myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

परिचय
पल्मोनरी एडिमा एक मेडिकल शब्द है, जिसका मतलब “फेफड़ों में पानी भर जाना” है। इस स्थिति में फेफड़ों में अधिक मात्रा में द्रव भर जाता है जिससे सांस लेने में कठिनाई होने लग जाती है और खून को पर्याप्त ऑक्सीजन भी नहीं मिल पाती है। 

इस स्थिति में फेफड़ों में मौजूद हवा की छोटी-छोटी थैलियों (Air sacs) में द्रव जमा होने लग जाता है, ऐसे में सांस लेने में कठिनाई होने लग जाती है। फेफड़ों में तरल भर जाने से फेफड़ों की ऑक्सीजन प्राप्त करने और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ने की क्षमता कम हो जाती है और इस कारण श्वसन तंत्र काम करना भी बंद कर देता है। फेफड़ों में पानी भरने का सबसे मुख्य कारण “हार्ट फेलियर” होता है, क्योंकि इस स्थिती में हृदय शरीर की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाता है। कुछ अन्य स्थितियां भी हैं, जो पल्मोनरी एडिमा का कारण बन सकती हैं, जैसे अचानक से ब्लड प्रेशर बढ़ जाना, निमोनिया, किडनी खराब हो जाना या लीवर खराब हो जाना। फेफड़ों में पानी भर जाने पर सांस लेने में दिक्कत, दिल तेजी से धड़कना, थकान होना, वजन बढ़ना आदि लक्षण होने लगते हैं।

हार्ट फेलियर के मामलों में फेफड़ों में पानी भरने की समस्या समय के साथ-साथ धीरे-धीरे विकसित होती है या फिर यह समस्या अचानक से विकसित हो सकती है इस स्थिति को “एक्युट पल्मोनरी एडिमा” कहा जाता है। इस स्थिति के तुरंत किए जाने वाले उपचार में फेफड़ों में से द्रव को निकालना और ऑक्सीजन के स्तर को फिर से सामान्य बनाना आदि शामिल है।

यदि अचानक से फेफड़ों में द्रव जमा हो गया है तो यह एक आपातकालीन स्थिति हो सकती है, जिसका तुरंत इलाज करवाने की आवश्यकता होती है। यदि मरीज को सही उपचार और पर्याप्त सहायता ना मिल पाए तो, यह स्थिति उसके लिए घातक हो सकती है।

(और पढ़ें - थकान दूर करने के लिए क्या खाएं)

  1. फेफड़ों में पानी भरना क्या है - What is Pulmonary Edema in Hindi
  2. फेफड़ों में पानी भरने के प्रकार - Types of Pulmonary Edema in Hindi
  3. चेस्ट में पानी के लक्षण - Pulmonary Edema Symptoms in Hindi
  4. फेफड़ों में पानी के कारण व जोखिम कारक - Pulmonary Edema Causes & Risk Factors in Hindi
  5. पल्मोनरी एडिमा से बचाव - Prevention of Pulmonary Edema in Hindi
  6. छाती में पानी का परीक्षण - Diagnosis of Pulmonary Edema in Hindi
  7. फेफड़ों में पानी का इलाज - Pulmonary Edema Treatment in Hindi
  8. फेफड़ों में पानी की जटिलताएं - Pulmonary Edema Complications in Hindi
  9. फेफड़ों में पानी की दवा - Medicines for Pulmonary Edema in Hindi
  10. फेफड़ों में पानी के डॉक्टर

फेफड़ों में पानी भरना क्या है - What is Pulmonary Edema in Hindi

फेफड़ों में पानी भरना क्या है?
छाती या फेफड़ों में पानी भर जाने की स्थिति को मेडिकल भाषा में पल्मोनरी एडिमा कहा जाता है। इस स्थिति में फेफड़ों में पानी की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होने लग जाती है। यह आमतौर पर हृदय संबंधी समस्याओं के कारण होता है। यदि आपको हृदय संबंधी कोई समस्या है या आपका हृदय क्षतिग्रस्त हो गया है, तो यह उतना खून फेफड़ों में पंप नहीं कर पाता जितना लेता है।

(और पढ़ें - सांस लेने में दिक्कत हो तो क्या करे)

फेफड़ों में पानी भरने के प्रकार - Types of Pulmonary Edema in Hindi

छाती में पानी कितने प्रकार से जमा हो सकता है?

