अगर आपको डायबिटीज है तो शकरकंद को देखकर अक्सर आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि क्या आपको इसे खाना चाहिए या नहीं। एक तो आलू और ऊपर से मीठा- तो क्या यह आपकी सेहत के लिए सुरक्षित होगा? तो इस सवाल का जवाब है हां। अगर आपको डायबिटीज की बीमारी है तो अपनी आलू खाने की इच्छा को पूरी तरह से दबा देने की बजाए आपको सफेद आलू की जगह उसके पोषण से भरपूर प्रतिरूप- शकरकंद का सेवन करना चाहिए। इसका कारण ये है कि नारंगी रंग का यह आलू न सिर्फ आपके ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है बल्कि एंटीऑक्सिडेंट्स से भी भरपूर होता है जिसकी वजह से आप कई और क्रॉनिक बीमारियों से भी बचे रहते हैं।

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  1. डायबिटीज के मरीजों के लिए कैसे फायदेमंद है शकरकंद? - Diabetes patients ke liye kaise faydemand hai shakarkand
  2. ब्लड शुगर को कैसे प्रभावित करता है शकरकंद? - Blood sugar ko kaise prabhavit karta hai Sweet Potato
  3. डायबिटीज के मरीज कितनी शकरकंद खा सकते हैं? - Diabetes patients kitni shakarkand kha sakte hain?
  4. क्या डायबिटीज के मरीजों को कोई नुकसान भी पहुंचा सकता है शकरकंद? - Kya diabetes patients ke liye sweet potato ke side effects hain?
  5. डायबिटीज के मरीजों के लिए शकरकंद पकाने का तरीका - Diabetes patients ke liye shakarkand banane ka tarike
क्या डायबिटीज में शकरकंद खाना चाहिए? के डॉक्टर

अगर आप सोच रहे हैं कि मधुमेह के रोगियों के लिए शकरकंद खाना क्यों और कैसे फायदेमंद है तो इसका कारण ये है कि शकरकंद एक लो ग्लाइसिमिक इंडेक्स (जीआई) वाली सब्जी है। वैसे खाद्य पदार्थ जिनका ग्लाइसिमिक इंडेक्स अधिक होता है वे ब्लड शुगर को बढ़ाने का काम करते हैं और चूंकि शकरकंद का जीआई सफेद आलू की तुलना में काफी कम है, इसलिए यह डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर लेवल को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद कर सकता है।

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इसके अलावा भी कई कारण हैं जिसकी वजह से डायबिटीज के मरीज अपनी डाइट में शकरकंद (स्वीट पोटैटो) को शामिल कर सकते हैं:

  • शकरकंद में बीटा-कैरोटीन नाम का कैरोटेनॉयड होता है जो इस जड़ वाली सब्जी को इसका चमकदार नारंगी रंग देता है। साथ ही शकरकंद विटामिन ए का भी बेहतरीन सोर्स है जो आंखों की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है। दरअसल, जिन लोगों को डायबिटीज होता है उनकी आंखें कमजोर होने और अंधेपन का खतरा भी बना रहता है। इस लिहाज से भी शकरकंद का सेवन डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है।
  • शकरकंद में विटामिन सी भी होता है जो शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है जिससे हमारे शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बेहतर होती है।
  • शकरकंद में आयरन भी होता है जो लाल रक्त कोशिकाओं को ऑक्सीजन बनाने और पोषक तत्वों को शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने में मदद करता है।
  • शकरकंद, प्रोटीन का प्लांट बेस्ड सोर्स है जिसे खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है, वजन घटाने में मदद मिलती है और इंसुलिन संवेदनशीलता भी बढ़ती है।
  • इसके अलावा शकरकंद में फाइबर भी भरपूर मात्रा में होता है जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ ही पेट भरने में भी मदद करता है।

चूंकि शकरकंद में भी कार्बोहाइड्रेट्स अधिक मात्रा में होते हैं इसलिए वे ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकते हैं लेकिन चूंकि इनमें फाइबर भी भरपूर मात्रा में होता है इसलिए फाइबर ब्लड शुगर लेवल के बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है। चूंकि किसी भी चीज की अति बुरी होती है फिर चाहे वह हेल्दी ही चीज क्यों न हो। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को शकरकंद का सेवन भी सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। चूंकि शकरकंद में एंटीऑक्सिडेंट्स, विटामिन्स, मिनरल्स आदि भरपूर मात्रा में होते हैं इसलिए आप इसे अपने डायबिटीज डाइट में शामिल कर सकते हैं लेकिन सीमित मात्रा में ही।

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डायबिटीज के मरीजों के लिए भले ही शकरकंद एक अच्छा और हेल्दी विकल्प हो लेकिन यहां आपको ये याद रखना जरूरी है कि इस सब्जी में भी कार्बोहाइड्रेट होता है। इसलिए इसके सकारात्मक फायदे आपको मिल सकें, इसके लिए कितनी मात्रा में शकरकंद खाना है, ये जानना जरूरी है। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर की मानें डायबिटीज के मरीजों को एक मध्यम आकार के शकरकंद का आधा हिस्सा ही खाना चाहिए क्योंकि यह 15 ग्राम कार्बोहाइड्रेट्स के बराबर होता है। हालांकि हर व्यक्ति के लिए पोर्शन साइज अलग-अलग हो सकता है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को शकरकंद का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या डायटिशियन से सलाह ले लेनी चाहिए। 

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इसमें कोई शक नहीं कि सफेद आलू की तुलना में शकरकंद एक बेहतर और पोषण से भरपूर विकल्प है, बावजूद इसके आपको सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए वरना ये आपके ब्लड ग्लूकोज लेवल पर नकारात्मक असर डाल सकता है। कुछ शकरकंद ऐसे होते हैं जो साइज में बहुत बड़े होते हैं और इसलिए कई बार हम ज्यादा खा लेते हैं। लिहाजा हमेशा मध्यम साइज के शकरकंद का ही चुनाव करें और साथ में बाकी के हेल्दी फूड्स को भी अपनी डेली डाइट में शामिल करें।

अक्टूबर 2011 में जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक स्टडी में बताया गया है कि खाने पकाने के कई तरीके ऐसे हैं जिनकी वजह से शकरकंद के ग्लाइसिमिक इंडेक्स (जीआई) की रैंकिंग बढ़ जाती है। बेकिंग और रोस्टिंग ये 2 तरीका है जिसकी वजह से शकरकंद का जीआई लेवल बदतर हो जाता है। इसके बाद नंबर आता है फ्राइंग का। ऐसे में आपको शकरकंद को उबालकर ही खाना बेहतर होगा क्योंकि ऐसा करने से उसका जीआई लेवल बेहद कम रहता है। लिहाजा डायबिटीज के मरीजों को शकरकंद को उबालकर ही खाना चाहिए। साथ ही आप चाहें तो शकरकंद का छिलका हटाने के बजाए उसे छिलके समेत खा सकते हैं ताकि फाइबर कॉन्टेंट में किसी तरह की कोई कमी न आए।

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कुल मिलाकर देखें तो शकरकंद को डायबिटीज के मरीजों के लिए हेल्दी फूड प्लान में शामिल किया जा सकता है लेकिन सिर्फ तभी जब आप सीमित मात्रा में इसका सेवन करें क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ ही इसमें कार्बोहाइड्रेट्स भी होता है।

Dr. Tanmay Bharani

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एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान
15 वर्षों का अनुभव

Dr. Sunil Kumar Mishra

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एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान
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Dr. M Shafi Kuchay

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