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चिंता करना एक मानसिक स्थिति है। इसमें व्यक्ति जरूरत से ज्यादा और लगातार किसी विषय के बारे में सोचता है, जिसके कारण जीवन प्रभावित हो सकता है। इसे बेचैनी, असहज और भय के रूप में परिभाषित किया गया है। जब ये भावनाएं लगातार बेकाबू हो जाती हैं और दैनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करने लगती हैं, तो इसे एंजाइटी डिसऑर्डर यानी चिंता विकार कहा जाता है। चिंता निम्नलिखित स्थितियों का लक्षण हो सकता है :

  • पैनिक डिसऑर्डर : यह अचानक घबराने या भय लगने की स्थिति है। गंभीर मामलों में इसमें दिल का दौरा भी पड़ सकता है, इसलिए पैनिक अटैक को एक स्थिति माना जाता है। आमतौर पर यह किसी निश्चित कारक (जगह, स्थिति या वस्तु) की वजह से ट्रिगर होता है।
  • जनरलाइज्ड एंजाइटी डिसऑर्डर : इस स्थिति में व्यक्ति लंबे समय तक एक से अधिक विषयों के बारे में अत्यधिक तनाव और घबराहट महसूस करता है, जिस कारण उसके दैनिक जीवन पर प्रतिकूल (नकारात्मक या बुरा असर) प्रभाव पड़ता है।
  • फोबिया : डर के कारण रिएक्शन को फोबिया कहते हैं। यह डर किसी भी चीज से हो सकता है, जैसे कोई विशेष जगह, स्थिति, वस्तु, अधिक ऊंचाई, भीड़, सुनसान जगह इत्यादि।
  • पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) : पीटीएसडी एक विकार है जो किसी चोट या तनाव के कारण हो सकती है।

ध्यान रहे, एंजाइटी की स्थिति गंभीर होने पर तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

चिंता के लिए सबसे आम प्रमाणित दवाओं में एंटी-एंजाइटी और एंटीडिप्रेसेंट दवाएं शामिल हैं। हालांकि, एंजाइटी के लिए एक स्थायी इलाज नहीं है, बेंजोडायजेपींस सबसे आम एंटी-एंजाइटी दवा है। हालांकि, इनका लंबे समय तक उपयोग करने से लत लग सकती है।

होम्योपैथिक उपचार प्राकृतिक पदार्थों से बने होते हैं और इसलिए इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। एंजाइटी से पीड़ित लोगों के लिए आर्सेनिकम एल्बम, नैट्रम म्यूरिएटिकम, इग्नेशिया अमारा और अन्य जैसे उपाय काफी प्रभावी हैं।

होम्योपैथिक चिकित्सक हमेशा किसी उपाय को निर्धारित करने से पहले मरीज में विशिष्ट परिस्थितियों से पीड़ित होने की प्रवृत्ति और रोग के लक्षणों पर विचार करता है। इसलिए, भले किन्हीं दो व्यक्तियों में एक जैसे लक्षण दिखाई दें, लेकिन उपाय एक जैसे नहीं होते हैं।

  1. एंजाइटी के लिए होम्योपैथिक दवाएं - Homeopathic medicines for anxiety in Hindi
  2. एंजाइटी रोगी के लिए आहार और जीवन शैली में बदलाव - Dietary and lifestyle changes for an anxiety patient as per homeopathy in Hindi
  3. एंजाइटी के लिए होम्योपैथिक दवाएं और उपचार कितने प्रभावी हैं - How effective are homeopathic medicines and treatments for anxiety in Hindi
  4. होम्योपैथिक दवा के साइड इफेक्ट्स, जोखिम और इलाज - Side effects and risks of homeopathic medicine and treatments for anxiety in Hindi
  5. टिप्स - Takeaway in Hindi

एथुसा साइनापियम
सामान्य नाम :
फूल्स पार्सले
लक्षण : एथुसा साइनापियम दिमाग और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी स्थिति को ठीक करने के लिए प्रभावी है, लेकिन इस उपाय से लाभ उठाने वाले व्यक्ति दूध को पचाने में असमर्थ हो जाते हैं। यह निम्नलिखित लक्षणों को भी ठीक कर सकता है :

  • बेचैनी
  • घबराहट के साथ चिंता करना
  • फोकस करने या किसी कार्य को करने में परेशानी
  • ब्रेन फाग (ऐसी स्थिति जिसमें मस्तिष्क थका होता है, जिसके कारण शरीर के कार्यों में समन्वय बिगड़ जाता है)

गर्मियों के महीनों में शाम के समय करीब 3 से 4 बजे के आसपास यह लक्षण बिगड़ जाते हैं, जबकि खुली हवा में रहने से लक्षणों से राहत मिलती है।

