर्तन में तेल हो
  • अब चम्मच की मदद से नीलगिरी की पत्तियों को तेल में अच्छी तरह से मिक्स करें। इस बात को सुनिश्चित करें कि सारी पत्तियां तेल के लेवल के नीचे ही हों और इस मिश्रण में हवा नहीं लगनी चाहिए
  • अब बर्तन के ढक्कन को टाइट से बंद कर दें और फिर कांच के बर्तन को अच्छी तरह से हिलाएं या हथेलियों के बीच रगड़ें ताकि मिश्रण और अच्छे से मिक्स हो जाए
  • अब इस बर्तन को करीब 5 हफ्तों के लिए घर में किसी ठंडी और अंधेरी जगह पर रख दें। लेकिन बीच-बीच में इसे हिलाते भी रहें ताकि नीलगिरी की पत्तियों से सारा तेल रिलीज हो जाए
  • 5 हफ्ते के बाद इस तेल को मलमल के कपड़े की मदद से छान लें और तेल को किसी गहरे रंग की शीशी या बर्तन में बंद करके रखें (ध्यान रहे कि सारे बर्तन अच्छी तरह से धुले और सूखे हुए हों)
  • नीलगिरी का तेल तैयार है, इसे किसी ऐसी जगह पर रखें जहां रोशनी न आती हो और वह जगह घर के बाकी हिस्सों से ठंडी हो

आप चाहें तो नीलगिरी के तेल में विटामिन ई की कुछ बूंदें डाल सकते हैं। यह प्रिजर्वेटिव की तरह काम करता है और तेल के उपयोग की अवधि (शेल्फ-लाइफ) को भी बेहतर बनाता है। तेल की शीशी पर नजर रखें कि कहीं उसमें किसी तरह का झाग, कीड़े या सूक्ष्म जीव तो नहीं आए गए हैं। अगर तेल किसी वजह से दूषित हो जाता है तो उसे तुरंत फेंक दें।

जिस प्रकार नीलगिरी के तेल के फायदे हैं। उसी प्रकार इसके कुछ नुकसान भी हैं -

  • नीलगिरी के तेल का अधिक सेवन विषैला (toxic) हो सकता है।
  • यह अन्य होम्योपैथिक उपचारों में हस्तक्षेप भी कर सकता है।
  • इसके अलावा, जो लोग एलर्जी के प्रति अतिसंवेदनशील हैं, उन्हें इसके उपयोग से एयरबोर्न कांटेक्ट डर्मेटाइटिस (airborne contact dermatitis) जैसी समस्या हो सकती है जो बहुत खतरनाक भी हो सकती है। ऐसी स्तिथि में अपने चिकित्सक से तुरंत परामर्श करें या एलर्जी का परीक्षण करें।
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