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हर साल 15 जुलाई को नैशनल प्लास्टिक सर्जरी डे मनाया जाता है। प्लास्टिक और पुनर्निर्माण सर्जरी आमतौर पर इसलिए की जाती है ताकि चेहरे पर या शरीर के किसी अन्य हिस्से पर जन्मजात दोष या दुर्घटना की वजह से अगर किसी भी तरह की त्रुटि या दोष उत्पन्न हो गया हो तो उसे फिर से प्राकृतिक और सही रूप दिया जा सके।

मोटे तौर पर बात करें तो प्लास्टिक सर्जरी के दो घटक होते हैं- पहला है पुनर्निर्माण सर्जरी और दूसरा है सौंदर्य या कॉस्मेटिक सर्जरी। पुनर्निर्माण सर्जरी का मुख्य उद्देश्य शरीर की कार्यप्रणालियों को बेहतर बनाना है। बाकी के समय, प्लास्टिक सर्जरी किसी व्यक्ति के आत्मसम्मान को बेहतर बनाने के लिए की जाती है जिसे सामान्य रूप में स्वीकार किया जा सके- इसे कॉस्मेटिक सर्जरी कहा जाता है।

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जब हम प्लास्टिक सर्जरी की बात करते हैं तो ज्यादातर लोगों को लगता है कि इसमें सिर्फ दो प्रक्रियाएं शामिल हैं- टमी टक यानी पेट कम करवाना और ब्रेस्ट इम्प्लांट यानी स्तन प्रत्यारोपण जिसमें सिलिकॉन इम्प्लांट की मदद से स्तन का पुनर्निर्माण किया जाता है। हालांकि, पुनर्निर्माण (रीकंस्ट्रक्टिव) सर्जरी इसलिए भी की जाती है ताकि शरीर की किसी अनियमितता को दूर किया जा सके और यह अनियमितता निम्नलिखित कारणों से हो सकती है:

सर्जरी की प्रक्रिया के दौरान प्लास्टिक सर्जन घाव के भरने से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल करते हैं। इसके अलावा जन्मजात दोष, अधिग्रहित समस्याएं और दर्दनाक समस्याओं से जुड़ी दिक्कतों का भी इसमें पुनर्निर्माण किया जाता है और इस पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में कॉस्मेटिक सर्जरी एक छोटा सा रोल निभाती है। प्लास्टिक सर्जरी के तहत इसके कई ब्रांच और विशेषताएं हैं जिनके बारे में यहां बताया जा रहा है:

  • जन्मजात दोष : इसमें कटे होंठ या कटे तालू और चेहरे से जुड़ी दूसरी विकृतियों का इलाज किया जाता है।
  • ब्रेस्ट सर्जरी : इसमें ब्रेस्ट कैंसर और कॉस्मेटिक ब्रेस्ट सर्जरी के बाद ब्रेस्ट का पुनर्निर्माण किया जाना शामिल है।
  • स्किन : इसमें स्किन कैंसर के प्रबंधन के दौरान स्किन के पुनर्निर्माण की जिस तरह से भी जरूरत होती है उसे शामिल किया जाता है।
  • चोट या आघात : इसमें चेहरे पर चोट या आघात लगने की वजह से चेहरे के जिस हिस्से की जरूरत होती है उसका पुनर्निर्माण या मरम्मत की जाती है। साथ ही इसमें जलने से होने वाली चोटें और फ्रैक्चर दोनों शामिल है।
  • हाथ और ऊपरी अंग की सर्जरी : इस तरह के विशेषज्ञ इलाज में शरीर का वह हिस्सा शामिल होता है जो जीवन की बेहतर गुणवत्ता के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें हाथ और बांह पर लगी चोटों की मरम्मत शामिल है।
  • सौंदर्य सिद्धांत से जुड़ी सर्जरी : इसे साधारण भाषा में कॉस्मेटिक सर्जरी कहा जाता है और इसमें अपनी पसंद के अनुसार अपने रंग-रूप और उपस्थिति में बदलाव किया जाता है, ना की किसी चोट, दुर्घटना या जन्मजात दोष की वजह से।

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इस वक्त प्लास्टिक सर्जन, सर्जरी करने के लिए इस क्षेत्र में इस्तेमाल हो रही कई तरह की तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसी ही एक तकनीक है स्किन ग्राफ्टिंग, जिसका अर्थ है कि प्लास्टिक सर्जन, शरीर के एक क्षेत्र से त्वचा का एक स्वस्थ पैच लेते हैं और इसका उपयोग दूसरे क्षेत्र को कवर करने के लिए करते हैं जहां त्वचा क्षतिग्रस्त होती है।

ऊत्तकों का विस्तार (टीशू एक्सपैन्शन) भी एक ऐसी ही प्रक्रिया है जो शरीर के क्षतिग्रस्त या जख्मी क्षेत्र के आसपास के हिस्से में अतिरिक्त त्वचा को विकसित करने में मदद करती है। एक बार ऊत्तक का पर्याप्त विस्तार हो जाता है उसके बाद, इस त्वचा का इस्तेमाल क्षतिग्रस्त हिस्से की त्वचा को बदलने के लिए किया जाता है। इसके लिए आसपास के ऊत्तकों में तनाव उत्पन्न किया जाता है। वहीं, फ्लैप सर्जरी में शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में रक्त वाहिकाओं (ग्राफ्ट सर्जरी के विपरीत जिसमें केवल त्वचा शामिल होती है) के साथ जीवित ऊतक का स्थानांतरण शामिल होता है जो इसे जीवित रखने में मदद करता है।

आखिर में होती है माइक्रोसर्जरी। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें वृद्धि या आवर्धन प्रक्रिया का इस्तेमाल कर बेहद छोटी-छोटी धमनियों, नसों और तंत्रिकाओं को एक साथ जोड़ा जाता है ताकि जीवित ऊत्तकों को जरूरी खून की आपूर्ति की प्रक्रिया को बहाल किया जा सके। लिहाजा हम ये कह सकते हैं कि प्लास्टिक सर्जन के अधिकांश कार्य में उत्तकों को खून की उचित आपूर्ति हो इसे समझना और घाव कैसे भरेगा यह भी शामिल है और साथ ही में चोट या घाव के निशान का प्रबंधन करना भी। इस तरह से देखें तो प्लास्टिक सर्जरी को लेकर लोगों की जो सामान्य धारणा से उससे काफी आगे निकलकर होता है प्लास्टिक सर्जन का काम।

(इस आर्टिकल को डॉ अनिल बहल ने लिखा है जो गुरुग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट में कॉस्मेटिक, रिकंस्ट्रक्टिव और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डायरेक्टर हैं)

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