फैटी लिवर - Fatty Liver in Hindi

Dr. Rajalakshmi VK (AIIMS)MBBS

March 22, 2017

February 16, 2021

फैटी लिवर

लिवर (जिगर) हमारे शरीर का एक मुख्य आंतरिक अंग होता है, जो शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि और दूसरा सबसे बड़ा अंग होता है। लिवर पित्त का निर्माण करता है, जो वसा के टूटने में मदद करता है। यह रक्त के डिटाक्सिफिकैशन में भी मदद करता है। एक सामान्य लिवर में कुछ फैट ज़रूर होता है, लेकिन कभी-कभी लिवर की कोशिकाओं में अनावश्यक फैट की मात्रा बढ़ जाती है। यह एक गंभीर रोग होता है जिसे आम तौर पर फैटी लिवर के नाम से जाना जाता है। फैटी लिवर विकार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं - एल्कोहल फैटी लिवर और गैर एल्कोहल फैटी लिवर। अनुचित आहार के साथ साथ नियमित और अधिक मात्रा में शराब पीना, मोटापा आदि भी फैटी लिवर के लिए कारण हो सकते हैं। यह बीमारी आनुवांशिक (पारिवारिक) भी हो सकती है।

(और पढ़ें - लिवर की बीमारी के लक्षण)

फैटी लिवर के प्रकार - Types of Fatty Liver in Hindi

फैटी लीवर के दो मूल प्रकार हैं: नॉनअलॉसिक और अल्कोहलिक।

1. नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर

नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर की बीमारी तब विकसित होती है जब लिवर को वसा को तोड़ने में कठिनाई होती है, जिससे लिवर के ऊतकों में वसा जमने लग जाता है। इसका कारण शराब से संबंधित नहीं है। इसका निदान तब किया जाता है जब जिगर का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वसा होता है। (और पढ़ें - लिवर को साफ करने के लिए क्या खाना चाहिए)

2. अल्कोहलिक फैटी लिवर

अल्कोहल-संबंधी फैटी लीवर, अल्कोहल-संबंधी लिवर रोग का सबसे प्रारंभिक चरण है। ज्यादा शराब पीने से लीवर को नुकसान पहुंचता है, और लीवर वसा को तोड़ने में असमर्थ हो सकता है। शराब से परहेज करने से संभवतः फैटी लिवर की समस्या कम हो जाती है। शराब नहीं पीने के छह सप्ताह के भीतर, लिवर से वसा खत्म हो जाता है। हालांकि, यदि अत्यधिक शराब का उपयोग जारी रहता है, तो लिवर सिरोसिस हो सकता है।

(और पढ़ें - शराब छुड़ाने के उपाय)

फैटी लिवर के लक्षण - Fatty Liver Symptoms in Hindi

फैटी लिवर की शुरूआत में अक्सर लक्षण देखने को नहीं मिलते। लेकिन जब यह अधिक बढ़ जाता है, तब धीरे-धीरे इसके लक्षण उभरने लगते हैं। इसमें कुछ लोग थकान, मतली, पेट दर्द, शरीर के वजन में कमी, भूख में कमी और कन्फ्यूजन (भ्रम) जैसे लक्षणों का सामना करते हैं। पेट में लगातार दर्द होना रोजाना की समस्या बन जाती है। (और पढ़ें - पेट दर्द का देसी उपचार)

इन लक्षणों को विशेष रूप से विकार नहीं बताया जाता है, इसलिए आपको अपने डॉक्टर से परामर्श लेने और इसका ठीक से इलाज कराने की आवश्यकता है। फैटी लिवर का आमतौर पर 40-60 की उम्र के बाद पता चलता है। यह हालत इतनी गंभीर नहीं है लेकिन इसका समय पर पता ना लगना और इलाज ना होना लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है जिसे सिरोसिस कहा जाता है। इससे पीलिया जैसी अन्य बीमारियां हो सकती हैं। आपका लिवर सूजन से ग्रस्त हो सकता है। लिवर की अत्यधिक सूजन और क्षति लिवर के कार्य को प्रभावित कर सकती हैं।

(और पढ़ें - लिवर में सूजन होने के लक्षण)

फैटी लिवर के कारण और जोखिम कारक - Fatty Liver Causes & Risk Factors in Hindi

फैटी लिवर क्यों होता है?

