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हमारे समाज में सेक्स और यौन स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना अब भी थोड़ा मुश्किल माना जाता है। लोग अक्सर झिझक जाते हैं या मज़ाक बना देते हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि सेक्स सिर्फ़ आनंद का ही हिस्सा नहीं है, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य का भी अहम पहलू है। ऐसे में जब "सेक्स टॉयज़" की बात आती है तो लोग चौंक जाते हैं, जबकि दुनिया भर में ये धीरे-धीरे आम हो चुके हैं। कई लोग इन्हें सिर्फ़ मज़े के लिए नहीं, बल्कि हेल्थ के लिहाज़ से भी उपयोग करते हैं। रिसर्च कहती है कि अगर इन्हें सही तरीके और साफ-सफाई के साथ इस्तेमाल किया जाए, तो ये सुरक्षित होने के साथ-साथ बेहद फायदेमंद भी हो सकते हैं।

(और पढ़ें - सेक्स की जानकारी)

  1. सेक्स टॉयज़ क्या होते हैं और क्यों ज़रूरी हैं?
  2. यौन स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव
  3. संक्रमण और स्वच्छता से जुड़े जोखिम
  4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  5. सारांश
यौन रोग के डॉक्टर

सेक्स टॉयज़ ऐसे इक्विपमेंट्स हैं जो आपके यौन सुख बढ़ाने, यौन स्वास्थ्य सुधारने या यौन जीवन में नयापन लाने के लिए बनाए जाते हैं। इनमें वाइब्रेटर, डिल्डो, मसाजर, और पुरुषों के लिए विशेष उपकरण शामिल हो सकते हैं। ये सिर्फ आनंद के लिए ही नहीं, बल्कि कई चिकित्सकीय सिचुएशन में भी सहायक पाए गए हैं। उदाहरण के लिए मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं को होने वाली ड्राईनेस या योनि से जुड़ी समस्याओं में ये उपकरण ब्लड सर्कुलेश बढ़ाकर आराम पहुँचा सकते हैं। इसी तरह जिन महिलाओं को यौन उत्तेजना में कठिनाई होती है, उनके लिए भी ये उपकरण मददगार हो सकते हैं। पुरुषों में भी कई बार यौन बनाए रखने के लिए इनका प्रयोग अच्छा होता है।

सेक्स टॉयज़ के प्रकार

अब तक के शोध और बाज़ार में उपलब्धता के अनुसार, सेक्स टॉयज़ कई प्रकार के होते हैं।

(और पढ़ें -  सेक्स करने के तरीके)

वाइब्रेटर

वाइब्रेटर सेक्स टॉय होते हैं, जिनका इस्तेमाल शरीर में यौन उत्तेजना बढ़ाने के लिए किया जाता है। ये अलग-अलग आकार और तरह के होते हैं। वाइब्रेटर का इस्तेमाल शरीर के उन हिस्सों पर किया जाता है जो यौन सुख बढ़ाते हैं। इन्हें लिंग, योनी, भगशेफ और गुदा पर बाहरी तौर पर लगाया जा सकता है, या गुदा और योनि में अंदर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। लगातार इस्तेमाल करने से यौन सुख की भावना बढ़ सकती है। वाइब्रेटर का इस्तेमाल अकेले या पार्टनर के साथ किया जा सकता है। यह सभी तरह के पुरुष और महिलाओं में फेमस है।

क्लिटोरल वाइब्रेटर

क्लिटोरल वाइब्रेटर खास तौर पर क्लिटोरिस को उत्तेजित करने के लिए बनाए जाते हैं। ये हल्का-हल्का कंपन करते हैं, जिससे उस हिस्से में रक्त का प्रवाह बढ़ता है और क्लाइमेक्स की संभावना बढ़ जाती है।

वाइब्रेटर का सुरक्षित उपयोग कैसे करें

वाइब्रेटर का इस्तेमाल सुरक्षित है। शोध बताते हैं कि इससे कोई बड़े दुष्प्रभाव बहुत ही कम होते हैं।

वाइब्रेटर कई तरह के होते हैं। कुछ वाइब्रेटर अंदर डालने के लिए होते हैं, जबकि कुछ नहीं। इसके अलावा, कुछ वाइब्रेटर दूसरों की तुलना में ज़्यादा तेज़ वाइब्रेशन कर सकते हैं। कुछ वाइब्रेटर प्लग किए जाते हैं, जबकि कुछ बैटरी से चलते हैं। आपको अपनी जरूरत के हिसाब से वाइब्रेटर चुनने के लिए थोड़ी जानकारी लेना जरूरी है।

