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स्यूडोहाइपोपैराथायराइडिज्म​ होना क्या है?

स्यूडोहाइपोपैराथायराइडिज्म एक ऐसी समस्या है, जिसमें व्यक्ति का शरीर पैराथाइरॉइड हॉर्मोन के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं दे पाता। ये हॉर्मोन हड्डियों व खून में कैल्शियम, फॉस्फेट और विटामिन डी को नियंत्रित करता है। स्यूडोहाइपोपैराथायराइडिज्म से ग्रस्त लोगों के खून में कैल्शियम कम होता है, फॉस्फेट की मात्रा अधिक होती है और पैराथाइरॉइड हॉर्मोन का स्तर भी ज्यादा होता है। स्यूडोहाइपोपैराथायराइडिज्म एक बहुत ही दुर्लभ समस्या है।

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स्यूडोहाइपोपैराथायराइडिज्म के लक्षण क्या हैं?

स्यूडोहाइपोपैराथायराइडिज्म के कई लक्षण होते हैं, जैसे मोतियाबिंद, लंबाई कम होना, दांतों से संबंधित समस्याएं, हाथ की हड्डियां छोटी होना, सुन्न होना, चेहरा गोल व गर्दन छोटी होना, दौरे पड़ना, उंगलियों के जोड़ की हड्डियों पर गढ्ढे होना और त्वचा के नीचे कैल्शियम जमा होना।

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स्यूडोहाइपोपैराथायराइडिज्म क्यों होता है?

स्यूडोहाइपोपैराथायराइडिज्म होने का कारण होता है कई प्रकार की अलग-अलग जीन में बदलाव होना। जब जीन सही से काम करना बंद कर देती हैं, तो शरीर पैराथाइरॉइड हॉर्मोन के प्रति सही प्रतिक्रिया नहीं दे पाता, जिसके कारण खून में फॉस्फोरस का स्तर बढ़ जाता है और कैल्शियम का कम हो जाता है। अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि जीन में ये बदलाव क्यों होते हैं, लेकिन इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि ये बदलाव व्यक्ति को उसकी मां से अनुवांशिक तौर पर मिलते हैं। कुछ मामलों में ये बदलाव पिता से भी बच्चे को मिल सकते हैं। 

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स्यूडोहाइपोपैराथायराइडिज्म का इलाज कैसे होता है?

स्यूडोहाइपोपैराथायराइडिज्म के इलाज का उद्देश्य होता है शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के स्तर को सामान्य स्तर पर लाना। इसके लिए व्यक्ति को कैल्शियम या विटामिन डी के सप्लीमेंट दिए जा सकते हैं क्योंकि विटामिन डी के कारण कैल्शियम का अवशोषण बढ़ता है। स्यूडोहाइपोपैराथायराइडिज्म से ग्रस्त कई लोगों की लंबाई बहुत कम होती है, इसीलिए उन्हें ग्रोथ हार्मोन दिए जाते हैं ताकि उनकी लंबाई बढ़ सके। इसके अलावा डॉक्टर रोगी को कम फॉस्फेट वाला खाना खाने की सलाह भी दे सकते हैं।

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