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त्वचा की देखभाल के लिए आप तरह-तरह के सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करती हैं लेकिन क्या कभी आपने कोई ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीदते समय यह सोचा है कि ये नकली हैं या असली?

आपको बता दें कि बाजार में नकली उत्पादों की भरमार है इसलिए जब भी बाजार जाएं और सौंदर्य प्रसाधनों या काॅस्मेटिक्स की खरीदारी करें तो उनके असली या नकली होने की पहचान जरूरी कर लें।

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अगर आप सोच रहे हैं कि प्रोडक्ट्स के असली या नकली होने से क्या फर्क पड़ता है तो आपको बता दें कि इससे आपकी त्वचा को नुकसान हो सकता है। नियमित फेक या नकली काॅस्मेटिक्स के इस्तेमाल की वजह से गंभीर रोग भी हो सकते हैं। आज इस लेख के ज़रिए हम आपको नकली ब्यूटी प्रोडक्ट्स के नकारात्मक प्रभावों के बारे में बताने जा रहे हैं।

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संक्रमण हो सकता है

सौंदर्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली सौंदर्य प्रसाधन बेशक सस्ते होते हों लेकिन इसके नियमित इस्तेमाल से आपको भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नकली सौंदर्य प्रसाधनों से सेहत को हानि पहुंच सकती है।

इससे त्वचा में संक्रमण और एलर्जी होने का खतरा बढ़ सकता है। संक्रमण या एलर्जी होने की वजह से त्वचा में कील-मुंहासे, डर्माटाइटिस और अन्य तरह की समस्याएं भी हो सकती हैं। विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी स्थिति में नकली काॅस्मेटिक्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

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होंठों को नुकसान

फेक काॅस्मेटिक्स इस्तेमाल करने वाले जानते हैं कि इससे न सिर्फ एलर्जी हो सकती है बल्कि कई अन्य समस्याएं भी जन्म ले सकती हैं। मसलन, फेक लिपस्टिक के निरंतर इस्तेमाल की वजह से होंठों में सूजन आ सकती है।

आश्चर्य इस बात का है कि फेक प्रोडक्ट्स की वजह से होंठों पर सूजन और छाले पड़ने की समस्या हो सकती है। अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया जाए तो सूजन और ज्यादा बढ़ सकती है।

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आंखों पर असर

आंखें बेहद संवेदनशील होती हैं। आंखों के आसपास कोई भी नकली प्रसाधन लगाना आपकी आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है और इसकी वजह से आंखों में संक्रमण भी हो सकता है। नकली मस्कारा लगाने से आई इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

अमूमन, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि आंखों के काॅस्मेटिक प्रोडक्ट्स जैसे मस्कारा, लाइनर या काजल किसी से शेयर नहीं करने चाहिए। इससे आपको संक्रमण हो सकता है। सस्ते और नकली प्रोडक्ट की बजाय ब्रांडेड और बेहतर प्रोडक्ट खरीदें।

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मौजूद होते हैं ये हानिकारक तत्व

फेक काॅस्मेटिक्स में इस तरह के तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है जिनका उपयोग या तो वर्जित है या फिर उनके अति उपयोग की वजह से त्वचा को हानि हो सकती है। मसलन मर्करी, सीसा, आर्सेनिक, साइनाइड और यहां तक कि कुछ देशों में इंसान के पेशाब और चूहों के मल तक का इस्तेमाल काॅस्मेटिक्स बनाने में किया जाता है।

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इन प्रोडक्ट्स में इस हद तक विषैले पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है कि त्वचा के संपर्क में आने से स्किन रैशेज, जलन और एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है। इसके साथ ही अन्य समस्याएं जैसे हाई बी.पी और बांझपन भी होने का खतरा बढ़ जाता है।

अधिकतर फेक प्रोडक्ट्स की पहचान करना काफी मुश्किल होता है। हैरानी की बात है कि ऐसे उत्पाद धड़ल्ले से ऑनलाइन बिक रहे हैं।

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