हड्डियों की सेहत और देखभाल को भारत में स्वास्थ्य सेवा के सबसे उपेक्षित पहलुओं में से एक माना जाता है। साल 2013 में अंतरराष्ट्रीय ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80 प्रतिशत शहरी भारतीय आबादी में विटामिन डी की कमी है। साल 2012 में, भारतीय हड्डी रोग संघ (इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन IOA) ने घोषणा की कि 4 अगस्त को हड्डी और जोड़ यानी बोन एंड जॉइंट दिवस के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें हड्डी के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाएगा। 

1-7 अगस्त के बीच हड्डी और जोड़ सप्ताह मनाया जाता है
इतना ही नहीं IOA, हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच कई तरह की गतिविधियां भी करता है जिसे बोन एंड जॉइंट वीक के रूप में जाना जाता है। इस सप्ताह के दौरान डॉक्टर्स और सर्जन्स हड्डी और जोड़ों की बीमारियों के बढ़ते प्रभाव और उन्हें रोकने और इलाज के तरीकों के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए अपने-अपने राज्यों में जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इतना ही नहीं, बहुत से सर्जन तो इस दौरान सुविधाओं से वंचित मरीजों के लिए मुफ्त में बोन मिनरल डेन्सिटी टेस्ट (बीएमडी) और मुफ्त सर्जरी भी करते हैं।

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इस साल बोन एंड जॉइंट डे की थीम है- 'अपकर्षक या डीजेनेरेटिव बीमारियों में विकृति या विकलांगता की रोकथाम'। हड्डियों के अपकर्षक या अपक्षयी रोग को मेडिकल भाषा में ऑस्टियोआर्थराइटिस कहते हैं, जो ज्यादातर मध्यम आयु वर्ग या वृद्ध लोगों को प्रभावित करता है। 

ऑस्टियोआर्थराइटिस: अपक्षयी (डीजेनेरेटिव) हड्डी रोग
ऑस्टियोआर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है जो शरीर के जोड़ वाले किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है लेकिन यह आमतौर पर शरीर के उन जॉइंट्स या जोड़ों को टार्गेट करती है जो शरीर के वजन को वहन करते हैं जैसे- घुटना, कुल्हा और टखना आदि। पीड़ित व्यक्ति के जोड़ बेहद कठोर या कड़े हो जाते हैं और उसमें तेज दर्द भी होने लगता है और साथ ही कभी-कभी सूजन भी हो सकती है। सूजे हुए जोड़ (जॉइंट्स) या तो कठोर हो सकते हैं या फिर जर्जर और अस्थिर (अतिरिक्त हड्डी के बढ़ने के कारण) या नरम भी हो सकते हैं (जॉइंट्स की परत के जमने या गाढ़ा होने के कारण)।

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ऑस्टोआर्थराइटिस से बचने का तरीका
ऐसे कई बेहद आसान और सरल तरीके हैं जिनकी मदद से ऑस्टियोआर्थराइटिस को होने से रोका जा सकता है, उनमें से कुछ हैं:  
1. शरीर के वजन को स्वस्थ बनाए रखें : वैसे लोग जिनका वजन अधिक है (ओवरवेट) या जो मोटापे का शिकार हैं उन्हें यह बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है क्योंकि उनके हड्डी के जोड़ (खासकर घुटना और कुल्हा) को अतिरिक्त भार और तनाव सहना पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि शरीर के हर 1 अतिरिक्त किलोग्राम वजन के साथ, घुटनों पर दबाव 2 से 4 किलोग्राम तक बढ़ जाता है।

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2. स्वस्थ आहार का सेवन करें: आपके आहार में पर्याप्त मात्रा में वैसे पोषक तत्व मौजूद होने चाहिए जिनकी मदद से हड्डियों और जोड़ों की सेहत को बनाए रखने में मदद मिल सके। इसमें कैल्शियम, विटामिन डी, विटामिन सी, फॉस्फोरस और प्रोटीन शामिल है। इन सभी में से कैल्शियम सबसे अहम खनिज है, जो हड्डियों की वृद्धि और विकास के लिए सबसे जरूरी माना जाता है। अपने आहार में कैल्शियम को शामिल करने के लिए आपको दूध, चीज और दूसरे डेयरी उत्पादों के साथ ही सप्लिमेंट्स का भी सेवन करना चाहिए। अगर आपको पर्याप्त मात्रा में धूप की रोशनी नहीं मिल पाती तो आपको विटामिन डी सप्लिमेंट्स का सेवन करना चाहिए ताकि आपका शरीर कैल्शियम को सोख पाए। औसतन, एक वयस्क व्यक्ति को रोजाना कम से कम 800 से 1 हजार इंटरनैशनल यूनिट विटामिन डी का सेवन करना चाहिए।

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3. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें : अपनी हड्डियों और जोड़ों को मजबूत रखने के लिए आपको वजन उठाने वाले व्यायाम करने चाहिए, जिसमें हड्डियों और मांसपेशियों को गुरुत्वाकर्षण और प्रतिरोध के खिलाफ काम करने की जरूरत होती है और इस प्रकार उनकी ताकत में सुधार होता है। नियमित रूप से व्यायाम करने से न केवल जोड़ों की गति, लचीलापन और कार्य करने की क्षमता में सुधार करने में मदद मिलती है बल्कि यह स्वस्थ वजन बनाए रखने में भी मदद करता है। घुटने के जोड़ में ऑस्टिआर्थराइटिस की समस्या से पीड़ित मरीजों के लिए बेहद जरूरी है कि एक अलग एक्सरसाइज प्रोग्राम बनाया जाए ताकि मरीजों की मांसपेशियां खासकर क्वॉड्रिसेप्स और हैमस्ट्रिंग (घुटनों के पीछे की नस) को मजबूत बनाया जा सके। हालांकि अगर जोड़ों में इन्फ्लेमेशन की गंभीर समस्या हो तो एक्सरसाइज नहीं करना चाहिए।

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4. योग का अभ्यास करें : इस बारे में अब तक हो चुके कई अध्ययनों में यह बात साबित हुई है कि योग, घुटनों के कार्य और गतिशीलता को बेहतर बनाने में मदद करता है जिससे जोड़ों में दर्द की समस्या कम होती है। योग की मदद से मांसपेशियां मजबूत बनती हैं, गति की सीमा बढ़ती है और संतुलन में भी सुधार होता है। चूंकि योग में कठिन और मुश्किल एक्सरसाइज शामिल नहीं होते हैं, इसलिए यह ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों के लिए भी सुरक्षित है।

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5. जोड़ों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें : एक तरफ जहां हड्डियों और जोड़ों की सेहत बनाए रखने के लिए स्वस्थ भोजन करना और नियमित रूप से एक्सरसाइज करना जरूरी है, वहीं, जोड़ों की थकान या खिंचाव से बचना भी उतना ही आवश्यक है। घुटनों को लगातार या लंबे समय तक झुकाना या मोड़कर रखना, बार-बार स्क्वॉट करना, क्रॉस-लेग्ड यानी पैर पर पैर चढ़ाकर बैठना या लंबे समय तक घुटने के बल बैठने के कारण घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ सकता है। इन सभी पॉस्चर से बचें ताकि जोड़ों की इस समस्या से बचा जा सके।

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