एमिलीनम नाइट्रोजम
सामान्य नाम :
अमाइल नाइट्राइट
लक्षण : एमाइलेनम नाइट्रोजम तेजी से असर करता है और निम्नलिखित लक्षणों को कम करने में मदद करता है :

  • सिर दर्द, मानो कोई हथौड़ा मार रहा हो
  • अत्यधिक चिंता के कारण थरथराहट होना
  • घुटन होना और इस दौरान ताजी हवा में जाने की जरूरत लगना

अर्जेन्टम नाइट्रिकम
सामान्य नाम :
सिल्वर नाइट्रेट
लक्षण : अर्जेन्टम नाइट्रिकम तंत्रिका रोग के लिए एक प्रभावी उपाय है। इसकी जरूरत अक्सर उन लोगों को होती है, जो गर्मी सहन नहीं कर पाते हैं। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों में भी राहत देने में मदद कर सकता है :

  • घबराहट
  • हर बात को लेकर अत्यधिक सोचना
  • आवेगी व्यवहार

गर्मी और मिठाई का सेवन करने पर व्यक्ति के लक्षण खराब हो जाते हैं, जबकि ताजा हवा और ठंड के मौसम में इन लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

आर्सेनिकम एल्बम
सामान्य नाम :
आर्सेनिक एसिड
लक्षण : आर्सेनिकम एल्बम बेचैनी, भय और चिंता के संकेतों से जुड़ी स्थितियों के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला उपाय है। यह उपाय चिंता के निम्नलिखित लक्षणों से राहत देने में मदद करता है :

  • बेचैनी
  • मृत्यु का भय
  • पसीना आने के साथ भय
  • आत्महत्या की प्रवृत्ति

व्यक्ति के नम और ठंडे परिस्थितियों में आने से उसके लक्षण बिगड़ जाते हैं, जबकि गर्म मौसम में या गर्म पेय पीने के बाद बेहतर महसूस होता है।

बेलाडोना
सामान्य नाम :
डेडली नाइटशेड
लक्षण : बेलाडोना तंत्रिका तंत्र से संबंधित स्थितियों के लिए एक बहुत ही सक्रिय उपाय है। यह उन लोगों को दिया जाता है जो निम्नलिखित लक्षणों का अनुभव करते हैं :

  • सामाजिक भय
  • स्थितियों से दूर भागना

जिन लोगों के लिए बेलाडोना निर्धारित किया जाता है, उनमें लेटने के दौरान (ज्यादातर शाम के समय) लक्षण खराब हो जाते हैं।

कैल्केरिया कार्बोनिका
सामान्य नाम :
कार्बोनेट ऑफ लाइम
लक्षण : कैल्केरिया कार्बोनिका आमतौर पर उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिनके रूटीन में शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाले काम शामिल होता है। यह उन लोगों में भी प्रभावी है, जिनका पेट निकला हुआ त्वचा पीली होती है। इसके अलावा कैल्केरिया कार्बोनिका निम्नलिखित लक्षणों को दूर करने में मदद करता है :

  • पैल्पिटैशन (किसी गतिविधि या बीमारी के कारण दिल की अनियमित धड़कन) के कारण चिंता बढ़ जाना
  • हानि या नुकसान होने का भय

किसी भी तरह की गतिविधि करने और ठंडे मौसम में अक्सर यह लक्षण खराब हो जाते हैं, जबकि गर्म और शुष्क मौसम में इन लक्षणों में सुधार होता है।

कैनबिस इंडिका
सामान्य नाम :
हशीश
लक्षण : कैनबिस इंडिका एक असरदार उपाय है, जो व्यक्ति की मानसिक स्थिति को बहुत हद तक शांत करता है। यह निम्नलिखित लक्षणों को ठीक कर सकता है :

  • अवसाद के साथ चिंता
  • बेचैनी
  • कंपन्न और पसीना आना

य​ह लक्षण सुबह के समय में स्ट्रांग कैफीनयुक्त पेय या शराब पीने से बिगड़ जाते हैं, जबकि ताजी हवा और ठंडे पानी से हालत में सुधार होता है।

इग्नैटिया अमारा
सामान्य नाम :
सेंट इग्नैटियस बीन
लक्षण : इग्नैशियस अमारा मुख्य रूप से भावनात्मक स्थितियों से निपटने के लिए दिया जाता है। यह उन व्यक्तियों के लिए निर्धारित है, जो सचेत होने के साथ घबरा जाते हैं। ऐसे व्यक्ति संवेदनशील और आसानी से उत्तेजित होने वाले होते हैं। ये निम्नलिखित लक्षणों में भी असर करते हैं :