वाइब्रेटर के इस्तेमाल को और भी मज़ेदार बनाने के लिए ल्यूब का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह देखना जरूरी है कि ल्यूब आपके वाइब्रेटर के लिए सही हो। आमतौर पर पानी वाले ल्यूब सबसे अच्छे होते हैं।

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डिल्डो

डिल्डो ऐसे इक्विपमेंट्स होते हैं जिनमें वाइब्रेशन नहीं होता है। इनका आकार ज़्यादातर पुरुष के लिंग जैसा होता है। इन्हें योनि या गुदा में डालकर अंदर की उत्तेजना के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डिल्डो कई तरह के साइज़ और डिज़ाइन में मिलते हैं और ये सिलिकॉन, काँच या स्टील जैसी चीज़ों से बनाए जाते हैं। चूँकि इनमें वाइब्रेशन नहीं होता, इसलिए इनसे अनुभव ज़्यादा नैचुरल लगता है। कई महिलाएँ इन्हें जी-स्पॉट को उत्तेजित करने के लिए भी इस्तेमाल करती हैं। अगर ये अच्छे और सुरक्षित मटेरियल से बने हों और इस्तेमाल के बाद साफ रखे जाएँ, तो ये पूरी तरह सुरक्षित माने जाते हैं।

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लव बॉल्स या केगेल बॉल्स

ये छोटी-छोटी बॉल्स होती हैं जो महिलाएँ अपनी योनि के अंदर डालती हैं। इनका मुख्य काम सिर्फ आनंद देना नहीं है, बल्कि योनि की मांसपेशियों को मजबूत बनाना भी है। जब महिलाएँ इन बॉल्स के साथ हल्की-हल्की एक्सरसाइज करती हैं, जैसे चलना या मांसपेशियों को दबाना और छोड़ना, तो उनकी मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। इससे यौन सुख बढ़ता है और उन महिलाओं के लिए भी फायदा होता है जिन्हें पेशाब रिसने की समस्या होती है। डॉक्टर भी कभी-कभी मेनोपॉज़ या डिलीवरी के बाद महिलाओं को मांसपेशियाँ मजबूत करने के लिए ऐसी बॉल्स इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।

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प्रोस्टेट मसाजर

प्रोस्टेट मसाजर खासकर पुरुषों के लिए बनाए गए छोटे उपकरण होते हैं। इन्हें गुदा के रास्ते अंदर डालकर प्रोस्टेट ग्लैंड पर हल्का दबाव दिया जाता है। प्रोस्टेट को कभी-कभी "पुरुषों का जी-स्पॉट" भी कहा जाता है क्योंकि इसे छूने या मसाज करने से अच्छा महसूस होता है। डॉक्टरी रूप से, प्रोस्टेट मसाज से प्रोस्टेट में खून का बहाव बेहतर हो सकता है और कुछ प्रोस्टेट की समस्याओं जैसे सूजन या जकड़न में भी आराम मिल सकता है। लेकिन इसे इस्तेमाल करते समय साफ-सफाई, पर्याप्त लुब्रिकेशन और सावधानी रखना बहुत ज़रूरी है, ताकि चोट या संक्रमण न हो।

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फ्लेशलाइट और मास्टर्बेटर

ये पुरुषों के लिए बनाए गए सेक्स टॉयज़ हैं। फ्लेशलाइट एक सिलिकॉन या रबर से बना छोटा इक्विप्मेंट्स होता है, जो दिखने में टॉर्च जैसा लगता है। इसका अंदर का हिस्सा योनि, गुदा या मुंह जैसी बनावट का अनुभव कराता है। पुरुष इसे हस्तमैथुन के दौरान इस्तेमाल करते हैं और यह अनुभव को असली जैसा महसूस कराता है। इसी तरह, मास्टर्बेटर भी अलग-अलग डिज़ाइन में आते हैं, जैसे अंडे के आकार या असली अंग जैसा रूप होता है। इनका पर्पस पुरुषों को यौन तनाव से राहत देना, शीघ्रपतन को कंट्रोल करना और सुरक्षित तरीके से आनंद लेना होता है।

