myUpchar प्लस+ के साथ पुरे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

परिचय

टखने या कभी-कभी टखने के बाहरी तरफ के लिगामेंट्स में लगने वाली किसी प्रकार की चोट को टखने की मोच या पैर की मोच कहा जाता है। लिगामेंट्स ऊतकों की बनी एक रबर के जैसी पट्टी होती है जो एक हड्डी को दूसरी हड्डी से जोड़ती है। टखने के जोड़ में उपस्थित लिगामेंट्स टखने की एक तरफ गति को सीमित करके स्थिरता प्रदान करते हैं। यदि आप किसी उबड़-खाबड़ या पहाड़ी वाले क्षेत्र में चल रहे हैं तो आपके टखने में मोच आ सकती है। टखने की मोच में मुख्य रूप से टखने में दर्द, सूजन, नील पड़ना या टखने का रंग बदल जाना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

स्थिति का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर आपकी शारीरिक जांच व टखने का एक्स रे करते हैं और आपके लक्षणों का भी अध्ययन करते हैं। पैर में मोच होने से रोकथाम करना काफी मुश्किल होता है। हालांकि चलने के दौरान पैर मुड़ने आदि से बचाव करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। जूते पहनना, ऊंची ऐड़ियों वाले सैंडल ना पहनना और उबड़-खाबड़ जमीन पर ना चलना आदि टखने की मोच से बचाव करने के मुख्य उपाय हैं।

यदि समय पर इलाज कर दिया जाए तो, टखने की मोच तेजी से ठीक होने लग जाती हैं और लक्षण भी अधिक गंभीर नहीं हो पाते हैं। टखने की मोच का इलाज चोट की गंभीरता पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में पैर की मोच का इलाज करने के लिए सिर्फ घरेलू देखभाल व मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली कुछ पेन किलर दवाओं की आवश्यकता पड़ती है। टखने की मोच के कुछ गंभीर मामलों में प्रभावित टखने के लिए ब्रेस (सहारा देने वाले उपकरण) लगाने और यहां तक की दुर्लभ मामलों में टखने का ऑपरेशन भी करवाना पड़ सकता है। 

यदि मोच का इलाज ठीक से ना हो पाए, तो आपको कुछ दीर्घकालिक समस्याएं भी हो सकती हैं। टखने की मोच से पैदा होने वाली समस्याएं जैसे कमजोरी, लंगड़ाते हुऐ चलना, प्रभावित हिस्से में तीव्र दर्द होना और टखने में अकड़न आना आदि शामिल है। 

(और पढ़ें - कंधे की अकड़न का इलाज​)

  1. पैर (टखने) में मोच क्या है - What is Sprained ankle in Hindi
  2. पैर (टखने) में मोच के प्रकार - Types of Sprained ankle in Hindi
  3. टखने में मोच के लक्षण - Sprained ankle Symptoms in Hindi
  4. पैर में मोच के कारण व जोखिम कारक - Sprained ankle Causes & Risk Factors in Hindi
  5. टखने में मोच का परीक्षण - Diagnosis of Sprained ankle in Hindi
  6. पैर में मोच से बचाव - Prevention of Sprained ankle in Hindi
  7. पैर (टखने) में मोच का इलाज - Sprained ankle Treatment in Hindi
  8. पैर (टखने) में मोच की जटिलताएं - Sprained ankle Complications in Hindi
  9. पैर में मोच के डॉक्टर

पैर की मोच क्या है?

पैर की मोच को टखने की मोच या फिर टखने में मरोड़ आदि के नाम से भी जाना जाता है। यह एक आम समस्या है, जिसमें टखने के जोड़ में मौजूद एक या दो लिगामेंट्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। पैर में मोच आने से आप दौड़ने, कूदने और यहां तक कि ठीक तरीके से चल पाने में पूरी तरह से असमर्थ हो जाते हैं।

(और पढ़ें - मोच आने पर क्या करे)

टखने की मोच कितने प्रकार की होती है?

