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पीसीओएस एक हार्मोन समस्या है, जो प्रजनन प्रणाली में अड़चन डाल सकती है. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें महिलाओं को कंसीव करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है.

पीसीओडी में महिलाओं को पीरियड्स अनियमित हो जाता है. पीसीओडी से ग्रसित महिलाओं के अंडाशय सामान्य से बड़े होते हैं. इन बड़े अंडाशय में कई छोटे सिस्ट हो सकते हैं, जिनमें अपरिपक्व अंडे (immature eggs) हो सकते हैं.

लेकिन समय पर पीसीओडी का निदान करते हैं, तो आप गर्भवती होने में सक्षम हो सकती हैं. बेशक, सामान्य से अधिक जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है. आज हम इस लेख में आपको पीसीओडी में प्रेग्नेंसी के इस बारे में बताएंगे.

(और पढ़ें - पीसीओएस में क्‍या खाएं)

  1. पीसीओएस गर्भधारण को कैसे प्रभावित करता है? - How does PCOS affect pregnancy in Hindi?
  2. क्या पीसीओडी में प्रेग्नेंट हो सकते हैं? - What are the chances of getting pregnant with PCOS in Hindi
  3. पीसीओएस में गर्भधारण करने में कितना समय लगता है? - How long can it take to get pregnant in PCOS in Hindi?
  4. पीसीओएस में गर्भधारण कैसे करें? - How to get pregnant with PCOS in Hindi?
  5. पीसीओएस में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के उपाय - Factors that can boost fertility in PCOS in Hindi
पीसीओएस में गर्भधारण कैसे करें? के डॉक्टर

पीसीओएस और गर्भावस्था का क्या संबंध है?

पीसीओएस से ग्रस्त महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान निम्न स्थितियों का खतरा बढ़ सकता है:

  • गर्भपात
  • गर्भावस्था के कारण होने वाला हाई ब्लड प्रेशर
  • गर्भावधि मधुमेह (गर्भ के दौरान ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाना)
  • बच्चे का समय से पहले जन्म होना

पीसीओएस से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी करवाने की आवश्यकता आमतौर पर अधिक होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन महिलाओं के गर्भ में शिशु अपनी उम्र के अनुसार थोड़े बड़े आकार का हो सकता है। 

यदि आपको पीसीओएस है और आप गर्भवती भी हैं, तो आपको जल्द से जल्द अपने डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए। पीसीओएस के लक्षणों की जांच करके और गर्भावस्था के दौरान कुछ विशेष देखभाल करके पीसीओएस से होने वाली जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।

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पीसीओडी से ग्रसित महिलाओं को कंसीव करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि इससे ग्रसित महिलाओं का प्रेगनेंट होना नामुमकिन है. पीसीओडी से ग्रसित महिलाएं समय पर अपना इलाज करवाती हैं, तो वह कंसीव कर सकती हैं. इसके अलावा कई ऐसे तरीके हैं, जिससे पीसीओडी से ग्रसित महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती हैं.

आइए विस्तार से जानते हैं पीसीओडी में महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती हैं या नहीं?

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम या पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज ऐसी स्थिति है, जो प्रसव उम्र की 6 से 15 फीसदी महिलाओं को प्रभावित करती है. अगर आप समय पर पीसीओएस का निदान करते हैं, तो आप गर्भवती होने में सक्षम हो सकते हैं. हालांकि, गर्भावस्था, प्रसव और प्रसव के दौरान आपको अधिक जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है.

वहीं, जिन महिलाओं को पीसीओडी नहीं है, उनकी तुलना में पीसीओडी से ग्रसित महिलाओं में गर्भपात होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है. उनमें प्रीक्लेम्पसिया, गर्भकालीन मधुमेह विकसित होने की संभावना अधिक होती है. इसके अलावा प्रीमैच्योर डिलीवरी का भी खतरा रहता है.

