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प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवर को क्लेम करने से पहले इन दोनों टर्म को समझते हैं। हॉस्पिटल में भर्ती होने से पहले बीमारी से संबंधित खर्चें को प्री हॉस्पिटलाइजेशन व हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद इलाज से संबंधित खर्चे को पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन के अंतर्गत रखा जाता है। यह हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी की तरफ से दी जाने वाली एक सुविधा है, जिसका बीमित व्यक्ति ही फायदा ले सकता है। इसमें ओपीडी के दवाओं के बिल, डॉक्टर द्वारा दिया गया प्रिस्क्रिप्शन, टेस्ट इत्यादि शामिल हैं। अब रही बात हॉस्पिटल में भर्ती होने से कितने दिन पहले या डिस्चार्ज के कितने दिन बाद तक कवरेज मिल सकता है? आमतौर पर बीमा कंपनियां भर्ती से 30-60 दिन पहले और अस्पताल से छुट्टी के 60 से 180 दिन बाद तक का मेडिकल खर्च कवर करती हैं।

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  • प्री हॉस्पिटलाइजेशन खर्च : एक मरीज को अस्पताल में भर्ती करने से पहले, एक या एक से अधिक टेस्ट कराने की जरूरत हो सकती है। डॉक्टर और विशेषज्ञ इसलिए टेस्ट कराने का सुझाव देते हैं, ताकि बीमारी या मेडिकल कंडीशन को सटीक तरीके से पकड़ा जा सके और उपचार सही दिशा में चल सके। आजकल लगातार बढ़ती बीमारियों के बीच छोटी-मोटी बीमारियों में भी डॉक्टर जोखिम नहीं लेते और टेस्ट लिख देते हैं। आमतौर पर, किसी भी नियमित स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के तहत, अस्पताल में भर्ती होने के 30 दिन से पहले किए गए टेस्ट इस पॉलिसी के अंतर्गत कवर होते हैं। हालांकि, बीमाकर्ता के आधार पर यह दिन कम या ज्यादा भी हो सकते हैं। प्री-हॉस्पिटलाइजेशन में ब्लड टेस्टयूरिन टेस्टएक्स-रे आदि को भी कवर किया जाता है।
  • पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन खर्च : अस्पताल में भर्ती होने से डिस्चार्ज होने तक के खर्चों को इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन के तहत कैशलेस भी क्लेम किया जाता है। पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन खर्च वे खर्च होते हैं जो बीमित व्यक्ति को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद कवर किए जाते हैं। इनमें दवा, फॉलो-अप और टेस्ट इत्यादि शामिल हैं, जबकि एक्यूपंक्चर जैसे उपचार कवरेज में शामिल नहीं होते हैं। हालांकि, कुछ स्वास्थ्य बीमा कंपनियां अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद 60 दिनों तक कवरेज देती हैं, जबकि कुछ कंपनियां इससे ज्यादा दिनों के लिए भी कवरेज दे सकती हैं। वैसे यह कुछ हद तक पॉलिसी पर भी निर्भर करता है।

पॉलिसी खरीदते समय कुछ आम बातों का ध्यान रखना जरूरी है, भले कुछ रुपये ज्यादा लगें लेकिन हमें एक बेहतर कवरेज वाली पॉलिसी ही लेनी चाहिए। यदि आप myUpchar बीमा प्लस पॉलिसी लेते हैं तो आपको 30 दिन के प्री-हॉस्पिटलाइजेशन और 60 दिन के पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवरेज के साथ ही फ्री ऑनलाइन डॉक्टर कंसल्टेशन की भी सुविधा मिलती है। 

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  1. प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन क्लेम - Claiming Pre And Post Hospitalisation Expenses in Hindi
  2. प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन क्लेम के लिए किन दस्तावेज की जरुरत होती है? - Documents for Pre and Post Hospitalisation Claim in Hindi
  3. प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवर क्यों जरूरी है - Why Pre and Post Hospitalisation Cover is Important in Hindi
  4. प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवर के फायदे - Reasons to Buy Insurance with Pre and Post Hospitalisation Coverage in Hindi
  5. प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवर कैसे काम करता है? - How Does Pre-Hospitalisation and Post-Hospitalization Cover Work in Hindi
  6. प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन क्लेम को कब खारिज कर दिया जाता है? - When are pre and post-hospitalisation claims not accepted in Hindi
  7. क्या पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवर के तहत आयुर्वेदिक उपचार क्लेम कवर होते हैं? - Are ayurvedic treatments covered under post-hospitalisation in Hindi?
  8. याद रखने वाली चीजें - Things to Remember

