1. क्रिएटिनिन टेस्ट क्या होता है? - What is Creatinine Test in Hindi?
  2. क्रिएटिनिन टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Creatinine Test in Hindi
  3. क्रिएटिनिन टेस्ट से पहले - Before Creatinine Test in Hindi
  4. क्रिएटिनिन टेस्ट के दौरान - During Creatinine Test in Hindi
  5. क्रिएटिनिन टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Creatinine Test mean in Hindi

क्रिएटिनिन ब्लड टेस्ट, रक्त में क्रिएटिनिन के स्तर को मापता है। क्रिएटिनिन एक अपशिष्ट पदार्थों (waste product) होता है, जो क्रिएटिन के टूटने के पर बनता है। क्रिएटिन मांसपेशी में पाया जाता है। खून में क्रिएटिनिन का स्तर डॉक्टरों को यह जानकारी देता है कि आपके गुर्दे कितनी अच्छी तरह से काम कर रहे हैं।

मानव शरीर में दो गुर्दे (kidney) होते हैं, यह बंद मुट्ठी के आकार के होते हैं और रिब केज (rib cage) के नीचे स्थित होते हैं। दोनो गुर्दे रीढ़ की हड्डी के एक-दूसरी तरफ होते हैं। दोनों गुर्दों में लाखों छोटी-छोटी खून साफ करने वाली यूनिट्स होती हैं, जिन्हें नेफ्रॉन्स (nephrons) कहा जाता है। नेफ्रॉन्स रक्त वाहिकाओं के बहुत छोटे-छोटे गुच्छों के माध्यम से लगातार खून को फिल्टर करते रहते हैं, रक्तवाहिकाओं के इन गुच्छों को ग्लोमेरुली (glomeruli) कहा जाता है। यह संरचना खून से अपशिष्ट पदार्थों, पानी की अधिक मात्रा और अन्य अशुद्धियों को निकाल देती है। सभी विषाक्त पदार्थों को मूत्राश्य (bladder) में इकट्ठा किया जाता है, और पेशाब के साथ निकाल दिया जाता है।

क्रिएटिनिन उन पदार्थों में से एक है जो गुर्दे द्वाारा शरीर से बाहर निकाले जाते हैं। गुर्दे के कार्यों जांच करने के लिए डॉक्टर रक्त में क्रिएटिनिन के स्तर को मापते हैं। क्रिएटिनिन का उच्च स्तर, गुर्दे क्षतिग्रस्त होने या ठीक से काम ना कर पाने का संकेत देता है।

क्रिटिनिन ब्लड टेस्ट आमतौर पर कई अन्य लेबोरेट्री टेस्टों के साथ किया जाता है, जिसमें ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN) टेस्ट और एक बेसिक मेटाबोलिक पैनल (BMP) शामिल है। ये टेस्ट शारीरिक परिक्षण के दौरान किये जाते हैं, इनकी मदद से गुर्दों से संबंधी समस्याओं की जांच की जाती है, कुछ रोगों का निदान करने में भी ये टेस्ट मदद करते हैं।

क्रिएटिनिन का टेस्ट करने के लिए डॉक्टर मूत्र के सामान्य सेंपल का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में डॉक्टर 24 घंटे में मूत्र की मात्रा का टेस्ट करते हैं। मूत्र के एक सेंपल का क्रिएटिनिन के लिए टेस्ट किया जाता है, और अधिक सटीक मूल्यांकन रिपोर्ट का पता लगाने के लिए पूरे दिन के मूत्र को इकट्ठा किया जाता है। मूत्र के क्रिएटिनिन की मात्रा काफी हद तक, खाए गए खाद्य पदार्थों, व्यायाम और निर्जलीकरण स्तर पर निर्भर करती है, इसलिए बिना सोचे समझे किया गया टेस्ट (spot check) उपयोगी नहीं हो सकता। जैसे की नाम से ही पता चलता है, यह यूरीन टेस्ट दिनभर में निकाले गए मूत्र की मात्रा को मापता है। यह कोई दर्दनाक टेस्ट नहीं है, और ना ही इससे किसी प्रकार के जोखिम जुड़े हैं।

यदि आप में गुर्दे के रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर आपके क्रिएटिनिन के स्तर का पता लगाने के लिए क्रिएटिनिन ब्लड टेस्ट का आदेश दे सकते है। लक्षणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:

  1. थकान और नींद ना आना
  2. भूख कम लगना,
  3. चेहरे, कलाई, टखनों या पेट में सूजन,
  4. गुर्दे के पास पीठ में दर्द,
  5. पेशाब बनने और आने में बदलाव
  6. उच्च रक्तचाप
  7. मतली और उल्टी

