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पॉलीसिस्टिक ओवरी डिस्‍ऑर्डर यानि पीसीओडी महिलाओं में होने वाला एक हार्मोनल विकार है। पीसीओडी के कारण महिलाओं में बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। इस समस्‍या के कारण मासिक धर्म और कार्डिएक की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।

पीसीओडी (पीसीओएस) से ग्रस्‍त महिलाओं के अंडाशय में कई छोटे सिस्‍ट (गांठे) बन जाते हैं। पीसीओडी की समस्या १५-४५ वर्षीय लड़कियों एवं महिलाओं में अधिकतर देखी जाती है। पॉलीसिस्टिक ओवरी का आकार और घनत्‍व सामान्य ओवरी की तुलना में बड़ा होता है। सेक्‍स हार्मोन के असंतुलित होने और शरीर के पुरुष हार्मोन का उत्‍पादन शुरु करने पर पीसीओडी की समस्‍या होने लगती है।

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पीसीओडी का संबंध मासिक धर्म में गड़बड़ी और शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्‍तर बढ़ने से है। माहवारी में गड़बड़ी के कारण सामान्‍य मासिक धर्म में देरी होना या तीन महीने से ज्‍यादा समय तक माहवारी ही न आने की दिक्‍कत हो सकती है। पीसीओएस के लक्षणों में अनियमित माहवारी, प्रजनन क्षमता में कमी आना, असामान्‍य रूप से वजन बढ़ना और घटना, ह्रदय से संबंधित समस्‍याएं होना, मुहांसे और रैशेज, शरीर पर अनचाहे बाल आना और बाल झड़ना शामिल हैं। 

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  1. पीसीओडी में डाइट का महत्‍व - Importance of diet In PCOD In Hindi
  2. पीसीओएस के लिए कैसी डाइट होनी चाहिए - What type of diet we should eat in PCOD In Hindi
  3. पीसीओडी में क्‍या खाना चाहिए - Food for PCOD In Hindi
  4. पीसीओडी में क्‍या नहीं खाना चाहिए - Food we should avoid in PCOD In Hindi
  5. पीसीओडी से जुड़े डाइट टिप्‍स - Dietary tips for PCOD In Hindi
  6. पीसीओडी के लिए दिनचर्या में क्या बदलाव करें - Lifestyle changes in PCOD In Hindi

पीसीओएस से ग्रस्‍त महिलाओं में इंसुलिन का स्‍तर सामान्य से कहीं ज्‍यादा होता है। इंसुलिन नामक हार्मोन अग्‍नाशय (पैन्क्रियाज़) के बीटा कोशिकाओं  में बनता है। ये शरीर में कोशिकाओं में शुगर (ग्‍लूकोज़) प्रवेश करने में मदद करता है जहाँ ग्लूकोस को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया होती है।

अगर आपके शरीर में पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है तो ऐसी स्थिति में रक्त शर्करा स्तर (ब्‍लड शुगर लेवल) बढ़ सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस (इसमें शरीर ठीक तरह से इंसुलिन का प्रयोग नहीं कर पाती है) की स्थिति में भी ऐसा हो सकता है।

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अगर आपको इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्‍या है तो आपका शरीर रक्त शर्करा (ब्‍लड शुगर लेवल) को सामान्‍य रखने के लिए उच्‍च मात्रा में इंसुलिन बनाने लगता है। इंसुलिन का स्‍तर अधिक होने पर ओवरी में एंड्रोजन (पुरुषों में होने वाला हार्मोन) जैसे कि टेस्‍टोस्‍टेरोन ज्‍यादा बनने लगता है। शरीर में फैट की मात्रा सामान्‍य स्‍तर से ज्‍यादा होने पर भी इंसुलिन रेजिस्टेंस हो सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस वजन घटाने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है और इसलिए पीसीओएस से ग्रस्‍त महिलाएं मोटापे का शिकार होने लगती हैं।

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इंसुलिन रेजिस्टेंस और पीसीओडी दोनों को ही नियंत्रित करने में संतुलित आहार अहम भूमिका निभाता है। अगर आप आप अपने आहार में स्‍वस्‍थ खाद्य पदार्थों को शामिल करते हैं तो इसकी मदद से आप जल्‍दी ही पीसीओडी या इंसुलिन रेजिस्टेंस पर नियंत्रण पा सकती हैं।

 

