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पीरियड्स या मासिक धर्म एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। इससे हर महिला को हर माह गुजरना पड़ता है। किसी को पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग होती है तो किसी को कम होती है। किसी को ब्लीडिंग होने के दौरान पेट दर्द और कमर दर्द होता है तो किसी को ब्लीडिंग होने का पता भी नहीं चलता। दरअसल पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे उन्हें इस तरह की परेशानियां हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन सबसे निपटने के लिए अपनी जीवनशैली संतुलित रखें और खानपान सही रखें। जिस तरह इन दिनों क्या करना है, इस पर ध्यानकेंद्रित रखते हैं, उसी तरह किस तरह की गलतयां नहीं करनी चाहिए, यह भी पता होना जरूरी है।

पीरियड का रिकाॅर्ड न रखना

भला पीरियड्स की डेट हम क्यों याद रखें? पीरियड की डेट तो वो महिला याद रखती है जिसे गर्भधारण करना हो। इस तरह की बातें अक्सर महिलाओं को कहते सुना होगा। जरा सोचिए पीरियड्स की डेट याद न रखने से आपको किस तरह के फायदे होते हैं? कुछ नहीं। जबकि पीरियड्स की डेट याद रखने से न सिर्फ अपने पीरियड साइकिल को समझ पाते हैं बल्कि उन दिनों होने वाले दर्द, तकलीफ से भी बचे रह सकते हैं। यहां तक कि अगर पीरियड्स अनियमित हों, तो उसकी वजह जानना भी आसान हो जाता है। हां, अगर अपके लिए पीरियड्स का रिकाॅर्ड रखना मुश्किल हे तो इसे किसी डायरी या अपने फोन में नोट कर लें।

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पर्याप्त आयरन न लेना

आम दिनों में आप क्या खा रही हैं, यह बात ज्यादा मायने नहीं रखती। लेकिन पीरियड्स के दिनों में आप क्या खा रही हैं, यह बात आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। पीरियड्स के दिनों में आपको पर्याप्त मात्रा में आयरन लेना बहुत जरूरी है। वैसे भी पीरियड्स की वजह से आपके शरीर से काफी ज्यादा आयरन बाहर निकल जाता है। यही वजह है कि इन दिनों ज्यादातर महिलाओं को आयरन युक्त आहार खाने की सलाह दी जाती है। लेकिन महिलाएं ऐसा नहीं करतीं। वे समाान्य आहार पर ही डटी रहती हैं। यह सही नहीं है। आपको अपने आहार में आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे बीन्स, पालक आदि शामिल करने चाहिए। इससे आपका स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है शरीर में खून की कमी भी नहीं होती।

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रेगुलर पैड नहीं बदलना

ज्यादातर लड़कियां पूरे दिन में सिर्फ दो ही बार पैड बदलती हैं। एक सुबह नहाने के बाद दूसरा रात को सोने से पहले। जबकि प्रत्येक कुछ घंटों में पैड बदलने की सलाह दी जाती है। हालांकि आपको ब्लीडिंग कितनी ज्यादा हो रही है, यह बात भी मायने रखती है। इसके अनुसार पैड बदलना चाहिए। खैर, समय-समय पर पैड बदलने से कपड़े गंदे नहीं होते और पैड से होने वाली बीमारियों की आशंका भी कम हो जाती है। यदि आप जरूरत अनुसार पैड नहीं बदलती हैं तो इससे बैक्टीरियल इन्फेक्शन होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

पर्याप्त पानी न पीना

पीरियड्स होने पर एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन में बदलाव होने लगते हैं। इससे पेट फूलने जैसी समस्या हो सकती है। यही वजह है कि इन दिनों पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। यदि आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीती हैं तो इससे कब्ज, गैस, पाचन तंत्र में समस्या हो सकती है। अतः जरूरी है कि अपने शरीर में पानी की कमी न होने दें। पूरे दिन में 8 ग्लास पानी पीना चाहिए। दरअसल पानी पीने से आपको ज्यादा से ज्यादा पेशाब आता है जिससे शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाता है। इससे आपको पीरियड्स में समस्याएं भी कम होंगी।

पीरियड्स तो हर माह होते हैं, यह सोचकर इन दिनों अपनी सेहत का ध्यान न रखना सही नहीं है। आपको चाहिए कि पीरियड के साइकिल से लेकर अपने स्वास्थ्य और हाइजीन का पूरा ध्यान रखें।

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