जब किसी पुरुष के लिए यौन संबंध के समय इरेक्शन को प्राप्त करने या उसे बनाए रखने में परेशानी आती है, तो उसे इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ईडी) कहा जाता है. हालांकि, कभी-कभी इरेक्शन बनाए रखने में कठिनाई होना कोई समस्या नहीं है, लेकिन अगर ऐसा बार-बार और लगातार होता है, तो यह चिंता का विषय है. इससे पुरुष का यौन जीवन बाधित हो सकता है. यहां तक कि पुरुष बांझपन का भी शिकार हो सकता है. ऐसी स्थिति में बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क कर इसका इलाज करवाना चाहिए.
आज इस लेख में हम यहा जानने का प्रयास करेंगे कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या कितनी सामान्य है और इसका इलाज कैसे किया जाता है -
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इस समस्या के संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि ईडी आम समस्या है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ यह समस्या भी बढ़ती है. कुछ स्टडी में ईडी को यौन समस्या का सबसे सामान्य प्रकार माना गया है, जो पुरुषों को प्रभावित करता है.
2018 में हुए वैज्ञानिक शोध में अनुमान लगाया गया था कि करीब एक तिहाई पुरुष ईडी से प्रभावित होते हैं. वहीं, 2019 के वैज्ञानिक शोध के अनुसार, विश्वभर में ईडी के मामले 3 प्रतिशत से 76.5 प्रतिशत के बीच है.
1994 में ईडी के संबंध में मैसाचुसेट्स मेल एजिंग स्टडी हुई थी. हालांकि, ये स्टडी बहुत पुरानी है, लेकिन अधिकरत वैज्ञानिक इस स्टडी का इस्तेमाल करते हैं. इस स्टडी में दावा किया गया था कि लगभग 52 प्रतिशत पुरुषों ईडी के किसी न किसी रूप का सामना करते ही हैं. वहीं, 40 से 70 की उम्र के बीच ईडी के केस लगभग 5 से 15 प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं.
हालांकि, ईडी का जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है, फिर भी युवा पुरुष भी इसका शिकार हाे सकते हैं. जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी में कहा गया है कि ईडी ने 40 वर्ष से कम आयु के लगभग 26 प्रतिशत पुरुषों को प्रभावित किया है.
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ईडी समस्या कब गंभीर होती है?
अगर ईडी की समस्या कभी-कभी होती है, तो यह चिंता का विषय नहीं है. क्लीवलैंड क्लिनिक का अनुमान है कि अगर यह समस्या बार-बार और लगातार हो रही है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है. इस स्थिति में बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करने की जरूरत होती है.
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इरेक्टाइल डिसफंक्शन का इलाज
आमतौर पर इरेक्टाइल डिसफंक्शन का इलाज बिना दवा के ही किया जाता है. ऐसी स्थिति में निम्न चीजों पर ध्यान देने से इस समस्या को खत्म किया जा सकता है -
बेहतर लाइफ स्टाइल
ईडी के पीछे मुख्य कारण मोटापा, डायबिटीज, हाई बीपी, हृदय रोग व मेटाबॉलिक सिंड्रोम को माना गया है. ऐसे में इन शारीरिक समस्याओं को ठीक करने की जरूरत होती है. इसके लिए, नियमित रूप से एक्सरसाइज, योग व मेडिटेशन करने की जरूरत है. साथ ही शराब व सिगरेट से भी दूरी बनाने की जरूरत है.
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दवा
मरीज की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर कुछ दवाएं भी दे सकते हैं. अवनाफिल, सिल्डेनाफिल, टाडालाफिल, वरडेनाफिल आम ईडी दवाएं हैं. ये दवाएं पेनिस में खून के प्रवाह को बेहतर करने में मदद करती हैं. अगर ईडी की समस्या कम टेस्टोस्टेरोन के कारण है, तो डॉक्टर टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के लिए कह सकते हैं.
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मनोवैज्ञानिक इलाज
अगर किसी को ईडी की समस्या तनाव, अवसाद, पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) या चिंता जैसी मनोवैज्ञानिक समस्या के कारण होता है, तो टॉक थेरेपी से लाभ हो सकता है.
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पेनिस पंप
पेनिस पंप, या वैक्यूम इरेक्शन पंप, एक ट्यूब होती है, जो पेनिस के ऊपर फिट हो जाती है. इस पंप इरेक्शन को बनाने में मदद करता है. यह माइल्ड ईडी का बेहतर विकल्प हो सकता है.
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ऑपरेशन
आमतौर पर सर्जरी तभी की जाती है जब इलाज के अन्य विकल्प से फायदा नहीं होता है. पेनाइल प्रोस्थेसिस का इस्तेमाल किया जा सकता है. प्रोस्थेसिस में पेनिस के बीच में एक इन्फ्लेटेबल रॉड लगाई जाती है.
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सारांश
इस लेख से यह स्पष्ट होता है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन कोई गंभीर समस्या नहीं है, बल्कि आम है. किसी भी उम्र का कोई भी पुरुष इसका शिकार हो सकता है, लेकिन अधिकतर मामलों में यह समस्या गंभीर नहीं होती और थोड़ी-सी सावधानी बरतने पर यह अपने आप ठीक हो जाती है. वहीं, कुछ मामलों में यह समस्या बार-बार और लगातार होती है, जिस कारण से यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है. ऐसे में लाइफस्टाइल में बदलाव कर और जरूरत पड़ने पर दवा का सेवन करने से इसे ठीक किया जा सकता है. सिर्फ कुछ मामलों में ही हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी व सर्जरी की जरूरत पड़ती है.
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इरेक्टाइल डिसफंक्शन कितना आम है? के डॉक्टर
Dr. Purushottam Sah
पुरुष चिकित्सा
40 वर्षों का अनुभव



