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नाक बहना काफी आम समस्या है, लेकिन अक्सर लोग इस समस्या से परेशान हो जाते हैं और दैनिक गतिविधयों को करने में दिक्कत आ सकती है।

बहती नाक को राइनोरिया भी कहा जाता है। इस स्थिति में नाक से अत्यधिक तरल निकलने लगता है। यह निर्वहन पतला या मोटा, पारदर्शी या रंगीन और कुछ-कुछ अंतराल में या लगातार हो सकता है। आमतौर पर नाक और साइनस खुद को नम रखने के लिए एक निश्चित मात्रा में बलगम का उत्पादन करते हैं, लेकिन अत्यधिक मात्रा में बलगम का स्राव होने की स्थिति को नाक बहना या राइनोरिया कहते हैं।

नाक बहने के कई कारण हो सकते हैं उदाहरण के लिए, ठंड का मौसम, रोना, ठंड और फ्लू, नेजल पॉलिप्स (नाक का मांस बढ़ना), एलर्जिक राइनाइटिस, नॉनएलर्जिक राइनाइटिस, नाक में ट्यूमर इत्यादि। वैसे तो ज्यादातर मामले में कोई खास इलाज की जरूरत नहीं होती है यह अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन अगर यह 10 दिनों से अधिक समय तक बना रहता है, तो स्थिति का इलाज करने के लिए अंतर्निहित कारण का निदान जरूरी है। आमतौर पर बहती नाक के साथ जो अन्य लक्षण अनुभव होते हैं उनमें थकान, चेहरे पर दबाव, गले में खराश, खांसी और अनियमित बुखार शामिल है। एलर्जी के कारण बहती नाक या राइनोरिया की स्थिति में खुजली और आंख से पानी आना और छींकने जैसे लक्षण शामिल हैं।

होम्योपैथी में कई ऐसी दवाओं के बारे में बताया गया है जो बहती नाक और इससे जुड़े लक्षणों का इलाज कर सकती हैं। इनमें आर्सेनिकम एल्बम, जेल्सेमियम सेंपरविरेन्स, सबडिला, क्विलाया सेपोनारिया, जस्टिसिया एडहाटोडा, यूफ्रेशिया ऑफिसिनेलिस, ब्रोमियम, एम्ब्रोसिया आर्टीमिसिएफोलिया, कैलियम आयोडेटम, नैट्रियम म्यूरिएटिकम, नैट्रियम आर्सेनिकोसम और आर्सेनिकम आयोडेटम शामिल है।

  1. बहती नाक के लिए होम्योपैथिक दवाएं - Naak behne ki homeopathic medicine
  2. होम्योपैथी के अनुसार बहती नाक के रोगी के लिए आहार और जीवन शैली में बदलाव - Naak behne ke liye khan pan aur jeevan shaili me badlav
  3. बहती नाक के लिए होम्योपैथिक दवाएं और उपचार कितने प्रभावी हैं - Naak behne ki homeopathic medicine kitni effective hai
  4. बहती नाक के लिए होम्योपैथिक दवा के नुकसान और जोखिम - Naak behne ki homeopathic medicine ke nuksan
  5. बहती नाक के लिए होम्योपैथिक उपचार से संबंधित टिप्स - Naak behne ke liye homeopathic treatment se jude tips

नैट्रियम म्यूरिएटिकम
सामान्य नाम :
क्लोराइड ऑफ सोडियम 
लक्षण : नैट्रियम म्यूरिएटिकम उन व्यक्तियों के लिए एक उपयुक्त उपाय है जिनकी श्लेष्मा झिल्ली (कुछ अंगों जैसे नाक और आंत की अंदरूनी परत) सूख जाती है। इस दवा के उपयोग से निम्न लक्षणों का भी उपचार किया जा सकता है :

  • नाक की श्लेष्म झिल्ली को प्रभावित करने वाली सूजन
  • अंदर से नाक में दर्द
  • नाक ब्लॉक होना, जिससे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है
  • स्वाद संबंधी व सूंघने वाली इंद्रियों को नुकसान

यह लक्षण मानसिक तनाव, बात करने पर, तेज ध्वनि में और सुबह 10 बजे लेटने से खराब हो जाते हैं। जबकि ठंडे पानी से नहाने, कसे हुए कपड़े पहनने और पीठ पर दबाव डालने से लक्षणों में सुधार हो सकता है।

यूफ्रेशिया ऑफिसिनेलिस
सामान्य नाम :
आईब्राइट
लक्षण : आईब्राइट मुख्य रूप से आंखों और नाक की श्लेष्मा झिल्ली की सूजन को ठीक करने के लिए प्रयोग की जाती है। इस उपाय के साथ निम्नलिखित लक्षणों को भी ठीक किया जा सकता है :