  • उदासी की भावना
  • रोने की प्रवृत्ति
  • सदमा या दुख

कैलियम कार्बोनिकम
सामान्य नाम :
कार्बोनेट ऑफ पोटेशियम
लक्षण : कैलियम कार्बोनिकम से निम्नलिखित लक्षणों को ठीक किया जा सकता है :

  • भय
  • तेज आवाज के प्रति अतिसंवेदनशीलता
  • अकेले छूट जाने का डर लगना
  • पेट में दिक्कत या उलझन लगना

लाइकोपोडियम क्लैवैटम
सामान्य नाम :
क्लब मॉस
लक्षण : आमतौर पर पतले, बेहद संवेदनशील और गैस्ट्रिक समस्या से जूझ रहे लोगों में यह दवा काफी असरदार होती है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों को भी कम करने में मदद करता है :

  • उदासी
  • आत्मविश्वास में कमी
  • अकेले होने का डर
  • नई चीजें करते समय डरना

मेडोरीनम
सामान्य नाम :
दि गोनोरिजल वायरस
लक्षण : यह उपाय निम्नलिखित लक्षणों वाले रोगियों के लिए निर्धारित है :

  • बात करते समय रोने की प्रवृत्ति
  • मुश्किल से फोकस करना
  • घबराहट
  • बेचैनी
  • आत्महत्या की प्रवृत्ति

फास्फोरस
सामान्य नाम :
फॉस्फोरस
लक्षण : निम्नलिखित लक्षणों के लिए फॉस्फोरस निर्धारित है :

  • उदासी और उत्साह की कमी
  • भय
  • संवेदनशील स्वभाव
  • बेचैनी
  • मानसिक थकावट

सोरियम
सामान्य नाम :
स्केबीज वेसिकल
लक्षण : इस उपाय का उपयोग करके निम्नलिखित लक्षणों से छुटकारा पाया जा सकता है :

  • उदासी
  • नकारात्मक विचार आना, जिसमें व्यक्ति आशाहीन हो जाता है
  • दुख और चिंता
  • आत्महत्या की प्रवृत्ति

रस टॉक्सीकोडेंड्रोन
सामान्य नाम :
पॉइजन-आइवी
लक्षण : पॉइजन-आइवी निम्नलिखित लक्षणों के लिए एक प्रभावी उपाय है :

  • बेचैनी
  • आत्महत्या करने वाले विचार
  • ऐसा लगना कि उसे जहर दिया जा सकता है
  • हादसा होने का डर, जिसमें व्यक्ति सो नहीं पाता है

सिलिकिया टेरा
सामान्य नाम :
सिलिका / प्योर फ्लाइंट
लक्षण : सिलिकिया टेरा निम्नलिखित लक्षणों के उपचार के लिए निर्धारित है :

  • घबराहट और डरना
  • चुभन वाले दर्द की स्थिति

इस उपाय से लाभान्वित होने वाले व्यक्तियों में सुबह के समय ठंडे मौसम में लक्षण बिगड़ते हैं, जबकि गर्म मौसम में लक्षणों में सुधार होता है।

एक व्यक्ति की जीवन शैली और आहार का उसके जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। अकेले रहले वाले लोगों को अपनी परेशानियों से निपटने के लिए अक्सर शराब या अन्य किसी नसे वाली चीजों का सहारा लेना पड़ता है।

पैनिक डिसऑर्डर या फोबिया से पीड़ित लोगों के लिए शारीरिक व्यायाम जैसी गतिविधियां काफी मददगार साबित होती हैं। योग और अन्य व्यायाम भी बेकार या व्यर्थ की भावनाओं से निपटने में मदद करते हैं।

होम्योपैथिक दवाएं अत्यधिक घुलनशील रूप में तैयार की जाती हैं, ऐसे में कई प्रकार के आहार और जीवन शैली के कारण आसानी से इन दवाइयों का असर प्रभावित हो सकता है। इसलिए, होम्योपैथिक डॉक्टर मरीजों को निम्नलिखित चीजों से सावधान रहने की सलाह देते हैं

क्या करना चाहिए

  • पौष्टिक भोजन के साथ संतुलित आहार लें।
  • नकारात्मक विचारों से बचें, खुद को व आसपास के माहौल को साफ व सुव्यवस्थित रखें, इससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • अपने कमरे में तापमान और परिस्थितियों को अपनी पसंद के अनुसार रखें

क्या नहीं करना चाहिए

  • अत्यधिक कैफीन और शराब के सेवन से बचें।
  • ऐसे भोजन से बचें जो बहुत अधिक खट्टा या नमकीन हो, क्योंकि यह दवाओं के असर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
  • अस्वच्छ वातावरण में न रहें।