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एनल टॉयज़

एनल टॉयज़ गुदा की जगह को उत्तेजित करने के लिए बनाए जाते हैं। इसमें बट प्लग, एनल बीड्स और प्रोस्टेट मसाजर जैसी चीज़ें शामिल हो सकती हैं। ये खास तौर पर उन लोगों के लिए होते हैं जिन्हें गुदा का आनंद लेना पसंद है। हालाँकि गुदा का इलाका नाज़ुक होता है और वहाँ नेचुरल लुब्रिकेशन नहीं होता, इसलिए एनल टॉयज़ का इस्तेमाल हमेशा पर्याप्त लुब्रिकेंट के साथ और बहुत सावधानी से करना चाहिए। डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि एनल टॉयज़ हमेशा बॉडी-सेफ सिलिकॉन या मेटल के बने हों और इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह साफ किए जाएँ तो ही वो अच्छे रहते हैं।

कपल्स टॉयज़

ये ऐसे टॉयज़ होते हैं जिन्हें पति-पत्नी या किसी भी कपल द्वारा साथ में यूज़ किया जाता है। इनमें डबल वाइब्रेटर, रिमोट-कंट्रोल टॉयज़ और पहनने के लायक इक्विपमेंट्स शामिल होते हैं। इनका पर्पस केवल फिजिकल सुख बढ़ाना नहीं बल्कि रिश्ते में अंतरंगता और जुड़ाव को भी मजबूत करना है। कपल्स टॉयज़ से पार्टनर दोनों को एक साथ ख़ुशी मिल सकती है, जिससे आपसी विश्वास और इमोशनल प्रोक्सिमिटी और गहरी हो जाती है।

यौन स्वास्थ्य सिर्फ़ फिजिकल सुख तक लिमिटेड नहीं होता, बल्कि इसका सीधा असर हमारे दिमाग़ और भावनाओं पर भी पड़ता है। कई शोध बताते हैं कि सेक्स टॉयज़ के इस्तेमाल से सटिस्फिकेशन बढ़ती है, जिससे तनाव कम होता है और नींद भी अच्छी आती है। महिलाओं में ये उपकरण उनकी इच्छा बढ़ाने और ऑर्गैज़्म पाने में मदद करते हैं। जिन महिलाओं को पेल्विक फ्लोर से जुड़ी समस्या होती है, उनके लिए भी ये उपयोगी हो सकते हैं, क्योंकि इनके प्रयोग से वहाँ की मांसपेशियाँ मज़बूत रहती हैं।

पुरुषों में भी अगर सही और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो ये प्रोस्टेट की सेहत बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे, अगर इनका ज़्यादा या गलत तरीके से प्रयोग किया जाए तो असुविधा हो सकती है। इसलिए इन्हें हमेशा सोच-समझकर और सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना चाहिए।

1. शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

सेक्स टॉयज़ खून के बहाव को ठीक रखते हैं और प्राइवेट पार्ट्स को ज्यादा सेंसिटिव बनाते हैं। महिलाओं में ये इक्विपमेंट्स योनि की मांसपेशियों को एक्टिव रखते हैं और पेल्विक फ्लोर यानी नीचे की मांसपेशियों को मज़बूत बनाने में मदद करते हैं। पीरियड बंद होने के बाद के समय योनि की स्किन पतली और सूखी हो जाती है। ऐसे में वाइब्रेटर का इस्तेमाल वहाँ खून का बहाव बढ़ाने और नमी बनाए रखने में फायदेमंद हो सकता है। पुरुषों के लिए प्रोस्टेट मसाजर, अगर सही तरीके से इस्तेमाल किए जाएँ, तो सेहत को फायदा पहुँचा सकते हैं।

2. मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
सेक्स से मिलने वाली खुशी का सीधा असर दिमाग की शांति पर पड़ता है। जब कोई इंसान अपनी चाहतों को सुरक्षित तरीके से पूरा कर लेता है, तो उसका तनाव और टेंशन कम हो जाता है। कई रिसर्च में ये बात सामने आई है कि अगर सेक्स से आनंद मिलता रहे, तो नींद अच्छी आती है और मूड भी ठीक बना रहता है।

3. रिश्तों पर प्रभाव
कपल्स के लिए सेक्स टॉयज़ रिश्ते में ताज़गी और एक्ससिटेमेंट लाने का तरीका हो सकते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि लंबे समय से साथ रह रहे पति-पत्नी का सेक्स लाइफ़ थोड़ा बोरिंग सा लगने लगता है। ऐसे में ये टॉयज़ उनकी लाइफ़ में नयापन लाने, मज़ा बढ़ाने और आपस में बातचीत को और खुला बनाने में मदद करते हैं।