  • कार्डियोजेनिक पल्मोनरी एडिमा:
    इसे हृदय से संबंधित पल्मोनरी एडिमा भी कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जो हृदय में दबाव बढ़ने के कारण विकसित होती है।
     
  • नॉन-कार्डियोजेनिक पल्मोनरी एडिमा:
    यह पल्मोनरी एडिमा का वह प्रकार होता है, जो हृदय में दबाव बढ़ने के कारण विकसित नहीं होता है।

(और पढ़ें - दिल के बढ़ने के लक्षण)

चेस्ट में पानी के लक्षण - Pulmonary Edema Symptoms in Hindi

चेस्ट में पानी भरने के लक्षण?
फेफड़ों में द्रव जमा होने पर निम्नलिखित लक्षण महसूस हो सकते हैं, जैसे: 

  • सिरदर्द होना
  • सांस फूलना और शारीरिक गतिविधि करने के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाना
  • ऊंचाई की तरफ चलने में कठिनाई होना जिसके बाद समतल सतह पर चलने में भी दिक्कत होना
  • लेटने के बाद सांस लेने में दिक्कत होना
  • घरघराहट होना
  • सोते समय सांस ना ले पाने के कारण अचानक से उठ जाना और बैठने के बाद स्थिति ठीक हो जाना
  • खांसी
  • खांसी के साथ बलगम आना जिसमें थोड़ा बहुत खून भी हो सकता है (और पढ़ें - बलगम में खून आने का कारण)
  • दिल तेजी से और अनियमित रूप से धड़कना
  • वजन तेजी से बढ़ना, खासकर टांगों में
  • शरीर के निचले हिस्से में सूजन आना
  • थकान महसूस होना

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
निम्नलिखित स्थितियां होने पर जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

  • अचानक से सांस फूलना
  • सांस लेने में कठिनाई होना और ज्यादा पसीना आना
  • त्वचा नीले या ग्रे रंग की दिखाई पड़ना
  • सिर घूमना, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना या ज्यादा पसीना आना आदि ये सभी बीपी लो होने का संकेत दे सकते हैं।
  • सांस लेने के दौरान घरघराहट या अन्य किसी प्रकार की आवाज आना
  • खांसी के साथ गुलाबी रंग का झागदार थूक या बलगम आना

(और पढ़ें - सूखी खांसी का इलाज)

फेफड़ों में पानी के कारण व जोखिम कारक - Pulmonary Edema Causes & Risk Factors in Hindi

फेफड़ों में पानी कैसे बनता है?
फेफड़ों में पानी जमा होने की स्थिति आमतौर पर हृदय संबंधी समस्याओं के कारण होती है। कई मामलों में हृदय का कोई एक चैम्बर (हिस्सा) फेफड़ों से रक्त वाहिकाओं में आने वाले खून को पंप नहीं कर पाता है। खून ठीक से पंप ना होने पाने पर दबाव बढ़ जाता है और द्रव भी बनने लग जाता है। जब हृदय ठीक से खून को पंप नहीं कर पाता तो खून फेफड़ों से होते हुए वापस नसों में पहुंच जाता है। 

जैसे ही इन रक्त वाहिकाओं में दबाव बढ़ता है तो द्रव फेफड़ों के अंदर छोटी-छोटी वायु की थैलियों (एल्वियोली) में चला जाता है। यह द्रव इन वायु थैलियों को घेर लेता है, जिससे फेफड़ों में पर्याप्त ऑक्सीजन जाने की जगह नहीं रह पाती है। ये दोनों कारक मिलकर सांस फूलने जैसी समस्याओं का कारण बनते हैं।

इसके निम्नलिखित कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं: 

  • निमोनिया
  • सेप्सिस (ब्लड इन्फेक्शन)
  • कुछ प्रकार के केमिकल के संपर्क में आना
  • शरीर का कोई अंदरुनी अंग काम करना बंद कर देना जिसके कारण द्रव जमा होने लगना, जैसे हार्ट फेलियर, किडनी खराब होना या लिवर सिरोसिस
  • सूजन व जलन
  • किडनी तक खून पहुंचाने वाली धमनियां संकुचित हो जाना
  • किसी ज़हरीली गैस या गंभीर संक्रमण होने के कारण फेफड़े क्षतिग्रस्त हो जाना
  • किडनी खराब होना

