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परिचय

घुटना शरीर का सबसे बड़ा जोड़ होता है। यह हड्डियों, लिगामेंट, कार्टिलेज और टेंडन से मिलकर बना होता है। घुटने के अंदर चार लिगामेंट्स होते हैं, जो एक प्रकार के लचीले व मजबूत ऊतक होते हैं ये ऊपरी टांग की हड्डी को निचली टांग की हड्डी से जोड़ते हैं। व्यक्ति के चलने, बैठने या कूदने के दौरान ये लिगामेंट्स जोड़ को स्थिर रखते हैं। घुटनों संबंधी ज्यादातर चोटें एथलेटिक्स (खेल-कूद) गतिविधियों के दौरान होती है, जैसे फुटबॉल खेलना। हालांकि घुटना मुड़ने जैसी रोजाना होने वाली सामान्य घटनाओं के कारण भी घुटने में चोट आ सकती है। घुटने में मोच आने से ऊतकों के फाइबर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे घुटने में मौजूद कई लिगामेंट्स प्रभावित हो जाते हैं। घुटने में मोच आने से आमतौर पर दर्द, सूजन व नील पड़ने लग जाती है। 

घुटने में मोच की जांच करने के लिए शारीरिक परीक्षण किया जाता है और कुछ इमेजिंग टेस्ट किये जाते हैं, जैसे एक्स रे और सीटी स्कैन आदि। डॉक्टर आपको कुछ समय तक घुटने को आराम देने के लिए कह सकते हैं और घुटने को सहारा देने वाले कुछ उपकरण भी दे सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टर आपकी रोजाना की गतिविधियों में भी कुछ समय के लिए थोड़े-बहुत बदलाव कर सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में मोच आने पर क्षतिग्रस्त हुऐ लिगामेंट्स का इलाज करने के लिए आपको ऑपरेशन (सर्जरी) भी करवाना पड़ सकता है।

(और पढ़ें - घुटने की हड्डी के खिसकने के लक्षण)

  1. घुटने की मोच क्या है? - What is Knee Sprain in Hindi
  2. घुटने की मोच के प्रकार - Types of Knee Sprain in Hindi
  3. घुटन में मोच के लक्षण - Knee Sprain Symptoms in Hindi
  4. घुटने की मोच के कारण व जोखिम कारक - Knee Sprain Causes and Risks Factors in Hindi
  5. घुटने की मोच से बचाव - Prevention of Knee Sprain in Hindi
  6. घुटने की मोच का परीक्षण - Diagnosis of Knee Sprain in Hindi
  7. घुटने की मोच का इलाज - Knee Sprain Treatment in Hindi
  8. घुटने की मोच की जटिलताएंघुटने की मोच की जटिलताएं - Knee Sprains Complications in Hindi
  9. घुटने में मोच के डॉक्टर

घुटने की मोच क्या है?

घुटने में मौजूद लिगामेंट्स में किसी प्रकार की चोट आने की स्थिति को घुटने की मोच कहा जाता है। ये लिगामेंट एक लचीली व मजबूत पट्टी की तरह होते हैं, जो टांग की दोनों हड्डियों के सिरों को एक दूसरे से जोड़ कर रखते हैं। 

(और पढ़ें - चोट लगने पर क्या करें)

घुटने की मोच कितने प्रकार की होती है?

अन्य प्रकार की मोच की तरह घुटने की मोच को भी अलग-अलग चरणों में विभाजित किया जाता है। घुटने की मोच को उसकी गंभीरता के अनुसार तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जैसे: 

  • ग्रेड 1 (हल्की मोच):
    यह घुटने में लगने वाली एक मामूली चोट की तरह होती है। यह अक्सर लिगामेंट्स में अधिक खिंचाव आने के कारण होती है, जिससे लिगामेंट में सूक्ष्म दरारें आ जाती हैं। इस स्थिति में होने वाला दर्द अधिक गंभीर नहीं होता है और इसमें आपका घुटना शरीर का वजन उठा लेता है। हालांकि मोच से ग्रस्त घुटना स्वस्थ घुटने जितना मजबूत महसूस नहीं होता है। (और पढ़ें - मांसपेशियों में खिंचाव का उपचार)
     
  • ग्रेड 2 (मध्यम मोच):
    इसमें घुटने का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाना शामिल है। इस स्थिति में घुटने को हिलाने-डुलाने या छूने पर दर्द महसूस होता है। इस स्थिति में आप मोच से ग्रस्त घुटने पर अपने शरीर का पूरा वजन नहीं उठा पाते हैं और खुद को थोड़ा अस्थिर भी महसूस करते हैं। इसमें प्रभावित घुटने में थोड़ी बहुत सूजन व नील आदि भी पड़ सकते हैं।
     
