कैल्शियम शरीर में सबसे सामान्य खनिज है। पूरे शरीर में सभी कोशिकाएं विभिन्न कार्यों के लिए कैल्शियम का उपयोग करती हैं। शरीर हड्डियों और दांतों की मरम्मत करने के लिए कैल्शियम का उपयोग करता है। कैल्शियम तंत्रिकाओं (nerves), हृदय और मांसपेशियों (muscles) को ठीक से कार्य करने में मदद करता है।

(और पढ़ें - यूरिन टेस्ट)

शरीर में अधिकांश कैल्शियम हड्डियों में पाया जाता है और शेष रक्त में पाया जाता है।

  1. मूत्र कैल्शियम परीक्षण क्या होता है? - What is Urine Calcium Tests in Hindi?
  2. मूत्र कैल्शियम परीक्षण क्यों किया जाता है - What is the purpose of Urine Calcium Tests in Hindi
  3. यूरिन कैल्शियम टेस्ट से पहले - Before Urine Calcium Tests in Hindi
  4. यूरिन कैल्शियम टेस्ट के दौरान - During Urine Calcium Tests in Hindi
  5. मूत्र कैल्शियम परीक्षण के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Urine Calcium Tests mean in Hindi

"यूरिन कैल्शियम टेस्ट" को यह मापने के लिए किया जाता है कि पेशाब के माध्यम से शरीर में से कितना कैल्शियम बाहर निकलता है। इस टेस्ट को मूत्र Ca + 2 टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है।

जब रक्त में कैल्शियम का स्तर बहुत कम होता है, तो हड्डियां रक्त का स्तर सामान्य लाने के लिए पर्याप्त कैल्शियम को रिलीज़ करती हैं। जब कैल्शियम का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, तो कैल्शियम का अतिरिक्त हिस्सा, हड्डियों में संग्रहीत हो जाता है या आपके मूत्र या मल के माध्यम से निकल जाता है।

आपके शरीर में कैल्शियम की मात्रा निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है -

  1. भोजन में कैल्शियम की मात्रा
  2. आंतों के माध्यम से अवशोषित कैल्शियम और विटामिन डी की मात्रा
  3. शरीर में फॉस्फेट का स्तर
  4. कुछ हार्मोन के स्तर - जैसे कि एस्ट्रोजन, कैल्सीटोनिन और पाराथॉयड हार्मोन

ज़यादातर कैल्शियम ज़्यादा या कम होने के लक्षण नहीं दिखते हैं। लक्षण दिखने के लिए कैल्शियम का स्तर बेहद ज़्यादा या कम होना चाहिए।

(और पढ़ें - कैल्शियम ब्लड टेस्ट)

मूत्र कैल्शियम परीक्षण करने के कारण शामिल हैं:

  1. मूत्र में कैल्शियम का स्तर ज़्यादा होने के कारण किडनी स्टोन बनना
  2. यह मूल्यांकन करने के लिए कि आप खाने में पर्याप्त कैल्शियम ले रहे हैं या नहीं
  3. अच्छी तरह से आपकी आंत कैल्शियम को अवशोषित कर रहे हैं या नहीं
  4. मूल्यांकन करने के लिए कि आपके गुर्दे कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं या नहीं
  5. पैराथायराइड ग्रंथि में समस्या की जांच करने के लिए 

रक्त कैल्शियम टेस्ट आमतौर पर विशिष्ट हड्डियों की बीमारियों, अग्नाशयशोथ और हाइपरपैराथायराइडिज्म जैसी कुछ समस्याओं का पता लगाने में अधिक सटीक होता है।

यूरिन कैल्शियम टेस्ट की तैयारी में, आपके डॉक्टर आपको उन दवाइयों को रोकने के लिए कह सकते हैं जो टेस्ट के परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, आपके डॉक्टर आपको परीक्षण के मुताबिक कई दिनों तक कैल्शियम के विशिष्ट स्तर के आहार का सेवन करने के लिए कह सकते हैं।

 

यूरिन कैल्शियम टेस्ट, 24 घंटों की अवधि में इकट्ठे किये गए पेशाब के नमूनों में कैल्शियम की मात्रा को मापता है। यह परीक्षण सुबह से अगले दिन की सुबह तक रहता है।