गुर्दे की समस्याएं विभिन्न रोगों या स्थितियों से संबंधित हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  1. ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस, क्षति की वजह से ग्लोमेरुली में सूजन।
  2. पाईलोनेफ्राइटिस, गुर्दे में बेक्टीरियल संक्रमण। 
  3. पौरुष ग्रंथि के रोग। 
  4. मूत्र पथ की रुकावट, जो गुर्दे की पथरी के कारण हो सकती है। (और पढ़ें - पथरी के घरेलू उपाय)
  5. गुर्दे का रक्त प्रवाह कम होना, जो मधुमेह, निर्जलीकरण या कॉन्जेंस्टिव हार्ट फेलियर के कारण हो सकता है।
  6. नशीली दवाओं के दुरुपयोग के परिणामस्वरूप गुर्दे की कोशिकाएं नष्ट हो जाना।

कुछ लोगों में एमिनोग्लाइकोसाइड (Aminoglycoside) दवाएं, जैसे कि जेंटामाइसिन (gentamycin) आदि भी गुर्दे की क्षति का कारण हो सकती हैं। यदि आप इस प्रकार की दवाएं ले रहे हैं, तो आपके डॉक्टर नियमित रूप से क्रिएटिनिन ब्लड टेस्ट का आदेश दे सकते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके गुर्दे स्वस्थ हैं।

क्रिएटिनिन ब्लड टेस्ट

क्रिएटिनिन ब्लड टेस्ट के लिए बहुत अधिक तैयारी की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, अगर आप किसी भी प्रकार की दवाएं ले रहे हैं, उनके बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं। कुछ दवाएं बिना गुर्दे को नुकसान पहुचाए और आपके टेस्ट के रिजल्ट में हस्तक्षेप किये बिना भी क्रिएटिनिन के स्तर को बढ़ा सकती हैं। अगर आप निम्न से मे कोई भी दवा ले रहे हैं, तो अपने डॉक्टर को बताएं:

  1. सिमेटीडिन (cimetidine)
  2. नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लामेट्री ड्रग्स (NSAIDs), जैसे कि एस्पिरिन (aspirin) या इबुप्रोफेन (ibuprofen)
  3. कीमोथेरेपी दवाएं।
  4. सेफैलोस्पोरिन (cephalosporin)

आपके डॉक्टर आपको  परीक्षण से पहले , खुराक को एडजस्ट करने या रोकने  के लिए कह सकते हैं।

क्रिएटिनिन यूरिन टेस्ट

24 घंटे की मात्रा टेस्ट नॉनिनवेसिव (noninvasive) होता है, और इसमें केवल पेशाब को इकट्ठा करना शामिल है। मूत्र को इकट्ठा करने के लिए आपको एक या अधिक कंटेनर दिए जाते हैं। क्योंकि इस टेस्ट में 24 घंटे की अवधि के लिए मूत्र को संग्रहीत करना शामिल है।

(और पढ़ें - यूरिन टेस्ट)

परीक्षण से पहले, निम्न काम करना चाहिए:

  1. अगर आप गर्भवती हैं या आपको लगता है कि आप गर्भवती हो सकती है तो अपने डॉक्टर को बताएं। (और पढ़ें - अगर आप गर्भवती होने का कर रही हैं विचार तो इन कुछ महत्वपूर्ण बातों का रखें खास ख्याल)
  2. अगर आप किसी भी प्रकार की दवाई, सप्लिमेंट या नुस्खे आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो अपने डॉक्टर को बताएं।
  3. डॉक्टर मना किये गए खाद्य और पेय पदार्थों का सेवन ना करें।
  4. अपने चिकित्सक से पूछें कि क्या आपको दिन के किसी विशेष समय में टेस्ट शुरू करने की आवश्यकता है।
  5. सुनिश्चित कर लें की मूत्र का कंटेनर आपको कहां और किस समय देना है।

क्रिएटिनिन खून टेस्ट एक साधारण टेस्ट होता है जिसमें खून के एक छोटे से सैंपल की आवश्यकता होती है।

एक टेकनीशियन जिसके फ्लेबोटोमिस्ट (phlebotomist) कहा जाता है, वे मरीज को उनकी बाजू दिखाने को कहेंगे। जिस जगह पर इंजेक्शन लगाना है, डॉक्टर उस जगह को एंटीसेप्टिक द्वारा किटाणु रहित (sterilize) करने के बाद बाजू को किसी पट्टी के साथ बांद देते हैं। पट्टी से बांधने के बाद नसें फूलने लग जाती हैं, और डॉक्टर आसानी से उन्हें ढूंढ पाते हैं। नस मिल जाने के बाद डॉक्टर नस में सुई इंजेक्ट करते हैं और खून का सेंपल निकाल लेते हैं। ज्यादातर मामलों में कोहनी अंदरूनी तरफ की नसों में सुई लगाई जाती है, सुई लगाने के दौरान एक बार हल्की सी चुभन भी महसूस होती है। लेकिन टेस्ट के दौरान किसी प्रकार का दर्द नहीं होता।

