क्रेपी स्किन उम्र बढ़ने की वजह से होती है, जिसमें त्वचा समय के साथ पतली हो जाती है और लूज दिखने लगती है. उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया में त्वचा का पतला होना शामिल है. हालांकि, यह सूरज के डैमेज की वजह से भी हो सकता है. क्रेपी स्किन के इलाज में ओवर द काउंटर दवाइयां, लेजर ट्रीटमेंट, अल्ट्रासाउंड व सर्जरी के साथ घरेलू इलाज भी मददगार है.

आज इस लेख में आप क्रेपी स्किन के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में जानेंगे -

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  1. क्रेपी स्किन के लक्षण
  2. क्रेपी स्किन के कारण
  3. क्रेपी स्किन का इलाज
  4. सारांश
  5. क्रेपी स्किन के लक्षण, कारण व इलाज के डॉक्टर

क्रेपी स्किन काफी हद तक झुर्रियों की तरह ही नजर आती है, जिसमें त्वचा पतली व झुर्रियों से भरी दिखने लगती है, लेकिन यह झुर्रियों वाली त्वचा से अलग होती है, जो शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकती है. इसमें चेहरा, बांह और पैर शामिल हैं. त्वचा से इलास्टिसिटी गायब हो जाने से क्रेपी स्किन नजर आने लगती है. 

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क्रेपी स्किन के कई कारण हैं, जिसमें सन डैमेज, उम्र का बढ़ना, ज्यादा वजन होना और कुछ दवाइयों का सेवन शामिल है. आइए, क्रेपी स्किन के कारण के बारे में विस्तार से जानते हैं -

  1. सूरज की किरणों के कारण क्रेपी स्किन
  2. बढ़ती उम्र के कारण क्रेपी स्किन
  3. ज्यादा वजन के कारण क्रेपी स्किन
  4. दवाइयों के सेवन के कारण क्रेपी स्किन
  5. त्वचा में नमी की कमी के कारण क्रेपी स्किन

सूरज की किरणों के कारण क्रेपी स्किन

क्रेपी स्किन का सबसे मुख्य और आम कारण सूरज से होने वली क्षति है. सूरज की खतरनाक किरणें त्वचा के इलास्टिसिटी को तोड़ देती हैं, जिससे त्वचा ढीली और पतली नजर आने लगती है. 40 की उम्र पार कर जाने के बाद अमूमन क्रेपी स्किन के लक्षण नजर आने लगते हैं.

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बढ़ती उम्र के कारण क्रेपी स्किन

उम्र बढ़ने के साथ त्वचा इलास्टिसिटी और कोलेजन को खोने लगती है, जिससे त्वचा पतली हो जाती है और क्रेपी दिखने लगती है. इसके साथ ही शरीर फाइबर का भी कम निर्माण करने लगता है, जो त्वचा को मुलायम रखने में मदद करता है. उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में कम तेल का निर्माण भी होने लगता है. ये तेल त्वचा की सुरक्षा करने के साथ त्वचा को नम रखने में भी मदद करता है.

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ज्यादा वजन के कारण क्रेपी स्किन

यदि किसी व्यक्ति का वजन ज्यादा हो जाता है, तो उसकी त्वचा खींच जाती है और पहले से पतली हो जाती है. यदि वजन तेजी से बढ़ने के साथ तेजी से कम भी होता है, तो क्रेपी स्किन होने की आशंका ज्यादा रहती है.

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दवाइयों के सेवन के कारण क्रेपी स्किन

प्रेडनिसोन जैसी कुछ दवाइयां त्वचा को प्रभावित करती हैं. इसकी वजह से त्वचा की लोच खाने लगती है और त्वचा में ढीलापन नजर आने लगता है.

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त्वचा में नमी की कमी के कारण क्रेपी स्किन

जब त्वचा को सही तरह से हाइड्रेशन नहीं मिलता है, तो इससे त्वचा को नुकसान पहुंचता है और नतीजतन क्रेपी स्किन नजर आने लगती है. भरपूर हाइड्रेशन से त्वचा मुलायम नजर आती है व कसाव भी बना रहता है. 

