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मस्सा (Wart):

मस्सा त्वचा में वृद्धि या उभार होता है, यह ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होता है। यह त्वचा की उपरी परत को प्रभावित करता है और आम तौर पर त्वचा के फटे या टूटे हुए भागों से प्रवेश होकर निकलता है। मस्सा शरीर में कहीं भी हो सकता है।

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मस्सा का आकार व दिखावट, उसके प्रकार और वह शरीर के किस हिस्से पर है, इस बात पर निर्भर करता है। एचपीवी वायरस कैरेटीन की एक अतिरिक्त मात्रा के कारण बनता है, यह वायरस त्वचा की बाहरी परत की कोशिकाओं को तेजी से वृद्धि करने के लिए उत्तेजित करता है। मस्सा अक्सर उंगली या उसके निशानों के पास या हाथ के उपर बनता है।

मस्सा को मेडिकल रूप में कई प्रकार से संदर्भित किया जाता है। जैसे सामान्य मस्सा, समतल मस्सा, तल का मस्सा, नाखून संबंधी मस्सा (Periungual), फिलीफोर्म मस्सा, जननांग मस्सा और मौजेएक मस्सा आदि। ज्यादातर मस्से त्वचा की मोटाई के हिसाब से परिभाषित किए जाते हैं।

आमतौर पर मस्से खुद ही ख़त्म हो जाते हैं, मगर इनमें कई साल भी लग सकते हैं।

बिना मेडिकल उपचार के ज्यादातर मस्से ख़त्म होने में 1 से 5 साल तक का समय ले लेते हैं। उपचार उन्हीं मस्सों के लिए उपलब्ध है जो संख्या में ज्यादा या बड़े  हैं या फिर जो शरीर के संवेदनशील भागों में हैं।

अलग-अलग प्रकार के उपचार के लिए मस्से अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं। मस्सों के लिए बिना पर्ची (ऑवर द काउंटर) के उपचार में सेलिसीलिक एसिड उपक्रम (Salicylic acid preparations) और फ्रीजिंग किट आदि शामिल है।

उपरोक्त उपचार के बाद भी मस्सा फिर से विकसित हो सकता है।

  1. मस्सा के प्रकार - Types of Warts in Hindi
  2. मस्सा के लक्षण - Warts Symptoms in Hindi
  3. मस्से का कारण - Warts Causes in Hindi
  4. मस्सा से बचाव - Prevention of Warts in Hindi
  5. मस्से का परीक्षण - Diagnosis of Warts in Hindi
  6. मस्सा का इलाज - Warts Treatment in Hindi
  7. मस्से का जोखिम और जटिलताएं - Warts Risks & Complications in Hindi
  8. मस्सा में परहेज़ - What to avoid during Warts in Hindi?
  9. मस्सा पीड़ित को क्या खाना चाहिए? - What to eat during Warts in Hindi?
  10. मस्से हटाने के घरेलू उपाय
  11. मस्से की होम्योपैथिक दवा और इलाज
  12. मस्सा की दवा - Medicines for Warts in Hindi

मस्सा के प्रकार - Types of Warts in Hindi

मस्सा के प्रकार (Types of Wart):-

मस्सा के कुछ सबसे सामान्य प्रकार में निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. सामान्य मस्सा (Verruca vulgaris) – आम रूप से इस मस्से की परत कठोर, रूखी और उपर उठी हुई हो सकती है। यह उपर से गोभी के फूल की तरह दिखती है।
  2. तल का मस्सा (Plantar warts) – शरीर का वजन पैर के तलवे पर ही रहता है, इसलिए यह मस्सा आमतौर पर त्वचा के अंदर ही पनपता है। यह मस्सा काफी कठोर होता है, इसमें कठोर और सफेद रंग के ऊतकों के बीच में एक काले रंग का डॉट होता है। अक्सर तल के मस्से को साफ करना काफी कठिन हो जाता है।
  3. फिलीफोर्म मस्सा (Filiform warts) – यह मस्सा आकार में काफी पतला होता है, लेकिन सतह से काफी उंचाई तक बढ़ सकता है।
  4. मौजेएक मस्सा (Mosaic warts) – तलवे में मस्से के एक बड़े समूह को मौजेएक मस्सा कहा जाता है। मोल्स के विपरित, मौजेएक मस्सा का रंग अक्सर व्यक्ति की त्वचा के रंग जैसा ही होता है। अगर मौजेएक मस्सा संक्रमित ना हो तो उसमें कभी मवाद या पस नहीं बनता।