अस्पताल में भर्ती होने से पहले और अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद के मेडिकल खर्चों को क्लेम करने के लिए समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इस समय के बारे में जानकारी आपको पॉलिसी बॉन्ड से मिल सकती है। यदि आप इस निर्धारित समय से पहले या इसके बाद क्लेम करते हैं तो बीमा कंपनियां इसे खारिज कर सकती हैं।

उदाहरण से समझिए क्लेम कैसे करें

मान लीजिए आपको अस्पताल जाकर डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है, ऐसे में आपको पॉलिसी बॉन्ड में बताए गए समय पर बीमा कंपनी को इन्फॉर्म करना होगा। आप चाहें तो टीपीए को भी इस बारे में इन्फॉर्म कर सकते हैं। टीपीए का मतलब थर्ड पार्टी एडमिनिस्टर होता है, कुछ बीमा कंपनी टीपीए के साथ अनुबंध कर लेती हैं, जो कि एक तरीके से मध्यथ यानी बिचौलिए का काम करते हैं। वैसे मौजूदा दौर में ऑनलाइन सर्विस का भी तेजी से लाभ उठाया जा रहा है, यानी आप कंपनी की वेबसाइट से भी क्लेम कर सकते हैं। एक बार जब कागज बीमा कंपनी तक पहुंच जाएंगे, तो वे इनकी जांच यानी सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करेंगे। बीमाकर्ता जांच करेगा कि खर्च उसी मेडिकल कंडीशन से संबंधित हैं, जिसके लिए रोगी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यदि खर्च संबंधित नहीं हैं तो क्लेम वहीं से रद्द कर दिया जाएगा और यदि सब कुछ सही है तो सत्यापन के बाद, पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अनुसार क्लेम को स्वीकार कर लिया जाएगा।

फिलहाल, प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन दोनों ही स्थितियों में क्लेम करने के लिए, सबसे जरूरी अस्पताल से मिले ओरिजनल बिल्स जैसे रिइम्बर्समेंट के लिए डॉक्टर द्वारा दिया गया सर्टिफिकेट, डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन के साथ ही फीस की रसीद, फार्मेसी बिल्स (जो दवाएं डॉक्टर ने लिखी हैं उन्हीं का क्लेम मिलेगा) इत्यादि दिखाने होते हैं। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेते समय, आवेदकों को जागरुक होना चाहिए और सभी सुविधाओं का आसानी से फायदा उठाने के लिए पहले पॉलिसी बॉन्ड को अच्छे से पढ़ लें।

बीमा पॉलिसियों में दस्तावेज से संबंधित एक लंबी सूची होती है और यह सलाह दी जाती है कि इसे जरूर पढ़ें, ताकि बीमाधारक नियम व शर्तों को लेकर स्पष्ट हो सकें।

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प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन क्लेम के लिए अमूमन निम्नलिखित दस्तावेज की जरूरत होती है : 

  • डिस्चार्ज समरी
  • ओरिजनल बिल्स, जिसमें लागत विवरण (cost break-up) भी शामिल हो
  • ओरिजनल रसीदें (डॉक्टर की फीस, एक्स-रे फिल्म और रिपोर्ट, ब्लड टेस्ट रिपोर्ट और रसीद आदि)
  • लैब व टेस्ट रिपोर्ट
  • यदि इम्प्लांट कराया है, तो इन्वॉयस/स्टिकर/बारकोड की कॉपी।
  • डॉक्टर का कंसल्टेशन लेटर
  • केवाईसी फॉर्म

हॉस्पिटल क्लेम फॉर्म जो कि बीमाधारक द्वारा विधिवत रूप से भरा हुआ हस्ताक्षरित (दस्तखत) होना चाहिए।