शोधकर्ताओं का कहना है कि पीसीओएस में भोजन का महत्‍वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन करने से पीसीओएस को नियंत्रित करने में मदद मिलती है एवं कुछ चीज़ें ऐसी भी हैं जिन्‍हें न खाने की सलाह दी जाती है।

पीसीओडी के लक्षणों को नियंत्रित करने में ये तीनो डाइट लाभकारी रहती है जो कि इस प्रकार है:

  • लो ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स डाइट: लो (कम) जीआई वाले आहार शरीर में देर से पचते हैं, जिससे इन खाद्य पदार्थों की वजह से अन्‍य चीज़ों की तुलना में इंसुलिन लेवल कम बढ़ता है। उदाहरण के तौर पर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे चीनी, सफ़ेद ब्रेड आदि की वजह से इंसुलिन का स्‍तर ज्‍यादा तेजी से बढ़ने लगता है। 
    लो जीआई डाइट वाले आहार में साबुत अनाज, दालें, नट्स, बीज, फल, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अण्डा और अन्‍य असंसाधित एवं लो कार्बोहाइड्रेट फूड्स शामिल हैं।
  • एंटी-इंफ्लामेट्री डाइट:  इसका अर्थ है- शरीर में सूजन कम करने वाला आहार। एंटी-इंफ्लामेट्री फूड जैसे कि बैरीज़, फैटी फिश, पत्तेदार सब्जियां और एक्‍स्‍ट्रा वर्जिन ऑयल सूजन से संबंधित लक्षणों (जैसे थकान,कमजोरी) को कम करने में मदद करते हैं।
  • डैश डाइट:  इसमें नमक या सोडियम का सेवन कम करना होता है। डैश डाइट पीसीओएस के लक्षणों को भी नियंत्रित करने में मदद करती है। ये एक ऐसा डाइट प्‍लान है जिसमें ज्‍यादा से ज्‍यादा प्राकृतिक खाद्य पदार्थों जैसे कि सब्जियां, फल, सूखे मेवे, मछली, चिकन, बींस शामिल होते हैं। इस डाइट में कम फैट वाले डेयरी उत्‍पाद लेते हैं।

पीसीओएस में गुड फैट:

भोजन में अधिक मात्रा में सैचुरेटेड और ट्रांस फैट लेने की वजह से वजन बढ़ने, हाई ब्‍लड प्रेशर और हाई कोलेस्‍ट्रोल की दिक्‍कत हो सकती है। इसलिए अपने आहार में ऐसी चीज़ों को शामिल करने से बचें। इनकी जगह स्वस्थ असंतृप्त वसा को चुनें जो कि वेजिटेबल ऑयल्‍स जैसे कि कैनोला तेल और जैतून के तेल, सूरजमुखी का तेल, सरसों का तेल, नारियल का तेल, एवोकैडो, बादाम, अखरोट आदि में पाया जाता है।

फाइबरयुक्‍त आहार:

ज्‍यादा से ज्‍यादा फाइबर खाने से ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने और कोलेस्‍ट्रोल को कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा फाइबर युक्‍त भोजन करने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है जिससे भूख कम लगती है और आप कम खाना खाते हैं। इससे वजन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। प्रतिदिन 21 से 25 ग्राम फाइबर खाएं। इसके लिए बैरीज़, नाशपातीसंतराअंजीरकिवीपालकब्रोकली, दालें, छोलेसोयाबीनराजमा खाएं। इसके अलावा पत्तेदार सब्जियां, चोकर सहित आटा, छिलके सहित एवं रेशेदार फल, इसबगोल, जई जरूर खाएं।

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प्रोटीन से भरा भोजन:

फाइबर की तरह प्रोटीन भी लंबे समय तक पेट को भरा हुआ रखता है और इससे आपको भूख कम लगती है। वजन को नियंत्रित करने का ये एक महत्‍वपूर्ण तरीका है। अपने प्रत्‍येक भोजन और स्‍नैक में थोड़ा प्रोटीन जरूर रखें जिसके लिए आप उबले अण्डे , काला चना चाट, हमस सब्जियों के सलाद के साथ, ग्रिल्ड पनीर, अंकुरित भेल आदि को मध्य भोजन के रूप में ले सकते हैं । प्रोटीन में चिकन या मछली ले सकते हैं, वहीं शाकाहारी महिलाओं के लिए दालें, सोया, पनीर, चौथाई कप नट्स या बीज प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं। दूध और लो फैट योगर्ट भी प्रोटीन का अच्‍छा स्रोत हैं।