टखने में मौजूद लिगामेंट्स की चोट की गंभीरता के अनुसार ही टखने में मोच के प्रकार को निर्धारित किया जाता है, जैसे: 

स्टेज 1 मोच (हल्की): 

  • लिगामेंट्स में थोड़ा सा खिंचाव आना और प्रभावित लिगामेंट के रेशे थोड़े बहुत क्षतिग्रस्त हो जाना
  • टखने के आसपास सूजन आना और छूने पर थोड़ा बहुत दर्द होना (और पढ़ें - घुटनों में खिंचाव का इलाज)

स्टेज 2 मोच (मध्यम): 

  • लिगामेंट्स का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाना
  • टखने के आस-पास सूजन होना और छूने पर अधिक दर्द होना
  • डॉक्टर के द्वारा जब टखने को हिला-ढुला कर देखा जाता है, टखने में असाधारण रूप से ढीलापन महसूस होना (और पढ़ें - चोट की सूजन का इलाज)

स्टेज 3 मोच (गंभीर): 

  • लिगामेंट्स पूरी तरह से फट जाना
  • टखने के आस पास गंभीर सूजन व छूने पर अत्यधिक दर्द होना
  • जब डॉक्टर प्रभावित टखने को दबाकर या खींचकर देखते हैं, तो टखने में एक विशेष प्रकार की अस्थिरता महसूस होना।

(और पढ़ें - मांसपेशियों में खिंचाव के कारण)

पैर में मोच कैसे आती है?

निम्नलिखित कुछ गतिविधियों के दौरान पैर अचानक से मुड़ सकता है, जिसके कारण टखने में मोच आ सकती है:

  • किसी उबड़-खाबड़ जगह पर चलना या एक्सरसाइज करना
  • अचानक से जमीन पर गिरना
  • किसी ऐसे खेल में भाग लेना जिसमें पैर को अचानक से मोड़ना या घूमाना पड़ता हो, जैसे बॉस्केटबॉल, टेनिस, फुटबॉल और दौड़ लगाना आदि।
  • खेल-कूद की गतिविधियों में जब दौड़ रहे होते हैं इस दौरान यदि कोई दूसरा खिलाड़ी आपके पैर पर पैर रख देता है, तो आपका पैर मुड़ सकता है। (और पढ़ें - एक्सरसाइज का सही टाइम

पैर में मोच आने का खतरा कब बढ़ता है?

निम्नलिखित कुछ कारक हैं जो टखने में मोच आने का जोखिम बढ़ा देते हैं:

  • पहले कभी टखने में चोट लगना:
    यदि पहले कभी आपके पैर में कई मोच आई है या फिर टखने में पहले कभी चोट लग चुकी है, तो टखने में फिर से मोच आने का खतरा बढ़ जाता है।
     
  • उबड़-खाबड़ जमीन:
    किसी ऐसी जमीन पर चलना या दौड़ना जो सपाट ना हो या फिर उबड़-खाबड़ हो, तो ऐसे में पैर में मोच आने का खतरा काफी बढ़ जाता है। (और पढ़ें - नसों की सूजन का इलाज)
     
  • उचित जूते ना पहनना:
    यदि आप ऐसे जूते पहन रहे हैं जो आपके पैरों में ठीक तरीके से फिट नहीं आ रहे हैं या फिर आपने शारीरिक गतिविधि के अनुसार ठीक से जूते नहीं पहने हैं, तो पैर में मोच आने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। इसके अलावा ऊंची ऐड़ियों वाले सैंडल आदि पहनने से भी टखने की मोच का खतरा बढ़ जाता है।
     
  • शारीरिक स्थिति ठीक ना होना:
    यदि टखने शारीरिक रूप से मजबूत नहीं है या फिर उनमें लचीलेपन की कमी है, तो खेल-कूद आदि के दौरान टखने में मोच आने का खतरा बढ़ जाता है।
     
  • खेल कूद में भाग लेना:
    जो लोग खेल-कूद में भाग लेते हैं उनके टखने में मोच आने के जोखिम बढ़ जाते हैं।

(और पढ़ें - टखने में दर्द का इलाज​)

पैर में मोच के लक्षण क्या हैं?