सेक्स टॉयज़ के फायदे तो बहुत हैं, लेकिन अगर सफाई का ध्यान न रखा जाए तो यह नुकसान भी कर सकते हैं। इन्हें इस्तेमाल करने के बाद अच्छे से धोना और साफ करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इन पर जल्दी बैक्टीरिया और फंगस जम सकते हैं। अगर लापरवाही हो जाए तो वजाइनल इंफेक्शन, यूरिन इंफेक्शन या यीस्ट इंफेक्शन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

इसके साथ ही, घटिया क्वालिटी के टॉयज़ में हानिकारक केमिकल हो सकते हैं, जो लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर प्रजनन यानी रिप्रोडक्टिव हेल्थ को खराब कर सकते हैं। इसलिए हमेशा भरोसेमंद जगह से मेडिकल ग्रेड मटेरियल से बने टॉयज़ ही खरीदने और इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। और अगर इन्हें पार्टनर के साथ शेयर करना हो, तो इंफेक्शन से बचने के लिए कंडोम का इस्तेमाल करना सबसे सेफ तरीका है।

गलत उपयोग के खतरे

कुछ मामलों में देखा गया है कि ग़लत तरीके से उपयोग करने पर अंदर चोट या असुविधा हो सकती है। बहुत तेज़ या गलत दबाव से प्रयोग करने पर पुरुषों और महिलाओं दोनों को परेशानी हो सकती है। यह सिचुएशन भले ही कम देखने को मिले लेकिन इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। अगर कभी इस्तेमाल के बाद असामान्य दर्द, खून निकलना या अजीब सी परेशानी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

सही उपयोग के तरीके और सुझाव

सेक्स टॉयज़ को सुरक्षित और सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले, हर बार उपयोग से पहले और बाद में टॉय को अच्छे से साफ करें। अगर टॉय बैटरी या चार्जिंग से चलता है तो उसके इलेक्ट्रिक हिस्से को पानी से बचाएँ। लुब्रिकेंट चुनते समय भी सावधानी रखें – सिलिकॉन वाले टॉयज़ के साथ हमेशा वॉटर-बेस्ड लुब्रिकेंट ही इस्तेमाल करें। शुरुआत धीरे-धीरे करें और अपने शरीर की प्रतिक्रिया समझते हुए आगे बढ़ें। अगर टॉय किसी और के साथ शेयर करना हो तो कंडोम का इस्तेमाल ज़रूरी है। और अगर कभी दर्द या असुविधा महसूस हो तो तुरंत रुक जाएँ।

टॉय को साफ करने के लिए गुनगुने पानी और हल्के साबुन या खास क्लीनर का इस्तेमाल करें। हमेशा अच्छी क्वालिटी और मेडिकल-ग्रेड मटेरियल से बने टॉयज़ ही खरीदें ताकि कोई नुकसान न हो। याद रखें – आराम और सुरक्षा सबसे ज़रूरी है।

कानूनी सिचुएशन

भारत में सेक्स टॉयज़ पर कानून पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इन्हें खरीदना या बेचना सीधे तौर पर ग़ैरकानूनी नहीं है, लेकिन कई बार अश्लीलता से जुड़े नियमों का सहारा लेकर इनकी बिक्री पर रोक लगा दी जाती है। ज़्यादातर ये ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर बिकते हैं क्योंकि वहाँ सीधा नियंत्रण कम होता है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ये चीज़ें शरीर के लिए सुरक्षित हैं और लोग आपसी सहमति से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं, तब तक इन्हें रोकने की ज़रूरत नहीं है। फिर भी, इस मुद्दे पर भारत में समाज और कानून दोनों के बीच बहस जारी है।

शोध और भविष्य की दिशा

पिछले कुछ सालों में किए गए शोध बताते हैं कि सेक्स टॉयज़ को सिर्फ मज़े के तौर पर देखना ठीक नहीं है। कई बार ये स्वास्थ्य से जुड़ी परिस्थितियों में भी काम आते हैं। नई तकनीक के साथ इन्हें और बेहतर और सुरक्षित बनाया जा रहा है, ताकि लोग इन्हें अपनी ज़रूरत के हिसाब से आराम से इस्तेमाल कर सकें। आने वाले समय में इस पर और रिसर्च होने की उम्मीद है, जिससे यह यौन स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य को और मज़बूत बना सकेंगे।

आपके सवालों के जवाब यहाँ पाएं।

क्या मुझे किसी विशेष आकार की आवश्यकता है?