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पीसीओएस से ग्रस्त महिलाओं को प्रेग्नेंट होने में कितना समय लगता है?

यदि आपकी उम्र 35 साल से कम है, आपकी डिंबोत्सर्जन प्रक्रिया नियमित रूप से काम कर रही है (पीसीओएस होने पर भी), आपको व आपके पार्टनर को कोई ऐसी समस्या नहीं है, जो प्रजनन शक्ति को प्रभावित करती है तो ऐसे में आप लगभग एक साल या उससे भी पहले गर्भवती हो सकती हैं।

लेकिन अगर आपको या आपके पार्टनर को कोई ऐसी समस्या है, जो प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही है जैसे शुक्राणुओं की कमी या गर्भाशय में रसौली आदि, तो ऐसे में आपको गर्भवती होने में एक साल से अधिक समय लग सकता है। 35 साल की उम्र के बाद महिलाओं की प्राकृतिक प्रजनन क्षमता कम होने लग जाती है और 40 साल की उम्र तक और भी कम हो जाती है। वैसे लगभग चालीस की उम्र में कुछ महिलाएं प्राकृतिक रूप से गर्भधारण कर लेती हैं, हालांकि इस उम्र में प्रजनन संबंधी दवाओं और अन्य तकनीकों की मदद लेने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं।

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कुछ महिलाओं को तब यह पता नहीं लग पाता है कि वे पीसीओएस से ग्रस्त हैं, जब तक वे गर्भधारण करने की कोशिश नहीं करती। पीसीओएस की ओर आमतौर पर ध्यान नहीं जाता है। लेकिन अगर आप प्राकृतिक रूप से कई सालों से गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हैं, तो ऐसे में आपको डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए।

आपके डॉक्टर आपको गर्भधारण करने में मदद करने के लिए एक विशेष योजना तैयार कर सकते हैं। जीवनशैली में कुछ विशेष प्रकार के बदलाव और कुछ दवाएं हैं, जो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण होने की संभावनाओं को बढ़ा देती है। 

डिम्बोत्सर्जन में मदद वाली दवाएं लें

यदि आपको गर्भवती होने के लिए डिम्बोत्सर्जन की जरूरत है, तो ऐसे में डॉक्टर निम्न दवाएं लिख सकते हैं:

  • क्लोमीफीन टेबलेट एक प्रकार की एंटी एस्ट्रोजन दवा होती है, जो डिम्बोत्सर्जन प्रक्रिया को सामान्य बनाने में  मदद करती है।
  • यदि क्लोमीफीन दवा काम ना कर पाए, तो डॉक्टर डायबिटीज की दवा मेटाफोर्मिन भी दे सकते हैं।
  • यदि क्लोमीफीन और मेटाफोर्मिन दोनो ही काम ना कर पाएं, तो डॉक्टर ऐसी दवा दे सकते हैं जिसमें एफएसएच (Follicle-stimulating-hormone) और एलएच (Luteinizing hormone) होता है। इन दवाओं को इंजेक्शन की मदद से दिया जाता है।
  • लेट्रोजोल (Letrozol) नाम की एक अन्य दवा भी है, जो डोम्बोत्सर्जन प्रक्रिया में मदद करती है। यह दवा आमतौर पर तब इस्तेमाल की जाती है, जब अन्य दवाएं काम ना कर पाएं। 

जीवनशैली के बदलाव करें

कुछ महिलाओं में अधिक वजन बढ़ने से उनके हार्मोन का स्तर प्रभावित हो जाता है। इसलिए यदि आपका वजन अधिक है या आप मोटापे का शिकार हैं, तो वजन कम करने से आपके हार्मोन का स्तर वापस सामान्य हो सकता है। शरीर का 10 प्रतिशत वजन कम करने से भी मासिक धर्म सामान्य समय के अनुसार आने लग सकते हैं। ऐसे आप सफलतापूर्वक गर्भवती हो सकती हैं।