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क्रेपी स्किन के लिए कई तरह के इलाज की सलाह दी जाती है, जिससे त्वचा की सेहत में सुधार आता है. क्रेपी स्किन का इलाज जितनी जल्दी कर लिया जाए, उतनी जल्दी इसके टेक्सचर और अपीयरेंस को बदला जा सकता है. टॉपिकल रेटिनोइड, अल्ट्रासाउंड, ओवर द काउन्टर दवाइयां की मदद से क्रेपी स्किन का इलाज किया जा सकता है. आइए, क्रेपी स्किन के इलाज के बारे में विस्तार से जानते हैं -

  1. टॉपिकल रेटिनोइड
  2. फ्रैक्शनल लेजर ट्रीटमेंट
  3. अल्ट्रासाउंड
  4. क्रायोलिपोलिसिस
  5. फिलर्स
  6. ओवर द काउंटर दवाइयां

टॉपिकल रेटिनोइड

यह क्रीम और जेल दोनों तरह से उपलब्ध है. रेटिनोइड एक्सफोलिएशन को बढ़ावा देकर सेल टर्नओवर में भी तेजी लाता है, लेकिन अगर इन प्रोडक्ट्स का सही तरह से इस्तेमाल नहीं किया गया, तो इससे क्रेपी स्किन की स्थिति और खराब हो सकती है.

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फ्रैक्शनल लेजर ट्रीटमेंट

इस इलाज में त्वचा के अंदर के छोटे हिस्सों को गरम करने के लिए लेजर का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे नए कोलेजन के विकास को बढ़ावा मिलता है. इससे त्वचा को मदद मिलती है और झुर्रियां स्मूद होती हैं. आंखों के इर्द-गिर्द की क्रेपी स्किन का भी इलाज लेजर ट्रीटमेंट से किया जा सकता है.

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अल्ट्रासाउंड

यह फ्रैक्शनल लेजर ट्रीटमेंट की तरह ही है, जिसे असल में त्वचा में कसाव लाने के लिए किया जाता है. इसमें अल्ट्रासाउंड की मदद से त्वचा के भीतर के सपोर्टिंग टिश्यू को गरम किया जाता है. इस गर्मी से कुछ कोशिकाएं टूटती हैं और त्वचा में कसाव लाने के लिए कोलेजन के विकास को बढ़ावा मिलता है. इस इलाज का इस्तेमाल मुख्यतः चेहरे और गर्दन पर किया जाता है, न की बांह के ऊपरी हिस्से पर.

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क्रायोलिपोलिसिस

इसे कूल स्कल्प्टिंग भी कहा जाता है, जिसमें फैट के लोकल एरिया को हटाया जाता है. इस इलाज में फैट सेल्स में लाइपिड को फ्रीज किया जाता है. क्रायोलिपोलिसिस तब किया जाता है, जब अतिरिक्त फैट पर ढीली त्वचा रहती है. यह इलाज सतह के भीतर के फैट को हटाकर त्वचा में कसाव लाने का काम करता है.

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फिलर्स

बायोस्टिमुलेट्री फिलिंग एजेंट (biostimulatory filling agent) त्वचा के अपीयरेंस, टेक्सचर और मोटाई में सुधार ला सकते हैं. कोलेजन के विकास को स्टिमुलेट करने के लिए इन एजेंट को सीधे त्वचा में इंजेक्ट किया जाता है.

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ओवर द काउंटर दवाइयां

रेटिनोइड, अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड या पेप्टाइड जैसे इंग्रेडियंस वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करके त्वचा के सन डैमेज को ठीक किया जा सकता है. ये प्रोडक्ट्स कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा देते हैं और डेड या खराब कोशिकाओं को हटा देते हैं. लैक्टिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड (salicylic acid), ग्लाइकोलिक एसिड (glycolic acid) और हायलूरॉनिक एसिड (hyaluronic acid) त्वचा में नमी रखने और त्वचा के अपीयरेंस में भी सहायक हैं. यदि बांह या पैरों पर क्रेपी स्किन है, तो इसके लिए ऐसे मॉइस्चराइजर मददगार होते हैं, जिनमें लैक-हाइड्रिन (lac hydrin)  या अमलैक्टिन (amlactin) जैसे अमोनियम लैक्टेट पाए जाते हैं.

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जब त्वचा पर झुर्रियों जैसा प्रभाव नजर आने लगे, तो इसे क्रेपी स्किन कहा जाता है, लेकिन यह समस्या झुर्रियों से अलग होती है. इसमें त्वचा पतली हो जाती है. क्रेपी स्किन का मुख्य और आम कारण सूरज की रोशनी से होने वाला डैमेज है और साथ ही बढ़ती उम्र भी. क्रेपी स्किन के इलाज के लिए टॉपिकल रेटिनोइड, फ्रैक्शनल लेजर ट्रीटमेंट और फिलर्स मदद करते हैं. क्रेपी स्किन से बचने के लिए जरूरी है कि त्वचा का खास ध्यान रखा जाए. 

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Dr. Ashish Mishra.

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