टखने में मोच आने से निम्नलिखित लक्षण पैदा हो सकते हैं, जैसे:

  • मोच की जगह पर दर्द होना:
    मोच से प्रभावित क्षेत्र में होने वाला दर्द आमतौर पर काफी तीव्र होता है और अचानक से विकसित होता है। इसके अलावा जब टखने को हिलाने की कोशिश की जाती है या फिर टखने पर शरीर का वजन दिया जाता है, तो दर्द और बदतर हो जाता है।
     
  • ट्रॉमा के समय तीव्र दर्द होना:
    गंभीर मोच के मामलों में जब लिगामेंट पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो उससे अत्यधिक तीव्र दर्द पैदा हो जाता है। इतना ही नहीं यह दर्द इतना तीव्र हो सकता है कि मरीज को हिलने-ढुलने में भी पूरी तरह से असमर्थ कर देता है।
     
  • प्रभावित क्षेत्र में नील पड़ना:
    सूजन के अलावा मरीज के प्रभावित टखने की त्वचा नीली, बैंगनी या लाल हो सकती है या फिर सामान्य त्वचा का रंग भी बिगड़ सकता है। टखने का रंग बदलना, लिगामेंट्स के क्षतिग्रस्त होने या फिर प्रभावित क्षेत्र में खून जमा होने का संकेत देता है। (और पढ़ें - सूजन कम करने के उपाय)
     
  • टखने को पूरी तरह से हिला-ढुला न पाना:
    यदि किसी व्यक्ति के पैर में गंभीर रूप से मोच आ गई है, तो पैर को मोड़ने, घुमाने या हिलाने-ढुलाने में मुश्किल होने लग जाती है। जिन गतिविधियों में टखने पर वजन पड़ता है जैसे चलना आदि गतिविधियां करने में बहुत कठिनाई हो सकती है। (और पढ़ें - मांस फटने का इलाज)
     
  • टखने से आवाज महसूस होना:
    जब टखने में चोट लगती है, तो इस दौरान मरीज को टखने से ‘कड़क’ या ‘चटक’ जैसी आवाज सुनाई दे सकती है। अक्सर लिगामेंट में अधिक खिंचाव आने या उसके फटने के कारण ऐसी आवाज आती है। 

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपके टखने में सूजन या दर्द हो रहा है या फिर आपको लगता है कि आपके पैर में मोच आ गई है, तो डॉक्टर को दिखा लें। यदि टखने पर वजन डालने या फिर चलने आदि में अत्यधिक दर्द हो रहा है, तो जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से इसका इलाज करवाएं। इसके अलावा निम्नलिखित स्थितियों में भी डॉक्टर को दिखा लें:

  • जोड़ की आकृति अजीब लगना
  • यदि क्षतिग्रस्त व्यक्ति की त्वचा पीली पड़ गई है या फिर उसकी पल्स तेज हो गई हैं।

(और पढ़ें - जोड़ों में दर्द का इलाज)

पैर की मोच का परीक्षण कैसे करें?

स्थिति के परीक्षण के दौरान डॉक्टर आपसे पूछेंगे कि आपको चोट कैसे लगी। डॉक्टर आपका शारीरिक परीक्षण कर सकते हैं, जिसकी मदद से पता लगाया जाता है कि आपका कौन सा लिगामेंट क्षतिग्रस्त हुआ है। परीक्षण के दौरान डॉक्टर आपके टखने के जोड़ को अलग-अलग दिशाओं में हिला कर देख सकते हैं।

(और पढ़ें -

इसके अलावा पैर की मोच का परीक्षण करने के लिए कुछ प्रकार के इमेजिंग टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जैसे:

  • एक्स रे:
    इस टेस्ट की मदद से पैर की मोच की जांच की जाती है। इसके अलावा यदि चोट आदि के दौरान हड्डी टूट गई है, तो एक्स रे टेस्ट की मदद से उसका भी पता लगाया जा सकता है। (और पढ़ें - ऑनलाइन लैब)
     