हरी सब्जियां:

अपने आहार में हरी सब्जियों को जरूर शामिल करें। इसमें उच्‍च मात्रा में पोषक तत्‍व और कम कैलोरी मौजूद होती है। इसलिए हरी सब्जियां शरीर को पोषण देने के साथ-साथ वजन कम करने में भी मदद करती हैं। पीसीओएस से ग्रस्‍त महिलाओं को हरी सब्जियां जैसे कि पालक, मेथी, चौलाई, तरोई, लौकी, भिंडी आदि लेने की सलाह दी जाती है। 

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लीन ग्रास-फेड मीट:

किसी भी संतुलित आहार में लीन मीट (कम वसा और उच्‍च मात्रा में प्रोटीन वाला मीट) जरूर होता है। पीसीओडी से ग्रस्‍त महिलाओं के लिए लीन मीट बहुत फायदेमंद होता है। अगर हार्मोनल असंतुलन के कारण वजन कम करने में दिक्‍कत आ रही है तो आपको अपने आहार में लीन मीट को शामिल करना चाहिए।

आहार में वसा की मात्रा का ध्‍यान रखने जितना ही जरूरी है ऑर्गेनिक मांस का सेवन करना। नॉन ऑर्गेनिक मांस (एंटीबायोटिक या विकास हार्मोन के बिना पशुओं द्वारा उत्‍पादित पोल्ट्री, अंडे और डेयरी उत्पाद) में आमतौर पर पशु को दिए जाने वाले उच्‍च स्‍तर के हार्मोन होते हैं और इसका सेवन करने पर इनका सीधा असर मनुष्‍य के हार्मोन लेवल पर पड़ता है। वहीं दूसरी ओर ऑर्गेनिक मांस में पशु हार्मोन का स्‍तर काफी कम होता है इसलिए हार्मोंस के असंतुलन की स्थिति में ये फायदेमंद होता है। 

एंटीऑक्‍सीडेंट्स वाले आहार:

आपको अपने आहार में ऐसी चीज़ों को शामिल करना चाहिए जिसमें एंटीऑक्‍सीडेंट की मात्रा ज्‍यादा हो। एंटीऑक्सीडेंट्स के लिए रंग बिरंगे फल एवं सब्जियां, आंवला, मशरूम,लहसुन, फैटी फिश, बादाम, मूंगफली, चिलगोज़ा, सूरजमुखी के बीज, चिआ सीड्स, ग्रीन टी, हल्दी, लौंग आदि को अपने रोज के भोजन में शामिल कर करते हैं।  इन सभी चीज़ों उच्‍च मात्रा में एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स मौजूद होते हैं। वैसे तो एंटीऑक्‍सीडेंट आहार सभी के लिए फायदेमंद होता है लेकिन पीसीओडी की स्थिति में ज्‍यादा लाभकारी सिद्ध होता है।

पीसीओडी से ग्रस्‍त महिलाओं में ऑक्‍सीडेटिव स्‍ट्रेस (शरीर में फ्री रेडिकल्‍स और एंटीऑक्‍सीडेंट्स में असंतुलन) का स्‍तर बहुत ज्‍यादा देखा गया है। आहार में उच्‍च मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट्स को शामिल कर ऑक्‍सीडेटिव स्‍ट्रेस को कम एवं नियंत्रित किया जा सकता है। इस तरह के खाद्य पदार्थों का चयन करते समय इनका जीआई इंडेक्‍स भी चैक कर लें क्‍योंकि हाई जीआई वाली चीज़ें ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ा सकती है। इस वजह से पीसीओएस से ग्रस्‍त महिला में डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

पीसीओडी में साबुत अनाज:

पीसीओडी से ग्रस्‍त महिला में सामान्‍य लोगों की तुलना में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा चार गुना ज्‍यादा होता है। साबुत अनाज में उच्‍च मात्रा में फाइबर होता है जो कि इंसुलिन के स्‍तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

ब्राउन राइस, गेहूं से बना पास्‍ता, होलव्‍हीट ब्रेड, ज्वार, बाजरा, रागी आदि साबुत अनाज में आते हैं। इनका सेवन करने के बाद कार्बोहाइड्रेट देर से पचता है जिससे खून में शर्करा धीमी गति से रक्त में पहुँचता है और रक्त शर्करा का स्तर अचानक या तेजी से नहीं बढ़ता है। 

