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सम्पूर्ण ब्रह्मांड की प्रत्येक चीज उर्जा द्वारा निर्मित एवं संचालित होती है, जिसमें मानव शरीर भी शामिल है। आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के आने के पहले से हमारी संस्कृति में यह मान्यता रही है कि हर जीव एक शक्ति से संचालित होता है, जो उसके अंदर विद्यमान होती है। मानव शरीर में इस शक्ति को सात चक्र के रूप में व्यक्त किया गया है।

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"चक्र" एक संस्कृत शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ है "पहिया"। मानव शरीर में शक्ति, जिसे "प्राण" कहते हैं, भी शरीर के अंदर पहिये की तरह ही घूमती है। इस शक्ति के 7 केंद्र या 7 चक्र हैं। पहला चक्र रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले भाग में होता है, फिर ऊपर की तरफ चलते हुए सातवां और आखिरी चक्र मस्तिष्क में होता है।

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ये सात चक्र एक स्वस्थ और संतुलित व्यक्ति के शरीर, मस्तिष्क और आत्मा को ऊर्जा देते हैं। हालांकि, अगर आपका कोई भी एक चक्र ठीक से कार्य नहीं करता है, तो इससे आपके स्वास्थ पर असर पड़ सकता है। तो ज़रूरी है कि आपके ये चक्र संतुलित रहें, जिससे आपका स्वास्थ बिगड़े नहीं और आप अपना जीवन आनंदमय जीयें।

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तो आइये आज हम आपको बताते हैं, मानव शरीर में मौजूद 7 चक्रों के बारे में -

  1. मूलाधार चक्र के लाभ - Muladhar chakr ke labh
  2. स्वाधिष्ठान चक्र का महत्व - Svadhishthan chakra ka mahatva
  3. मणिपुर चक्र साधना के फायदे - Manipura chakra sadhna ke fayde
  4. अनाहत चक्र के प्रभाव - Anahata chakra ke prabhav
  5. विशुद्ध चक्र की महत्ता - Vishudh chakr ki mehatta
  6. अजना चक्र के गुण - Ajna chakr ke gun
  7. सहस्रार चक्र की विशेषता - Sahasrara Chakra ki visheshta

मूलाधार दो शब्दों से बना है - "मूला" मतलब जड़ और "धारा" मतलब सहारा। इस चक्र का कार्य है पृथ्वी के साथ आपकी ऊर्जा को जोड़ना, जिसे ग्राउंडिंग (Grounding) कहते हैं। मूलाधार चक्र आपके जीवन के संघर्ष से संबंध रखता है। इस ऊर्जा का कार्य है, आपको वो सब देना जो इस धरती पर आपको जीने के लिए ज़रूरी है। 

कहाँ स्थित होता है मूलाधार चक्र - मूलाधार चक्र गुदा के पास होता है।

मूलाधार चक्र के भावनात्मक महत्व - मूलाधार चक्र से पैसा, भोजन और नींद आदि की समस्याएं खत्म होती हैं और जीवन से आर्थिक कठिनाइयाँ कम होती हैं।

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दूसरा चक्र है स्वाधिष्ठान, जिसका अर्थ है "खुद की जगह"। यह चक्र आपकी पहचान बताता है। इस चक्र का अभ्यास करने से आपके जीवन में एक आनंदमय ऊर्जा आती है। आपका स्वाधिष्ठान चक्र आपको एक रचनात्मक ऊर्जा देता है, जिसकी मदद से आप अपने जीवन को खुशहाल तरीके से जीने लगते हैं। यह चक्र सुखद गतिविधियों के लिए आपको प्रेरित करता है, जैसे सेक्स। 

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कहाँ स्थित होता है स्वाधिष्ठान चक्र - पेट के निचले क्षेत्र में स्थित होता है।

स्वाधिष्ठान चक्र के भावनात्मक महत्व - इस चक्र को जागृत करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है, हमेशा आनंदमय रहता है और उसमें कामेच्छा अधिक होती है।

