लिवर की बीमारी सामान्य से लेकर गंभीर हो सकती है. कुछ मामलों में यह मौत तक का कारण बन सकती हैं. वैसे तो शराब को लिवर की बीमारी का मुख्य कारण माना जाता है, लेकिन खानपान, खराब जीवनशैली और फिजिकली एक्टिव न रहने से भी लिवर की बीमारी हो सकती है. इसके अलावा, कुछ रोग भी लिवर की बीमारी का कारण बन सकते हैं. इसमें क्रोन रोग भी शामिल है. क्रोन रोग से पीड़ित लोगों को लिवर की बीमारियों का सामना करना पड़ता है.
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आज इस लेख में आप क्रोन रोग के कारण होने वाली लिवर की बीमारी के बारे में विस्तार से जानेंगे -
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- क्रोन रोग क्या है?
- क्रोन रोग व लिवर की बीमारी आपस में कैसे संबंधित है?
- क्रोन रोग से होने वाली लिवर की बीमारियां
- क्रोन रोग से होने वाले लिवर की बीमारी के लक्षण
- क्रोन रोग में लिवर रोग से कैसे बचें
- सारांश
क्रोन रोग क्या है?
क्रोन रोग एक सूजन आंत्र रोग है, जो जीआई पथ में क्रोनिक सूजन का कारण बनता है. यह सूजन पेट से लेकर लिवर तक फैल सकती है. जब क्रोन रोग के कारण होने वाली सूजन लिवर तक फैल जाती है, तो लिवर से जुड़ी बीमारियां होने लगती हैं. क्रोन रोग वाले लगभग 20 फीसदी लोगों को लिवर की बीमारी का सामना करना पड़ता है. क्रोन रोग में पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसमें बुखार, पेट दर्द, दस्त और वजन कम होने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं.
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क्रोन रोग व लिवर की बीमारी आपस में कैसे संबंधित है?
क्रोन रोग पाचन से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें आंतों और लिवर में सूजन होने लगती है. जब यह सूजन बढ़ती जाती है, तो लिवर की समस्याओं का जोखिम अधिक हो जाता है. इस स्थिति में लिवर से जुड़ी बीमारियां जैसे- लिवर फेलियर, फैटी लिवर या लिवर सिरोसिरस आदि का सामना करना पड़ सकता है. क्रोन रोग गंभीर लिवर रोगों को विकसित कर सकता है. इसके अलावा, क्रोन रोग की दवाइयां भी दुष्प्रभाव पैदा करके लिवर रोगों को जन्म दे सकती हैं. इसलिए, अगर आप क्रोन रोग में होने वाली सूजन को कम करने के लिए दवाइयां ले रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर ही लें. वहीं, क्रोन रोग वाले लोगों को समय-समय पर लिवर की जांच भी करवाते रहना चाहिए.
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क्रोन रोग से होने वाली लिवर की बीमारियां
क्रोन रोग लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. इसमें लिवर में सूजन होने लगती है और लिवर की खराबी के लक्षणों का अनुभव होने लगता है. क्रोन रोग से होने वाली लिवर की बीमारियां इस प्रकार हैं -
फैटी लिवर रोग
क्रोन रोग वाले लोगों में फैटी लिवर की बीमारी होना सबसे आम है. अगर किसी को क्रोन रोग है, तो उसे फैटी लिवर होने की आशंका बढ़ जाती है. इस स्थिति में वजन कम होने व लिवर में सूजन होने जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं. फैटी लिवर रोग में लिवर में फैट जमा होने लगता है. फैटी लिवर रोग दो प्रकार के होते हैं, इसमें शराब से संबंधित फैटी लिवर रोग और नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर रोग शामिल होते हैं. जिन लोगों को क्रोन रोग होता है, उन्हें नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर रोग हो सकता है.
