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लिम्फेडेमा क्या है?

लिम्फेडेमा को सूजन भी कहा जा सकता है। यह आमतौर पर, हाथ या पैर में होती है। इस स्थिति में कभी-कभी दोनों हाथ या दोनों पैर एकसाथ भी सूज सकते हैं। यह आमतौर पर तब होता है जब कैंसर के उपचार के तौर पर लिम्फ नोड्स (छोटी-छोटी अंडाकार गांठें या ग्रंथियां) को हटाया या नुकसान पहुंचाया जाता है। यह लसीका प्रणाली (प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा, जो अपशिष्ट पदार्थ, बैक्टीरिया और वायरस को द्रव के रूप में शरीर से बाहर निकालता है और संक्रमण व बीमारी से बचाता है) में आए रुकावट के कारण होता है। यह रुकावट लिम्फ तरल पदार्थ को अच्छी तरह से बाहर निकलने से रोकता है जिस कारण सूजन होती है। 
हालांकि, वर्तमान में लिम्फेडेमा बीमारी के लिए कोई इलाज नहीं है। इसे केवल प्रभावित अंग की शुरुआती जांच से ही नियंत्रित किया जा सकता है। 

लिम्फेडेमा के लक्षण

  • उंगलियों सहित पूरे हाथ या पैर में सूजन आना
  • भारीपन या जकड़न महसूस होना
  • हाथ या पैर को हिलाने में दिक्कत आना
  • दर्द और असहज महसूस होना
  • बार-बार संक्रमण होना
  • त्वचा का सख्त और मोटा होना (फाइब्रोसिस)

लिम्फेडेमा का कारण

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए लसीका तंत्र महत्वपूर्ण है। यह बैक्टीरिया, वायरस और अपशिष्ट पदार्थों को इकट्ठा करके शरीर में प्रोटीन युक्त लिम्फ फ्लूइड (लसीका प्रणाली से बहने वाला एक तरल पदार्थ) का संचार करती है। लसीका प्रणाली, लसीका वाहिकाओं के माध्यम से लिम्फ फ्लूइड और हानिकारक पदार्थों को एकत्र करती है फिर इन्हें लिम्फोसाइट्स (संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाएं, जो लिम्फ नोड्स में होती हैं) द्वारा फिल्टर किया जाता है और अंततः यह शरीर से द्रव के रूप में बाहर निकल जाती है।

(1) प्राइमरी लिम्फेडेमा के कारण

  • मिलरॉय रोग: यह विकार नवजात बच्चों में होता है और इसके कारण असामान्य रूप से लिम्फ नोड्स बनने लगते हैं।
  • मेज रोग: यह विकार अक्सर किशोरावस्था के आसपास या गर्भावस्था के दौरान होता है और अक्सर इस विकार के कारण लिम्फेडेमा की समस्या पैदा होती है, हालांकि यह 35 साल की उम्र तक भी हो सकता है।
  • लेट-ऑनसेट लिम्फेडेमा: यह रोग बहुत कम किसी को होता है। आमतौर पर यह 35 साल की उम्र के बाद होता है।

(2) सेकेंडरी लिम्फेडेमा के कारण

लिम्फ नोड्स या लिम्फ वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाली कोई भी स्थिति या प्रक्रिया लिम्फेडेमा का कारण बन सकती है। इसके निम्न कारण हैं:

  • सर्जरी: लिम्फ नोड्स और लिम्फ वाहिकाओं को हटाने या चोट के कारण लिम्फेडेमा हो सकता है।
  • कैंसर के लिए रेडिएशन ट्रीटमेंट: रेडिएशन के कारण लिम्फ नोड्स या लिम्फ वाहिकाओं पर घाव और सूजन हो सकती है।
  • संक्रमण: लिम्फ नोड्स के या परजीवी संक्रमण लिम्फ फ्लूइड के प्रवाह को बाधित कर सकता है, जिस कारण लिम्फेडेमा हो सकता है। 

लिम्फेडेमा का इलाज

लिम्फेडेमा को ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसमें होने वाली सूजन को कुछ हद तक नियंत्रित करने और इसकी स्थिति को गंभीर होने से बचाया जा सकता है।

  • बैंडेज: 
    प्रभावित हिस्से (हाथ या पैर की उंगलियां) को बैंडेज से कसकर लपेटें लेकिन बाकी अंग को ढीला रहने दें, ताकि उस हिस्से में मौजूद द्रव अंग के दूसरी ओर बहने लगे और सूजन कम होने लगे। इस प्रक्रिया के लिए किसी प्रोफेशनल व्यक्ति की मदद लेना उचित होगा।
  • कंप्रेशन गारमेंट: 
    सूजन वाले अंग में फ्लूइड के स्राव के लिए प्रभावित हाथ या पैर पर दबाव बनाने के लिए स्टॉकिंग्स पहन सकते हैं। ध्यान रखें, व्यायाम या हवाई जहाज से यात्रा करते समय कंप्रेशन गारमेंट पहनना बहुत जरूरी है क्योंकि ऊंचाई वाली जगहों पर लिम्फेडेमा की स्थिति और खराब हो सकती है। 
  • मसाज थेरेपी: 
    इसमें प्रभावित हिस्से की हल्के हाथों से मालिश की जाती है जिससे लिम्फ फ्लूइड का संचार हो सके। एक प्रशिक्षित पेशेवर ही इस तरह की मालिश कर सकता है, जिससे सूजन वाले हिस्से से द्रव को हटाया जा सकता है। 
  • संक्रमण से बचें: 
    प्रभावित हिस्से पर किसी तरह का कट लगने, खरोंच और जलन से बचें क्योंकि इनकी वजह से संक्रमण हो सकता है।
  1. हाथ या पैर में सूजन (लिम्फेडेमा) के डॉक्टर
Dr. Sushila Kataria

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सामान्य चिकित्सा

Dr. Sanjay Mittal

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Dr. Prabhat Kumar Jha

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