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मस्तिष्क के बाहरी हिस्से में खून जमने की स्थिति को सबड्यूरल हेमाटोमा कहा जाता है। आमतौर पर सिर में चोट लगने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मस्तिष्क में रक्तस्राव और अतिरिक्त दबाव के कारण खून जमने की स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। कुछ लोगों में सबड्यूरल हेमाटोमा  स्वत: ठीक हो जाती है जबकि कुछ लोगों को सर्जरी की आवश्यकता होती है। आइए इस स्थिति को समझते हैं।

सबड्यूरल हेमाटोमा में मस्तिष्क के चारों ओर फैले ऊतकों की परतों के बीच खून जमा हो जाता है। ऊतकों की सबसे बाहरी परत को ड्यूरा कहा जाता है। सबड्यूरल हेमाटोमा में ड्यूरा और उसकी अगली परत अर्चनॉइड के बीच रक्तस्राव होता है। कुछ लोगों में सबड्यूरल हेमाटोमा क्रोनिक जबकि कुछ लोगों में यह एक्यूट हो सकता है। एक्यूट सबड्यूरल हेमाटोमा मुख्य रूप से सिर में गंभीर चोट लगने के कारण होता है। वहीं क्रोनिक सबड्यूरल हेमाटोमा सिर में हल्की चोट के कारण होता है।

इस लेख में हम सबड्यूरल हेमाटोमा के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।

  1. सबड्यूरल हेमाटोमा के लक्षण- Subdural Hematoma Symptoms in Hind
  2. सबड्यूरल हेमाटोमा का कारण- Subdural Hematoma Causes in Hindi
  3. सबड्यूरल हेमाटोमा का निदान - Diagnosis of subdural hematoma in Hindi
  4. सबड्यूरल हेमाटोमा का इलाज - Subdural Hematoma Treatment in Hindi

सबड्यूरल हेमाटोमा के लक्षण- Subdural Hematoma Symptoms in Hind

सबड्यूरल हेमाटोमा के लक्षण मस्तिष्क में हुए रक्तस्राव पर निर्भर करते हैं।

  • सिर पर लगने वाली चोट के कारण होने वाले गंभीर रक्तस्राव के कारण सबड्यूरल हेमाटोमा की समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में कई लोगों की तुरंत मौत हो जाती है, जबकि कुछ लोग कोमा में जा सकते हैं।
  • कई बार सिर में चोट लगने के बाद व्यक्ति कुछ दिनों तक सामान्य रह सकता है लेकिन धीरे-धीरे भ्रमित होता जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति की मौत हो सकती है। यह आमतौैर पर धीमी दर से होने वाले रक्तस्राव के कारण होता है।
  • कुछ लोगों में सबड्यूरल हेमाटोमा बहुत धीमी गति से विकसित होता है। इस स्थिति में रक्तस्राव शुरू होने के 2 सप्ताह से अधिक समय के बाद लक्षण दिखने शुरू होते हैं।

इसके अलावा सबड्यूरल हेमाटोमा में निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं :

सबड्यूरल हेमाटोमा का कारण- Subdural Hematoma Causes in Hindi

सबड्यूरल हेमाटोमा का सबसे प्रमुख कारण सिर में लगने वाली चोट है। यह चोट कई तरह से लग सकती है जैसे फिसल कर गिरना, दुर्घटना या किसी प्रकार का हमला। सिर पर अचानक लगने वाले झटके के कारण मस्तिष्क की सतह पर फैली रक्त वाहिकाएं फट जाती हैं। इसके अलावा रक्त ​विकार से प्रभावित लोग और रक्त को पतला करने वाली दवाओं का सेवन करने वालों में भी सबड्यूरल हेमाटोमा विकसित होने की आशंका अधिक होती है। सिर में मामूली सी चोट लगने के परिणामस्वरूप होने वाला रक्तस्राव भी सबड्यूरल हेमाटोमा का कारण बन सकता है।

सबड्यूरल हेमाटोमा मुख्य रूप से दो प्रकार (एक्यूट सबड्यूरल हेमाटोमा और क्रोनिक सबड्यूरल हेमाटोमा) का होता है, आइए इन दोनों के कारणों के बारे में जानते हैं।

एक्यूट सबड्यूरल हेमाटोमा

यदि मस्तिष्क में गंभीर चोट लग जाए तो उस हिस्से में रक्त का जमाव अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। इसे सबड्यूरल हेमाटोमा का सबसे घातक प्रकार माना जाता है।

