मोटापा कई तरह की समस्याओं की जड़ है। मोटापे की वजह से हृदय रोग, डायबिटीज, हाई बीपी और मेटाबाॅलिक स्तर में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन क्या आप जानतते हैं कि मोटापा पुरूषों को पिता बनने से भी रोकता है? जी, हां। मोटापा पुरूषों में नपुंसकता को भी बढ़ाता है। दरअसल बढ़ता वजन पुरूषों के स्पर्म में कमी करता है जिससे नपुंसकता बढ़ती है।
आप यहां दिए लिंक पर क्लिक करके जान सकते हैं कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन का इलाज किस प्रकार किया जाता है।
आज इस लेख में आप जानेंगे कि मोटापा कैसे पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है -
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शोध क्या कहते हैं?
क्या मोटापे की वजह से नपुंसकता बढ़ती है, यह जानने के लिए कई अध्ययन किए गए हैं। एक अध्ययन में यह साबित हुआ कि जैसे-जैसे पुरूषों में 20 पाउंड (लगभग 9 किलोग्राम) की बढ़ोत्तरी हेाती है, वैसे-वैसे उनमें नपुंसकता की आशंका 10 फीसदी तक बढ़ जाती है। पुरूष के पिता बनने की आशंका तब और कम हो जाती है जब पार्टनर ओवर वेट हो, पुरूष की उम्र ज्यादा हो, धूम्रपान करता हो, काफी मात्रा में शराब पीता हो और किसी तरह के रसायनों के संपर्क में आता हो।
हालांकि यह जानना जरूरी है कि वजन किस तरह शुक्राणु के निर्माण या नपुंसकता को बढ़ावा देता है? एक सिद्धांत के अनुसार वजन बढ़ने से सेक्स हार्मोन में बदलाव आते हैं। सेक्स हार्मोन टेस्टिस के लिए ऊर्जा की तरह है ताकि वह स्पर्म का निर्माण कर सके। मोटापा फैट बढ़ाता है और फैट मेल हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) को महिला हार्मोन (एस्ट्रोजेन) में परिवर्तित कर देता है। पुरूषों में महिला हार्मोन बढ़ने की वजह से स्पर्म प्रोडक्शन में कमी आती है।
इसी तरह एक अन्य थ्योरी से पता चला है कि वसा बढ़ने के साथ पुरूष के शरीर और उसके टेस्टिस के बीच तापमान में सामान्य अंतर समाप्त होने लगता है। यह भी नपुंसकता के लिए जिम्मेदार है। यही बात बहुत ज्यादा पतले पुरूषों पर भी लागू होती है। जब पुरूष काफी पतला होता है तो उसे हर समय भूख लगती है, जिससे हार्मोन प्रभावित होते हैं इस कारण स्पर्म निर्माण में कमी और नपुंसकता बढ़ती है।
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कौन सी वजहें हैं जिम्मेदार?
हालांकि शोधों से अब तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है कि मोटापा किस तरह नपुंसकता तो बढ़ाता है। लेकिन विशेषज्ञ कुछ सिद्धांत पर विश्वास करते हैं। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं -
टेस्टोस्टेरोन का स्तर
वसा कोशिकाओं की मदद से शरीर हार्मोन का प्रबंधन करता है। जब वसा असंतुलित हो जाए तो इससे हार्मोन भी प्रभावित होते हैं। अधिक वजन वाले पुरूषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हेाता है और महिला हार्मोन एस्ट्रोजन बढ़ता है। इसी कारण मोटापे की वजह से पुरूषों में शुक्राणु की कमी हो जाती है और उनमें नपुंसकता बढ़ती है।
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शरीर का बढ़ता तापमान
स्पर्म के निर्माण में शरीर का तापमान बहुत मायने रखता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि टेस्टिस गर्म होने की वजह से स्पर्म की गिनती और गुणवत्ता में कमी आती है। शरीर में वसा के इंसुलेशन की वजह से अंडकोश का तापमान बढ़ जाता है। नतीजतन स्पर्म को क्षति पहुंचती है।
यौन रोग
मोटापा पुरूषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (स्तंभन दोष) से संबंधित है। हालांकि इसके पीछे वजह थोड़ी जटिल है। लेकिन मोटापे के कारण उच्च रक्त चाप होता है जिस वजह से पुरूष लिंग में रक्त प्रवाह सही तरह से नहीं होता। नतीजतन पुरूष को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है।
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आप क्या करें?
नपुंसकता और मोटापा दोनों समस्याओं का एक साथ सामना करना किसी भी सामान्य पुरूष के लिए दुखदायी और चिंताजनक हो सकता है। मरीज को अपनी स्थिति पर शर्मिंदगी, खुद में अधूरापन महसूस हो सकता है। इस तरह के दबाव में अपनी जीवनशैली में बदलाव करना आसान नहीं होता। अगर आप अपने मोटापे और नपुंसकता से उबरना चाहते हैं तो बेहतर है कि अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हों। मोटापे कम करें। इसके लिए जरूरी हो तो विशेषज्ञ की सलाह लें। इसके साथ ही स्पर्म टेस्ट करवाएं ताकि आपकी स्थिति का ठीक-ठीक पता चल सके।
सारांश
इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या किसी भी पुरुष को हो सकती है। वैसे तो यह गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन अगर इसका समय रहते इलाज न किया जाए, तो इससे पुरुष को नपुंसकता का शिकार होना पड़ सकता है। यही कारण है कि इस छोटी-सी समस्या को भी गंभीरता से लेने की जरूरत है।
पुरुषों का बढ़ता वजन उन्हें बना सकता है नपुंसक के डॉक्टर
Dr. Purushottam Sah
पुरुष चिकित्सा
40 वर्षों का अनुभव




