यह बात तो हम सभी जानते हैं कि नए कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 से होने वाली बीमारी कोविड-19 उच्च जोखिम वाले लोगों में गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है, जिनमें बुजुर्गों के अलावा वैसे लोग शामिल हैं जिन्हें पहले से कोई बीमारी है जैसे- हृदय रोग और डायबिटीज या फिर वे लोग जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है।

हालांकि, अधिकांश बच्चों और किशोरों को कोविड-19 बीमारी होने का खतरा कम लगता है, लेकिन अब एक नए अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि इस नए संक्रमण की वजह से बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज होने का जोखिम बढ़ गया है। इम्पीरियल कॉलेज हेल्थकेयर एनएचएस ट्रस्ट और इम्पीरियल कॉलेज लंदन के अनुसंधानकर्ताओं की एक टीम ने जो रिसर्च की है उसमें उन्होंने बच्चों में कोविड-19 और संक्रमण होने के बाद टाइप 1 डायबिटीज विकसित होने के बीच एक लिंक पाया है। डायबिटीज केयर नाम की पत्रिका में इस रिसर्च को प्रकाशित किया गया है।

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  1. टाइप 1 डायबिटीज नए कोरोना वायरस के साथ विकसित हो सकता है
  2. न्यू ऑनसेट टाइप 1 डायबिटीज के मामले हुए दोगुने
  3. वायरस के संपर्क में आने के बाद बच्चों में जटिलताओं का खतरा
  4. 70 फीसद बच्चों में डायबिटिक केटोएसिडोसिस भी पाया गया
  5. डायबिटीज और कोविड-19
  6. अग्नाशय को नुकसान पहुंचाता है टाइप 1 डायबिटीज

ऐसी कई स्टडीज सामने आयी है कि जिसमें यह बताया गया है कि कोविड-19 संक्रमण होने के बाद लोगों में टाइप 1 डायबिटीज (न्यू ऑनसेट टाइप 1 डायबिटीज) विकसित हो जाता है जो कि पहले उन्हें नहीं था। ऐसे में इस कोरोना वायरस महामारी के दौरान इस नए तरह के टाइप 1 डायबिटीज से जुड़े आंकड़ें विशेष रूप से बच्चों में काफी सीमित हैं। इस बारे में जो नए सबूत सामने आ रहे हैं उनका सुझाव यही है कि यह ऑटोइम्यून बीमारी वायरस के साथ विकसित हो सकती है।

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स्टडी से जुड़े अपने निष्कर्षों पर पहुंचने के लिए, रिसर्च टीम ने नॉर्थ-वेस्ट लंदन के 4 एनएचएस ट्रस्ट में मरीजों का अध्ययन किया, जिनमें से कुछ ने डायबिटीज के मरीजों में वृद्धि की सूचना दी। उत्तर-पश्चिम लंदन क्षेत्र के अस्पतालों में करीब 30 बच्चों में कोविड-19 महामारी के चरम पर रहने के दौरान न्यू ऑनसेट टाइप 1 डायबिटीज देखने को मिला जो पिछले वर्षों में इस अवधि में आमतौर पर देखे गए मामलों की संख्या से दोगुना है।

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इस स्टडी की सुपरवाइजिंग ऑथर कैरेन लोगान कहती हैं, "ऐसा प्रतीत होता है कि बच्चों में कोविड-19 के गंभीर मामलों के विकसित होने का जोखिम कम है। हालांकि, वायरस के संपर्क में आने के बाद बच्चों मे होने वाली संभावित स्वास्थ्य जटिलताओं पर विचार करने की आवश्यकता है। हमारा मानना ​​है कि यह अध्ययन कोविड-19 और कुछ बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज के विकास के बीच एक संभावित लिंक दिखाने वाला पहला अध्ययन है। हमारा अध्ययन चूंकि यूके तक की सीमित था इसलिए यह स्थापित करने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है कि क्या कोविड-19 और टाइप 1 डायबिटीज के बीच निश्चित लिंक है।"

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इसके अलावा, रिसर्च टीम ने यह भी खुलासा किया कि स्टडी में शामिल करीब 70 प्रतिशत बच्चे जिनमें हाल ही में टाइप 1 डायबिटीज डायग्नोज हुआ था उन बच्चों में डायबिटिक केटोएसिडोसिस (डीकेए) भी पाया गया। यह एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है जो डायबिटीज से पीड़ित लोगों में उस वक्त देखने को मिलती है जब उनका ब्लड इंसुलिन लेवल बहुत कम हो जाता है। यह तब होता है जब व्यक्ति का शरीर बहुत तेज गति से फैट (वसा) को तोड़ना शुरू कर देता है और बदले में, वसा कीटोन्स में बदल जाता है, जिससे खून अम्लीय (ऐसिडिक) हो जाता है।

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डायबिटिक केटोएसिडोसिस (डीकेए) के कारण कई जटिलताएं हो सकती हैं जिसमें किडनी का क्षतिग्रस्त होना, फेफड़ों में पानी भरनामस्तिष्क में सूजन और जलन (इन्फ्लेमेशन) होना और शरीर में हाइपोकैलेमिया या पोटैशियम का लेवल बेहद कम होना शामिल है। करीब 52 प्रतिशत से अधिक बच्चों में गंभीर डायबिटिक केटोएसिडोसिस (डीकेए) था और शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है।

टाइप 1 डायबिटीज जिसे इंसुलिन पर निर्भर डायबिटीज के रूप में भी जाना जाता है, लंबे समय तक जारी रहने वाली बीमारी है जिसमें अग्न्याशय (पैनक्रियाज) बहुत कम या कोई इंसुलिन पैदा नहीं करता है। इंसुलिन शरीर के लिए बेहद जरूरी हार्मोन है जो शरीर में ऊर्जा पैदा करने के लिए कोशिकाओं में शर्करा या ग्लूकोज को प्रवेश करने की अनुमति देता है।

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टाइप 1 डायबिटीज अग्नाशय, विशेष रूप से इंसुलिन-उत्पादक कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, शरीर को रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने और विनियमित करने के लिए पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन करने से रोकता है। अगर शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर बहुत अधिक हो जाए तो यह कई तरह की जटिलताओं को जन्म दे सकता है, जिसमें देरी से घाव भरना, आंखों को होने वाला नुकसान और यहां तक ​​कि किडनी को होने वाला नुकसान भी शामिल है।

चीन और इटली पहले ऐसे 2 देश जिन्होंने कोविड-19 महामारी के मामले में शुरुआत में मरीजों की सबसे अधिक संख्या का अनुभव किया, उनके रिपोर्ट की मानें तो कुछ बच्चों में डायबिटीज की समस्या विकसित हुई। रिसर्च टीम ने यह निर्धारित करने का लक्ष्य रखा कि क्या यूके में नए मामले सामने आए हैं और क्या वे कोविड-19 जोखिम से संबंधित हैं। शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि महामारी के दौरान टाइप 1 डायबिटीज के मामलों में महत्वपूर्ण वृद्धि से पता चलता है कि कोविड-19 और टाइप 1 डायबिटीज के बीच संभावित लिंक है। अनुसंधानकर्ता कोविड-19 और न्यू ऑनसेट टाइप 1 डायबिटीज के बीच निश्चित लिंक स्थापित करने के लिए आगे और शोध और विश्लेषण की बात कह रहे हैं।


उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें कोविड-19 की वजह से बच्चों में बढ़ा टाइप 1 डायबिटीज और डायबिटिक केटोएसिडोसिस का खतरा है

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