अगर आपने कभी डिल्डो इस्तेमाल नहीं किया है, तो छोटे आकार से शुरुआत करें और फिर धीरे-धीरे बड़े आकार के डिल्डो इस्तेमाल करें। सेक्स टॉय बनाने वाली कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले डिल्डो और वाइब्रेटर पर 2015 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, आमतौर पर बेचे जाने वाले डिल्डो की लंबाई 4 से 6 इंच और परिधि 4 से 5 इंच के बीच होती है। हमेशा ऐसा डिल्डो चुनें जो आपको आरामदायक लगे।

डिल्डो किस सामग्री से बने होते हैं?

शरीर के लिए सुरक्षित डिल्डो काँच, स्टेनलेस स्टील या मेडिकल ग्रेड सिलिकॉन से बने होते हैं। डिल्डो प्लास्टिक, रबर, चमड़े या विनाइल से भी बनाए जा सकते हैं, लेकिन इन सामग्रियों में ऐसे रसायन हो सकते हैं जो आप अपने शरीर में नहीं चाहते और इन्हें ठीक से साफ़ करना भी मुश्किल होता है।

क्या मुझे किसी विशेष आकार की आवश्यकता है?

अगर आपने कभी डिल्डो इस्तेमाल नहीं किया है, तो छोटे आकार से शुरुआत करें और फिर धीरे-धीरे बड़े आकार के डिल्डो इस्तेमाल करें। सेक्स टॉय बनाने वाली कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले डिल्डो और वाइब्रेटर पर 2015 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, आमतौर पर बेचे जाने वाले डिल्डो की लंबाई 4 से 6 इंच और परिधि 4 से 5 इंच के बीच होती है। हमेशा ऐसा डिल्डो चुनें जो आपको आरामदायक लगे।

क्या कपल्स भी सेक्स टॉयज़ का इस्तेमाल कर सकते हैं?

जी हाँ, कपल्स टॉयज़ खास तौर पर पति-पत्नी या पार्टनर्स के लिए बनाए जाते हैं। ये रिश्तों में नयापन, अंतरंगता और excitement लाने का काम करते हैं। रिसर्च से पता चला है कि कपल्स टॉयज़ से रिश्तों में बातचीत और संतुष्टि दोनों बढ़ती हैं।

सेक्स टॉयज़ इस्तेमाल करने के बाद सफाई कैसे करनी चाहिए?

हर बार उपयोग से पहले और बाद में टॉय को गुनगुने पानी और हल्के साबुन या विशेष क्लीनर से धोना ज़रूरी है। बैटरी या चार्जिंग वाले टॉयज़ के इलेक्ट्रिक हिस्से को पानी से बचाना चाहिए। सही सफाई से बैक्टीरिया और फंगस नहीं जमते और संक्रमण से बचाव होता है

क्या भारत में सेक्स टॉयज़ कानूनी हैं?

भारत में सेक्स टॉयज़ को लेकर कानून पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इन्हें खरीदना और इस्तेमाल करना अपराध नहीं है, लेकिन कई बार अश्लीलता से जुड़े नियमों के तहत बिक्री पर रोक लग सकती है। ज़्यादातर ये ऑनलाइन उपलब्ध हैं और मेडिकल-ग्रेड टॉयज़ को चुनना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

क्या सेक्स टॉयज़ का ज़्यादा इस्तेमाल नुकसान कर सकता है?

हाँ, अगर बहुत ज़्यादा या गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो त्वचा में जलन, चोट या असुविधा हो सकती है। हर बार शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान देना ज़रूरी है। अगर किसी को दर्द, खून या असामान्य समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

सेक्स टॉयज़ आधुनिक जीवन का केवल मनोरंजन साधन नहीं हैं बल्कि कई बार चिकित्सकीय दृष्टि से भी उपयोगी साबित होते हैं। सही और सुरक्षित तरीके से इनके उपयोग से यौन स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों की गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। हालांकि यह तभी संभव है जब सुरक्षा और स्वच्छता के नियमों का पालन किया जाए। खराब गुणवत्ता वाले उपकरण या गलत उपयोग नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसीलिए हमेशा सही स्रोत से खरीदे गए और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए नियमों का पालन करना सबसे बेहतर है।

Dr. Hakeem Basit khan

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