एचपीवी के कुछ उपभेद भी हैं जिसके कारण व्यक्ति के गुप्तांग के आस-पास मस्सा निकलता है। महिलाओं में इन मस्सों को गुप्तांग मस्सा (Genital warts) कहा जाता है। बाद में यह सर्वाइकल कैंसर (Cervical cancer) के रूप में एक घातक बीमारी का रूप धारण कर सकता है।

(और पढ़ें - तिल का इलाज)

मस्सा के लक्षण - Warts Symptoms in Hindi

मस्सा के संकेत और लक्षण -

  1. हाथों की उंगलियां, पैर की उंगलियां और घुटनों के पीछे गुंबद आकार का उभार दिखना मस्से का लक्षण है, अक्सर मस्से की परत पर एक छोटा और काले रंग का डॉट दिखाई पड़ता है। यह काले रंग का डॉट कई समूहीकृत मृत केशिकाओं को दर्शाता है। 
  2. प्लांटर मस्से सिर्फ पैर के तलवे में ही पनपते हैं। किसी अन्य जगह पर इनको अंकित नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके ही जैसा दिखने वाला मस्सा हथेली पर (Palm warts) भी हो सकता है। पैर के तलवे में अगर छोटे मस्से समूह के रूप में दिखने लगें तो उसके मौएजेक मस्सा कहा जाता है।
  3. समतल मस्सा चेहरा, टांगे और शरीर के अन्य भागों पर बन सकता है, अक्सर से ज्यादा संख्या में भी हो जाते हैं।
  4. पेरिअंगल मस्सा (Periungual warts) – यह मस्सा नाखून के आस-पास या नाखून के भीतर बनता है।
  5. फिलीफोर्म मस्सा (Filiform warts) – यह अक्सर काफी लंबा और एक पतले डंठल की तरह होता है और अक्सर चेहरे पर बनता है।
  6. ज्यादातर मस्सों की परत रूखी होती है और साथ ही उनमें कुछ काले छोटे स्पॉट्स होते हैं जो छोटी केशिकाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  7. ट्रॉमाटाइज्ड मस्सों से कभी-कभी खून निकल ही आता है इसलिए उनको खून के मस्से (Blood warts) भी कहा जाता है।

(और पढ़ें - तिल हटाने के घरेलू उपाय)

मस्से का कारण - Warts Causes in Hindi

मस्से क्यों होते हैं​?

सामान्य मस्से एचपीवी (Human Papilloma Virus) से बनते हैं। 100 से भी अधिक प्रकार के एचपीवी होते हैं, लेकिन इनमें कुछ ही के कारण हाथों पर मस्से बनते हैं। वहीं अन्य प्रकार के एचपीवी पैरों, अन्य त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली (Mucous Membranes) आदि में मस्सा बनने की संभावना को बढ़ाते हैं। एचपीवी के ज्यादातर प्रकार अपेक्षाकृत हानिरहित स्थिति उत्पन्न करते हैं, जैसे कि सामान्य मस्सा जबकि अन्य एचपीवी सर्वाइकल कैंसर जैसे गंभीर रोगों का कारण बन सकते हैं।

(और पढ़ें - चर्म रोग का कारण)

