विश्वभर में लगभग 7 में से 1 जोड़ा इनफर्टाइल है, जिसका अर्थ है कि वे गर्भधारण करने में सक्षम नहीं हैं। एक जोड़े को इनफर्टाइल तब माना जाता है जब वह एक वर्ष या उससे अधिक समय तक लगातार, असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण न कर पा रहे हों। इनमें से आधे जोड़ों में, पुरुष बांझपन कारण होता है।

पुरुष बांझपन शुक्राणु की कमी, अबनॉर्मल स्पर्म फंक्शन या रुकावटों के कारण हो सकता है। बीमारी, चोट, क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याएं, खराब जीवनशैली और अन्य कारक पुरुष बांझपन में योगदान कर सकते हैं।

गर्भधारण करने में असमर्थता तनावपूर्ण और निराशाजनक हो सकती है, लेकिन पुरुष बांझपन के लिए कई उपचार उपलब्ध हैं।

  1. कितने भारतीय पुरुषों में बांझपन होता है? - How common is male infertility in India in Hindi
  2. पुरुषों में बांझपन के लक्षण - Male infertility symptoms in Hindi
  3. पुरुष बांझपन के कारण क्या हैं? - Male infertility causes in Hindi
  4. मेल इनफर्टिलिटी से बचाव - Preventing male infertility in Hindi
  5. पुरुषों में बांझपन की जांच और टेस्ट - Male infertility tests and diagnosis in Hindi
  6. पुरुषों बांझपन का इलाज - Male infertility treatment in Hindi
पुरुषों में बांझपन के डॉक्टर

बांझपन की समस्या युगों से एक चिंता का विषय रही है और आज भी यह एक महत्वपूर्ण नैदानिक समस्या बनी हुई है। यह दुनिया भर में 8-12% जोड़ों को प्रभावित करती है। सभी बांझपन के मामलों में, लगभग 40-50% मामले पुरुष बांझपन के कारण होते हैं।

पुरुषों में प्रजनन क्षमता कम होने के लक्षण

पुरुषों में बांझपन के लक्षण इस प्रकार हैं -

पुरुषों में इनफर्टिलिटी क्यों होती है?

  • 90 प्रतिशत से अधिक पुरुषों में बांझपन का कारण स्‍पर्म की खराब क्‍वालिटी और कम संख्‍या है। इसके अलावा किसी शारीरिक बीमारी, हार्मोंस में असंतुलन और अनुवांशिक विकार के कारण भी पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्‍या हो सकती है।
  • सबसे पहले पुरुषों में इनफर्टिलिटी का संबंध प्‍यू‍बर्टी की उम्र के दौरान जननांगों के विकास और बनावट पर निर्भर करता है। पुरुषों में कम से कम एक टेस्टिकल ठीक तरह से कार्य करना चाहिए और शरीर टेस्‍टोस्‍टेरोन और अन्‍य हार्मोन बना पाने में समर्थ हो ताकि स्‍पर्म के उत्‍पादन को ट्रिगर और बनाए रखा जा सके।
  • वीर्य में पर्याप्‍त मात्रा में शुक्राणुओं का बनना जरूरी है। अगर वीर्य में स्‍पर्म काउंट कम होता है तो इससे महिला को गर्भधारण करने में कठिनाई आती है। वीर्य में स्‍पर्म काउंट का कम बनना पुरुषों में इनफर्टिलिटी का कारण है।
  • स्‍पर्म क्रियाशील और एक जगह से दूसरी जगह पर जाने में समर्थ होने चाहिए। अगर स्‍पर्म का कार्य या मूवमेंट असामान्‍य होगी तो स्‍पर्म पार्टनर के अंडे तक पहुंच पाने में असमर्थ रहते हैं। स्‍पर्म के अक्रियाशील होने के कारण भी पुरुषों में बांझपन हो सकता है।
  • पुरुषों में वेरिकोसेल के कारण भी इनफर्टिलिटी हो सकती है। इसमें नसों में सूजन होने के कारण टेस्टिकल सूख जाते हैं। वेरिकोसेल के कारण इनफर्टिलिटी होने के स्‍पष्‍ट कारण का अब तक पता नहीं चल पाया है। वेरिकोसेल से स्‍पर्म की क्‍वालिटी पर भी खराब असर पड़ता है।
  • कुछ इंफेक्‍शन स्‍पर्म के उत्‍पादन या स्‍पर्म की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इसकी वजह से घाव बन सकता है जोकि स्‍पर्म के रास्‍ते को बंद कर देता है। गोनोरिया, एचआईवी या कोई यौन संचारित संक्रमण के कारण ऐसा हो सकता है।
  • एंटी-स्‍पर्म एंटी-बॉडीज़ को इम्‍यून सिस्‍टम की कोशिकाएं माना जाता है। ये एंटी-बॉडीज़ गलती से स्‍पर्म को शरीर के लिए हानिकारक समझ लेती हैं और फिर उसे नष्‍ट करने का प्रयास करने लगती हैं। इस वजह से भी पुरुषों में बांझपन हो सकता है।
  • कैंसर या घातक ट्यूमर भी पुरुषों के प्रजनन अंगों को सीधा नुकसान पहुंचा सकता है। प्रजनन से संबंधित हार्मोंस स्रावित करने वाली ग्रंथियों पर ट्यूमर या कैंसर का असर पड़ता है जिससे पुरुषों में इनफर्टिलिटी पैदा हो सकती है। कुछ मामलों में ट्यूमर का इलाज करने के लिए की गई सर्जरीरेडिएशन थैरेपी या कीमोथेरेपी भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है।
  • हार्मोंस में असंतुलन के कारण भी पुरुषों में बांझपन बढ़ सकता है। लो टेस्‍टोस्‍टेरोन और अन्‍य हार्मोंस में असंतुलन के कारण पुरुषों में बांझपन बढ़ सकता है।
  • शरीर में कई ट्यूब्‍स होती है जो स्‍पर्म को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करती हैं। कई कारणों जैसे कि सर्जरी से लगी चोट, संक्रमण की वजह से ये ट्यूब्‍स बंद हो सकती हैं जिस वजह से टेस्टिकल सूख जाते हैं।
  • संभोग के लिए इरेक्‍शन ना हो पाने की स्थिति भी इनफर्टिलिटी का कारण बन सकती है। इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन, प्रीमैच्योर इजैकुलेशन, संभोग के दौरान दर्द होने जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • ग्‍लूटेन के प्रति संवेदनशील होने के कारण भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता कम हो सकती है। अपने आहार में ग्‍लूटन की मात्रा को कम कर इस समस्‍या से बचा जा सकता है।
  • टेस्‍टोस्‍टेरोन रिप्‍लेसमेंट थेरेपी, लंबे समय तक एनाबोलिक स्टेरॉयड का इस्‍तेमाल, कैंसर की दवाएं, एंटी-फंगल दवाएं, अल्‍सर की कुछ दवाओं के कारण भी पुरुषों में फर्टिलिटी घट सकती है।