  • ग्रेड 3 (गंभीर मोच):
    इस स्थिति में लिगामेंट का ज्यादातर हिस्सा या पूरा लिगामेंट क्षतिग्रस्त हो जाता है। इससे काफी दर्दनाक स्थिति पैदा हो जाती है और आप अपने घुटने पर शरीर का वजन उठाने में भी असमर्थ हो जाते हैं। ग्रेड 3 की मोच में घुटने में काफी अस्थिरता हो जाती है। घुटने में गंभीर सूजन हो जाती है और नील पड़ने लग जाते हैं, जो घुटने को हिलाने-डुलाने में मुश्किल पैदा कर देते हैं। 

(और पढ़ें - घुटने में दर्द का इलाज)

घुटने की मोच के लक्षण क्या हैं?

घुटने में मोच आने पर निम्नलिखित कुछ सामान्य लक्षण हो सकते हैं:

  • घुटने में सूजन:
    घुटने की मोच के साथ आमतौर पर हमेशा सूजन भी देखी जाती है। घुटने में जितनी गंभीर मोच आई है, उतनी ही अधिक सूजन हो जाती है। इसके अलावा जितने समय तक मोच रहती है उतनी ही अधिक सूजन हो सकती है।
     
  • नील पड़ना:
    घुटने में पाए जाने वाले चारों लिगामेंट्स में किसी एक को चोट आदि लगने पर घुटने पर नील पड़ सकता है। घुटने के ऊपर व आस-पास की त्वचा पर नील पड़ सकता है या त्वचा के सामान्य रंग में बदलाव हो सकते हैं।
     
  • दर्द:
    जिन लोगों के घुटने में मोच आ गई है, उनको हल्के से गंभीर दर्द हो सकता है। दर्द की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि घुटने में कितनी गंभीर चोट आई है। यदि घुटने की मोच मध्यम है, तो उससे होने वाला दर्द भी मध्यम होता है, जबकि मोच के गंभीर मामलों में काफी तीव्र दर्द हो सकता है। आमतौर पर घुटने को आराम दिया जाता है या सामान्य गतिविधियों में लाया जाता है, तो दर्द भी धीरे-धीरे कम होने लगता है।
     
  • गति कम होना:
    घुटने में मोच आने के बाद प्रभावित लिगामेंट कमजोर हो जाते हैं जिससे घुटने की हिलने-डुलने की क्षमता कम हो जाती है। इसके अलावा घुटने के आस-पास के क्षेत्र में सूजन आने के बाद भी घुटने को हिलाने में मुश्किल होने लग जाती है।
     
  • घुटने से आवाज आना:
    आपको घुटने में मोच आने के दौरान घुटने से कुछ असाधारण आवाज (कुछ टूटने जैसी आवाज) सुनाई दे सकती है। यह आवाज संकेत देती है, कि घुटने में मौजूद चार लिगामेंट्स में से कोई एक क्षतिग्रस्त हो गया है। मोच आने के दौरान घुटने से निकलने वाली आवाज आमतौर पर गंभीर मोच का संकेत देती है।
     
  • वजन ना उठा पाना:
    घुटने में सूजन या छूने पर दर्द होना या फिर उसमें मौजूद लिगामेंट क्षतिग्रस्त हो जाने से प्रभावित टांग शरीर का वजन उठाने में असमर्थ हो जाती है।

डॉक्टर को कब दिखाएं? 

निम्नलिखित स्थितियों में डॉक्टर की मदद ले लेनी चाहिए:

  • प्रभावित घुटना शरीर का वजन उठाने में असमर्थ हो जाना।
  • घुटने में अधिक सूजन दिखाई देना।
  • घुटनों को पूरी तरह से खोलने या हिलाने में असमर्थ हो जाना।
  • टांग व घुटने में स्पष्ट रूप से किसी प्रकार का विकृति (Diformity) दिखाई देना।
  • घुटने में लालिमा, दर्द व सूजन के अलावा आपको हल्का बुखार भी होना।
  • घुटने में अस्थिरता महसूस होना।

(और पढ़ें - चोट की सूजन का इलाज)

घुटने में मोच क्यों होती है?

घुटना शरीर का सबसे मजबूत जोड़ होता है और इसमें शरीर के सबसे शक्तिशाली लिगामेंट्स पाए जाते हैं। हालांकि इन लिगामेंट्स में चोट आदि लगने की काफी संभावना होती है, क्योंकि ये शरीर की दो बड़ी हड्डियों को आपस में जोड़ते हैं, जो शरीर का वजन उठाती हैं। 

ज्यादातर प्रकार की मोच निम्नलिखित कारणों से होती है: 

  • घुटने पर कुछ तेजी से लगना
  • अचानक से बल या दिशा में परिवर्तन आने के कारण घुटने पर अधिक दबाव पड़ना
  • घुटने के जोड़ में अधिक तनाव आना

यदि आप बेढंगे तरीके से घुटने को मोड़ते हैं या गिर जाते हैं तो भी आपके घुटने में मोच आ सकती है।

घुटने में मोच आने का खतरा कब बढ़ता है?