फैटी लीवर का सबसे आम कारण अधिक शराब पीना या शराब की लत। अक्सर फैटी लिवर की समस्या उन लोगों में भी देखि जाती है जो शराब नहीं पीते। इन मामलों में डॉक्टर यह नहीं जानते हैं कि फैटी लिवर का क्या कारण होता है। (और पढ़ें - लिवर फैटी होने पर क्या करें)

जब शरीर बहुत अधिक वसा बनाता है या वसा को तेजी से मेटाबोलाइज नहीं कर पाता है, तब फैटी लीवर की समस्या होती है। अतिरिक्त वसा लिवर की कोशिकाओं में संग्रहित हो जाता है, जहां यह फैटी लीवर रोग को जन्म होता है। ज्यादा वसा-युक्त या चीनी वाले आहार खाने से सीधा फैटी लिवर सम्बन्ध होने के प्रमाण कम हैं, लेकिन ऐसे खाद्य पदार्थों का इसमें योगदान अवश्य होता है। (और पढ़ें - फैटी लिवर में क्या खाएं)

शराब के अलावा, फैटी लीवर के अन्य सामान्य कारणों में शामिल हैं -

  • मोटापा
  • हाइपरलिपिडिमिया ( रक्त में वसा का स्तर ज्यादा होना)
  • डायबिटीज (और पढ़ें - डायबिटीज का आयुर्वेदिक इलाज)
  • आनुवंशिकता
  • तेजी से वजन कम होना (और पढ़ें - वजन बढ़ाने के तरीके)
  • एस्पिरिन, स्टेरॉयड, टैमोक्सीफेन और टेट्रासाइक्लिन सहित कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट

फैटी लिवर होने का जोखिम किन वजहों से बढ़ जाता

रोगों और अन्य स्थितियों की एक विस्तृत सीमा, जो नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग के जोखिम को बढ़ा सकती है। जिसमें शामिल हैं: -

(और पढ़ें - फैटी लीवर के घरेलू उपाय)

फैटी लिवर से बचाव - Prevention of Fatty Liver in Hindi

फैटी लीवर के लिए कोई दवा या सर्जिकल उपचार नहीं हैं, लेकिन कुछ कदम नुकसान को रोकने या उलटने में मदद कर सकते हैं।
 
सामान्य तौर पर, यदि आपके पास फैटी लिवर है, तो -

  • वजन कम करें - सुरक्षित रूप से। यह आमतौर पर एक सप्ताह में आधे से एक किलोग्राम से अधिक नहीं खोने का मतलब है (और पढ़ें - वजन कम करने वाले आहार)
  • व्यायाम करें और अधिक सक्रिय रहें - सप्ताह के अधिकांश दिनों में कम से कम 30 मिनट के व्यायाम का लक्ष्य रखें
  • अपने ट्राइग्लिसराइड्स को कम करें - एक स्वस्थ पौधे-आधारित आहार, व्यायाम और दवाएं आपके कोलेस्ट्रॉल और आपके ट्राइग्लिसराइड्स को स्वस्थ स्तरों पर रखने में मदद कर सकती हैं (और पढ़ें - कोलेस्ट्रॉल कम करने के घरेलू उपाय)
  • शराब से बचें
  • यदि आपको डायबिटीज है तो उसे नियंत्रित करें
  • स्वस्थ, संतुलित आहार खाएं
  • अपनी शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं
  • लीवर स्पेशलिस्ट से नियमित जांच करवाएं

(और पढ़ें - डायबिटीज के लिए व्यायाम)

फैटी लिवर का परीक्षण - Diagnosis of Fatty Liver in Hindi

फैटी लिवर का निदान या परीक्षण कैसे करें?