पुरुष बांझपन से कैसे बच सकते हैं?

पुरुषों में होने वाली कई प्रकार की इनफर्टिलिटी को रोका नहीं जा सकता है। हालांकि, फिर भी कुछ चीज़ों से दूर रहकर पुरुष बांझपन की समस्‍या से बच सकते हैं। जैसे कि :

  • धूम्रपान ना करें।
  • शराब का सेवन कम या बिलकुल बंद कर दें।
  • गैरकानूनी ड्रग्स का इस्‍तेमाल ना करें।
  • वजन संतुलित रखें।
  • नसबंदी ना करवाएं।
  • टेस्टिकल्‍स पर लंबे समय तक हीट पैदा करने वाली चीज़ों से बचें।
  • तनाव से दूर रहें।
  • कीटनाशक, भारी धातु (heavy metals) और अन्‍य विषाक्‍त चीज़ों से दूर रहें।

इनफर्टिलिटी से ग्रस्‍त पुरुषों में इसके एक से ज्‍यादा कारण हो सकते हैं इसलिए महिला और पुरुष दोनों को ही फर्टिलिटी जांच करवानी चाहिए। बांझपन का पता लगाने के लिए कई टेस्‍ट होते हैं जिनमें निम्‍न टेस्‍ट शामिल हैं :

  • सामान्‍य शारीरिक परीक्षण या कोई पुरानी बीमारी - इस टेस्‍ट के अंतर्गत डॉक्‍टर आपके जननांगों की जांच करते हैं और प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले कारक जैसे कि किसी अनुवांशिक स्थिति, पुराने रोग, बीमारियों, चोट या सर्जरी के बारे में पूछते हैं। डॉक्टर आपसे प्‍यूबर्टी उम्र के दौरान आपकी यौन आदतों और यौन विकास के बारे में भी पूछ सकतें हैं।
  • वीर्य की जांच - वीर्य की जांच के लिए पुरुषों के वीर्य का सैंपल लिया जाता है। पुरुष हस्‍तमैथुन या डॉक्‍टर के क्‍लीनिक में एक कंटेनर में इजैकुलेशन द्वारा वीर्य का सैंपल दे सकते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक मान्‍यता की वजह से कुछ पुरुष सीमन कलेक्‍शन के अन्‍य तरीके को अहमियत देते हैं। कुछ मामलों में संभोग के दौरान विशेष प्रकार के कंडोम द्वारा वीर्य का सैंपल लिया जाता है। इसके बाद शुक्राणुओं की संख्‍या की जांच करने के लिए वीर्य को लैब भेजा जाता है और उसके आकर और मूवमेंट की असामान्‍यता का पता लगाया जाता है। इसके अलावा वीर्य में संक्रमण आदि की भी जांच की जाती है। अगर पुरुषों का वीर्य का स्‍तर सामान्‍य आता है तो किसी और टेस्‍ट से पहले डॉक्‍टर उनकी महिला पार्टनर का फर्टिलिटी टेस्‍ट करवाने की सलाह देते हैं।