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वो चीजें जो इन्सुलिन लेवल को ठीक रखेंगी:

अपने आहार में मेथी, दालचीनी एवं मोरिंगा लीव्स ( सहजन के पत्ते) शामिल करें। कई अध्ययनों के अनुसार ये भोज्य पदार्थ इन्सुलिन की सेंस्टिविटी को बढ़ाने में एवं इंसुलिन रेसिस्टेन्स को भी करने में मदद करते हैं। 

पानी की मात्रा ज्यादा रखें:

पीसीओडी में शरीर में पानी इकट्ठा होने (वाटर रेटेन्शन) की समस्या भी देखी जाती है।  कोशिश करिये कि दिन में ८-१० गिलास पानी रोज पीएं।  सादा पानी नहीं पी पाते तो सादा नीबू पानी पी सकते हैं या पानी में खीरा, नींबू, अदरक, रोजमेरी या सेलरी डाल कर रख लें और डेटॉक्स वाटर की तरह पी सकते हैं। 

आयरन की मात्रा ठीक रखें:

 माहवारी के दौरान ज्यादा रक्तस्राव के कारण आयरन की कमी के आसार बढ़ जाते हैं. पालक, अंकुरित दालें, छोले, राजमा, किनुआ, गुड़, कद्दू के बीज, कम वसा वाले चिकन या मीट, लोहे की कढ़ाही आदि का प्रयोग कर के अपने भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ा सकते हैं.

अन्य आवश्यक पोषक तत्व:

  पीसीओडी में कुछ अन्य पोषक तत्व भी आवश्यक होते है जैसे- कैल्शियम, विटामिन बी १२ इनको अपने भोजन में शामिल करें 

  • कैल्शियम के लिए- दूध, दूध से बनी चीजें, रागी, अंडा, संतरे का जूस, पालक आदि। 
  • विटामिन बी १२ के लिए- दूध एवं दूध से बने पदार्थ, अण्डा, ऑर्गन मीट ( लीवर और किडनी), मछली, विटामिन बी १२ फोर्टीफाइड भोज्य पदार्थ

 

संसाधित खाद्य पदार्थ:

संसाधित खाद्य पदार्थों में हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है जिसका सीधा संबंध इंसुलिन के ज्यादा उत्‍पादन और डायबिटीज से होता है। जैसा कि हमने पहले भी बताया कि पीसीओएस से ग्रस्‍त महिलाओं में डायबिटीज का खतरा ज्‍यादा रहता है इसलिए इन्‍हें अपने आहार में हाई जीआई फूड्स कम से कम करें ।  संसाधिक खाद्य पदार्थों में बिस्‍किट, केक, पैकेटबंद मीट के अलावा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स जैसे कि मैदा, चीनी, शहद, सफेद आलू, व्‍हाइट ब्रेड एवं सफेद चावल, मिठाइयां, जूस पैकेट, शुगर सिरप, कोल्ड ड्रिंक आदि शामिल हैं।

बैड फैट:

जिन खाद्य पदार्थों में सैचुरेटेड और ट्रांस फैट है वो भी पीसीओएस में \ नुकसानदायक होते हैं। इनमें क्रीम, चीज़ और वसायुक्‍त लाल मीट और तला हुआ भोजन शामिल, पैकेट वाले नमकीन, चिप्स, पिज़्ज़ा, बर्गर आदि  है। ये नुकसानदायक वसा शरीर में एस्‍ट्रोजन के उत्‍पादन को बढ़ा देते हैं जिससे पीसीओए के लक्षण और ज्‍यादा दिखने लगते हैं। इसकी वजह से महिलाओं का वजन भी बढ़ सकता है जिसके कारण पीसीओडी के इलाज में और दिक्‍कतें आने लगती हैं।

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सोया उत्‍पाद:

पीसीओएस से ग्रस्‍त महिलाओं में एस्‍ट्रोजन का स्‍तर सामान्‍य से ज्‍यादा हो जाता है। सोया उत्‍पाद एस्‍ट्रोजन के स्‍तर को बढ़ा सकते हैं इसलिए पीसीओएस के मरीज़ों को सोया उत्‍पादों का सेवन कम करना चाहिए। 

जंक फ़ूड को कहे ना:

पिज़्ज़ा, बर्गर, चिप्स, कोक, पेप्सी, लिम्का, नमकीन, कैच अप, चीज़, पैकेट वाली जूस, केक, पेस्ट्री, पेटीज आदि में ऊर्जा के साथ साथ वसा एवं सोडियम भी काफी अधिक मात्रा होती है,  जिससे वजन के साथ साथ शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा एवं उच्च रक्तचाप होने के आसार भी बढ़ जाती है। 

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लोकल एवं मौसमी फल एवं सब्जियों को शामिल करें:

लोकल एवं मौसमी फल एवं सब्जियों में पोषक तत्वों की मात्रा प्रचुर होती है, बिना मौसम की एवं माल्स आदि में रखी सब्जियों पर केमिकल आदि का छिड़काव होता है या इनके कोल्ड स्टोरेज में रखे होने के काफी आसार होते है, जिससे पोषक तत्वों की मात्रा काफी कम हो जाती हैं। 

घर का बना खाना खाएं:

इससे प्रेसेर्वटिव के प्रयोग से बच पाएंगे, कैलोरी एवं सोडियम की मात्रा को कम कर पाएंगे। जिससे वजन कम करने में मदद मिलेगी।

मीठे की तलब के लिए फलों का सेवन करें:

रक्त में इन्सुलिन की मात्रा ज्यादा होने के कारण मीठा खाने की तलब होती है, इसके लिए फलों की सहायता लें।  इसके लिए पपीता, सेब, खरबूजा, खजूर जैसे फलों का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

नुट्रिशन लेबल पढ़ें:

कोई भी पैकेट वाली वस्तु लेने से पहले उस पर लिखी नुट्रिशन लेबल जरूर पढ़े।  कार्बोहायड्रेट, शुगर, ट्रांस फैट, सोडियम आदि की मात्रा कम हो ये देख कर ही खरीदें। 

जीवनशैली में कुछ बदलाव कर के भी पीसीओडी को नियंत्रित किया जा सकता है

नियमित तौर पर व्यायाम करें:

शोधकर्ताओं का कहना है कि पीसीओएस डाइट के साथ व्‍यायाम  किया जाए तो इन्सुलिन की सेंस्टिविटी को बढ़ती है, जिससे इन्सुलिन रेसिस्टेन्स को कम किया जा सकता है, इसके साथ ही नियमित माहवारी, कोलेस्‍ट्रोल लेवल कम करने में भी मदद मिलती है। एक अध्ययन के अनुसार, कम से कम ४५ - ६० मिनट्स व्यायाम हफ्ते में ५ दिन अवश्य करें।

पर्याप्त एवं सही समय पर सोएं:

जैसा की ये अनियमित हॉर्मोन्स से संबधित समस्या है, सही समय पर ली गई नींद हमारे हॉर्मोन्स को ठीक रखने में काफी मदद करती है। 

वजन को नियमित करें:

पीसीओडी में हॉर्मोन्स के अनियमितता के कारण वजन बढ़ने के आसार बढ़ जाते हैं। रोजाना एक्सरसाइज कर के एवं संतुलित आहार ले कर वजन को नियंत्रण में रखें, इससे आप की दवाएं भी ज्यादा प्रभावशाली होंगी। एक शोध के अनुसार, यदि आप अपने वजन का ५% वजन कम करती हैं तो उससे भी आपके पीसीओडी की समस्या में काफी सुधार मिल पाता है। 

दवाएं समय पर लें:

आहार के साथ साथ दवाएं भी अत्यंत आवश्यक है अतः डॉक्टर द्वारा दी गयी पी सी ओ डी की दवाओं नजरअंदाज ना करें, नियमित तौर पर लें, जिससे इस समस्या पर समय पर नियंत्रण किया जा सके। 

तनाव को नियंत्रण में करें:

तनाव से स्ट्रेस होर्मोंस बढ़ते है जो आपके पीसीओडी की स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं। अतः तनाव को कम करने के लिए दिन में कम से कम १०-१५ मिनट्स की मैडिटेशन अवश्य करें। 

धूम्रपान न करें:

धूम्रपान से इन्सुलिन रेसिस्टेन्स की समस्या और बढ़ सकती है इसलिए पीसीओडी पर नियंत्रण के लिए धूम्रपान को जल्दी से जल्दी बंद करें। 

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References

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