  • अत्यधिक बलगम का उत्पादन होना
  • तेज खांसी

यह सभी लक्षण गर्म मौसम में खासकर शाम के दौरान खराब हो जाते हैं। इसके अलावा जब मरीज लंबे समय तक घर के अंदर रहता है तो भी यह लक्षण खराब हो जाते हैं, लेकिन अंधेरे में और कॉफी पीने पर इनमें सुधार होता है।

आर्सेनिकम एल्बम
सामान्य नाम :
आर्सेनिअस एसिड
लक्षण : यह दवा विभिन्न प्रकार की समस्याओं के लिए अच्छी है और बेचैनी व कमजोरी वाले व्यक्तियों के लिए सबसे उपयुक्त है, जो थोड़े-सी शारीरिक गतिविधि करने के बाद भी अत्यधिक थक जाते हैं। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन में भी मददगार है :

  • नाक की श्लेष्म झिल्ली में सूजन
  • अत्यधिक छींक आना
  • नाक में जलन के साथ नाक बहना
  • बंद नाक

यह लक्षण बरसात के मौसम में, आधी रात के बाद और ठंडे खानपान के बाद बिगड़ जाते हैं। सिर को ऊंचा रखने या गर्म पेय लेने पर लक्षणों में सुधार महसूस होता है।

जेल्सेमियम सेंपरविरेन्स
सामान्य नाम :
येलो जैस्मिन
लक्षण : यह उपाय फ्लू, मांसपेशियों की कमजोरी, उनींदापन, चक्कर आना और नीरसता के उपचार में उपयोगी है। इस उपाय का उपयोग करके अन्य लक्षणों का इलाज किया जा सकता है :

  • नाक भरी लगना
  • सिरदर्द
  • नाक से निकलने वाला स्राव
  • अत्यधिक छींक आना
  • सांस लेने में कठिनाई
  • बुखार

यह लक्षण सुबह 10 बजे, नम या धुंधले मौसम, लक्षणों के बारे में बहुत अधिक सोचने और तम्बाकू या धूम्रपान करने से खराब हो जाते हैं। अत्यधिक पेशाब के बाद और खुली हवा में घूमने पर इनमें सुधार होता है।

सबडिला
सामान्य नाम :
केवडिला सीड
लक्षण : सबडिला 'हे फीवर' (एलर्जी राइनाइटिस) के लिए एक शानदार उपाय है, क्योंकि यह नाक की श्लेष्म झिल्ली की सूजन को कम करता है। इसके अलावा यह निम्नलिखित इलाज में भी उपयोगी है :

  • अत्यधिक आंसू के साथ-साथ आंखों में दर्द और लालिमा
  • बार-बार और अनियमित रूप से छींक के साथ नाक बहना

यह लक्षण ठंड के मौसम में, कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन करने पर बिगड़ जाते हैं। इसके अलावा पूर्णिमा पर भी यह लक्षण खराब हो जाते हैं। गर्म भोजन और पेय का सेवन करने और गर्म कपड़े पहनने के बाद लक्षण बेहतर पाए गए हैं।

क्विलाया सपोनारिया
सामान्य नाम :
चिली सोप-बार्क
लक्षण : इस होम्योपैथिक उपाय का उपयोग निम्नलिखित लक्षणों को प्रबंधित करने के लिए किया जाता है :

  • नाक की श्लेष्म झिल्ली में अचानक होने वाली सूजन
  • अत्यधिक छींक आना
  • गले में खराश
  • गले में सूखापन के साथ ठंड लगना

जस्टिसिया एडहाटोडा
सामान्य नाम :
सिंघी
लक्षण : यह उपाय एक्यूट इंफ्लेमेटरी कंडीशन (अचानक या तेज होने वाली सूजन) के लिए मुख्य रूप से उपयोगी है। यह कुछ अन्य लक्षणों के इलाज में भी मददगार है :

ब्रोमियम
सामान्य नाम :
ब्रोमीन
लक्षण : ब्रोमियम का उपयोग मुख्य रूप से श्वसन पथ के लक्षणों के उपचार के लिए किया जाता है। यह डिस्चार्ज, कमजोरी और अधिक पसीना के प्रबंधन में विशेष रूप से प्रभावी है। ब्रोमियम से छुटकारा पाने वाले कुछ अन्य लक्षणों में शामिल हैं :

  • नॉस्ट्रिल (नथुना) ब्लॉक होना
  • नाक की सूजन
  • नकसीर
  • नाक पर दबाव महसूस होना
  • लगातार खांसी आना