फेफड़ों में द्रव होने का खतरा कब बढ़ता है?
निम्नलिखित कुछ कारक हैं, जो छाती में पानी भरने का खतरा बढ़ा देती है:

  • हृदय संबंधी समस्याओं से ग्रस्त लोगों या हार्ट फेलियर के मरीजों में पल्मोनरी एडिमा का खतरा सबसे अधिक होता है।
  • जिन लोगों को पहले भी कभी फेफड़ों में पानी जमा होने की समस्या हो चुकी हो।
  • जिन लोगों को पहले कभी फेफड़ों से संबंधित रोग हो चुके हैं, जैसे टीबी या सीओपीडी
  • कुछ प्रकार की दवाएं भी हैं, जो छाती में पानी भरने का कारण बन सकती है।
  • अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर रहना
  • कोई गंभीर चोट लगना
  • गैर कानूनी नशीले पदार्थ खाना या दवाओं को अत्यधिक मात्रा में लेना
  • सांस लेने के दौरान शरीर के अंदर विषाक्त पदार्थ चले जाने के कारण फेफड़े क्षतिग्रस्त हो जाना
  • गंभीर रूप से आघात (ट्रामा) होना
  • पानी में डूबना

(और पढ़ें - चोट की सूजन का इलाज)

पल्मोनरी एडिमा से बचाव - Prevention of Pulmonary Edema in Hindi

चेस्ट में पानी भरने की रोकथाम कैसे करें?
जिन मरीजों के फेफड़ों में पानी जमा होने के जोखिम अधिक होते हैं, उनको डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना चाहिए, ताकि स्थिति को कंट्रोल में रखा जा सके। 

यदि फेफड़ों में पानी भरना हार्ट फेलियर से संबंधित है, तो स्वस्थ व संतुलित आहार खाना और शरीर का सामान्य वजन बनाए रखने से भविष्य में ऐसी समस्याएं होने की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं। 

नियमित रूप से व्यायाम करने से हृदय भी स्वस्थ होता है इसके अलावा निम्न बातों का ध्यान रख कर भी हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है:

  • नमक के सेवन में कमी करके:
    नमक की मात्रा अधिक होने पर शरीर में पानी जमा हो जाता है। शरीर में पानी की अधिक मात्रा होने पर हृदय का काम बढ़ जाता है।
     
  • कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके:
    शरीर में कोलेस्ट्रॉल अधिक होने से धमनियों में वसा जमा होने लग जाती है, जिसके कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक आदि होने का खतरा बढ़ जाता है।
     
  • धूम्रपान को बंद करके:
    धूम्रपान करने से कई गंभीर बीमारियां विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, इनमें हृदय रोग, फेफड़ों के रोग और रक्त संचार संबंधी समस्याएं शामिल हैं। 

यदि आपको अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से चेस्ट में पानी जमा होने की समस्या होती है, तो कुछ तरीकों की मदद से इस समस्या से बचाव किया जा सकता है, जैसे चढ़ाई पर धीरे-धीरे चढ़ना, ऊंचाई वाले स्थानों पर अधिक परिश्रम ना करना और यात्रा करने से पहले दवाई आदि लेना। 

आप निम्नलिखित उपायों की मदद से हार्ट फेल होने के खतरे को भी कम कर सकते हैं, जो पल्मोनरी एडिमा का सबसे मुख्य कारण होता है:

  • नियमित रूप से डॉक्टर के पास जाते रहें,
  • नशीले पदार्थों का सेवन ना करें,
  • नियमित रूप से रोजाना व्यायाम करें,
  • शरीर का सामान्य वजन बनाए रखें

(और पढ़ें - व्यायाम करने का सही समय)

छाती में पानी का परीक्षण - Diagnosis of Pulmonary Edema in Hindi

फेफड़ों में द्रव का परीक्षण कैसे किया जाता है?
परीक्षण के दौरान डॉक्टर आपके फेफड़ों में द्रव की जांच करेंगे या फेफड़ों में द्रव जमा होने के कारण पैदा होने वाले लक्षणों का पता लगाएंगे। इस दौरान डॉक्टर सामान्य शारीरिक परीक्षण करते हैं, जिसमें स्टीथोस्कोप के माध्यम से फेफड़ों से आने वाली आवाज का पता लगाया जाता है। इसकी मदद से निम्नलिखित समस्याओं का भी पता लगाया जा सकता है:

  • हृदय के धड़कनों की गति बढ़ जाना
  • तेजी से सांस लेना
  • फेफड़ों से घरघराने की आवाज आना
  • हृदय से किसी प्रकार की असामान्य आवाज आना

निम्नलिखित कुछ अन्य चीजें भी हैं, जिनका परीक्षण के दौरान पता लगाया जा सकता है:

  • टांगों या पेट में सूजन
  • गर्दन की नसों में असामान्यता दिखाई पड़ना (जिस से यह पता चलता है कि आपके शरीर मे अत्यधिक मात्रा में द्रव है)
  • त्वचा का रंग पीला या नीला पड़ जाना

फेफड़ों में जमा हुऐ पानी की जांच करने के लिए कुछ टेस्ट किए जाते हैं, जिनमें निम्नलिखित टेस्ट शामिल हो सकते हैं:

  • कम्पलीट ब्लड काउंट (सीबीसी)। 
  • हृदय की असामान्य गतिविधियों का पता लगाने के लिए इकोकार्डियोग्राम या अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाना। 
  • फेफड़ों के अंदर या बाहर किसी प्रकार के द्रव का पता लगाने के लिए या फिर हृदय के आकार का पता लगाने के लिए एक्स रे स्कैन भी किया जा सकता है। इसके अलावा सीटी स्कैन भी किया जा सकता है।
  • खून में ऑक्सीजन के स्तर की जांच करने के लिए खून टेस्ट करना
  • पल्स ऑक्सिमेट्री टेस्ट करना। इस टेस्ट में आपकी उंगली या कान पर एक सेंसर (एक प्रकार की मशीन) लगा दिया जाता है। यह सेंसर रौशनी का उपयोग करता है और आपके खून में ऑक्सीजन की मात्रा का पता लगा लेता है। 
  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी), इस टेस्ट की मदद से हार्ट अटैक व हृदय की धड़कनों संबंधित समस्याओं का पता लगाया जाता है।

(और पढ़ें - दिल की कमजोरी के लक्षण)

फेफड़ों में पानी का इलाज - Pulmonary Edema Treatment in Hindi

फेफड़ों में पानी भरने का इलाज कैसे किया जाता है?
पल्मोनरी एडिमा एक गंभीर स्थिति होती है, जिसका तुरंत इलाज करवाने की आवश्यकता होती है। ऑक्सीजन इस स्थिति के इलाज का सबसे पहले हिस्सा होता है। इलाज के दौरान डॉक्टर आपको ऑक्सीजन मास्क, नेजल कैनुला या पॉजिटिव मास्क की मदद से आपको 100 प्रतिशत ऑक्सीजन देने की कोशिश करेंगे। 

फेफड़ों में पानी भरने के कारण का जल्द से जल्द पता लगाकर इलाज करना जरूरी होता है। उदाहरण के लिए यदि यह स्थिति हार्ट अटैक के कारण पैदा हुई है, तो उसका उसी समय इलाज शुरू कर देना चाहिए। 

इसके इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में निम्न शामिल हो सकती हैं:

  • डाइयुरेटिक्स (मूत्रल) दवाएं जो शरीर से अतिरिक्त तरल को निकाल देती हैं। 
  • हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली, हृदय की धड़कनों को कंट्रोल करने वाली और हृदय का दबाव कम करने वाली दवाएं। (और पढ़ें - मांसपेशियों की कमजोरी दूर करने के उपाय)
  • कुछ अन्य दवाएं जो तब दी जाती हैं, जब चेस्ट में पानी जमा होने का कारण हार्ट अटैक की जगह कुछ और हो।

पल्मोनरी एडिमा का इलाज हमेशा अस्पताल या इमर्जेंसी रूम में किया जाता है। इसके अलावा मरीज को आईसीयू (इंटेसिव केयर यूनिट) में भी भेजा जा सकता है।

