लगातार खराब हो रही जीवनशैली के कारण हमारा शरीर विभिन्न प्रकार की बीमारियों का शिकार होता जा रहा है। आजकल हर परिवार में कई सदस्य ऐसे पाए जाते हैं, जो किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त होते हैं। इतना ही नहीं है मेडिकल क्षेत्र में महंगाई भी लगातार नए आसमान छू रही है, यही कारण है कि लोगों को अस्पतालों में जाने से डर लगने लगा है। लेकिन अपने व परिवार की स्वास्थ्य कल्याण के लिए उन्हें अच्छी चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना जरूरी है। ऐसा सिर्फ एक अच्छी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी की मदद से संभव हो सकता है, जो आपकी जेब पर दबाव डाले बिना ही आपको अच्छे अस्पताल में इलाज कराने की सुविधा प्रदान करता है।

यदि आपने अभी तक कोई हेल्थ इन्शुरन्स प्लान नहीं खरीदा है, तो आपको देरी न करते हुए जल्द से जल्द अपने व परिवार के लिए एक अच्छी सी पॉलिसी खरीद लेनी चाहिए। हालांकि, प्लान खरीदने से पहले आपको उसके बारे में अच्छे से पढ़ लेना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि कई ऐसी चीजें होती हैं, जिनके बारे में हमे बीमा खरीदने से पहले ही जान लेना चाहिए। इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन और आउट-पेशेंट भी ऐसे ही कुछ पॉइंट्स हैं, जिनके बारे में आपको पता होना जरूरी है। आज हम आपको इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन और आउट-पेशेंट के बारे में बताएंगे और साथ ही यह भी जानकारी देने की कोशिश करेंगे कि इनका हेल्थ इन्शुरन्स प्लान से क्या संबंध है।

  1. हेल्थ इन्शुरन्स में इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन क्या है
  2. हेल्थ इन्शुरन्स में इन-पेशेंट केयर क्या है
  3. हेल्थ इन्शुरन्स में आउट-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन क्या है
  4. हेल्थ इन्शुरन्स में आउट-पेशेंट केयर क्या है
  5. इन-पेशेंट और आउट-पेशेंट का हेल्थ इन्शुरन्स से क्या संबंध है
  6. इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन और आउट-पेशेंट में क्या अंतर है
  7. myUpchar बीमा प्लस देता है कवरेज

“इन-पेशेंट” शब्द उस व्यक्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसे ट्रीटमेंट के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन आमतौर पर दो प्रकार का होता है, जिन्हें प्लान्ड इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन और इमरजेंसी इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन के नाम से जाना जाता है। हेल्थ इन्शुरन्स में इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन पर अलग से कवरेज प्रदान की जाती है। यदि आपके द्वारा ली गई बीमा योजना में इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन पर कवरेज मिलती है और आपको किसी बीमारी, चोट या सर्जरी आदि के लिए 24 घंटे से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ जाता है तो आपको इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन के रूप में मेडिकल खर्च पर कवरेज मिल जाती है। 

हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसियों में इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन एक आम कवरेज है और अधिकतर स्वास्थ्य बीमा कंपनियां इस पर कवरेज प्रदान करती हैं। हालांकि, वे इसपर कितना कवरेज प्रदान करती हैं, वह उनके प्लान पर निर्भर करता है। जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया है कि इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन की कवरेज का लाभ उठाने के लिए आपको लगातार 24 घंटे से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है और यह नियम प्लान्ड और इमरजेंसी दोनों इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन पर लागू होता है।

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मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उसे दी गई मेडिकल सुविधाओं को इन-पेशेंट केयर कहा जाता है। इस दौरान डॉक्टर, नर्स व अन्य मेडिकल प्रोफेशनल आपकी समय-समय पर शारीरिक जांच करते हैं और आपको मेडिकल सुविधाएं प्रदान करते हैं। यदि अस्पताल में भर्ती हुए मरीज एक स्वास्थ्य बीमित व्यक्ति है, तो इस दौरान डॉक्टर, नर्स व अन्य चिकित्सा पेशेवरों की फीस और अन्य खर्च बीमा कंपनी द्वारा ही उठाए जाते हैं। इसके अलावा इन-पेशेंट केयर के दौरान होने वाले अन्य सभी खर्च भी (जैसे दवाएं आदि) एक निश्चित सीमा तक बीमा कंपनी ही उठाती है।

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आउट-पेशेंट वह मरीज होता है, जिसको इलाज कराने के लिए अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती है अर्थात् उसका इलाज होने में 24 घंटे से भी कम समय लगता है। आउट-पेशेंट में मुख्य रूप से डॉक्टर परामर्श, निदान व अन्य वे सभी प्रक्रियाएं शामिल हैं जिन्हें अस्पताल से बाहर किया जा सकता है। हेल्थ इन्शुरन्स में आउट-पेशेंट पर विशिष्ट शर्तों व नियमों के अनुसार कवरेज दी जाती है। इसलिए यदि आप ओपीडी कवरेज चाहते हैं, तो हेल्थ इन्शुरन्स प्लान खरीदते समय इसके बारे में पहले जानकारी ले लें। इसके अलावा आप अपने हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में आउट-पेशेंट डिपार्टमेंट को एक एड-ऑन के रूप में भी शामिल कर सकते हैं।