जिस व्यक्ति को मस्सा है, उस व्यक्ति के प्रभावित जगह को छूने से भी मस्सा बन सकता है। अगर आपको मस्सा है तो आप उसके वायरस को खुद अपने शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैला सकते हैं। किसी व्यक्ति के मस्से द्वारा स्पर्श में आई वस्तु को स्वस्थ व्यक्ति द्वारा छूने से भी मस्सा बन सकता है जैसे संबंधित व्यक्ति के तौलिया आदि छूने से। आमतौर पर मस्से से संबंधित वायरस त्वचा के फटे हुऐ हिस्से के अंदर से शरीर में प्रवेश करता है, जैसे किसी खरोंच या नाखून की जड़ के अंदर से शरीर में पहुंचना। नाखूनों को दांत से काटने से भी वायरस फैल सकता है, जो नाखून और उपरी उंगलियों के आस-पास मस्से का कारण बन सकता है।

प्रत्येक व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली एचपीवी को अलग-अलग प्रतिक्रिया देती है, इसलिए एचपीवी के संपर्क में आने से हर किसी को मस्सा निकले यह जरूरी भी नहीं है।

मस्सा से बचाव - Prevention of Warts in Hindi

मस्से की रोकथाम के उपाय:

ऐसे कुछ उपाय हैं, जिनकी मदद से मस्से की रोकथाम की जा सकती है। अगर आपको पहले ही एक मस्सा हो गया है तो आप यह उपाय करके आप उसे शरीर के अन्य भागों में इसे फैलने से रोक सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित सरल दिशा निर्देशों का पालन करें:

  1. अपने हाथों को नियमित रूप से धोते रहें, खासतौर पर जब आप किसी मस्से से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों।
  2. मस्से को खुद से हटाने या निकालने की कोशिश ना करें।
  3. मस्से को पट्टी (बैंडेज) से ढक कर रखें।
  4. अपने हाथ और पैरों को सूखा रखें।
  5. सार्वजनिक बाथरूम में जाने से पहले चप्पलों या शॉवर शूज़ का प्रयोग करें।

(और पढ़ें - मस्से हटाने के घरेलू उपाय)

 

मस्से का परीक्षण - Diagnosis of Warts in Hindi

मस्से का निदान:

किसी मस्से का निदान उसकी होने की जगह और दिखावट पर निर्भर करता है। अगर त्वचा की समस्या के बारे में ठीक से पुष्टि नहीं हो पा रही है तो डॉक्टर निम्न प्रकार के टेस्टों में से किसी एक को चुन सकते हैं:

  1. पंच बायोप्सी (Punch Biopsy) – यह संदिग्ध मस्से का नमूना प्राप्त करने का एक प्रमुख तरीका होता है। इस दौरान डॉक्टर मस्से के चारों तरफ का हिस्सा सुन्न कर देते हैं और एक कोरिंग (छोटा टुकड़ा) के रूप में मस्से का नमूना निकाल लेते हैं। जो आंकलन डॉक्टर के पास संभव नहीं हो पाता उसकी पुष्टि के लिए  निकाले गए संदिग्ध मस्से के नमूने को लेबोरेट्री में जाँच हेतु भेज दिया जाता है।

मस्सा का इलाज - Warts Treatment in Hindi

मस्से का उपचार:

ज्यादातर सामान्य मस्से बिना उपचार के अपने आप ख़त्म जाते हैं, हालांकि इसमें एक या दो साल लग सकते हैं और इस दौरान इनके आस पास नए मस्से भी विकसित हो सकते हैं।

क्योंकि मस्से का कोई घरेलू उपचार नहीं होता और मस्से से बेचैनी तथा इसके फैलने का डर भी रहता है, इसलिए कुछ लोग अपने मस्से का इलाज डॉक्टर से ही करवाना पसंद करते हैं।

मस्से का स्थान, व्यक्ति के लक्षण और उसकी प्राथमिकता के आधार पर डॉक्टर निम्नलिखित तरीकों में से किसी एक का सुझाव दे सकते हैं। इन तरीकों का प्रयोग कभी-कभी घरेलू उपचार के साथ-साथ भी किया जाता है, जैसे कि सेलिसिलिक एसिड का प्रयोग।

उपचार का लक्ष्य मस्से को नष्ट करना या प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस से लड़के के लिए उत्तेजित करना होता है या फिर दोनो। इसके इलाज में हफ्ते या महीने का समय भी ले सकता है, यहां तक की उपचार के साथ भी मस्सा फिर से पुनरावृत्त होकर फैल सकता है। डॉक्टर आम तौर पर कम दर्द वाले उपचार शुरू करते हैं, खासकर जब छोटे बच्चों का इलाज करना होता है।

