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हमारी आंख के सफेद भाग के ऊपर एक पारदर्शी झिल्ली मौजूद होती है जो कोशिकाओं से बनी होती है। इस झिल्ली के इन्फेक्शन या सूजन को कंजंक्टिवाइटिस (Conjunctivitis) या आंख आना कहा जाता है। इसके कारण आंख में मौजूद छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएं सूज जाती हैं और अधिक दिखने लगती हैं।

कंजंक्टिवाइटिस के कारण आंख में सूजन, लाली और असहजता जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसके कारण आंख से रिसाव भी हो सकता है।

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आंख आने पर आपकी आंख का सफेद भाग लाल या गुलाबी रंग का दिखने लगता है। ये आमतौर पर कुछ समय में अपने आप ठीक हो जाता है और इससे कुछ दुर्लभ मामलों में ही कोई गंभीर समस्या होती है।

आंख आने की समस्या अधिकतर बैक्टीरियल संक्रमण, वायरल संक्रमण या एलर्जी के कारण होती है। ये समस्या बहुत अधिक संक्रामक होती है, इसीलिए इसके लिए जल्दी कुछ करना महवपूर्ण होता है।

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इस लेख में आंख आने पर क्या होता है, क्या आंख आना एक गंभीर समस्या है, आंख आने पर क्या करें और इसके लिए डॉक्टर के पास कब जाएं के बारे में बताया गया है।

  1. आंख आने पर क्या होता है - Ankh aane ka pata kaise chalta hai
  2. क्या आंख आना एक गंभीर समस्या है - Kya ankh aana gambhir hota hai
  3. आंख आने पर क्या करना चाहिए - Ankh aane par kya kare
  4. आंख आने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए - Ankh aane par doctor ke pas kab jaye

आंख आने से होने वाली समस्याएं उसके प्रकार पर निर्भर करती हैं। इसके कुछ आम लक्षण निम्नलिखित हैं -

आंख आने पर पहले एक ही आंख प्रभावित होती है और फिर कुछ घंटों में दोनो आंखों में समस्या होने लगती है।

हालांकि, आंख आना एक परेशान करने वाली स्थिति होती है, लेकिन बहुत ही कम मामलों में इससे कोई गंभीर समस्या होने की सम्भावना होती है।

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बच्चों को ये समस्या अधिक होती है क्योंकि ये अत्यधिक संक्रामक होती है और बच्चे स्कूल या अन्य जगहों पर इससे प्रभावित हो सकते हैं। बहुत ही कम मामलों में आंख आने से नजर पर प्रभाव पड़ता है और अगर इसके लिए जल्द कुछ किया जाए तो ये फैलती भी नहीं है।

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अगर सही तरीके से इसका ध्यान रखा जाए, तो आंख आने से होने वाली समस्याएं कुछ दिनों में ठीक हो जाती हैं।

आंख आने पर कुछ प्राथमिक चिकित्सा करने से इससे होने वाली समस्याओं में आराम मिल सकता है और आंख जल्दी ठीक होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इसके लिए निम्निलिखित उपाय किए जा सकते हैं -

  • एक साफ कपड़े को पानी में भिगोकर निचोड़ लें। अब इस कपड़े से दिन में कुछ बार प्रभावित आंख की सिकाई करें। इसके लिए आप गर्म या ठन्डे किसी भी पानी प्रयोग कर सकते हैं, क्योंकि दोनों ही तरह से आपको समस्या से आराम मिलेगा।
  • सोने से पहले नहाने से समस्या में आराम मिलता है। (और पढ़ें - नहाने का सही तरीका)
  • आंख से होने वाले रिसाव के लिए गर्म पानी में भिगोए हुए कपडे से अपनी आंख को आराम से साफ करें। दोनों आंखों के लिए अलग-अलग साफ कपड़ों का इस्तेमाल करें।
  • आंख की चिपचिपाहट दूर करने के लिए मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली “आर्टिफिशियल टीयर्स” (Artificial tears) ड्रॉप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • अपना निजी सामान, जैसे कपड़े और अन्य वस्तुएं जल्दी-जल्दी धोएं ताकि ये समस्या फैले नहीं।
  • कंजंक्टिवाइटिस को फैलने से रोकने के लिए अपने हाथों को बार-बार गर्म पानी और साबुन से धोएं।
  • आंख आने पर कांटेक्ट लेंस का प्रयोग बिलकुल न करें और आंख ठीक हो जाने पर लेंस, लेंस रखने वाली डिब्बी और उसका सॉलूशन बदल लें। (और पढ़ें - कांटेक्ट लेंस के नुक्सान)
  • हर दिन विटामिन ए से समृद्ध भोजन करें और एक संतुलित आहार लें ताकि आपकी आंखों का स्वास्थ्य सही रहे।

अधिकतर मामलों में आंख आना कोई गंभीर समस्या नहीं होती है, लेकिन निम्नलिखित समस्याएं अनुभव करने पर तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाएं -

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नोट: प्राथमिक चिकित्सा या फर्स्ट ऐड देने से पहले आपको इसकी ट्रेनिंग लेनी चाहिए। अगर आपको या आपके आस-पास किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर या अस्पताल​ से तुरंत संपर्क करें। यह लेख केवल जानकारी के लिए है।

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