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एक्सट्रॉकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी या ईएसडब्ल्यूएल बिना चीरा लगाए किए जाने वाला ऑपरेशन है जिसका उपयोग गुर्दे के छोटे पत्थरों और युरेटर (मूत्रवाहिनी) के ऊपरी हिस्से के भीतर फंसी पथरी के इलाज के लिए किया जाता है।

डॉक्टर एनेस्थीसिया के तहत ईएसडब्ल्यूएल करते हैं ताकि ऑपरेशन के दौरान आप बेहोश हों और आपको कोई दर्द महसूस न हो। ईएसडब्ल्यूएल में हाई-एनर्जी शॉकवेव्स (तरंगों) का उपयोग होता है जो गुर्दे की पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देती हैं। फिर ये छोटे टुकड़े यूरिन के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

इस ऑपरेशन में आमतौर पर लगभग एक घंटा लगता है। आपको ऑपरेशन वाले दिन ही घर जाने और एक से दो दिनों के भीतर अपने रोज़मर्रा के काम फिर से शुरू करने की अनुमति दी जा सकती है। इस ऑपरेशन के बाद कोई विशेष आहार की आवश्यकता नहीं है।

सर्जरी के बिना शरीर से गुर्दे की पथरी को निकालने के लिए ईएसडब्ल्यूएल एक अच्छा विकल्प है। यह लागत, संभावित नुकसान, रिकवरी टाइम और अस्पताल में रहने का समय, इन सब को कम करता है।

(और पढ़ें - पथरी के लिए परक्यूटेनियस नेफ्रो लिथोटॉमी)

  1. एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी क्या होता है? - ESWL Surgery kya hai in hindi?
  2. एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी क्यों की जाती है? - ESWL surgery kab ki jati hai?
  3. एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी होने से पहले की तैयारी - ESWL operation ki taiyari
  4. एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी कैसे की जाती है? - ESWL Operation kaise hota hai?
  5. एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी के बाद देखभाल - Extracorporeal Shock Wave Lithotripsy hone ke baad dekhbhal
  6. एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी की जटिलताएं - Extracorporeal Shock Wave Lithotripsy operation me jatiltaye
एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी के डॉक्टर

एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी स्टोन निकालने का एक सर्जिकल उपचार है। इस प्रक्रिया में एक बाहरी स्त्रोत से 'हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स' का इस्तेमाल किया जाता है जिससे स्टोन्स को छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं और मूत्र पथ के ज़रिये बाहर आ जाते हैं। 

इसका प्रयोग उन मरीज़ों में किया जाता है जिनके गुर्दे में स्टोन है और उस स्टोन में दर्द होता है, साथ ही उससे मूत्रत्याग ब्लॉक हो रहा है। जो स्टोन डायमीटर में 4 mm (0.16 in) और 2 cm (0.8 in) के बीच होते हैं उनके लिए ईएसडब्ल्यूएल किये जाने की अधिक सम्भावना है। 

इस प्रक्रिया का उपयोग यूरेटर व ब्लैडर के स्टोन और प्रोस्टेट बढ़ने के इलाज के लिए भी किया जाता है। 

यदि आप गर्भवती हैं, आपको कोई रक्तस्त्राव सम्बन्धी विकार है, गुर्दे का संक्रमण जिसका इलाज न किया गया हो, मूत्रपथ का संक्रमण (यूटीआई), गुर्दे का कैंसर है, या गुर्दे के काम करने में कोई असामन्यता है तो ये ऑपरेशन नहीं किया जा सकता। 

(और पढ़ें – पथरी के घरेलू उपाय)

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपके डॉक्टर कहें उन सभी सलाहों का पालन करें - 

  • ऑपरेशन से पहले किये जाने वाले टेस्ट
  • ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया की जांच
  • ऑपरेशन की प्लानिंग
  • ऑपरेशन से पहले दी जाने वाली दवाइयाँ
  • ऑपरेशन से पहले फास्टिंग (खाली पेट रहना)
  • ऑपरेशन से पहले अन्य सामान्य सलाह

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

(और पढ़ें - पथरी का होम्योपैथिक इलाज)

यह ऑपरेशन लगभग एक घंटे तक चलता है। मरीज़ को एक विशेष ऑपरेटिंग रूम टेबल पर लिटाया जाता है जिसपर एक पानी से भरा हुआ कुशन लगा हुआ होता है जिसके द्वारा हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स गुर्दे तक प्रेषित की जाती हैं। प्रक्रिया के दौरान एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड का प्रयोग किया जाता है ताकि स्टोन का स्थान जाना जा सके और स्टोन को तोड़ने की प्रभावशीलता के बारे में पता लगाया जा सके। 

कई स्थितियों में युरेटर में स्टेंट भी लगाया जा सकता है जिससे मूत्रनली को विस्तारित किया जा सके और मूत्राशय से स्टोन के पारित होने में आसानी हो।

(और पढ़ें - किडनी स्टोन का आयुर्वेदिक इलाज)

सर्जरी के बाद कुछ हफ़्तों तक स्टोन के टुकड़े मूत्र से पारित होंगे और इससे हल्का दर्द भी हो सकता है। कभी कभी, मरीज़ को इस प्रक्रिया को फिर करवाने की आवश्यकता हो सकती है या कोई और काम चीरकर की जाने वाली प्रक्रिया करवानी पड़ सकती है। सर्जरी के बाद पहले 48 घंटों तक होने वाले मूत्रत्याग को छानकर टन के टुकड़ों को इकठा करें और एक सूखे कंटेनर में रखकर अपने डॉक्टर के पास ले जाएँ जिससे उनकी जांच की जा सके। 

स्टोन के टुकड़ों को पारित करने में आसानी हो इसके लिए प्रतिदिन 8 से 10 गिलास पानी पियें। सर्जरी के बाद कम से कम 24 घंटों तक ड्राइविंग न करें। डॉक्टर द्वारा बताये हुए समय और दिन पर चेक-अप करवाने ज़रूर जाएँ और डॉक्टर द्वारा निर्धारित सभी दवाएं निर्धारित खुराक में लें। आपको कुछ टेस्ट्स करवाने के लिए भी कहा जा सकता है।

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यह एक सुरक्षित ऑपरेशन है हालांकि हर सर्जिकल प्रक्रिया की तरह इससे भी कुछ जोखिम और जटिलताएं जुड़ी हैं -

  1. स्टोन के टुकड़ों के पारित होने पर दर्द (और पढ़ें - पथरी का दर्द कहाँ होता है)
  2. स्टोन के टुकड़ों की वजह से यूरिन के फ्लो में ब्लॉकेज जिससे अन्य सर्जरी करनी पड़ सकती है
  3. संक्रमण
  4. शॉक वेव्स की वजह से ऊतकों को क्षति हो सकती है जिसके कारण गुर्दे के बाहर रक्तस्त्राव हो सकता है

(और पढ़ें - पथरी के लिए यूरेटेरोस्कोपी)

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संदर्भ

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  3. Nephrolithiasis. In: Goldman L, Schafer AI, eds. Goldman-Cecil Medicine. 26th ed. Philadelphia, PA: Elsevier; 2016:chap 117.
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