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अंगूठे में मोच लगना बहुत दर्द वाली स्थिति है। यह मोच अंगूठे के जोड़ों पर किसी तरह से चोट लगने की वजह से होती है। लिगामेंट एक तरह का नाजुक टीशू होता है जो हड्डियों को जोड़ों के माध्यम से एक दूसरे से जोड़ने का काम करता है। खेलकूद या गिरने की वजह से ऐसी चोट लगना आम बात होती है। अंगूठे में मोच कई वजहों से लग सकती है। खेलकूद में यह टकराने से या फिर गेंद से चोट लगने के कारण हो सकती है। कई बार अंगूठे के अचानक बहुत अधिक मुड़ जाने के कारण भी मोच लग जाती है। इससे अंगूठे में सूजन आ सकती है।

आमतौर पर मोच लग जाने पर बहुत अधिक दर्द होता है। इसके लिए जब आप अपने डॉक्टर से संपर्क करेंगे तो डॉक्टर आपके अंगूठे के आसपास सूजन तथा अंगूठे के मूवमेंट को देखेंगे। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आपको एक्स-रे कराने की सलाह भी दे सकते हैं। एक्स-रे से डॉक्टर ये पता लगाना चाहते हैं कि कहीं अंगूठे की हड्डी में किसी तरह का फ्रैक्चर तो नहीं है। इसके बाद अगर डॉक्टर को जरूरत महसूस हुई तो डॉक्टर आपके चोटिल अंगूठे में मरहम-पट्टी का इस्तेमाल कर सकते हैं। डॉक्टर उन वजहों का इलाज करते हैं, जिनके कारण आपका अंगूठा जाम हुआ है। आमतौर पर लिगामेंट को ठीक होने में 3 से 6 हफ़्तों का वक्त लगता है। इसके बाद आप डॉक्टर से पूछकर धीरे-धीरे अंगूठे को चलाना शुरू कर सकते है।

यदि ऐसा लगता है कि सामान्य इलाज से आपका अंगूठा काम करना (हिलना-डुलना) शुरू नहीं कर सकेगा और आपकी लिगामेंट इंजरी अच्छी तरह से ठीक नहीं हो पायेगी तो आपको सर्जरी कराने की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा ऐसे मामलों में जरूरी है कि मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए अभ्यास किया जाए ताकि अंगूठे में फिर से मोच न लगे। देर से इलाज कराने से अंगूठे में कमजोरी आने और लगातार दर्द बने रहने की संभावना होती है।

(और पढ़ें - मोच के घरेलू उपाय)

  1. अंगूठे की मोच के प्रकार - Types of thumbs sprain in Hindi
  2. अंगूठे में मोच के लक्षण - Symptoms of thumb sprain in Hindi
  3. अंगूठे में मोच के कारण और जोखिम कारक - Causes and risks of thumb sprain in Hindi
  4. अंगूठे में मोच से बचाव - Prevention of thumb sprain in Hindi
  5. अंगूठे में मोच का परीक्षण - Diagnosis of thumb sprain in Hindi
  6. अंगूठे में मोच का इलाज - Thumb sprain treatment in Hindi
  7. अंगूठे में मोच की जटिलताएं - Complications of thumb sprain in Hindi
  8. अंगूठे में मोच के डॉक्टर

मोच को कई श्रेणियों में बांटा गया है। इन श्रेणियों को इस आधार पर बांटा गया है कि चोट कितनी गंभीर लगी थी। 

  • ग्रेड 1 मोच (हल्की मोच): 
    इसमें लिगामेंट्स में खिंचाव आ जाता है लेकिन वो फटती नहीं हैं। 
     
  • ग्रेड 2 मोच (सामान्य मोच):
    इसमें लिगामेंट्स आंशिक रूप से फट जाती हैं। ऐसी इंजरी में आपको चलने-फिरने में थोड़ी सी समस्या हो सकती है। 
     
  • ग्रेड 3 मोच (गंभीर मोच): 
    इसमें लिगामेंट पूरी तरह से फट जाता है या फिर खिंच जाता है। यह गंभीर चोट होती है। ऐसी स्थिति में आपको अच्छे उपचार की जरूरत होती है। इसके लिए आपको बेहतर मेडिकल या सर्जिकल देखरेख की जरूरत होती है। अगर लिगामेंट फटकर हड्डी से दूर हो गई है तो इसमेंं हड्डी के एक छोटे से चिप की जरूरत हो सकती है। 

मोच लगने के कुछ मिनटों या घंटो में निम्नलिखित लक्षण देखे जा सकते हैं: 