  • एमआरआई स्कैन:
    यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि आपके पैर की हड्डी टूट गई है, तो वे एमआरआई स्कैन करवाने की भी सलाह दे सकते हैं। यदि लिगामेंट्स में गंभीर चोट आई है या फिर टखने के जोड़ की बाहरी परत पर चोट लगी है, तो एमआरआई स्कैन की मदद से इसका भी पता लगाया जा सकता है। एमआरआई प्रक्रिया में शक्तिशाली चुंबकिय और रेडियों किरणों का इस्तेमाल किया जाता है जिसकी मदद से काफी स्पष्ट तस्वीरें प्राप्त की जाती हैं। इसकी मदद से डॉक्टर अच्छी तरह से परीक्षण कर पाते हैं। (और पढ़ें - यूरिक एसिड टेस्ट)
     
  • सीटी स्कैन:
    इस टेस्ट की मदद से हड्डियों व उनके जोड़ों संबंधी काफी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। सीटी स्कैन तकनीक में एक्स रे प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है और अलग-अलग दिशाओं से प्रभावित क्षेत्र की तस्वीरें निकाली जाती हैं। (और पढ़ें - एचएसजी टेस्ट क्या है)
     
  • अल्ट्रासाउंड:
    अल्ट्रासाउंड स्कैन के साथ टखने के अंदरुनी हिस्से की तस्वीरें ली जाती हैं। इन तस्वीरों की मदद से डॉक्टर लिगामेंट व टेंडन की हालत का पता लगा पाते हैं।

(और पढ़ें - गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड कब कराएं)

पैर की मोच की रोकथाम कैसे करें?

निम्नलिखित कुछ उपायों की मदद से पैर में मोच आने या बार-बार होने वाली मोच संबंधी समस्याओं से बचाव किया जा सकता है: 

  • ऐसे जूते पहनें जो आपके पैर के साइज में एकदम फिट हों और आपकी शारीरिक गतिविधि के लिए भी अनुकूल रहें। (और पढ़ें - गलत साइज के जूते का इलाज)
  • ऊंची ऐड़ियों वाले सैंडल ना पहनें या कम से कम पहनने की कोशिश करें।
  • अपने टखने के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत व लचीली बनाएं रखें। (और पढ़ें - मांसपेशियों को मजबूत करने के उपाय)
  • स्टैबिलीटी ट्रेनिंग करें, जिनमें बैलेंस एक्सरसाइज भी शामिल हैं।
  • एक्सरसाइज करने से पहले या फिर कोई खेल खेलने से पहले वॉर्म अप करें। (और पढ़ें - वार्म अप के फायदे)
  • उबड़-खाबड़ जमीन पर ध्यानपूर्वक चलें या दौड़ें।
  • ऐसी किसी गतिविधि या खेल में भाग ना लें जिसके आप अनुकूल नहीं हैं। 

(और पढ़ें - एड़ी के दर्द का इलाज​)

पैर की मोच का इलाज कैसे किया जात है?

टखने की मोच के शुरूआती इलाज में निम्नलिखित उपाय शामिल हो सकते हैं:

  • चलें-फिरें नहीं और अपने टखने को आराम दें।
  • सूजन को कम करने के लिए लगातार 20 से 30 मिनट और दिन में कम से कम 3-4 बार बर्फ से सिकाई करनी चाहिए। बर्फ को हमेशा किसी कपड़े में लपेट कर ही त्वचा पर लगाएं, इसको कभी सीधे त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए। 
  • प्रभावित टखने को पट्टी से बांध लें ताकि क्षतिग्रस्त टखना हिल-ढुल ना सके।
  • सूजन होने के पहले 48 घंटों में जितनी देर हो सके टखने को हृदय के स्तर से ऊपर रखना चाहिए।

(और पढ़ें - सिकाई के फायदे)