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24 घंटे से कम समय के भीतर ही की गई इलाज प्रोसीजर को आउट-पेशेंट केयर में रखा जाता है। इसमें आमतौर पर नैदानिक टेस्ट जैसे छाती का एक्स-रे, सीटी स्कैन, ब्लड टेस्ट, यूरिनलिसिस और कीमोथेरेपी आदि शामिल हैं। आजकल एडवांस टेक्नोलॉजी की मदद से कई प्रकार के इलाज व प्रोसीजर भी आउट-पेशेंट केयर में शामिल कर दिए गए हैं। इन-पेशेंट केयर की तुलना में आउट-पेशेंट केयर में मेडिकल खर्च कम होता है और साथ ही आपको परेशानियां भी कम होती हैं। हेल्थ इन्शुरन्स में आउट-पेशेंट केयर पर कवरेज मिलना आपके प्लान पर निर्भर करता है। हालांकि, बहुत सी हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां हैं, जो आउट-पेशेंट केयर पर कवरेज प्रदान करती हैं।

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वैसे तो इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन और आउट-पेशेंट ये दोनों एक अस्पताल के अलग-अलग डिपार्टमेंट होते हैं। यदि सीधे तौर पर देखा जाए तो इनका किसी भी हेल्थ इन्शुरन्स प्लान से कोई संबंध नहीं होता है। हालांकि, यदि कवरेज की बात की जाए तो ये दोनों किसी हेल्थ इन्शुरन्स प्लान का एक हिस्सा हो सकते हैं। आपके द्वारा खरीदे गए हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में इन-पेशेंट और आउट-पेशेंट को कवरेज दी जा रही है या नहीं, यह पूरी तरह से आपके प्लान पर ही निर्भर करता है। हालांकि, भारत उपलब्ध अधिकतर हेल्थ इन्शुरन्स प्लान में इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन पर एक निश्चित सीमा पर कवरेज मिल जाती है। जबकि कुछ स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में आउट-पेशेंट पर कवरेज नहीं मिलती है और वहीं कुछ हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियां विशेष नियम व शर्तों के अनुसार ओपीडी पर कवरेज प्रदान करती हैं।

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जैसा कि आप जान ही चुके हैं कि इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन और आउट-पेशेंट दोनों से पूरी तरह से विपरीत हैं। जब कोई व्यक्ति 24 घंटे या उससे लंबे समय तक उसे अस्पताल में रहना पड़ता है या फिर उसे लंबे समय तक भर्ती किया जाता है, तो उसे इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन कहा जाता है। वहीं यदि व्यक्ति को अपना इलाज कराने के लिए अस्पताल में 24 घंटे से अधिक समय तक रुकने की जरूरत नहीं है या फिर उसे भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है तो उसे आउट-पेशेंट कहा जाता है। आउट पेशेंट का इलाज आउट-पेशेंट डिपार्टमेंट में होता है, जिसे आजकल आम भाषा में ओपीडी कहा जाने लगा है।

इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन में आमतौर पर ऐसी स्थितियों का इलाज किया जाता है, जिनमें लगातार डॉक्टर की जांच की आवश्यकता पड़ती है। उदाहरण के लिए इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन में गंभीर बीमारियों व चोटों का इलाज और बड़ी सर्जरियां आदि शामिल की जाती हैं। वहीं आउट-पेशेंट में ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, सामान्य बीमारियों का इलाज, छोटी-मोटी सर्जरी और अन्य मेडिकल प्रोसीजर शामिल हैं।

वहीं अगर खर्च की बात की जाए तो इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन में अधिक खर्च होता है, क्योंकि इसमें मरीज को कई दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ता है और ऐसे में रूम रेंट व अन्य कई खर्च बढ़ जाते हैं। साथ ही इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन में आमतौर पर गंभीर बीमारियों का इलाज व बड़ी सर्जरी की जाती है, जिसमें जाहिर है मेडिकल खर्च अधिक होता है। ठीक इसके विपरीत आउट-पेशेंट डिपार्टमेंट में आमतौर पर छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज किया जाता है और परिणामस्वरूप इसमें होने वाला मेडिकल खर्च भी कम ही होता है।

यदि आप इन-पेशेंट के रूप में अस्पताल में भर्ती हुए हैं, तो आपकी देखभाल आमतौर पर एक बड़ी टीम द्वारा की जाती है, जिसमें मुख्य रूप से डॉक्टर, सर्जन, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट, नर्स, फार्मासिस्ट और फीजिकल थेरेपिस्ट आदि शामिल हैं। वहीं आउट-पेशेंट में सर्जन या किसी स्पेशलिष्ट डॉक्टर की आवश्यकता नहीं होती है। इसमें आमतौर पर जनरल फीजिशियन और फीजिकल थेरेपिस्ट ही आपकी आपका ट्रीटमेंट करते हैं।

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अपने व परिवार के लिए हेल्थ इन्शुरन्स खरीदने में कभी भी देरी नहीं करनी चाहिए, लेकिन उससे पहले इस बात पर अच्छे से सोच-विचार कर लेना चाहिए कि आपके व परिवार के लिए कौन सा प्लान उचित रहेगा। आप एक बार myUpchar बीमा प्लस खरीदने पर भी विचार कर सकते हैं। क्योंकि यह आपको कम प्रीमियम के साथ-साथ 24×7 फ्री टेली ओपीडी जैसी खास सुविधाएं भी देता है। myUpchar बीमा प्लस द्वारा दिया जाने वाला यह एक विशेष फीचर, जिसमें आप बिना पैसे खर्च किए घर बैठे फोन पर ही डॉक्टर से परामर्श कर सकते हैं। कोविड-19 महामारी के समय में टेली ओपीडी की सुविधा आपके लिए एक वरदान हो सकती हैं, क्योंकि इसमें आपको अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती हैं।

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