होम्योपैथी दवाएं ’लाइक क्योर लाइक’ सिद्धांत पर आधारित हैं, जिसका मतलब है कि किसी स्वस्थ व्यक्ति में लक्षण पैदा करने वाले पदार्थ का उपयोग करके किसी बीमार व्यक्ति में समान लक्षणों को प्रबंधित करने का प्रयास किया जा सकता है, बशर्ते इन दवाओं की खुराक उचित मात्रा में ली जाए। ध्यान रहे, होम्योपैथिक उपचार शुरू करने से पहले हमेशा योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

ये प्राकृतिक स्रोतों से बनाई जाती हैं, इसलिए इन दवाओं से शरीर को लंबे समय में कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और न ही तो इनकी लत लगती है। होम्योपैथिक डॉक्टर रोगी के लक्षणों, अंतर्निहित कारणों और नैदानिक स्थिति जानने के बाद दवा लिखते हैं। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि होम्योपैथिक दवाएं एनजाइटी को प्रबंधित करने में मदद करती हैं।

आठ से 67 आयु वर्ग के 220 एंजाइटी रोगियों पर एक अवलोकन अध्ययन किया गया था, जिसमें पाया गया कि एनजाइटी के लक्षणों के प्रबंधन में आर्सेनिकम एल्बम, एर्जेंटम नाइट्रिकम, इग्नैशिया अमारा जैसे उपाय प्रभावी हैं। इन 220 व्यक्तियों में से 157 लोग इन दवाइयों के माध्यम से ठीक हुए, जबकि शेष 63 व्यक्तियों में से कुछ ने अपने लक्षणों को नियंत्रण करने के लिए इन दवाओं के उपयोग को जारी रखा।

अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी में किए गए एक केस स्टडी में, एंजाइटी के साथ समायोजन (एडजेस्टमेंट) विकार से पीड़ित एक महिला नर्स को वैनेडियम का उपयोग करने पर राहत मिली थी।

व्यक्ति की शारीरिक व मानसिक स्थिति जानने और प्रत्येक संभावित पहलू को ध्यान में रखते हुए, होम्योपैथिक उपचार निर्धारित किए जाते हैं। यह दवाइयां आसानी से शरीर में घुल जाती हैं और इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। इन्हें प्राकृतिक स्रोतों से तैयार किया जाता है।

हालांकि, कुछ मामलों में, उपचार का प्रभाव शुरू होने से पहले लक्षण थोड़ा बढ़ जाते हैं। यदि यह लक्षण खराब होते जाते हैं, तो ऐसे में विचार करने की जरूरत है कि शरीर में दवा सटीक असर नहीं कर रही है और नए सिरे से उपचार की जरूरत है।

ज्यादातर लोग एनजाइटी के लक्षणों का प्रबंधन करने के लिए प्रमाणित थेरेपी या अवसादरोधी दवाओं का विकल्प चुनते हैं। लेकिन, एंजाइटी के लिए होम्योपैथी भी एक बेहतरीन और प्रभावी विकल्प है।

होम्योपैथी उपचार में अन्य उपचार के तुलना में अधिक समय लग सकता है। लेकिन ऐसे लोग जिनमें आत्महत्या से संबंधित विचार आते हैं इन मामलों में कोई भी डॉक्टर पहले पारम्परिक तरीकों को सुझाते हैं।

जिन मामलों में आत्महत्या के विचार नहीं आते हैं, उनमें होम्योपैथी एक उत्कृष्ट उपचार हो सकता है। प्रमाणित उपचार के विपरीत यह केवल लक्षणों को नहीं दबाता है, बल्कि इसका उद्देश्य बीमारी की पुनरावृत्ति को रोकना और उसे जड़ से ठीक करना है। यदि कोई व्यक्ति होम्योपैथिक ट्रीटमेंट लेने के बारे में सोच रहा है तो उसे पहले डॉक्टर से बात करने की जरूरत है, क्योंकि हर उपाय हर किसी पर सूट नहीं करता है।

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References

  1. National Institute of Mental Health [Internet] Bethesda, MD; Anxiety Disorders. National Institutes of Health; Bethesda, Maryland, United States
  2. British Homeopathic Association. Anxiety and depression. London; [Internet]
  3. Rosalia Zueras Gelabert. Clinical Study of the Effectiveness of Pluralist Homeopathy in Generalized Anxiety Disorder. Altern Integr Med 2017, Vol 6(4): 250
  4. National Center for Complementary and Integrative Health [Internet]. Bethesda (MD): U.S. Department of Health and Human Services; Homeopathy
  5. University of Minnesota. What Lifestyle Changes are Recommended for Anxiety and Depression?. Minneapolis and Saint Paul, Minnesota; [Internet]
  6. Wenda Brewster O’Reilly. Organon of the Medical art by Wenda Brewster O’Reilly. B jain; New Delhi
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