क्रिएटिनिन खून टेस्ट एक कम जोखिम वाली प्रक्रिया है। हालांकि, इससे कुछ मामूली जोखिम भी हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

सेंपल के लिए पर्याप्त खून निकाल लेने के बाद खून को लेबोरेट्री में विश्लेषण के लिए भेज दिया जाता है। टेस्ट के कुछ दिन बाद डॉक्टर रिजल्ट बताते हैं। 

क्रिएटिनिन ब्लड टेस्ट

प्रति डेसीलीटर खून में क्रिएटिनिन को मिलीग्राम से मापा जाता है। जिन लोगों की मांसपेशियां अच्छी होती है, उनमें क्रिएटिनिन का उच्च स्तर पाया जाता है। इसके परिणाम भी उम्र और लिंग के आधार पर अगल-अलग हो सकते हैं।

सामान्य तौर पर, क्रिएटिनिन का सामान्य  स्तर पुरुषों में 0.7 से 1.3 मिलीग्राम / डीएल और महिलाओं में 0.6 से 1.1 मिलीग्राम/डीएल होता है।

खून में सीरम क्रिएटिनिन का उच्च स्तर होना इस बात का संकेत है कि आपके गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।

आपके सीरम क्रिएटिनिन का स्तर सामान्य रूप से थोड़ा ऊंचा या अधिक हो सकता है। जिसका कारण है :

  • मूत्र पथ में रुकावट
  • एक उच्च प्रोटीन आहार
  • निर्जलीकरण
  • गुर्दे की समस्याएं, जैसे कि गुर्दे में संक्रमण या किसी प्रकार की क्षति
  • सदमा लगने के कारण गुर्दे में रक्त का प्रवाह कम होना, कॉंजेसिटिव हार्ट फेलियर या डायबिटीज की जटिलताएं आदि। (और पढ़ें - शुगर के घरेलू उपाय)

इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि सामान्य और असामान्य श्रेणियां प्रयोगशालाओं में काफी अलग-अलग हो सकती हैं। अपने टेस्ट के रिजल्ट पर अच्छे से चर्चा करने के लिए आपको अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि अगर आपको अन्य टेस्ट या कोई उपचार करवाने की आवश्यकता तो डॉक्टर इस बारे में जानकारी दे सकते हैं।

क्रिएटिनिन यूरिन टेस्ट

टेस्ट करने के लिए, अगले 24 घंटों तक मूत्र को इकट्ठा करने के लिए एक विशेष कंटेनर की आवश्यकता पड़ती है। अगर आपको मूत्र को इकट्ठा करने के बारे में अधिक जानकारी नहीं है तो आप इस बारे में डॉक्टर से बात करें। निर्देशों का पालन पूरी तरह से ना कर पाने से रिजल्ट गलत भी हो सकता है। जिससे आपको फिर से टेस्ट करना पड़ सकता है। 

यह टेस्ट जिस विशेष समय शुरू किया जाता है, अगले दिन उसी समय बंद किया जाता है।

  1. पहले दिन, जब आप पहली बार पेशाब करते हैं तो पेशाब इकट्ठा न करें। हालांकि, सुनिश्चित करें कि आप समय को नोट और रिकॉर्ड कर रहे हैं। यह 24 घंटे की टेस्ट अवधि का प्रारंभ समय होगा।
  2. अगले 24 घंटों में दिनभर के मूत्र को इकट्ठा करें। इकट्ठा करने की प्रक्रिया के दौरान और कंटेनर भरने के बाद उसे किसी ठंडी जगह पर ही रखें।
  3. जब 24 घंटे की अवधि समाप्त हो जाती है, तो निर्देशानुसार कंटेनर को बंद कर दें और तुरंत उसे लैब में पहुंचा दें।
  4. यदि आप निर्देशों का पूरी तरह से पालन करने में असमर्थ हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें। 24 घंटे के अंदर अगर किसी प्रकार से कंटेनर में ना भरे जाने वाले मूत्र, या 24 घंटे के बाद इकट्ठा किये गए मूत्र की रिपोर्ट डॉक्टर को करवा देनी चाहिए। अगर मूत्र के कंटेनर को आप किसी ठंडी जगह पर नहीं रख पाए हैं, तो इस बारे में भी डॉक्टर को बता देना चाहिए।