आजकल अधिकतर लोग कब्ज और थायराइड से परेशान हैं. कब्ज बनने पर व्यक्ति को मल त्याग करने में मुश्किल होती है. इस स्थिति में पाचन क्रिया सही से काम नहीं कर रही होती है. वहीं, हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड ग्रंथि हार्मोन का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन नहीं कर पाती है. इस स्थिति में मेटाबॉलिज्म धीमा काम करना शुरू कर देता है. इसका असर पाचन पर भी पड़ता है. यही वजह है कि कई लोग हाइपोथायरायडिज्म होने पर कब्ज की शिकायत भी करते हैं.

आज इस लेख में आप जानेंगे कि कब्ज को हाइपोथायरायडिज्म का लक्षण माना जा सकता है नहीं -

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  1. कब्ज क्या है?
  2. हाइपोथायरायडिज्म क्या है?
  3. हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण
  4. क्या कब्ज को हाइपोथायरायडिज्म का लक्षण माना जा सकता है?
  5. हाइपोथायरायडिज्म में कब्ज बनने के कारण
  6. हाइपोथायरायडिज्म में कब्ज को कैसे ठीक करें?
  7. सारांश
क्या कब्ज हाइपोथायरायडिज्म का लक्षण है? के डॉक्टर

कब्ज पाचन से जुड़ी समस्या है. कब्ज बनने पर व्यक्ति को मल त्याग करने में काफी कठिनाई होती है. इस स्थिति में गांठदार और कठोर मल निकल सकता है. साथ ही मल त्याग के दौरान जोर लगाना पड़ सकता है. अगर किसी को सप्ताह में 3 दिन से कम बार मल त्याग होता है, तो यह स्थिति कब्ज की होती है.

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हाइपोथायरायडिज्म को अंडरएक्टिव थायराइड के रूप में भी जाना जाता है. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें थायराइड ग्रंथि शरीर में हार्मोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाती है. ऐसे में मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ने लगता है. शुरुआत में हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों का अनुभव नहीं होता है, लेकिन जैसे-जैसे हाइपोथायरायडिज्म का स्तर बढ़ता जाता है, इसके लक्षण महसूस होने लगते हैं.

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हाइपोथायरायडिज्म की गंभीरता के आधार पर लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. हाइपोथायरायडिज्म होने पर थकानकमजोरी, वजन बढ़ना और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षणों से परेशान होना पड़ सकता है. इसके अलावा, ठंड लगनाड्राई स्किनचेहरे पर सूजनमांसपेशियों में दर्दबालों का झड़ना व तनाव जैसी परेशानियां भी हाइपोथायरायडिज्म में हो सकती हैं. हाइपोथायरायडिज्म में मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, ऐसे में कुछ लोगों को कब्ज से भी परेशान होना पड़ सकता है.

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हाइपोथायरायडिज्म या अंडरएक्टिव थायराइड वाले लोगों में कब्ज बनना सामान्य होता है. दरअसल, हाइपोथायरायडिज्म में मेटाबॉलिज्म और पाचन क्रिया धीमी हो जाती है. इसकी वजह से कुछ लोगों को हाइपोथायरायडिज्म होने पर लंबे समय तक कब्ज भी बनी रह सकती है. आपको बता दें कि कब्ज हाइपोथायरायडिज्म का एक सामान्य लक्षण होता है.

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हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड ग्रंथि हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती है. जब शरीर में पर्याप्त हार्मोन का उत्पादन नहीं हो पाता है, तो शरीर के कई कार्य धीमे हो जाते हैं, जिस कारण कब्ज हो सकती है -

  • आपको बता दें कि हाइपोथायरायडिज्म में आंतों की गति कम हो जाती है, जिसकी वजह से कब्ज बनने लगती है. आंतों की गति का धीमा होना हाइपोथायरायडिज्म में कब्ज का मुख्य कारण हो सकता है.
  • इसके अलावा, हाइपोथायरायडिज्म में मांसपेशियां बार-बार सिकुड़ती नहीं है. इससे मल कोलन के माध्यम से धीरे-धीरे चलता है और मलाशय तक पहुंचने में समय लग जाता है. इससे कब्ज बन सकती है.

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सबसे पहले तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हाइपोथायरायडिज्म का उचित इलाज करवाया जा रहा है नहीं. अगर डॉक्टर की ओर से बताई गई दवाओं को न लिया जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है और कब्ज की समस्या भी बढ़ सकती है. इसके अलावा, निम्न बातों पर भी ध्यान देने की जरूरत है -

  • डाइट में फाइबर की मात्रा को बढ़ाने की जरूरत है. इसके लिए फलहरी पत्तेदार सब्जियों व बींस आदि का सेवन करना चाहिए.
  • रोज कम से कम 7-8 गिलास पानी जरूर पिएं. इसके अलावा, अन्य तरल पदार्थ, जैसे - दूध व सूप आदि भी पिएं.
  • नियमित रूप से योग व एक्सरसाइज करने भी कब्ज की समस्या को खत्म किया जा सकता है.
  • अगर क्रोनिक कब्ज की समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह पर लैक्सेटिव दवा का सेवन करना चाहिए.

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पाचन तंत्र को ठीक करने के लिए आप नियमित रूप से Myupuchar Ayurveda Yakritas का सेवन कर सकते हैं -

हाइपोथायरायडिज्म वह स्थिति होती है, जिसमें शरीर में थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम मात्रा में होता है. इस स्थिति में शरीर में कई दिक्कतें होनी शुरू हो जाती हैं. इसमें कब्ज भी शामिल है. जी हां, हाइपोथायरायडिज्म होने पर व्यक्ति को कब्ज बन सकती है. अगर किसी को लगातार कब्ज बनती है, तो उसे अपने थायराइड स्तर की जांच जरूर करवानी चाहिए.

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Dr. Swapnil Saurabh Deka

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