myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

हाइपरटेंशन यानि हाई ब्‍लड प्रेशर को आमतौर पर हाई बीपी भी कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें धमनियों के अंदर खून का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है। इसकी वजह से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि हृदय रोग

ब्लड प्रेशर दो स्थितियों का आपस में संयोजन (मिलना) है, आपका हृदय कितनी मात्रा में खून को पंप कर रहा है और धमनियों में खून के प्रवाह में कितना अवरोध आ रहा है। अगर खून को पंप करने में हृदय को ज्‍यादा मेहनत करनी पड़ रही है और आपकी धमनियां संकुचित हो गई हैं, तो आपका ब्लड प्रेशर बढ़ जाएगा। 

दुर्भाग्य से हाई ब्‍लड प्रेशर के लक्षण एक दम से दिखाई नहीं देते हैं और हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त व्यक्ति को कई सालों तक कोई स्पष्ट लक्षण महसूस ही नहीं होता है। आपको यह बात समझनी चाहिए कि किसी प्रकार के लक्षण दिखाई ना देने का ये मतलब नहीं है कि इससे सेहत को कोई नुकसान या खतरा नहीं है।

यदि आपको ऐसा लग रहा है कि आप हाई ब्‍लड प्रेशर से ग्रस्त हैं, तो जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से इसकी जांच करवाएं। अगर आप सही समय पर हाई ब्‍लड प्रेशर की जांच नहीं करवाते हैं तो इसकी वजह से स्ट्रोक या हार्ट अटैक भी आ सकता है। अच्छी बात यह है कि एक बार हाई ब्‍लड प्रेशर का पता लगने के बाद, डॉक्टर आपकी शारीरिक स्थिति के अनुसार उचित उपचार दे पाएंगे। समय पर सही इलाज मिलने से हाई बीपी को नियंत्रित करना काफी आसान हो जाता है।

ब्‍लड प्रेशर रीडिंग को समझें

रक्तचाप की रीडिंग में मुख्य रूप से दो नंबर होते हैं, उदाहरण के लिए 120/80। पहले आने वाला नंबर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (दिल के धड़कने पर सबसे अधिक दबाव और खून को पूरे शरीर में भेजने के लिए दबाव बनाने का स्‍तर) होता है। इसके बाद वाला नंबर डायस्टोलिक ब्लडप्रेशर (रक्त का सबसे कम दबाव जब आपका हृदय एक धड़कन के बाद और दूसरी धड़कन से पहले रिलैक्स अवस्था में हो) होता है।

हाई ब्‍लड प्रेशर के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

भारतीय व्यस्कों में हाई ब्‍लड प्रेशर 

आमतौर पर यह धारणा बनी हुई है कि कम उम्र वाले वयस्कों में हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्या नहीं होती है। हालांकि, कुछ अध्ययनों से पता चला है कि 20 की उम्र के आस-पास हल्‍का-सा ब्लड प्रेशर बढ़ने का मतलब है कि अधेड़ उम्र तक आपमें हृदय की धमनियों के ब्‍लॉक होने का खतरा है। 

हार्वर्ड टी एच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में हुए एक अध्ययन के अनुसार, भारतीय वयस्कों में हाई ब्‍लड प्रेशर का खतरनाक स्तर दिखाई दे रहा है जो कि पहले के आंकड़ों से काफी अधिक है। यहां तक कि भारतीय युवा वयस्कों में हाइपरटेंशन के मामले, मध्य और पूर्वी यूरोप से कई ज्‍यादा हैं।

शोधकर्ताओं ने भारत के राज्यों में हाई ब्‍लड प्रेशर और डायबिटीज के फैलने का पता लगाने के लिए ग्रामीण और शहरी राज्यों की आपस में तुलना की। इसमें सामाजिक व जनसंख्या से संबंधित कारकों पर भी विचार किया गया जैसे शिक्षा व घरेलू संपत्ति आदि।

इस अध्ययन में भौगोलिक स्थानों और सामाजिक व जनसंख्या से संबंधित कारकों से जुड़े  वृद्ध व अधेड़ उम्र के लोगों में हाई ब्‍लड प्रेशर और डायबिटीज के अधिक मामले देखे गए। शोधकर्ताओं ने बताया कि महिलाओं में 20 प्रतिशत और पुरुषों में 24.5 प्रतिशत हाई बीपी का खतरा पाया गया।

युवा वयस्कों (18 से 25 साल) में हाई ब्‍लड प्रेशर का खतरा 12.1 प्रतिशत पाया गया है। हार्वर्ड टी एच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रमुख लेखक “पास्कल गेल्जसेट्जर” ने बताया कि तेजी से फैल रहे हाई ब्‍लड प्रेशर की जड़ को समझने की जरूरत है ताकि इसका इलाज व बचाव आदि के लिए प्रभावी उपाय किए जा सकें। 

हार्ट पत्रिका में प्रकाशित एक अन्‍य अध्ययन में पाया गया कि वयस्क उम्र के शुरुआती चरण में तनाव होने पर हाई बीपी होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है, इतना ही नहीं यदि व्यक्ति का शारीरिक वजन भी ज्यादा (मोटापा) है, तो हाई बीपी का खतरा अत्यधिक बढ़ सकता है। असल में इसका मतलब है कि यदि वयस्क होने के शुरुआती दौर में तनाव को नियंत्रित करने में कठिनाई हो रही है, तो इससे स्वास्थ्य संबंधी कई दीर्घकालिक समस्याएं विकसित हो सकती हैं।

एक अध्ययन में पाया गया कि यदि कम उम्र वाले किसी वयस्क को “प्री-हाइपरटेशन” है, तो 25 साल बाद उसके हृदय की धमनियों में कैल्शियम जमा होने का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार जीवनशैली में स्वस्थ बदलाव करने से, वयस्कता में हृदय क्षतिग्रस्त होने के खतरे को काफी प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है। इसीलिए युवा लोगों को शराब आदि ना पीने के लिए सावधान किया जाता है क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और अधिक नींद आती है।

हाई ब्‍लड प्रेशर से संबंधित इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • ब्लड प्रेशर का सामान्य स्तर 120/80 है, लेकिन इसका स्तर 130/80 एमएमएचजी से ऊपर जाने के बाद हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या होती है।
  • तनाव भी हाई ब्‍लड प्रेशर के कारणों में से एक है, लेकिन यह किसी अन्‍य बीमारी के कारण भी हो सकता है जैसे किडनी रोग
  • यदि हाई ब्‍लड प्रेशर की समय पर जांच या इलाज ना किया जाए तो इसके कारण हार्ट अटैक, स्ट्रोक और स्वास्थ्य संबंधी अन्य कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
  • जीवनशैली में कुछ बदलाव जैसे कि स्वस्थ भोजन, व्यायाम और तनाव को अच्छी तरह से नियंत्रित कर हाई ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल किया जा सकता है।
और पढ़ें ...