  • अंगूठे और उसके बगल वाली उंगली के बीच वाली जगह में दर्द।
  • अंगूठे में सूजना
  • अंगूठे का फटना।
  • अंगूठे का लाल होना और जकड़न होना
  • अंगूठे और तर्जनी से किसी चीज को पकड़ने पर दिक्कत या कमजोरी महसूस होना। रोजमर्रा के कामों जैसे लिखने और गिलास पकड़ने में तकलीफ होना।
  • अंगूठे और तर्जनी को बगल में छूने पर कोमलता महसूस करना। 
  • अंगूठे की स्किन का काला या लाल होना।
  • अंगूठे में दर्द होना, जो अंगूठे को किसी निश्चित दिशा में या फिर किसी भी दिशा में घुमाने पर दर्द होना। 
  • कलाई में दर्द होना (अंगूठे में दर्द के कारण)। 

डॉक्टर को कब दिखाएं?
अगर आप अपने अंगूठे में उपर्युक्त समस्याओं जैसा कोई लक्षण देखते हैं तो अपने डॉक्टर से बात करें। इसके बाद डॉक्टर जांच करके बताएंगे कि आपको कहीं किसी तरह का फ्रैक्चर तो नहीं हुआ है। इसके अलावा डॉक्टर आपको घर पर देखभाल करने के तरीके भी बताएंगे। 

(और पढ़ें - कलाई में मोच का इलाज)

अंगूठे में मोच तब लगती है, जब कोई लिगामेंट अपनी सामान्य रेंज से अधिक खिंच जाता है। ये निम्नलिखित कारणों से हो सकता है: 

  • ज्यादातर मामलों में अंगूठे में मोच किसी तरह की दुर्घटना, गिरने, खेलकूद में टकरा जाने जैसे कारणों से होती है। यह उस स्थिति में होती है, जब अंगूठा पीछे की ओर सामान्य रेंज से ज्यादा खिंच जाता है। 
  • कई बार गिरते समय हाथ को अंगूठे के बल जमीन पर एकाएक टिका देने के कारण भी अंगूठे में मोच लग जाती है। 
  • खेलकूद (फुटबाल, बास्केटबाल या वॉलीबाल) में खिलाड़ियों के अंगूठे में  मोच लगना आम बात होती है। 
  • कई बार लोग अपने अंगूठे को किसी ठोस चीज पर जोर से दबा देते हैं या फिर अनजाने में दब जाने के कारण अंगूठा उलटी दिशा में मुड़ जाता है, जिसके कारण अंगूठे में मोच लग जाती है। 
  • अंगूठे में मोच लगने का एक और कारण ऑटोमोबाइल्स की टक्कर है, जब ड्राइवर का केवल अंगूठा स्टेयरिंग ह्वील पर रह जाता है। 

(और पढ़ें - टखने में मोच का इलाज)

अंगूठे में लगने वाली मोच को रोक पाना नामुमकिन है क्योकि कोई जानबूझकर मोच नहीं लगवाता है। यह अनजाने में अचानक लग जाती है। फिर भी निम्नलिखित कुछ सावधानियों से आप मोच से बचने के प्रयास कर सकते हैं:

  • अगर आपके अंगूठे में पहले से कभी मोच लगी है तो रोज के कामों को करते समय अपने डॉक्टर की सलाह का ध्यान रखें।
  • फुटबॉल, बॉलीबॉल या अन्य तरह के खेल खेलते समय साथ में फर्स्ट एड के लिए कोई डॉक्टर रखें ताकि वह खेल शुरू होने से पहले आपके अंगूठों में टेप बांध दे। यह टेप अंगूठे में मोच से बचाने का काम करेगा। 
  • तभी खेलें या अभ्यास करें जब आप अच्छे से आराम कर चुके हों।
  • किसी दुर्घटना में अंगूठे में मोच से बचने के लिए अपने अंगूठे को स्टेयरिंग से बाहर करके पकड़ें। यानी अंगूठा स्टेयरिंग पर न टिकाएं। क्योंकि दुर्घटना होने पर अंगूठे पर एकाएक दबाव पड़ जाता है जिसके कारण अंगूठे में मोच आ सकती है।
  • कोई भी खेल खेलते समय सभी जरूरी चीजें (दस्ताने, हैलमेट) पहनें।
  • किसी भी तरह के अभ्यास से पहले अपनी मांसपेशियों को हल्का सा खींचे। इससे अकड़ी हुई मांसपेशियां थोड़ी लचीली हो जाएंगी। 
  • खानपान का ख्याल रखें। संतुलित आहार का सेवन करें ताकि शरीर संतुलित रहे। 
  • घर पर रहें तब भी अभ्यास करें। यहां तक कि अगर ग्राउंड न हो तो मोहल्ले में ही अभ्यास कर लें। 
  • हर रोज अपनी अंगुलियों और हाथ को खींचें ताकि मांसपेशियों में जकड़न न रहे। 