ज्यादातर समय, लोगों को यह लगता है कि स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी या कोई फैमिली फ्लोटर मेडिक्लेम केवल अस्पताल के खर्चों को कवर करता है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। इसी जागरूकता की कमी के कारण, लोग अपने मेडिक्लेम का अधिकतम लाभ नहीं ले पाते हैं। देखा जाए, तो पोस्ट के साथ-साथ प्री-हॉस्पिटलाइजेशन भी आपकी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी का एक हिस्सा होता है।

मान लीजिए, जब भी आप बीमार पड़ते हैं या अपने शरीर में कुछ असामान्यताएं पाते हैं, तो आप तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए जाते हैं। डॉक्टर क्लीनिक में अपना सामान्य चेक-अप करते हैं और राहत के लिए तुरंत कुछ दवाएं लिखते हैं। लेकिन, खुराक की अवधि पूरी करने के बाद, यदि आपकी स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो डॉक्टर आपको आगे के निदान और उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दे सकते हैं। ऐसे में अस्पताल में भर्ती होने से पहले डॉक्टर विजिट से लेकर, प्रिस्क्रिप्शन में लिखी गई दवाइयां व टेस्ट जैसे सभी खर्चे आपकी जेब को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए पॉलिसी लेते समय प्री हॉस्पिटलाइजेशन कवरेज विकल्प को चुनने के बारे में जरूर याद रखें।

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प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन के फायदों में निम्नलिखित शामिल हैं :

एक अच्छी स्वास्थ्य बीमा योजना में अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्च भी शामिल होने चाहिए।

  • वित्तीय बोझ को करता है कम : अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्चे रिइम्बर्स हो सकते हैं, जिससे आपके ऊपर पड़ने वाला अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम हो जाएगा।
  • मेडिकल खर्चों से मुक्ति : प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन जैसी सुविधा के साथ, आप अपने मेडिकल खर्चों की चिंता किए बिना इलाज करा सकते हैं।
  • इमर्जेंसी में करता है मदद : कई बार स्वास्थ्य संबंधी इमर्जेंसी आ जाती है, ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती पैसों का प्रबंधन करना होता है। यदि आपकी पॉलिसी में प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन जैसी सुविधा है तो आप इमर्जेंसी में भी चिंता मुक्त रहेंगे और किसी के आगे पैसों के लिए झुकना नहीं पड़ेगा।
  • बचत में फायदेमंद : अक्सर लोग अच्छे इलाज के नाम पर बड़े अस्पताल की ओर भागते हैं, जहां खर्चा भी बड़ा होता है, जिसका प्रभाव सीधे आपकी बचत पर पड़ता है, लेकिन प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन जैसी सुविधा के साथ आपकी बचत खत्म नहीं होने पाएगी। जबकि रिइम्बर्समेंट जैसे मामलों में तो आपको सारा पैसा लौटा (यदि सम-इन्श्योर्ड से ज्यादा का बिल नहीं है तो) दिया जाएगा। दूसरी तरफ, यही पैसा आप अपने परिवार के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

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हेल्थ इन्शुरन्स में प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवर रिइम्बर्समेंट मॉडल पर कार्य करता है। यहां उदाहरण से समझिए :

  • मान लीजिए किसी दिन आप डॉक्टर के पास गए और उन्होंने कुछ टेस्ट लिखे। जिसके बाद स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ने आपको अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी और आप भर्ती हो भी गए। इस स्थिति में डॉक्टर की फीस, लिखी दवाएं और टेस्ट का मूल्य यह सब प्री-हॉस्पिटलाइजेशन खर्च में आएगा।
  • मान लीजिए रोगी को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है, या उसका इलाज चल रहा है, या उसे डिस्चार्ज किया जा रहा है, तो यह अस्पताल में भर्ती होने का खर्च कहलाएगा। इस तरह के खर्च को इन्शुरन्स कंपनियां नेटवर्क में मौजूद अस्पतालों के साथ कैशलेस माध्यम से भी निपटाती हैं।
  • फॉलोअप ट्रीटमेंट अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद का खर्च क​हलाएगा। फॉलोअप ट्रीटमेंट किसी बीमारी का इलाज खत्म होने के बाद समय-समय पर रोगी को दी जाने वाली देखभाल है। इसमें नियमित मेडिकल चेकअप शामिल हैं, जिसमें एक फिजिकल टेस्ट, ब्लड टेस्ट और इमेजिंग टेस्ट शामिल हो सकते हैं।