सामान्य तौर पर स्वस्थ आहार लेना, नियमित रूप से व्यायाम करना, धूम्रपान ना करना, तनाव मुक्त रहना और डायबिटीज को कंट्रोल करना आदि की मदद से एक स्वस्थ जीवनशैली अपना कर भी प्रजनन क्षमता में सुधार किया जा सकता है।

याद रखें कि यदि आपके पीरियड्स सामान्य समय के अनुसार नहीं हो रहे हैं या पहले ही आप में पीसीओएस का परीक्षण हो चुका है, तो ऐसे में डॉक्टर की मदद ले लेनी चाहिए। यदि आप गर्भवती होना चाहती हैं, तो किसी अच्छे फर्टीलिटी स्पेशलिस्ट (प्रजनन विशेषज्ञ) से बात करें।

वजन को रखें नियंत्रित

पीसीओडी से ग्रसित महिलाओं का वजन काफी ज्यादा बढ़ता है. अगर आप पीसीओडी से ग्रसित हैं और प्रेग्नेंट होना चाहती हैं, तो सबसे पहले अपना वजन कंट्रोल करने की कोशिश करें. इसके लिए डॉक्टर के सलाहनुसार अपनी बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच करें. बीएमआई से आप जान सकते हैं कि आपके शरीर का वजन हेल्दी है या नहीं. साथ ही आपके शरीर की संरचना कैसी है. अगर आपके शरीर में एक्स्ट्रा चर्बी है, तो उसे कम करने की कोशिश करें. डॉक्टर से बात करें कि प्रेग्नेंट होने के लिए आपके शरीर का कितना वजन होना जरूरी है.

स्वस्थ आहार लें

अगर आप पीसीओडी के साथ प्रेग्नेंट होना चाहती हैं, तो अपने आहार पर ध्यान दें. अपने खानपान में हेल्दी विकल्प का चुनाव करें. स्वस्थ आहार और व्यायाम से आप काफी हद तक हेल्दी रह सकते हैं.

ओव्यूलेशन अवधि पर दें ध्यान

पीसीओडी से ग्रसित महिलाएं भी ओवुलेट होती हैं. ऐसे में अपनी ओव्यूलेशन अवधि पर ध्यान दें. आप ओव्यूलेशन ट्रैक करने के लिए कैलेंडर या ऐप का उपयोग कर सकते हैं. इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि महीने के किस दिन आपके गर्भवती होने की अधिक संभावना है.

ब्लड शुगर की नियमित रूप से करें जांच

अपने ब्लड शुगर का स्तर जांचते रहें. ताकि आप अपने शरीर का ब्लड शुगर स्तर संतुलित रख सकें. साथ ही अपने डॉक्टर से मिलें. पीसीओडी के दौरान गर्भवती होने पर अपना ब्लड शुगर जरूर चेक करें. ताकि आप खुद को और भविष्य में होने वाले बच्चे को ब्लड शुगर की समस्या से बचा सकें.

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पीसीओएस में प्रजनन क्षमता को कैसे बढ़ाएं?

प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के उपाय जैसे आहार में कुछ स्वस्थ बदलाव करना, पोषक तत्वों वाले सप्लीमेंट्स लेना और शारीरिक गतिविधि बढ़ाने से आपका शरीर स्वस्थ होता है और आप स्वस्थ रूप से गर्भधारण कर पाती हैं। कुछ निश्चित मामलों में स्वस्थ आहार की मदद से शरीर का वजन कम करना, गर्भधारण करने में  मदद करने वाला एक प्रभावी उपाय हो सकता है। 

पीसीओएस से ग्रस्त महिलाओं के लिए वजन घटाना और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, जल्दी गर्भवती होने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार जो महिलाएं स्वस्थ जीवनशैली के साथ जीती हैं, उनके गर्भधारण में काफी वृद्धि देखी गई है।

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