निम्नलिखित कारणों से घुटने में मोच आने के जोखिम बढ़ जाते हैं:

  • कुछ प्रकार के खेल:
    कुछ प्रकार के खेल ऐसे हैं, जो अन्य खेलों के मुकाबले घुटनों पर अधिक दबाव डालते हैं। तेज रफ्तार के खिलाड़ियों में घुटने की मोच आने के जोखिम अधिक होते हैं, जैसे फुटबॉल, बास्केटबॉल और हॉकी आदि। यदि कोई तेजी से दौड़ते हुऐ अचानक से रुकता है या फिर अचानक से अपनी दिशा बदल लेता है, तो उसके घुटने में मोच आ सकती है। इसके अलावा यदि किसी खिलाड़ी का पैर जमीन पर जमे हुऐ है और उस पैर पर कोई दूसरा खिलाड़ी आकर गिर जाता है, तो भी उसके पैर में मोच आ सकती है।
     
  • शरीर का अधिक वजन होना:
    शरीर का अधिक वजन या मोटापा होने पर घुटने पर अधिक वजन पड़ने लग जाता है। ऐसी स्थिति में सामान्य गतिविधियों के दौरान भी मोच आने संभावना बढ़ जाती है, जैसे चलना या सीढ़ियों पर चढ़ना या उतरना।
     
  • पहले लगी हुई चोट:
    यदि आपके घुटने पर पहले कभी चोट लगी है, तो ऐसे में फिर से चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। 

(और पढ़ें - सूजन कम करने के घरेलू उपाय)

घुटने में मोच आने से बचाव कैसे करें?

घुटने में मोच आने के जोखिम को पूरी तरह से खत्म करना संभव नहीं है। हालांकि कुछ साधारण तकनीकों की मदद से घुटने में मोच आने की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। घुटने में मोच आने से बचाव रखने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखा जा सकता है।

किसी भी प्रकार की एक्सरसाइज या अन्य किसी गतिविधि को शुरु करने से पहले अपने घुटनों को वॉर्म अप कर लेना चाहिए, ताकि उनमें अच्छी तरह से लचीलापन आ सके और वे तनाव झेल सकें। घुटनों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज मोच आने की संभावनाओं को कम कर देती है। टांग व घुटने के आस-पास की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए एक्सरसाइज करते रहें।

(और पढ़ें - मांसपेशियों की कमजोरी दूर करने के उपाय)

पैर को आरामदायक और पूरी तरह से सहारा देने वाले जूते पहनें, जो आपके पैर में पूरी तरह से फिट आ रहे हों और आपके खेल के अनुसार भी ठीक हों। यदि आपको पैर सीधे रखने में समस्या होती है, तो आपके घुटने में मोड़ आने की संभावना रहती है। ऐसी स्थिति में आपके लिए उचित जूतों का चुनाव करने के लिए आप डॉक्टर की मदद भी ले सकते हैं। यदि आप फुटबॉल खेलते हैं, तो विशेष प्रकार के जूते पहनें जो आपके घुटने में चोट आदि आने की संभावनाओं को कम कर सके। 

एक्सरसाइज करते समय घुटनों को सुरक्षा देने वाले सुरक्षात्मक उपकरणों का इस्तेमाल करें। ये उपकरण आपके घुटने व टखने जैसे जोड़ों को स्थिर बनाकर रखते हैं, जिससे जोड़ों में विपरीत गति आने की संभावना कम हो जाती है। किसी खेल को खेलने की सही तकनीक सीखना बहुत जरूरी होता है, यदि सही तकनीक का इस्तेमाल ना किया जाए तो घुटने आदि जैसे जोड़ों में गंभीर क्षति पहुंच सकती है। चिकनी व फिसलन वाली जगह पर खेलने व अन्य गतिविधियां करने से बचना चाहिए, ऐसा करने से ना सिर्फ घुटने में मोच आने की संभावनाएं कम हो जाती हैं बल्कि अन्य चोटें लगने का खतरा भी कम हो जाता है। 

(और पढ़ें - मांसपेशियों में खिंचाव का इलाज)

घुटने की मोच का परीक्षण कैसे किया जाता है?