  1. छिलने वाली तीव्र दवा (Stronger peeling medicine /Salicylic acid) – सेलिसिलिक एसिड के साथ प्रिस्क्रिप्शन-स्ट्रेंथ दवाएं बहुत ही कम समय में मस्से की परत को हटाने का काम करती हैं। अध्ययन से पता चला की सेलिसिलिक एसिड को फ्रीजिंग के साथ प्रयोग करने से यह और अधिक प्रभावी हो जाता है।
  2. फ्रीजिंग (क्रियोथेरेपी) – फ्रीजिंग थेरेपी को अस्पताल में किया जाता है, जिसमें तरल नाइट्रोजन को मस्से के ऊपर लगाया जाता है। फ्रीजिंग की मदद से मस्से के आस-पास और नीचे छाला बनाया जाता है, जिसके बाद मृत ऊतक एक हफ्ते के अंदर गल या सूख जाते हैं। यह तरीका आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए उत्तेजित करता है। कई बार व्यक्ति को फिर से उपचार करवाने की जरूरत भी पड़ सकती है।
  3. सेलिसेलिक एसिड – मेडिकल स्टोर पर बिना डॉक्टर की पर्ची के मिलने वाली क्रीम, जैल, पेंट्स, और बैंडस में सेलिसिलिक एसिड होता है। सेलिसिलिक एसिड को मस्से पर लगाते समय आस-पास की त्वचा को बचाना जरूरी होता है क्योंकि सेलिसिलिक एसिड स्वस्थ त्वचा को भी नष्ट कर देता है। आसपास की त्वचा पर पेट्रोलियम जैली या कोर्न प्लास्टर लगाकर उसको सेलिसिलिक एसिड से नष्ट होने से बचाया जा सकता है। सेलिसिलिक एसिड को चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए।
  4. अन्य एसिड – अगर सेलिसिलिक एसिड और फ्रीजिंग काम न करें तो डॉक्टर बाइ-क्लोरोएसिटिक या ट्राईक्लोरोएसिटिक एसिड का प्रयोग भी कर सकते हैं। इस तरीके में डॉक्टर सबसे पहले मस्से वाले स्थान से अच्छी तरह बाल साफ करते हैं, और उसके बाद लकड़ी की टूथपिक के सहारे मस्से पर एसिड लगाते हैं। इसमें हर हफ्ते दोबारा उपचार की जरूरत होती है, इसके दुष्प्रभाव मुख्य रूप से मस्से की जगह का जलना और दर्द होना होता है।
  5. लेजर उपचार – पल्सड डाई लेजर छोटी रक्त वाहिकाओं को जला देता है और अंत में संक्रमित ऊतक नष्ट हो जाते हैं।  जिसकी वजह से पुनः मस्सा होना बंद हो जाता है।

अन्य उपचार:

अगर मस्से के लिए साधारण उपचार काम ना करे तो त्वचा विशेषज्ञ अन्य विकल्प का सुझाव दे सकते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल है:

  1. इम्यूनोथेरेपी के माध्यम से मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा मस्सों को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है।(और पढ़ें -  रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के घरेलू उपाय)
  2. ब्लियोमाइसिन (Bleomycin) या ब्लेनोक्सेन (Blenoxane) को इंजेक्शन की माध्यम से मस्से के अंदर छोड़कर संबंधित वायरस को नष्ट किया जाता है। इसके अलावा ब्लियोमाइसिन को कुछ प्रकार के कैंसर का इलाज करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।
  3. रेटिनोइड्स, जो कि विटामिन-ए से निकाला जाता है, यह मस्से की त्वचा की वृंद्धि को बंद कर देती है। इसका भी प्रयोग मस्से के इलाज में किया जाता है।
  4. मस्से के संक्रमण के मामले में एंटीबायोटिक्स का प्रयोग भी काफी प्रभावी हो सकता है।

