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मेलेनिन से त्वचा, बाल और आंखों को अपना रंग मिलता है। गोरी त्वचा वाले लोगों की तुलना में संवाली त्वचा वाले लोगों में अधिक मेलेनिन पाया जाता है। मेलेनोसाइट्स (melonocytes) नामक कोशिकाएं मेलेनिन बनाती हैं।

मेलेनिन सूर्य की हानिकारक किरणों से त्वचा को नुकसान पहुंचने से बचाता है। बाहर जैसे ही आप सूर्य के संपर्क में आते हैं मेलेनोसाइट्स कोशिकाएं ज्यादा मेलेनिन बनाना शुरू कर देती हैं। लेकिन स्किन में अधिक मेलेनिन हो जाए तो आपकी त्वचा पर झाइयां होने लगती है। 

इस लेख में मेलेनिन के महत्व के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। साथ ही आपको मेलेनिन के प्रकार और मेलेनिन एवं त्वचा के विषय में भी आगे बताया गया है।

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  1. मेलेनिन क्या है और महत्व - Melanin kya hai aur mahatva
  2. मेलेनिन के प्रकार - Melanin ke prakar
  3. मेलेनिन और त्वचा का रंग - Melanin aur twacha ka rang

त्वचा का रंग मेलेनिन नामक वर्णक (रंग देने वाला) द्वारा निर्धारित किया जाता है। मेलेनिन हर तरह की त्वचा में होता है, चाहे वह गोरी हो या संवाली। हर व्यक्ति के अंदर यह विभिन्न रूपों और अनुपात में मौजूद होते हैं। मेलेनिन न सिर्फ त्वचा को रंग प्रदान करते हैं, बल्कि यह सूर्य की हानिकारक किरणों से भी त्वचा की रक्षा करते हैं। यह त्वचा के अलावा बालों, आंखों, कान, मस्तिष्क और एड्रनल ग्रंथि में पाया जाता है।

सूर्य की हानिकारक किरणों के अधिक संपर्क में आने से आपकी त्वचा पर समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण, जैसे कि झुर्रियां, दिखने लगते हैं। साथ ही इससे आपको कई तरह के त्वचा संबंधी कैंसर होने की संभावनाएं रहती हैं। "बेसल सेल कार्सिनोमा" (basal cell carcinoma​) से लेकर "मेलानोमा" (melanoma) तक, स्किन कैंसर का कोई भी प्रकार हो सकता है। मेलानोमा त्वचा के कम सक्रिय कैंसर की अपेक्षा तेजी से फैलता है।

सूर्य की यू.वी. विकिरण (Ultraviolet radiation: पराबैंगनी विकिरण) से होने वाले दुषप्रभाव आपकी त्वचा में मेलेनिन की मात्रा पर निर्भर करते हैं। आपकी त्वचा में जितना ज्यादा मेलेनिन होगा, पराबैंगनी विकिरण का दुष्प्रभाव उतना कम होगा। 

इसके साथ ही जिन लोगों की त्वचा में मेलेनिन अधिक होता है वह गोरे लोगों की तुलना में अधिक जवान दिखते हैं। इसके अलावा मेलेनिन "फ्री रेडिकल्स" (free radicals: शरीर में मौजूद हानिकारक तत्व) से त्वचा को होने वाले नुकसान को कम कर देता है।

(और पढ़ें - झाइयां हटाने के घरेलू उपाय)

मेलेनिन के तीन निम्नलिखित प्रकार होते हैं -

  • यूमेलेनिन (eumelanin):
    यह बालों, त्वचा और निप्पल के चारों ओर काले हिस्से में पाया जाता है। बालों, त्वचा और आंखों का काला और भूरा रंग मेलेनिन के इसी प्रकार पर निर्भर करता है। यूमेलेनिन की कम मात्रा से बाल सुनहरे या भूरे रंग के दिखते हैं। (और पढ़ें - बालों को घना करने के घरेलू उपाय)
     
  • फियोमेलेलिन (pheomelanin):
    यह भी बालों और त्वचा में पाया जाता है। यह मेलेनिन त्वचा और बालों को गुलाबी व लाल रंग प्रदान करता है, लाल बालों वाले व्यक्तियों में यह मुख्य रूप से पाया जाता है। फियोमेलेलिन सूर्य की हानिकारक यूवी किरणों से होने वाले कैंसर से आपका बचाव नहीं कर पाता है। (और पढ़ें - कैंसर से लड़ने वाले आहार)
     
  • न्यूरोमेलिनिन (Neuromelanin):
    यह मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाने वाले मेलेनिन का एक रूप है और इस मेलेनिन की कमी से आपको कई न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) विकार हो सकते हैं। (और पढ़ें - मानसिक रोग दूर करने के उपाय)

यह समझने के लिए कि लोगों की त्वचा का रंग अलग क्यों होता है, इसके पीछे के मूल विज्ञान को समझना जरूरी है। त्वचा के रंग के मामले में "सफेद", "लाल", "काले", या "पीले" जैसी कोई चीज़ नहीं होती है। त्वचा का रंग कई रंगों से मिलकर बनता है, जो आपकी अनुवांशिकता के पर निर्भर करता है।

उदाहरण के तौर पर सांवली त्वचा वाले लोगों के शरीर में मेलेनिन के सभी प्रकार में से यूमेलेनिन सबसे ज्यादा बनता है, जबकि पीली रंग की त्वचा वाले लोगों मे फियोमेलेनिन ज्यादा बनता है। त्वचा का रंग मेलेनिन के अणु के आकार और उनकी संख्या पर निर्भर करता है। मेलेनिन मेलेनोसाइट्स कोशिका से बनते हैं और यह हर व्यक्ति में अलग-अलग तरह से कार्य करते हैं। कुछ व्यक्तियों में प्राकृतिक रूप से मेलेनिन का निर्माण कम होता है, जिससे उनकी त्वचा का रंग हल्का हो जाता है। इसके अलावा सामान्य से कम मेलेनोसाइट्स वाले व्यक्ति की त्वचा का रंग भी हल्का हो जाता है।

गोरे लोगों में गुच्छों के रूप में मौजूद मेलेनोसाइट्स "फ्रेकल्स" (freckles: त्वचा पर छोटे-छोटे भूरे रंग के दाग) की वजह होते हैं, जबकि बिना फ्रेकल्स वाला हिस्सा अधिक हल्के रंग का होता है। सनबर्न (sunburn: सूर्य की किरणों से त्वचा का जल जाना) के कारण आपकी त्वचा का रंग अस्थायी रूप से बदला सकता है। सनबर्न मेलेनिन के उत्पादन को प्रभावित करता है और यूवी किरणों की वजह से होता है।

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