  • शारीरिक परिक्षण – अगर आपके लिवर में सूजन आ गई है तो डॉक्टर आपके पेट की जांच करके लिवर के आकार में वृद्धी का पता लगा सकते हैं। अगर आपको थकान या भूक कम लगना जैसी समस्याएं होने लगी हैं, तो इस बारे में अपने डॉक्टर को बताएं। पहले लिए गए सप्लिमेंट्स, शराब का सेवन और दवाइयां आदि की पूर्ण जानकारी डॉक्टर को जरूर दें। (और पढ़ें - थकान दूर करने के उपाय)
  • खून की जांच – नियमित रूप से खून की जांच करके डॉक्टर लिवर में एंजाइम की मात्रा का सामान्य से अधिक होना आदि पता कर सकते हैं हैं। पर इस से फैटी लिवर होने की पुष्टी नहीं हो पाती, सूजन होने के कारण का पता लगाने के लिए आगे विश्लेषण करना जरूरी होता है। (और पढ़ें - सूजन की आयुर्वेदिक दवा)
  • इमेंजिंग परिक्षण - लिवर में मोटापा या सूजन का पता लगाने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड की मदद लेते हैं। अल्ट्रासाउंड टेस्ट द्वारा ली गई तस्वीर से लिवर का अतिरिक्त मोटापा सफेद क्षेत्र के रूप में दिखाई देता है। इसके अलावा सीटी या एमआरआई स्कैन जैसे अन्य इमेंजिंग भी लिए जा सकते हैं। अल्ट्रासाउंड के जैसा एक इमेजिंग टेस्ट फाइब्रोस्कैन भी होता है। इसमें भी अल्ट्रासाउंड की तरह की ध्वनि तरंगों की मदद से लिवर के घनत्व, सूजन या मोटापा से प्रभावित क्षेत्रों की जांच की जाती है। फाइब्रोस्कैन की मदद से लिवर के सामान्य टिश्यूज़ की जांच भी की जाती है। इमेंजिंग टेस्ट से लिवर में फैट का पता लगाया जा सकता है, लेकिन इसकी मदद से डॉक्टर लिवर में हो रही अन्य समस्याओं की पुष्टी नहीं कर पाते। (और पढ़ें - लिवर फंक्शन टेस्ट नार्मल रेंज)
  • लिवर बायोप्सी – लिवर के परिक्षण के लिए डॉक्टर सुई की मदद से लिवर का एक टुकड़ा निकालते हैं। निश्चित रूप से फैटी लिवर का पता करने का यही एकमात्र तरीका होता है इस दौरान दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर, मरीज को सामान्य बेहोशी की दवाएं दे देते हैं। बायोप्सी भी डॉक्टरों को रोग का सही कारण निर्धारित करने में मदद करता है (और पढ़ें - बायोप्सी क्या है)

फैटी लिवर का इलाज - Fatty Liver Treatment in Hindi

फैटी लिवर का उपचार कैसे करें -

फैटी लिवर के रोगियों के लिए उपचार के लिए कुछ विकल्प इस प्रकार हैं - जीवनशैली में बदलाव (व्यायाम करना, वजन घटाना,आहार सेवन आदि), दवाइयाँ, सप्लिमेंट्स (supplements), ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 fatty acids), सर्जरी, लिवर प्रत्यारोपण (liver transplantation)।

  • वजन घटाना और व्यायाम – वजन घटाना और व्यायाम करना फैटी लिवर के मरीजों के उपचार में काफी मददगार होते हैं। लिवर फैट को कम करने के लिए शरीर का बहुत ज्यादा वजन घटाने की जरूरत नही पड़ती, शरीर से 10 प्रतिशत वजन करना काफी होता है। फुर्तीले व्यायाम करने से लिवर के फैट में कमी होती है, इसके अलावा व्यायाम से NASH की सूजन को भी कम करने में मदद करता है। (और पढ़ें - व्यायाम करने का सही समय)
  • दवाइयाँ और अन्य उपचार:-
    • इन्सुलिन सेन्सिटाइजर्स – मेटफोर्मिन (ग्लूकोफेज) डायबिटीज के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली दवा है, जो कोशिकाओं की इन्सुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने का काम करती है। यह सीधे इन्सुलिन प्रतिरोध के विपरित प्रतिक्रिया करती है जो लिवर रोग और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के साथ जुड़े होते हैं। पियोग्लिटाज़ोन (एक्टोस) और रोसिग्लिटाज़ोन (एवेंडिया) दवाइयों का प्रयोग भी डायबिटीज के उपचार कि लिए किया जाता है, क्योंकि ये दवाएं भी इन्सुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं। इन दोनों दवाओं (पियोग्लिटाज़ो और रोसिग्लिटाज़ोन) से लिवर के फैट और अन्य प्रकार की लिवर समस्याओं में कमी हुई है। पियोग्लिटाज़ो निशान (scarring) की समस्या को भी कम कर देती है, जो NASH (नॉन-एल्कोहॉलिक स्टीटोहैपेटाइटिस) के कारण बनते हैं। (और पढ़ें - इंसुलिन प्रतिरोध के कारण)
    • एंटीऑक्सिडेंट्स – NASH के उपचार के लिए विटामिन ई का प्रयोग भी किया जा सकता है, मगर यह हर रोगी के लिए प्रयोग नहीं की जा सकती। इसको चुनिंदा मरीजों को दिया जाता है इसके संभावित जोखिमों के बारे में मरीजों को अच्छे से जान लेना चाहिए। (और पढ़ें - एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार)
    • ओमेगा-3 फैटी एसिड - ओमेगा -3 फैटी एसिड फैटी लिवर रोग और मेटाबोलिक सिंड्रोम वाले रोगियों के लिए उचित उपचार हो सकता है। क्योंकि इन रोगियों में कार्डियोवेस्कुलर (हृदय तथा रक्तवाहिकाओं संबंधी) रोग और मौत की संभावना अधिक हो जाती है।
    • लिपिड कम करने की दवा – खास तौर पर एज़ेटिमिब (ezetimibe) और स्टेटिन (statins) का उपयोग मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़े असामान्य रक्त लिपिड को सामान्य स्तर पर लाने के लिए और उनका इलाज करने के लिए किया जाता है। (और पढ़ें - कोलेस्ट्रॉल टेस्ट कैसे होता है)
  • सर्जरी – बेरिएट्रिक सर्जरी पेट की सर्जरी होती है जो पेट के आसपास का फैट निकालने के लिए की जाती है। क्योंकि मोटापा नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग के कारणों में एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। जबकि वजन कम होना नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर रोग में लाभकारी प्रभाव दिखाता है। इसमें कोई आशचर्य नहीं है कि बेरिएट्रिक सर्जरी को नॉन-एल्कोहॉलिक रोग के लिए एक संभावित उपचार माना जाता है।
  • लिवर प्रत्यारोपण – जब लिवर सिरोसिस रोग ग्रस्त हो जाता है और जटिलताएं बढ़ जाती है। तो उपचार के लिए एक ही दो ही विकल्प बचते हैं या तो जटिलताओं का इलाज किया जाए जैसे ही वे लिवर में पनती हैं, या फिर रोग ग्रस्त लिवर को प्रत्यारोपित लिवर के साथ बदल दिया जाए। असल में, नॉन अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (नॉन अल्कोहलिक फैटी लवर रोग का एक प्रकार) लिवर प्रत्यारोपण करने का तीसरा सबसे सामान्य कारण बन गया है। केवल एल्कोहॉलिक लिवर रोग और हैपेटाइटिस-सी इससे पहले आते हैं। (और पढ़ें - लीवर सिरोसिस के घरेलू नुस्खे)

