फेनिलकीटोन्यूरिया - Phenylketonuria (PKU) in Hindi

Dr. Pradeep JainMD,MBBS,MD - Pediatrics

October 03, 2020

January 21, 2021

कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!
फेनिलकीटोन्यूरिया
कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!

फेनिलकीटोन्यूरिया को पीकेयू भी कहा जाता है। यह एक दुर्लभ वंशानुगत विकार है, जिसमें शरीर में फेनिलएलनिन नामक एमिनो एसिड बनने लगता है। पीकेयू ऐसे जीन में दोष के कारण होता है, जो फेनिलएलनिन को तोड़ने के लिए आवश्यक एंजाइम बनाने में मदद करता है। जब पीकेयू से ग्रस्त व्यक्ति प्रोटीन या एस्पार्टेमयुक्त (अप्राकृतिक मीठी चीजें) खाद्य पदार्थ का सेवन करते हैं, तो आवश्यक एंजाइम नहीं होने की वजह से फेनिलएलनिन संसाधित नहीं होता और इसकी मात्रा बढ़ती चली जाती है, जो कि गंभीर स्वास्थ समस्याओं का कारण बन सकती है।

फेनिलकीटोन्यूरिया के संकेत और लक्षण क्या हैं? - Phenylketonuria Symptoms in Hindi

पीकेयू से ग्रस्त नवजात शिशुओं में शुरू में कोई लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि, उपचार न होने पर कुछ महीनों के अंदर पीकेयू के लक्षण विकसित हो सकते हैं।

पीकेयू के संकेत और लक्षण हल्के या गंभीर हो सकते हैं। इसमें शामिल हैं :

  • शरीर में बहुत अधिक फेनिलएलनिन के कारण सांस, त्वचा या मूत्र से गंध आना
  • तंत्रिका संबंधी समस्याएं, जिनमें दौरे पड़ना शामिल है
  • त्वचा पर चकत्ते (एक्जिमा)
  • गोरी त्वचा और नीली आंखें
  • असामान्य रूप से छोटा सिर
  • सक्रियता (अति सक्रियता असामान्य रूप से सक्रिय होने की एक अवस्था है)
  • इंट्लेक्चुअल डिसएबिलिटी (जैसे सीखने, प्रॉब्लम को सॉल्व करने या निर्णय लेने में कठिनाई)
  • विकास में देरी
  • व्यवहारिक, भावनात्मक और सामाजिक समस्याएं
  • मानसिक विकार

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फेनिलकीटोन्यूरिया के कारण क्या हैं? - Phenylketonuria Causes in Hindi

फेनिलकीटोन्यूरिया पीएएच नामक जीन में दोष के कारण होता है। यह एक वंशानुगत स्थिति है। पीएएच जीन फेनिलएलनिन हाइड्रॉक्सिलस बनाने में मदद करता है, जो फेनिलएलनिन को तोड़ने के लिए जरूरी एंजाइम है। फेनिलएलनिन तब खतरनाक रूप से इकट्ठा होने लगता है जब उच्च प्रोटीन वाला खाद्य पदार्थ जैसे अंडे और मांस का सेवन करता है।

यह समस्या तभी किसी बच्चे में होती है जब उसे उसके माता-पिता दोनों से पीएएच जीन की खराब प्रतियां मिलती है। यदि केवल माता या पिता से पीएएच जीन की खराब प्रति बच्चे में पारित होती है तो ऐसे में बच्चे में कोई लक्षण दिखाई नहीं देंगे और वह केवल इस जीन का वाहक होगा।

फेनिलकीटोन्यूरिया का निदान कैसे किया जा सकता है? - Phenylketonuria Diagnosis in Hindi

फेनिलकीटोन्यूरिया का निदान ब्लड टेस्ट के जरिए किया जा सकता है। कुछ विकसित देशों में पीकेयू स्क्रीनिंग टेस्ट की जरूरत पड़ती है। आमतौर पर शिशु के अस्पताल से डिस्चार्ज होने से पहले उसके खून की कुछ बूंदों का परीक्षण किया जाता है।

यदि स्क्रीनिंग टेस्ट पॉजिटिव है, तो निदान की पुष्टि करने के लिए आगे खून और यूरिन टेस्ट की आवश्यकता हो सकती है। जरूरत पड़ने पर जेनेटिक परीक्षण भी किया जा सकता है।

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पीकेयू टेस्ट कितने दिन बाद होता है?

बच्चे के जन्म के एक या दो दिन बाद पीकेयू टेस्ट किया जाता है और सटीक परिणाम प्राप्त करने के लिए बच्चे के आहार में कुछ प्रोटीन का उपयोग किया है।

फेनिलकीटोन्यूरिया का उपचार कैसे होता है? - Phenylketonuria Treatment in Hindi

पीकेयू से ग्रस्त लोग अपने लक्षणों को दूर कर सकते हैं और एक विशेष आहार फॉलो करके व उचित दवाइयों के सेवन से जटिलताओं को रोक सकते हैं।

आहार

पीकेयू का इलाज करने का मुख्य तरीका एक विशेष आहार लेना है, जो फेनिलएलनिन युक्त खाद्य पदार्थों को सीमित कर सकता है। पीकेयू वाले शिशुओं को स्तन का दूध पिलाया जा सकता है। उन्हें आमतौर पर लूफेनैक (एक तरह का पाउडर वाला दूध) देने की भी जरूरत हो सकती है।

जब आपका बच्चा इतना बड़ा हो जाता है कि वह ठोस खाद्य पदार्थों का सेवन कर सके तो उसे ऐसा खाद्य पदार्थ नहीं देना चाहिए जिसमें उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है। ऐसे प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों में शामिल है :

यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि बच्चा पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन प्राप्त करें, इसलिए पीकेयू से ग्रस्त बच्चों को पीकेयू के लिए विशेष पाउडर वाले दूध का उपभोग करने की आवश्यकता होती है। इसमें फेनिलएलनिन को छोड़कर शरीर के लिए आवश्यक सभी अमीनो एसिड होते हैं।

इसके अलावा कुछ ऐसी दवाइयां भी विकसित हो चुकी हैं जो फेनिलएलनिन के स्तर को कम करने में सहायक हैं।

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फेनिलकीटोन्यूरिया के डॉक्टर

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