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तीसरा चक्र है 'मणिपुर चक्र', जिसका अर्थ है "उज्जवल रत्न"। इस चक्र में आपके आत्मविश्वास और पहचान का जन्म होता है। इस चक्र से आपको खुद से निर्णय लेने की समझ और शक्ति मिलती है, खुद की एक पहचान बनाने की हिम्मत मिलती है और हर काम को पूरा करने की ताकत भी।

कहाँ स्थित होता है मणिपुर चक्र - पेट के ऊपरी क्षेत्र में यह चक्र स्थित होता है। 

मणिपुर चक्र के भावनात्मक महत्व - इस चक्र का अभ्यास व्यक्ति को आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और बुद्धिमानी की ओर ले जाता है। 

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चौथा चक्र है अनाहत चक्र, जिसका अर्थ है "प्यार देने वाला"। इस चक्र में आप कुछ न कुछ नया करने की सोचते हैं। इस चक्र में आप प्यार, सम्बन्ध, सहानुभूति आदि में शामिल हो जाते हैं। इस चक्र में प्यार मौजूद होता है, इसलिए इसे स्वास्थ्य और इलाज के साथ जोड़ा जाता है।

कहाँ स्थित होता है अनाहत चक्र - छाती के बीच और ह्रदय से ऊपर यह चक्र होता है। 

अनाहत चक्र के भावनात्मक महत्व - इस चक्र के सक्रीय हो जाने के बाद प्यार, आनंद और अंदर से एक शांति मिलती है। 

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पांचवा चक्र है विशुद्ध चक्र जिसका अर्थ है "बहुत ही शुद्ध।" इस चक्र के सक्रीय हो जाने के बाद आपका व्यवहार बदल जाता है। किसी को भी अपनी बातों और सच्चाई से मनाने की क्षमता इस चक्र में होती है।

कहाँ स्थित होता है विशुद्ध चक्र - यह चक्र गले में स्थित होता है।

विशुद्ध चक्र के भावनात्मक महत्व - इस चक्र से आपके मन की घबराहट दूर होती है और आप लोगों के सामने अपनी बातों को सही तरीके से रख पाते हैं। 

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छठा चक्र है 'अजना चक्र' जिसका अर्थ है "बहुत ही ज़्यादा बुद्धिमानी।" यह चक्र आपका मस्तिष्क खोलता है और आपकी सोच को भी अलग बनाता है। सहज ज्ञान (Intuition) या मानसिक ऊर्जा, अधिक संवेदनात्मक अनुभूति होना, ये सब अजना चक्र से आता है। इस चक्र में आप अपने पांच प्रकार की इन्द्रियों (Five senses) से भी आगे पहुंच जाते हैं।    

कहाँ स्थित होता है अजना चक्र - आंखों के बीच (जिसे ब्रो चक्र भी कहा जाता है) यह चक्र स्थित होता है।  

भावनात्मक महत्व - सहज ज्ञान, कल्पना, बुद्धि और कोई भी निर्णय लेने या सोचने की क्षमता इस चक्र से आपको प्राप्त होती है। 

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सातवां चक्र है सहस्रार चक्र। इस चक्र में आपको एक शुद्ध चेतना की ऊर्जा आती है। सहस्रार चक्र में आप आत्मा से जुड़ पाते हैं। आपको इस चक्र में परमानंद मिलता है, शांति महसूस होती है, अधिक चेतना की पहचान होती है, विशिष्ट ऊर्जा की तरफ आप बढ़ने लगते हैं। 

कहाँ स्थित होता है सहस्रार चक्र - मस्तिष्क के ऊपर यह चक्र स्थित होता है।

सहस्रार चक्र के भावनात्मक महत्व - इस चक्र में आपको अंदर और बाहर से सब चीज़ खूबसूरत लगती है, इसमें हमारा सम्पर्क आत्मा और परम सुख से होने लगता है। 

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