(और पढ़ें - फुट कॉर्न का इलाज)

विदित हो कि खासतौर पर हाथों के नाखून और पैरों के नाखून के आस-पास होने वाले साधारण मस्सों को पूरी तरह या स्थायी रूप से नष्ट करना मुश्किल हो जाता है। काफी लोग जो मस्सा के मामले में अतिसंवेदनशील होते हैं, उनके इलाज के बाद पुनः उनके शरीर में मस्से विकसित होने की संभावना ज्यादा रहती है। 

मस्से का जोखिम और जटिलताएं - Warts Risks & Complications in Hindi

मस्से के जोखिम के कारक:

जिन लोगों की त्वचा में मस्सा विकसित होने के अत्यधिक जोखिम होते हैं, उनमें शामिल हैं,

  1. छोटे बच्चे और किशोरावस्था के दौरान के लोग।
  2. जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो, जैसे कि जो लोग HIV/AIDS से ग्रसित हैं। (और पढ़ें - एचआईवी का इलाज)
  3. जिन लोगों के अंदरूनी अंग प्रत्यारोपण किए गए हैं। जैसे कि जिन लोगों का लीवर प्रत्यारोपण किया गया हो। (और पढ़ें - लिवर की प्रत्यारोपण सर्जरी)

 

मस्सा में परहेज़ - What to avoid during Warts in Hindi?

जिन लोगों को मस्सा की समस्या है, उन लोगों को निम्न बातों से बचना चाहिए:

  1. खुद इलाज करके घाव बनाने से बचें – आजकल ज्यादातर लोगों के पास इतना टाइम नहीं होता कि वे किसी डॉक्टर के पास जाकर अपने मस्से की चेकअप करवा सकें, इसलिए उनको खुद उपचार करने का तरीका आसान लगता है। लेकिन अगर आप किसी अच्छी तरह से वाकिफ व्यक्ति से सही दवाई ना लें, तो मस्सा ठीक होने की जगह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। (और पढ़ें - घाव ठीक करने के घरेलू उपाय)
  2. नम स्थितियों से बचें – नमी की स्थिति मस्से के वायरस को सक्रिय रहने और मस्से विकसित होने की माहौल देती है, अत: किसी भी कीमत पर नमी की स्थिति से बचना चाहिए।
  3. खुद धारणाएं ना बनाएं – अक्सर मस्सा, कैलस और कॉन्स में से एक को निर्धारित करने में उलझन रहती है। ये तीनों एक दूसरे के आंशिक रूप से लगते हैं, क्योंकि ये तीनों काफी हद तक एक दूसरे जैसे लगते हैं।
  4. यह सुनिश्चित कर लें कि आप रेजर, जुराबें, तौलिया और जूते जैसी निजी चीजों को किसी के साथ साझा नहीं कर रहे और ना किसी अन्य व्यक्ति की निजी चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
  5. सार्वजनिक स्थानों पर नंगे पांव ना जाएं, जैसे की पब्लिक बाथरूम।

मस्सा पीड़ित को क्या खाना चाहिए? - What to eat during Warts in Hindi?

मस्से से पीड़ित व्यक्तियों हेतु अनुकूल खाद्य पदार्थ में निम्नलिखित चीजें शामिल हैं:

सब्जियां – सब्जियो में विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को एचपीवी जैसे वायरसों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। गहरे हरे पत्तों वाली और समुद्री सब्जियों में विटामिन-बी और कैल्सियम उच्च मात्रा में होता है। उदाहरण के लिए पालक और हरी गोभी (जैसे पत्ता गोभी व अन्य)

फलफल भी प्रतिरक्षा प्रणाली की क्षमता को बढ़ाते हैं और मस्से जैसी परेशानियों को कम करते हैं। ब्लूबेरी, टमाटर (बिना पकाए) और चेरी जैसे फलों में उच्च मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, और इनके अलावा कुम्हड़ा और शिमला मिर्च में भी एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं। लाल शिमला मिर्च विशेष रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए बेहतर मानी जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जिन फलों व सब्जियों में विटामिन-सी होती हैं, उनके मुकाबले में लाल शिमला मिर्च में दोगुनी विटामिन सी पाई जाती है। इसके अलावा कद्दू भी प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए बेहतर रहता है। कद्दू में विटामिन-ए पाया जाता है, यह कोशिकाओं से कोशिकाओं का संपर्क नियमित रूप से बनाए रखती है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली का आधार होता है। (और पढ़ें - कद्दू के बीज के फायदे और नुकसान)