फैटी लिवर के नुकसान - Fatty Liver Complications in Hindi

फैटी लिवर से होने वाले अन्य बीमारियां कौन सी हैं?

लिवर कैंसर – नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर औऱ नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस दोनों के लिए सिरोसिस मुख्य जटिलताओं में से एक है, जो लिवर में निशान या स्कारिंग (फाइब्रोसिस) का कारण बनती है। सिरोसिस लिवर में किसी प्रकार की क्षति पहुंचने से होता है, जैसे नॉन एल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस के कारण सूजन बढ़ना। जैसे ही लिवर बढ़ती सूजन को रोकने की कोशिश करता है, तो इससे निशान या स्कार (फाइब्रोसिस) बनने लगते हैं। लगातार बढ़ती सूजन के साथ, फाइब्रोसिस ज्यादा से ज्यादा लिवर के ऊतकों में फैलने लगता है। (और पढ़ें - फैटी लिवर का आयुर्वेदिक)

सिरोसिस की प्रतिक्रिया पर रोकथाम ना की जाए तो ये समस्याएं भी हो सकती है:-

(और पढ़ें - लिवर सिरोसिस में क्या खाना चाहिए)



संदर्भ

  1. Leon A. Adams, Paul Angulo, and Keith D. Lindor. Nonalcoholic fatty liver disease. CMAJ. 2005 Mar 29; 172(7): 899–905. PMID: 15795412.
  2. Kalra S, Vithalani M, Gulati G, Kulkarni CM, Kadam Y, Pallivathukkal J, Das B, Sahay R, Modi KD. Study of prevalence of nonalcoholic fatty liver disease (NAFLD) in type 2 diabetes patients in India (SPRINT). J Assoc Physicians India. 2013 Jul;61(7):448-53. PMID: 24772746.
  3. Min-Sun Kwak, Donghee Kim. Non-alcoholic fatty liver disease and lifestyle modifications, focusing on physical activity. Korean J Intern Med. 2018 Jan; 33(1): 64–74. Published online 2017 Dec 6. PMID: 29202557.
  4. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Fatty Liver Disease
  5. Better health channel. Department of Health and Human Services [internet]. State government of Victoria; Liver - fatty liver disease
  6. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases [internet]: US Department of Health and Human Services; Eating, Diet, & Nutrition for NAFLD & NASH
  7. American Liver Foundation [Internet]. New York: American Association for the Study of Liver Diseases; The Progression of Liver Disease.

फैटी लिवर के वीडियो

फैटी लिवर के डॉक्टर

Dr. Abhay Singh Dr. Abhay Singh गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
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फैटी लिवर की दवा - Medicines for Fatty Liver in Hindi

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फैटी लिवर की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Fatty Liver in Hindi

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