(और पढ़ें - मांसपेशियों में जकड़न रोकने के उपाय

सबसे पहले तो डॉक्टर इस बात की पुष्टि करेंगे कि कहीं आपके किसी दूसरे अंग में गंभीर चोट तो नहीं आई है। इसके लिए वो आपके अन्य अंगों की भी जांच करेंगे। इसके बाद डॉक्टर आपसे पूछेंगे कि यह चोट कैसे, कब और किस तरह लगी। यहां तक कि वो आपसे चोट लगने के समय अंगूठे की पोजिशन के बारे में भी पूछेंगे। वो यह भी पूछेंगे कि कितनी देर पहले चोट लगी थी। 

अंगूठे में लगी मोच के इलाज के लिए डॉक्टर शारीरिक परीक्षण करते हैं। इनमें अंगुलियों को अलग-अलग दिशा में घुमाना भी शामिल है। डॉक्टर आपको एक्स-रे जैसे इमैजिंग टेस्ट्स की सलाह भी दे सकते हैं। इससे चोट की सटीक जगह का पता लगाया जा सकता है। डॉक्टर इस बात की भी जांच करते हैं कि हड्डियां और लिगामेंट्स किस हद तक चोटिल हैं। 

(और पढ़ें - मांस फटने पर क्या करें)

जैसे ही आपके अंगूठे में मोच लगे तो सबसे पहले निम्नलिखित बातों का ख्याल रखें:

  • टाइपिंग जैसे उन कामों से बचें, जिनमें अंगूठे का मूवमेंट शामिल हो। जितना संभव हो सके, अंगूठा चलाने से बचें। इससे आपके अंगूठे में दर्द कम होगा। इसके अलावा अगर सलाह दी जाए तो पट्टी बांधें रहें।
  • चोटिल जगह पर 20-20 मिनट तक बार-बार बर्फ से सिकाई करें। दिनभर में कम से कम 4 से 8 बार हर रोज ऐसा करें। 
  • नॉन-स्टेरॉयडल एंटी इन्फ्लेमेटरी दवाइयों जैसे इबुप्रोफेन का सेवन करें।
  • जिस जगह चोट लगी है, उस जगह को कुछ दिनों तक ऊपर उठाकर रखें।
  • अपने अंगूठे को अंगुलियों से जुड़ा रखने के लिए उन्हें टेप से बांधे रखें। इससे अंगूठा हिलेगा-डुलेगा नहीं और लिगामेंट में और चोट नहीं लगेगी। 

अगर आपका लिगामेंट पूरी तरह से फट चुका है तो इस स्थिति में सर्जिकल ट्रीटमेंट जरूरी होता है। इससे उस चोटिल क्षेत्र को फिर से सामान्य किया जा सकता है। उपचार में देरी करने से चोट ठीक होने में दिक्कतें आ सकती है। अगर हड्डी का कोई टुकड़ा टूट गया है तो फ्रैक्चर के उपचार में सर्जिकल स्टेबलाइजेशन की जरूरत होती है। सर्जरी के दौरान आपके डॉक्टर लिगामेंट को फिर से हड्डी से जोड़ देंगे। अगर आपके हड्डी का कोई हिस्सा लिगामेंट से दूर खिंच गया है तो सर्जन हड्डी के उस हिस्से को किसी पिन या स्क्रू की मदद से या तो निकाल देंगे या फिर उसे सही स्थिति में रख देंगे। इस मामले में कुछ जोखिम होते हैं। ये जोखिम व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकते हैं।

अगर हम जटिलताओं की बात करें तो इस प्रक्रिया में जटिलताएं कम हैं। हालांकि सर्जरी से पहले डॉक्टर आपसे उन सभी समस्याओं, जटिलताओं या अन्य स्थितियों के बारे में बता देंगे, जिनकी सर्जरी के बाद या दौरान होने की संभावना होगी। 

(और पढ़ें - चोट की सूजन का इलाज)

अंगूठे में मोच का जब सही तरह से परिक्षण के बाद उपचार किया जाता है तो ज्यादातर मोचें बिना किसी जटिलता के ठीक हो जाती हैं। हालांकि अगर लोग यह सोचकर अनदेखी कर देते हैं कि यह धीरे-धीरे अपने आप ठीक हो जाएगा, तो वो आगे चलकर लंबे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकती हैं। जैसे:  

  • लंबे समय तक के लिए अस्थिरता।
  • कमजोरी
  • अगर आपने अपने लिगामेंट का ठीक से इलाज नहीं करवाया तो यह मोच आगे चलकर गठिया भी बन सकता है। 

(और पढ़ें - गठिया के घरेलू उपाय)

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