  • इसमें मरीज को ऑक्सीजन फेस मास्क के द्वारा या फिर प्लास्टिक की एक पतली ट्यूब को नाक में लगाकर दी जाती है। 
  • यदि मरीज खुद से ठीक तरह से सांस नहीं ले पा रहा है, तो एक ट्यूब को मरीज की वायु नली (Windpipe) से जोड़ दिया जाता है, जो उसे वेंटिलेटर (सांस लेने में मदद करने वाली मशीन) से जोड़ती है। 

जीवन शैली में कुछ सुधार
डॉक्टर आपको अपनी जीवन शैली में कुछ बदलाव करने के लिए भी बोल सकते हैं, ताकि फेफड़ों में पानी भरने जैसी समस्या में सुधार किया जा सके। इनमें निम्नलिखित उपाय शामिल हो सकते हैं:

  • पर्याप्त मात्रा में फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाएं। 
  • नमक कम मात्रा में खाएं। (और पढ़ें - नमक की कमी के लक्षण)
  • पल्मोनरी एडिमा का कारण बनने वाली स्थितियों से बचना। यदि आपको ऊंचाई वाले स्थानो पर जाने से, एलर्जिक पदार्थों से या फिर किसी प्रकार की दवा से फेफड़ों में पानी जमा होने की समस्या हो रही है, तो इनसे बचाव करके आप अपने फेफड़ों को और अधिक क्षतिग्रस्त होने से बचा सकते हैं। 
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। 
  • स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याओं को नियंत्रित रखें। उदाहरण के लिए यदि आपको डायबिटीज है, तो अपने ग्लूकोज (शुगर) के स्तर को सामान्य स्तर पर रखने की कोशिश करें और नियमित रूप से अपने शुगर के स्तर की जांच करवाते रहें। 
  • यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो उसे तुरंत छोड़ें दें। 
  • यदि आपके शरीर का वजन सामान्य से अधिक है, तो उसे नियंत्रण में लाएं।

(और पढ़ें - वजन कम करने के उपाय)

फेफड़ों में पानी की जटिलताएं - Pulmonary Edema Complications in Hindi

फेफड़ों में पानी भरने से क्या जटिलताएं होती हैं?
पल्मोनरी एडिमा से पैदा होने वाली समस्याएं उसके कारण पर निर्भर करती हैं। यह स्थिति एकदम से ठीक हो सकती है या ठीक होने में समय ले सकती है। कुछ लोगों को लंबे समय तक ब्रिथिंग मशीन (सांस लेने में मदद करने वाली मशीन) का उपयोग करना पड़ सकता है। यदि समस्या का समय पर इलाज ना किया जाए, तो यह जीवन के लिए घातक हो सकती है। 

फेफड़ों में पानी भरने से पैदा होने वाली ज्यादातर जटिलताएं अक्सर इसके कारण से संबंधित होती हैं। अधिक विशेष रूप से पल्मोनरी एडिमा होने पर फेफड़े खून में गंभीर रूप से ऑक्सीजन की कमी कर देते हैं। ऑक्सीजन की कमी होने से संभावित रूप से शरीर में किसी अंग तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है, जैसे कि मस्तिष्क तक ऑक्सीजन ना पहुंच पाना। 

 जिन लोगों को एक बार फेफड़ों में पानी हो चुका है, उन मरीजों को फिर से यह समस्या होने और यहां तक कि इससे उनकी मृत्यु होने का खतरा भी पैदा हो जाता है।

(और पढ़ें - लंग इन्फेक्शन का इलाज)

Dr. Subhajit Mondal

Dr. Subhajit Mondal

श्वास रोग विज्ञान

Dr. Sai Theja reddy

Dr. Sai Theja reddy

श्वास रोग विज्ञान

Dr. Kishor Kameliya

Dr. Kishor Kameliya

श्वास रोग विज्ञान

फेफड़ों में पानी की दवा - Medicines for Pulmonary Edema in Hindi

फेफड़ों में पानी के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
ADEL Calc Hypophos DilutionCalcarea Hypophosphorica Dilution 1 M155.0
Dr. Reckeweg R34Reckeweg R34 Recalcifying Drop200.0
Dr. Reckeweg Calc.Hypo. 3x TabletCalc.Hypophos Trituration Tablet 3 X190.0
Schwabe Hepar Sulphuris PentarkanHepar Sulphuris Pentarkan Tablet140.0

क्या आप या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है? सर्वेक्षण करें और दूसरों की सहायता करें

और पढ़ें ...