यह लक्षण गर्म और नम मौसम में, शाम से मध्यरात्रि के बीच और बाईं ओर लेटने पर खराब हो जाते हैं। व्यायाम या किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि करने से इनमें सुधार होता है।

एम्ब्रोसिया आर्टीमिसिएफोलिया
सामान्य नाम :
राग-वीड
लक्षण : यह उपाय 'हे फीवर', खांसी और श्वसन पथ की अन्य समस्याओं के उपचार के लिए फायदेमंद है। यह निम्नलिखित लक्षणों का इलाज भी कर सकता है जैसे :

  • नाक बहना
  • घरघराहट वाली खांसी
  • सिर और नाक में भारीपन
  • नाक गुहा की झिल्ली में सूजन

कैलियम आयोडेटम
सामान्य नाम: आयोडाइड ऑफ पोटेशियम
लक्षण :
कैलियम आयोडेटम का उपयोग मुख्य रूप से श्लेष्म झिल्ली की सूजन और जलन के इलाज के लिए किया जाता है। यह अन्य लक्षणों का इलाज करने में भी मदद करता है जैसे :

  • सूखी और भरी हुई नाक
  • नाक में लालिमा और सूजन
  • तेज खांसी
  • नाक की जड़ में तेज दर्द
  • नाक से हरे रंग का डिस्चार्ज
  • सिरदर्द

यह लक्षण नम मौसम और रात में बिगड़ जाते हैं। गर्म कपड़े पहनने और गर्म कमरे में रहने से भी लक्षण बिगड़ जाते हैं, लेकिन खुली हवा में गतिविधि करने से लक्षणों में सुधार हो सकता है।

नैट्रियम आर्सेनिकोसम
सामान्य नाम :
आर्सेनिएट ऑफ सोडियम
लक्षण : नैट्रियम आर्सेनिकोसम निम्नलिखित लक्षणों को कम करने में प्रभावी है :

  • नाक ब्लॉक होना
  • नाक गुहा में बलगम जमा होना, जो मोटा और पीला होता है
  • नाक की जड़ में दर्द
  • सिरदर्द
  • ब्रोंकाइटिस
  • लगातार हरे रंग के बलगम के साथ खांसी
  • नाक में पानी का स्राव जो गले से नीचे उतरता है
  • नाक में पपड़ी बनना

आर्सेनिकम आयोडेटम
सामान्य नाम :
आयोडाइड ऑफ आर्सेनिक
लक्षण : आयोडाइड ऑफ आर्सेनिक उन व्यक्तियों के लिए एक उपयुक्त उपाय है, जिन्हें लगातार पानी डिस्चार्ज होने की समस्या बनी रहती है। यह स्थिति श्लेष्म झिल्ली की लालिमा और सूजन का कारण बनती है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन में भी उपयोगी है :

  • खांसते समय दर्द और आवाज बैठना
  • अत्यधिक छींक आना
  • अत्यधिक बलगम आना
  • नाक और गले में बलगम का अत्यधिक स्राव
  • कमजोरी
  • नाक की सूजन
  • बार-बार होने वाला बुखार

दवाओं के साथ-साथ होम्योपैथिक डॉक्टर अपने रोगियों को आहार और जीवन शैली में कुछ संशोधन करने का सुझाव देते हैं, जो उन्हें जल्दी से ठीक करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में अवगत कराया जाता है, जिन्हें होम्योपैथिक दवाओं के साथ नहीं लेना चाहिए, क्योंकि ये खाद्य पदार्थ दवा की कार्रवाई को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। यहां कुछ ऐसे दिशानिर्देशों के बारे में बताया गया है, जो मरीज में तेजी से सुधार लाने में मदद कर सकते हैं।

क्या करना चाहिए

  • स्वस्थ आहार लें
  • अपनी दिनचर्या में सक्रिय जीवन शैली को अपनाएं, इसमें पर्याप्त शारीरिक गतिविधि जैसे चलना शामिल है
  • शांत और हवादार कमरे में रहें
  • खुद की व अपने आसपास की साफ-सफाई बनाए रखें

क्या नहीं करना चाहिए

  • इत्र जैसे तेज महक वाले उत्पादों का उपयोग न करें, क्योंकि ये होम्योपैथिक दवाओं की कार्रवाई को प्रभावित कर सकते हैं।
  • मसालेदार भोजन, स्पाइज्ड चॉकलेट, रखा हुआ पनीर, सॉस और स्पाइज्ड केक न खाएं।
  • औषधीय जड़ी-बूटियों या जड़ों और पौधों के डंठल वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें, क्योंकि इनमें औषधीय गुण होते हैं।
  • प्याज, अजवाइन और बासी मीट या बतख और गीज के मांस वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
  • भोजन में चीनी या नमक की अधिकता से बचें।