जड़ी-बूटीयां – इनमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो वायरल संक्रमण को रोकने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार लाते हैं। लहसुन में कई ऐसे यौगिक होते हैं जो फंगल, बैक्टीरियल और पैरासिस्टिक संक्रमण के खिलाफ लड़ने में काफी प्रभावी होते हैं।

(और पढ़ें - जड़ी बूटियों के फायदे)

प्रोटीन – खाद्य पदार्थ जैसे, मछली, मांस, टोफू बीन्स और नट्स आदि खाद्य पदार्थो में उच्च मात्रा में प्रोटीन तो होता ही है साथ ही साथ प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी होते हैं। सेम की फली और बादाम में विटामिन-बी और कैल्सियम उच्च मात्रा में होता है। इनके अलावा साबुत अनाज भी इन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। टोफू बीन्स, ठंडे पानी की मछलिया और लीन मीट भी मस्से के मामले में काफी बेहतर होती हैं, लेकिन लाल मांस का प्रयोग सीमित रखना जरूरी होता है। कस्तूरी में उच्च मात्रा में जिंक होता हो जो काफी लाभकारी होता है। जिंक काफी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह किसी भी मिनरल की एंजाइमेटिक प्रतिक्रियाओं में कार्य करता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है।

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मस्सा की दवा - Medicines for Warts in Hindi

मस्सा के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Exel GnExel Gn 0.05% W/W/0.5% W/W Cream41
Propyderm NfPROPYDERM NF CREAM 5GM60
Propygenta NfPROPYGENTA NF CREAM 20GM122
Schwabe Ranunculus ficaria CHSchwabe Ranunculus ficaria 1000 CH96
Schwabe Anagallis arvensis CHSchwabe Anagallis arvensis 12 CH96
SBL Sempervivum tectorum DilutionSBL Sempervivum tectorum Dilution 1000 CH86
Tenovate GnTenovate Gn Cream24
Clop MgClop Mg 0.05%/0.1%/2% Cream34
ADEL 32 Opsonat DropADEL 32 Opsonat Drop200
Clovate GmClovate Gm Cream0
Dr. Reckeweg Ova Testa 3x TabletDr. Reckeweg Ova Testa 3x Tablet 164
Cosvate GmCosvate Gm Cream18
Propyzole NfPropyzole Nf Cream112
Dermac GmDermac Gm Cream32
Triben CnTriben Cn Cream0
Etan GmEtan Gm Cream16
Globet GmGLOBET GM CREAM 20GM0
Lobate GmLOBATE GM LOTION 25ML89
TopisoneTopisone Cream0
ADEL 40 And ADEL 86 KitAdel 40 And Adel 86 Kit 499
SBL Carica papaya Mother Tincture QSBL Carica papaya Mother Tincture Q 76
Clobenate GmCLOBENATE GM CREAM 20GM0
Soltec GmSoltec Gm Cream0
Zincoderm GmZINCODERM GM NEO CREAM 15GM33

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References

  1. InformedHealth.org [Internet]. Cologne, Germany: Institute for Quality and Efficiency in Health Care (IQWiG); 2006-. Warts: Overview. 2014 Jul 30 [Updated 2017 May 4]
  2. American Academy of Dermatology. Rosemont (IL), US; Warts
  3. American Academy of Dermatology. Rosemont (IL), US; What warts look like
  4. American Orthopaedic Foot & Ankle Society [Internet] Orthopaedic Foot & Ankle Foundation, Rosemont, IL; Ailments of the Big Toe
  5. American Academy of Dermatology. Rosemont (IL), US; Dermatologists share tips to treat common warts
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