आमतौर पर यूरिन कैल्शियम टेस्ट ऐसे होता है -

  1. पहले दिन, आप जागने के बाद पेशाब करें लेकिन इसका नमूना न रखें।
  2. अगले 24 घंटों के लिए, आप जब भी मूत्र करते हैं, इसे स्वास्थ्य चिकित्सक द्वारा दिए गए कंटेनर में इकट्ठा करते रहें।
  3. आप फिर कंटेनर बंद करें और इसे 24 घंटे की संग्रह अवधि के दौरान ठन्डे स्थान पर रखें। कंटेनर पर अपना नाम डालें, साथ ही साथ टेस्ट पूरा होने की तिथि और समय भी लिखें।
  4. दूसरे दिन, आप जागने के बाद पहले मूत्र को कंटेनर में इकट्ठा करें। इसके बाद और कोई यूरिन सैंपल नहीं लेना है। 

सामान्य परिणाम

सामान्य आहार खाने वाले किसी व्यक्ति के मूत्र में कैल्शियम की मात्रा 100 से 300 मिलीग्राम / दिन होती है। कम कैल्शियम वाले आहार के कारण मूत्र में कैल्शियम की मात्रा 50 से 150 मिलीग्राम / दिन होती है।

असामान्य परिणाम

यदि मूत्र में कैल्शियम का स्तर सामान्य से ज़्यादा है, तो यह निम्न में से किसी का संकेत हो सकता है -

  1. हाइपरपैराथायराइडिज्म (Hyperparathyroidism): एक ऐसी स्थिति जहां पैराथाइरॉइड ग्रंथि बहुत अधिक पैराथाइरॉइड हार्मोन बना रही होती है जिससे थकान, पीठ दर्द और गले में दर्द हो सकता है।
  2. मिल्क-अल्कली सिंड्रोम (milk-alkali syndrome): एक ऐसी बिमारी जो बहुत अधिक कैल्शियम लेने के कारण होती है। आमतौर पर उन वृद्ध महिलाओं में देखी जाती है जो ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने के लिए कैल्शियम लेती हैं।
  3. ईडीओपैथिक ह्यपरकैल्सियूरिया (Idiopathic Hypercalciuria): बिना किसी कारण के आपके मूत्र में बहुत अधिक कैल्शियम होना।
  4. सार्कोइडोसिस (sarcoidosis): एक रोग जिसमें लिम्फ नोड्स, फेफड़े, लिवर, आंख, त्वचा या अन्य ऊतकों में सूजन होती है। 
  5. रीनल ट्यूब्युलर एसिडोसिस (Renal Tubular Acidosis): खून में एसिड का स्तर ज़्यादा होना क्योंकि गुर्दे पर्याप्त मात्रा में मूत्र अम्लीय नहीं बनाते हैं।
  6. विटामिन डी इंटोक्सिकेशन (vitamin D intoxication): आपके शरीर में विटामिन डी का अधिक होना
  7. लूप ड्यूरेटिक्स (loop diuretics) का उपयोग: एक प्रकार की पानी की गोली जो गुर्दे से पानी से निकलने को बढ़ाने का काम करती है।
  8. किडनी फेलियर (kidney failure)। 

यदि मूत्र में कैल्शियम का स्तर असामान्य रूप से कम होता है, तो यह निम्न का संकेत हो सकता है:

  1. मैलएब्ज़ोर्प्शन विकार (malabsorption disorder): जैसे उल्टी या दस्त, जो भोजन के पोषक तत्वों के ठीक से न पच पाने के कारण होते हैं।
  2. विटामिन डी की कमी
  3. हाइपोपैराथायराइडिज्म (hypoparathyroidism): पैराथाइरॉइड ग्रंथि कैल्शियम और फॉस्फोरस को सही स्तर पर रखने के लिए एक निश्चित हार्मोन बनाती है। इस रोग में पैराथाइरॉइड ग्रंथि ये हॉर्मोन कम बना पाती है जिससे कैल्शियम और फॉस्फोरस का स्तर ठीक नहीं रहता।