यदि मोच गंभीर नहीं है, तो पहले 48 घंटों में वह ज्यादातर ठीक हो जाती है और आप अपनी रोजाना की गतिविधियां करने में सक्षम हो जाते हैं। यदि मोच मध्यम या गंभीर है, तो ऐसी स्थिति में लंबे समय तक इसका इलाज चलता है। जिसमें आमतौर पर एक हफ्ता या फिर उससे भी अधिक समय लग सकता है। 

ऑपरेशन: 
बहुत ही कम मामलों में टखने में मोच का इलाज करवाने के लिए ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ती है। आमतौर पर जब लिगामेंट गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं या प्रभावित टखना असाधारण रूप से अस्थिर लगता है तो टखने का ऑपरेशन किया जा सकता है। इसके अलावा यदि बिना सर्जरी के पैर की मोच का इलाज करना मुश्किल हो रहा हो तो भी टखने का ऑपरेशन किया जा सकता है। सर्जिकल उपचारों में निम्नलिखित उपचार शामिल हो सकते हैं: 

  • आर्थ्रोस्कोपी:
    इस प्रक्रिया के दौरान सर्जन (सर्जरी करने वाले डॉक्टर) जोड़ के अंदर देखते हैं और हड्डी या लिगामेंट के टुकड़े का पता लगाते हैं। (और पढ़ें - कंधे की अर्थरोस्कोपी)
     
  • रिकंस्ट्रक्शन (फिर से बनाना):
    रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी में सर्जन क्षतिग्रस्त लिगामेंट में टांके लगाकर उसे सही करता है। इसके अलावा वे क्षतिग्रस्त लिगामेंट का इलाज करने के लिए पैर के आसपास के अन्य लिगामेंट या टेंडन का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। (और पढ़ें - सर्जरी से पहले की तैयारी)

ऑपरेशन के बाद, रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) रिकवरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। डॉक्टर आपको ऑपरेशन के बाद कई बार बुला सकते हैं। डॉक्टर आपकी शारीरिक थेरेपी करते हैं, जिसकी मदद से आपके टखने के आसपास की मांसपेशियां मजबूत हो जाती हैं और उनमें लचीलापन बढ़ जाता है। 

(और पढ़ें - चोट की सूजन का इलाज)

टखने की मोच से क्या समस्याएं हो सकती हैं?

यदि पैर या टखने में गंभीर रूप से मोच आ गई है, तो उससे कई जटिलताएं विकसित हो सकती हैं जैसे:

  • लंबे समय तक दर्द रहना:
    लंबे समय तक रहने वाला दर्द टखने में मोच आने पर होने वाली सबसे आम जटिलता है। (और पढ़ें - पेन किलर के नुकसान)
     
  • अकड़न:
    यह भी पैर की मोच से होने वाली एक आम जटिलता है जो आमतौर पर टखने में अधिक सूजन आने के परिणामस्वरूप विकसित होती है। इसके कारण प्रभावित टखना पूरी तरह से हिल-ढुल नहीं पाता। (और पढ़ें - गर्दन में अकड़न का इलाज)
     
  • नसों संबंधी विकार:
    यदि टखना गंभीर रूप से मुड़ गया है, तो इसके परिणामस्वरूप प्रभावित हिस्से में मौजूद नसें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। नसों संबंधी विकार से प्रभावित हिस्सा सुन्न हो सकता है या फिर उसमें तीव्र दर्द व कमजोरी आ सकती है। (और पढ़ें - कमजोरी दूर करने के उपाय)
     
  • सूजन:
    प्रभावित टखने में गंभीर रूप से सूजन आ सकती है। (और पढ़ें - पसली में सूजन का इलाज)
     
  • गठिया:
    पैर की मोच के कारण प्रभावित टखने के जोड़ में सूजन भी आ सकती है।

(और पढ़ें - गठिया का इलाज​)

Dr. Krish Jivani

Dr. Krish Jivani

सामान्य चिकित्सा

Dr. Manoz Marwin

Dr. Manoz Marwin

सामान्य चिकित्सा

Dr.  Purnesh Chudasama

Dr. Purnesh Chudasama

सामान्य चिकित्सा

और पढ़ें ...