एक्यूट सबड्यूरल हेमाटोमा आमतौर इन कारणों से हो सकता है।

  • कार दुर्घटना
  • सिर को बहुत तेज झटका लगना
  • गिरकर लगने वाली चोट

एक्यूट सबड्यूरल हेमाटोमा बहुत तेजी से विकसित होता है और इसके लक्षण भी तुरंत दिखाई देने लगते हैं। एक्यूट सबड्यूरल हेमाटोमा के शिकार लगभग 50 से 90 फीसदी लोगों की इसकी जटिलताओं के कारण मौत हो जाती है।

क्रोनिक सबड्यूरल हेमेटोमा

क्रोनिक सबड्यूरल हेमाटोमा आमतौर पर हल्के या बार-बार सिर पर लगने वाली चोट के कारण होता है। ये उम्रदराज लोगों में सबसे आम है, क्योंकि वह बार-बार गिरते रहते हैं, जिससे सिर में चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। कुछ क्रोनिक सबड्यूरल हेमाटोमा बिना किसी स्पष्ट कारण के भी हो सकते हैं।

वृद्ध लोगों में क्रोनिक सबड्यूरल हेमाटोमा विकसित होने का खतरा इसलिए भी अधिक होता है क्योंकि उम्र के अनुसार उनका मस्तिष्क सिकुड़ जाता है। इस वजह से खोपड़ी में अतिरिक्त स्थान बन जाता है, जिसके कारण सिर की चोट के दौरान नसों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ जाता है। क्रोनिक सबड्यूरल हेमाटोमा के लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते हैं, इनके विक​सित होने में कई हफ्तों तक का वक्त लग सकता है।

एक्यूट सबड्यूरल हेमाटोमा की तुलना में क्रोनिक सबड्यूरल हेमाटोमा का इलाज करना आसान होता है। हालांकि, इसमें भी जान जाने का डर बना रहता है।

सबड्यूरल हेमाटोमा का निदान - Diagnosis of subdural hematoma in Hindi

सिर पर लगने वाली चोट के बाद डॉक्टर सबसे पहले कुछ प्रकार के इमेजिंग टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, जिससे रक्तस्राव की स्थिति के बारे में जाना जा सके। इसके लिए सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन कराने की सलाह दी जाती है। इन परीक्षणों की मदद से खोपड़ी के आंतरिक हिस्सों की छवियां प्राप्त की जा सकती हैं, जो आमतौर पर मौजूद किसी भी सबड्यूरल हेमाटोमा का पता लगाने में मदद कर सकती हैं। सबड्यूरल हेमाटोमा का पता लगाने में एमआरआई को सीटी स्कैन से बेहतर माना जाता है।

कुछ मामलों में एंजियोग्राफी कराने की भी सलाह दी जा सकती है। एंजियोग्राफी (एंजियोग्राम) के दौरान, एक कैथेटर को कमर की धमनी के माध्यम से डाला जाता है और गर्दन और मस्तिष्क की धमनियों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद विशेष डाई को इंजेक्ट किया जाता है और एक्स-रे के माध्यम से धमनियों में रक्त के प्रवाह का पता लगाया जाता है।

सबड्यूरल हेमाटोमा का इलाज - Subdural Hematoma Treatment in Hindi

एक्यूट सबड्यूरल हेमाटोमा का सर्जरी ही एकमात्र इलाज होता है। सबड्यूरल हेमाटोमा को हटाने के लिए एक क्रैनियोटॉमी नामक सर्जिकल प्रक्रिया को प्रयोग में लाया जाता है। इस प्रक्रिया में खून के थक्के या हेमाटोमा तक पहुंचने के लिए सर्जन सर्जरी करके खोपड़ी के छोटे से हिस्से को हटा सकते हैं।

एक्यूट सबड्यूरल हेमाटोमा के रोगियों में क्रैनियोटॉमी को आवश्यक प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन इसके कई सारे जोखिम भी होते हैं। एक अध्ययन के अनुसार सर्जरी के 30 दिनों के भीतर 18 प्रतिशत रोगियों की मृत्यु हो गई।

क्रोनिक सबड्यूरल हेमाटोमा में थक्कों को बाहर निकालने के लिए सिर में छेद करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए सबसे पहले सर्जन आपकी खोपड़ी में छोटा छेद बनाते हैं और फिर उनमें रबर की नली डाली जाती है। हेमाटोमा से निकलने वाला रक्त इन नलियों के माध्यम से बाहर निकल जाता है।

सबड्यूरल हेमाटोमा के कारण रोगियों को पड़ने वाले दौरों के इलाज के लिए डॉक्टर एंटी सीर्जस दवाइयां दे सकते हैं। इसके अलावा दवा के माध्यम से मस्तिष्क की चोट का भी इलाज किया जा सकता है। मस्तिष्क की सूजन को कम करने के लिए रोगियों को कॉर्टिकोस्टेरॉइड दिया जा सकता है।

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