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हेपेटाइटिस
हेपेटाइटिस भी एक लिवर रोग है, जिसमें लिवर में सूजन होने लगती है. क्रोन रोग की वजह से हेपेटाइटिस रोग पैदा हो सकता है. हेपेटाइटिस एक वायरल संक्रमण के कारण होता है. अगर किसी को हेपेटाइटिस रोग हो गया है, तो इसका तुरंत इलाज करवाना जरूरी होता है.
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पित्त नलिकाओं पर असर
क्रोन रोग के कारण पित्त नलिकाएं भी प्रभावित हो सकती हैं. पित्त नलिकाएं पाचन तंत्र के साथ काम करती हैं. पित्त नलिकाएं लिवर से छोटी आंत में जाती हैं. ये छोटी आंत को भोजन में फैट को पचाने में मदद करते हैं. पित्त नलिकाओं के प्रभावित होने पर कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
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लिवर सिरोसिस
क्रोन रोग से लिवर सिरोसिस की समस्या हो सकती है, लेकिन यह कुछ ही मामलों में देखने को मिलता है. क्रोन रोग की वजह से होने वाला लिवर सिरोसिस रोग बहुत गंभीर हो सकता है.
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पित्ताशय की पथरी
क्रोन रोग के चलते पित्ताशय की पथरी होना आम है. क्रोन रोग होने पर पित्त कभी-कभी पित्ताशय की थैली के भीतर पथरी बना देता है. इस स्थिति में पथरी से वो नलिकाएं अवरुद्ध हो जाती हैं, जिनसे पित्त को निकलता होता है. इस स्थिति में दर्द, मतली और उल्टी हो सकती है. पित्ताशय में होने वाली पथरी की थैली को हटाने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है.
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क्रोन रोग से होने वाले लिवर की बीमारी के लक्षण
क्रोन रोग वाले लोगों का लिवर डैमेज हो सकता है. इसके साथ ही क्रोन रोग होने पर लिवर फेलियर, लिवर सिरोसिस, फैटी लिवर और हेपेटाइटिस के लक्षण महसूस हो सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को क्रोन रोग की वजह से लिवर की बीमारी होती है, तो उसमें निम्न लक्षण दिख सकते हैं -
- थकान और कमजोरी
- काम में मन न लगना
- लगातार वजन कम होना
- पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द होना
- त्वचा और आंखों का रंग पीला पड़ना
- त्वचा पर आसानी से खरोंच लग जाना
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क्रोन रोग में लिवर रोग से कैसे बचें
अगर क्रोन रोग से ग्रस्त मरीज अपना वजन संतुलित बनाए रखता है और सही डाइट लेता है, तो विभिन्न तरह के लिवर रोग से बचा रह सकता है. आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं -
- क्रोन रोग से पीड़ित मरीज को नियमित रूप से एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए. इससे वजन को संतुलित बनाए रखने में मदद मिलती है और शारीरिक गतिविधि पूरी तरह से होती रहती है.
- एक्सरसाइज के साथ-साथ संतुलित भोजन करना भी जरूरी है. इसके लिए पोषक तत्वों से युक्त भोजन करना चाहिए, जिसमें मीठे पेय पदार्थ, तली व मिर्च-मसाले वाली चीजें नहीं होनी चाहिए.
- उबली सब्जियां व बिना छिलके वाले फल खाने से क्रोन रोग से ग्रस्त मरीज को फायदा हो सकता है.
- हाई ट्रांस और सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर भी लिवर रोग से बचा जा सकता है.
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सारांश
क्रोन रोग पाचन से जुड़ी समस्या है, जिसमें आंतों में सूजन शुरू होती है और धीरे-धीरे लिवर तक फैलने लगती है. जब यह सूजन लिवर को प्रभावित करती है, तो लिवर से जुड़ी बीमारियां होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है. क्रोन रोग के चलते लिवर सिरोसिस, फैटी लिवर और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर लिवर बीमारियां हो सकती हैं. ऐसे में अगर किसी को भी क्रोन रोग है, तो लिवर रोग से बचने के लिए इसका समय पर इलाज करना जरूरी होता है.
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