परीक्षण के दौरान डॉक्टर ये जानना चाहेंगे कि घुटने में मोच कैसे आई है और आपको किसी प्रकार के लक्षण महसूस हो रहे हैं। साथ ही परीक्षण के दौरान यह भी पता लगाने की कोशिश की जाती है, कि मरीज को ऐसी कोई समस्या पहले भी कभी हुई है या नहीं। 

परीक्षण के दौरान डॉक्टर आपका शारीरिक परीक्षण शुरू करते हैं, जिस दौरान डॉक्टर घुटने में सूजन, दर्द, लालिमा, घुटने की त्वचा गर्म होना आदि जैसी समस्याओं की जांच करते हैं। साथ ही यह भी जांच करते हैं कि आप अपने घुटने को कितने अच्छे से हिला पा रहे हैं और टांग को पूरी तरह मोड़ या पूरी तरह से सीधा कर पा रहे हैं या नहीं। ये जांच करने के बाद डॉक्टर घुटने के अंदर की स्थिति का पता लगा लेते हैं। 

कुछ मामलों में डॉक्टर निम्नलिखित टेस्ट करवाने की सलाह भी दे सकते हैं:

  • एक्स रे:
    घुटने की मोच की स्थिति में डॉक्टर सबसे पहले एक्स रे टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं, इसकी मदद से यह पता लग जाता है कि कहीं घुटने के अंदर कोई हड्डी तो नहीं टूटी है।
     
  • सीटी स्कैन:
    इसमें एक्स रे तकनीक का ही इस्तेमाल किया जाता है और प्रभावित हिस्से की अलग-अलग दिशाओं से एक्स रे तस्वीरें ली जाती है। उसके बाद इन सभी तस्वीरों कों आपस में जोड़ दिया जाता है, जिससे प्रभावित हिस्से की अधिक स्पष्ट तस्वीर मिलती है। (और पढ़ें - सीटी स्कैन क्या है)
     
  • अल्ट्रासाउंड:
    डॉक्टर अल्ट्रासाउंड स्कैन के दौरान आपके घुटने की पोजीशन बदल सकते हैं। ऐसा करने से विशिष्ट समस्या का पता लगाने में  मदद मिल सकती है।
     
  • एमआरआई:
    इस टेस्ट प्रक्रिया में रेडियों तरंगों व चुंबकिय शक्ति का उपयोग किया जाता है, जिसकी मदद से शरीर के प्रभावित हिस्से की 3D तस्वीर बनाई जाती है। यह टेस्ट विशेष रूप से नरम ऊतकों संबंधी चोट का पता लगाने के लिए काफी उपयोगी है, जैसे टेंडन, लिगामेंट, कार्टिलेज और मांसपेशियां आदि।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड कब कराएं)

घुटने की मोच का इलाज कैसे किया जाता है?

यदि आपके घुटने की मोच ग्रेड 1 या ग्रेड 2 की श्रेणी में है, तो डॉक्टर आपको निम्नलिखित चार बातों का पालन करने की सलाह दे सकते हैं:

  • प्रभावित जोड़ को आराम देना।
  • प्रभावित हिस्से की सूजन को कम करने के लिए बर्फ की सिकाई करना।
  • सूजन को कम करने के लिए उस पर हल्की पट्टी बांधना।
  • प्रभावित घुटने को ऊपर की तरफ उठा कर रखना

सर्जरी:

घुटने की मोच के अत्यधिक गंभीर मामलों (ग्रेड 3) का इलाज करने लिए घुटने का ऑपरेशन करवाना पड़ सकता है। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर घुटने के क्षतिग्रस्त हिस्से को फिर से ठीक करने की कोशिश करते हैं। 

रिहैबिलिटेशन:

जैसे ही आपके घुटने का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है, डॉक्टर आपका रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम शुरू कर देते हैं। इसमें आपके घुटने के आस-पास की मांसपेशियों को फिर से मजबूत बनाया जाता है और उसको फिर से सही अवस्था में लाया जाता है। यह प्रोग्राम आपके घुटनों को स्थिर बनाने में मदद करता है और फिर से मोच आदि आने की संभावनाओं को कम करता है। 

आपके घुटने की मोच का इलाज चाहे ऑपरेशन से हुआ हो या नहीं, लेकिन आपको अपनी गतिविधियों में फिर वापस लाने में रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया एक मुख्य भूमिका निभाती है। यह एक शारीरिक थेरेपी प्रोग्राम होता है, जो आपके घुटने को धीरे-धीरे फिर से सामान्य गतिविधियों में लाने में मदद करता है।

(और पढ़ें - घुटने का ऑपरेशन कैसे होता है)

घुटने में मोच आने पर क्या जटिलताएं होती हैं?

घुटने में मोच आने पर निम्नलिखित प्रकार की समस्याएं होने लग जाती हैं, जैसे:

  • लंबे समय तक घुटने अस्थिर रहना
  • लंबे समय तक घुटने में दर्द रहना
  • घुटने के जोड़ की हड्डियां अधिक कमजोर होना, जैसे ओस्टियोआर्थराइटिस

(और पढ़ें - आर्थराइटिस का आयुर्वेदिक इलाज)

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