इसके अलावा इनफर्टिलिटी का पता लगाने के लिए डॉक्‍टर आपको कई और टेस्‍ट करवाने की सलाह दे सकते हैं जिनमें निम्‍न जांच शामिल हैं:

  • स्‍क्रोटल अल्‍ट्रासाउंड - स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड से डॉक्टर को अंडकोष और सहायक संरचनाओं में अवरोधों या अन्य समस्याओं के बारे में पता चलता है। इससे टेस्टिकल्‍स के अंदर या सहायक संरचना में किसी दिक्‍कत का पता चल पाता है।
  • हार्मोंस की जांच - पिट्यूट्री ग्‍लैंड, हाइपो-थैलेमस द्वारा हार्मोंस का उत्‍पादइन किया जाता है और यौन विकास और शुक्राणुओं के उत्‍पादन में टेस्टिकल्‍स अहम भूमिका निभाते हैं। अन्‍य हार्मोनल या अंग की कार्यप्रणाली में असामान्‍यता होने पर भी इनफर्टिलिटी हो सकती है। टेस्‍टेस्‍टेरोन और अन्‍य हार्मोंस के स्‍तर को मापने के लिए ब्‍लड टेस्‍ट करवाया जाता है।
  • पोस्ट ईजैक्यूलैशन यूरीनालिसिस - मूत्र में उपस्थित शुक्राणुओं से ये पता लगाया जा सकता है कि शुक्राणु इजैकुलेशन के दौरान लिंग से बाहर निकलने की बजाय मूत्राशय में वापिस जा रहे हैं।
  • जेनेटिक टेस्‍ट - किसी अनुवांशिक कारण की वजह से भी स्‍पर्म की संख्‍या कम हो सकती है। ब्‍लड टेस्‍ट द्वारा पता लगाया जा सकता है कि किस आनुवांशिक कारण की वजह से पुरुष में इनफर्टिलिटी हो रही है। कई जन्‍मजात या आनुवांशिक सिंड्रोम का पता लगाने के लिए जेनेटिक टेस्‍ट करवाया जाता है।
  • टेस्टिकुलर बायोप्‍सी - इस जांच में सुईं की मदद से टेस्टिकल से सैंपल लिए जाते हैं। अगर टेस्टिकुलर बायोप्‍सी में स्‍पर्म का उत्‍पादन सामान्‍य रहा तो इसका मतलब है कि पुरुष में इनफर्टिलिटी कारण ब्‍लॉकेज या स्‍पर्म के स्‍थानांतरण से संबंधित कोई अन्‍य समस्‍या है।

(और पढ़ें - मेल फर्टिलिटी पैनल)

पुरुषों में बांझपन को दूर करने के लिए कई इलाज पद्धतियां मौजूद हैं। बांझपन के मामलों में महिला पार्टनर की भी जांच की जानी जरूरी है। पुरुषों में इनफर्टिलिटी का इलाज करने के निम्‍न तरीके हैं:

  • सर्जरी - वेरीकोसील को सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। स्‍खलन में शुक्राणु मौजूद ना होने पर स्‍पर्म रिट्रीवल तकनीकों के ज़रिए टेस्टिकल्‍स या एपिडिडाइमिस के ज़रिए सीधे शुक्राणु डाले जाते हैं।
  • संक्रमण का इलाज - एंटी-बायोटिक इलाज से प्रजनन प्रणाली में हुए संक्रमण को ठीक किया जा सकत है लेकिन ये हर मामले में फर्टिलिटी को दोबारा ला पाने में असमर्थ है।
  • सेक्स समस्याओं का इलाज - दवाओं और काउंसलिंग से फर्टिलिटी से संबंधित बीमारियां जैसे कि इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन या प्रीमैच्‍योर इजैकुलेशन को ठीक किया जा सकता है।
  • हार्मोन ट्रीटमेंट और दवाएं - शरीर में किसी हार्मोन के कम या ज्‍यादा या उसके कार्य करने के तरीके में समस्‍या होने पर डॉक्‍टर आपको हार्मोन रिप्‍लेसमेंट या दवाएं लेने की सलाह दे सकते हैं।
  • सहायक प्रजनन तकनीक - इसे एआरटी भी कहा जाता है। इसमें सामान्‍य वीर्यस्‍खलन, सर्जिकल निष्कर्षण या डोनर से शुक्राणु प्राप्‍त किए जाते हैं। इसके बाद स्‍पर्म को महिला यौन मार्ग में डाल दिया जाता है।

जब ट्रीटमेंट काम नहीं कर पाती

कुछ दुर्लभ मामलों में पुरुषों के बांझपन का इलाज हो पाना असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में डॉक्‍टर किसी डोनर से स्‍पर्म लेने या बच्‍चा गोद लेने की सलाह देते हैं।

Dr. Nipa Brahmbhatt

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