बहती नाक और उससे जुड़े लक्षणों के उपचार के लिए कई होम्योपैथिक उपचारों का उपयोग किया गया है। इन उपायों को व्यक्ति की नैदानिक ​​स्थिति के अलावा उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाता है। होम्योपैथिक उपचार बहती नाक को ट्रिगर करने वाली सूजन को ठीक करती है। इसके अलावा यह अंतर्निहित कारणों को भी ठीक करता है।

'सिस्टमिक रिव्यू' जर्नल में प्रकाशित एक साहित्य समीक्षा में एलर्जिक राइनाइटिस के उपचार में होम्योपैथी की प्रभावशीलता के बारे में बताया गया है। एलर्जी राइनाइटिस एक ऐसी स्थिति है जो नाक के श्लेष्म झिल्ली की सूजन का कारण बनती है और यह आमतौर पर बहती नाक, छींकने और आंखों में पानी भरने जैसे लक्षणों से जुड़ी होती है। समीक्षा में सभी आयु समूहों के व्यक्तियों को शामिल करने वाले कई प्रकार के अध्ययन शामिल किए गए थे। इस अध्ययन के प्राथमिक परिणाम से पता चला कि होम्योपैथी बहती नाक व इससे संबंधित लक्षणों को सुधारने में मदद करता है।

अमेरिका के वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक नैदानिक ​​परीक्षण में पाया गया कि होम्योपैथिक उपचार का इस्तेमाल बच्चों में ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण के प्रबंधन जैसे कि बहती नाक, खांसी, नाक में जमाव और छींक के लिए किया जा सकता है। परीक्षण के लिए, 18 वर्ष से कम उम्र के कुल 50 बच्चों को शामिल किया गया था। होम्योपैथिक दवाइयों में यूफ्रेशिया ऑफिसिनेलिस, नैट्रियम म्यूरिएटिकम, फास्फोरस, पल्सेटिला प्रेटेंसिस और सल्फर सहित कई अवयवों का इस्तेमाल किया गया था। परिणाम यह रहा कि अधिकांश प्रतिभागियों ने लगभग सभी लक्षणों में राहत का अनुभव किया।

होम्योपैथिक उपचारों का उपयोग करने से पहले इन्हें घुलनशील रूप दिया जाता है और इन्हें बड़ी आबादी के बीच में असरदार माना जाता है। यह छोटे बच्चों, शिशुओं और यहां तक कि गर्भवती महिलाओं में सुरक्षित और प्रभावी है। होम्योपैथिक दवाइयों को पतले रूप में इस तरह से दिया जाता है कि दवा के चिकित्सीय गुण बरकरार रहते हैं, लेकिन इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। 

ये दवाएं उन व्यक्तियों में विशेष रूप से उपयोगी है जो दुष्प्रभावों के डर से पारंपरिक चिकित्सा को नहीं अपनाते हैं।

हालांकि, होम्योपैथी उपचार एक ऐसा ट्रीटमेंट है, जिसमें किसी व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और बीमारी के लक्षणों के आधार पर दवाइयां निर्धारित की जाती हैं। यह न सिर्फ बीमारी के लक्षणों में सुधार करता है बल्कि समग्र स्वास्थ को भी अच्छा करता है।

बहती नाक एक आम समस्या है जो किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित करती है। यह समस्या एलर्जी और संक्रमण सहित कई अंतर्निहित स्थितियों के कारण हो सकती है। होम्योपैथी में बहती नाक के लिए विभिन्न प्राकृतिक उपचार मौजूद हैं, जो व्यक्ति की नैदानिक स्थिति और उनकी शारीरिक व मानसिक विशेषताओं के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं। इन दवाइयों को जब एक योग्य डॉक्टर के मार्गदर्शन में लिया जाता है, तो इन दवाओं का असर सर्वोत्तम और तेज होता है।

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References

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  2. Cleveland Clinic. [Internet]. Cleveland, Ohio. Runny Nose: Possible Causes
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  4. The European Comittee for Homeopathy. Benefits of Homeopathy. Belgium; [Internet]
  5. Kushal Banerjee, Ceire Costelloe, Robert T Mathie, Jeremy Howick. Homeopathy for allergic rhinitis: protocol for a systematic review. 2014 Jun 10. PMID: 24913155
  6. Wenda Brewster O’Reilly. Organon of the Medical art by Wenda Brewster O’Reilly . B jain; New Delhi
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