जिस बीमारी के लिए बीमित व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उससे संबंधित मेडिकल बिल को बीमा कंपनी या टीपीए तक पहुंचाने की जरूरत होती है और यह सब निर्धारित समय पर किया जाता है।

जब आपके द्वारा भेजे गए मेडिकल बिल का सत्यापन कर लिया जाता है तो बीमाकर्ता (insurer) सभी बिल को रिइम्बर्स कर देता है, यानी बीमित व्यक्ति द्वारा दिए गए अकाउंट में पैसा भेज दिया जाता है। हालांकि, यह सब कुछ तुरंत नहीं होता है, इसमें कुछ दिनों (आमतौर पर 30 दिन या इससे ज्यादा) का वक्त लग सकता है।

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स्वास्थ्य बीमा का फायदा पाने के लिए, बीमा प्रदाता (insurance provider) को आपके हेल्थ इन्शुरन्स क्लेम के बारे में उचित समय पर पता होना जरूरी है। ध्यान रखें कि कुछ ऐसी भी शर्तें हैं, जिनमें अस्पताल में भर्ती होने से पहले और अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद के मेडिकल खर्च संबंधी क्लेम को खारिज किया जा सकता है। इसका एक सामान्य उदाहरण यह है कि यदि कोई बीमित व्यक्ति प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कवरेज में आने वाले शर्तों के बाहर किसी स्थिति के लिए मेडिकल खर्च कर रहा है तो वह प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन के लिए क्लेम नहीं कर सकता है। यही कारण है कि प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन में क्या-कवर किया जा रहा है, इसका आपको पता होना चाहिए।

दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करें कि आप एक ऐसे प्रोवाइडर के साथ बीमा पॉलिसी ले रहे हैं, जिसका क्लेम रेशियो बहुत अच्छा है। यह रेशियो ज्यादा होने का मतलब है कि उस बीमा कंपनी ने ज्यादा क्लेम निपटाए हैं और रेशियो कम होने का मतलब बीमा कंपनी द्वारा क्लेम निपटाए जाने की संख्या कम है, जो कि ग्राहक के तौर पर अच्छा संकेत नहीं है।

निष्कर्ष

देखा जाए तो बढ़ते स्वास्थ्य खर्चों को देखते हुए स्वास्थ्य बीमा खरीदना खुद को सुरक्षित करने का सबसे बढ़िया और आसान माध्यम है। इस दौर में लोग इसके बारे में अधिक जागरुक हो रहे हैं और इसलिए, स्वास्थ्य बीमा योजनाएं पहले से कहीं अधिक मजबूती से बाजार में प्रवेश कर रही हैं। आज बाजार में उपलब्ध स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों की भारी मात्रा को देखते हुए अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद में अच्छा कवरेज प्राप्त करने का चलन जोरों पर है।

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कुछ बीमाकर्ता ऐसे खर्चों को कवर करते हैं, जबकि कुछ नहीं करते हैं, यह निर्भर करता है कि आपने किस बीमा कंपनी को चुना है। यदि आप इस बारे में जानने चाहते हैं तो आपको स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के इन्क्लुजन और एक्सक्लुजन को देखना होगा।

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यहां प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन से जुड़े खर्चों के बारे में ध्यान देने योग्य बातों की सूची दी गई है :

  • अस्पताल में भर्ती होने से पहले और डिस्चार्ज होने के बाद इलाज की लागत उसी स्थिति से जुड़ी होनी चाहिए, जिसके लिए मरीज को भर्ती किया गया था।
  • आमतौर पर अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद के क्लेम पर केवल तभी विचार किया जाता है, जब वे एक निश्चित अवधि (उदाहरण के लिए, 45 से 90 दिनों) के दौरान किए गए हों। अलग-अलग बीमा कंपनियों के लिए ये दिन अलग-अलग हो सकते हैं। निश्चित समय सीमा के बाद किए गए किसी भी खर्च को बीमाकर्ता द्वारा कवर नहीं किया जाएगा।
  • क्लेम करने के लिए, सुनिश्चित करें कि आपने बीमाकर्ता/टीपीए को सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए हैं।
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