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स्वस्थ्य जीवन के लिए नियमित रूप से व्यायाम बहुत आवश्यक होता है। फिट रहने के लिए आप कई तरीकों को प्रयोग में ला सकते हैं। आप चाहें तो नियमित सैर, दौड़, साइकिलिंग या तैराकी को दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं या फिर अपने पसंदीदा खेल को खेलते हुए भी फिटनेस को बरकरार रख सकते हैं। अच्छे स्वास्थ्य और फिटनेस की चाह रखने वालों के लिए जिम एक बढ़िया उपाय हो सकता है। यहां आप कई सारी शारीरिक गतिविधियां कर सकते हैं जो आपको फिट रखने में मदद करेंगे।

भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल के निर्देशानुसार प्रत्येक व्यक्ति को हफ्ते में लगभग 150 मिनट व्यायाम अवश्य करना चाहिए। हालांकि, शरीर के हर हिस्से के व्यायाम के लिए इतना समय भी पर्याप्त नहीं है। इस समस्या का सबसे सरल और बेहतर उपाय है 'कंपाउंड एक्सरसाइज'। इस व्यायाम के जरिए एक ही समय में कई मांसपेशियों के समूहों को लक्षित किया जा सकता है। इन व्यायामों को आप घर पर, पार्क या फिर जिम में कर सकते हैं।

अगर आप देखें तो मौजूदा समय में प्रयोग में लाए जा रहे व्यायाम विभिन्न खेलों, सैन्य प्रशिक्षण अभ्यासों से प्रेरित हैं, जिनका उद्देश्य शरीर का संपूर्ण विकास है। ऐसे में कंपाउंड व्यायामों को दिनचर्या में शामिल करके न सिर्फ आप अपनी फिटनेस को तेजी से सुधार सकेंगे, साथ ही अपने दैनिक व्यायाम को रोचक और आनंददायक भी बना सकेंगे।

  1. कंपाउंड एक्सरसाइज के फायदे - Compound exercises ke laabh
  2. कंपाउंड एक्सरसाइज के प्रकार - Compound exercises ke types
  3. कंपाउंड बॉडीवेट एक्सरसाइज - Compound bodyweight exercises
  4. वजन के साथ कंपाउंड एक्सरसाइज - Weights ke sath Compound exercises
  5. कंपाउंड एक्सरसाइज के टिप्स और सावधानियां - Compound exercises ke Tips aur precaution

कंपाउंड ऐसा अभ्यास है जिसमें एक ही वक्त में कई मांसपेशियों के समूहों का व्यायाम हो जाता है। प्रारंभिक स्तर के बॉडीवेट एक्सरसाइज और वेट-ट्रेनिंग के कुछ व्यायाम भी कंपाउंड एक्सरसाइज की श्रेणी में आते हैं, क्योंकि इन अभ्यासों के दौरान भी एक समय में कई मांसपेशियों का व्यायाम हो जाता है। इन व्यायामों के कई लाभ हो सकते हैं जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं।

समय की बचत : कंपाउंड व्यायामों को प्रयोग में लाने से आप कई तरह के लाभ के साथ अपना समय भी बचा सकते हैं। जिमों में जब आप किसी एक मांसपेशी समूह को लक्षित करते हुए व्यायाम करते हैं तो उसमें एक घंटे से भी अधिक का वक्त लग जाता है, वहीं आप कंपाउंड एक्सरसाइज के माध्यम से कम वक्त में ज्यादा मांसपेशियों के समूहों का व्यायाम कर सकते हैं।

अधिक भार उठाने की स्वतंत्रता : कंपाउंड लिफ्ट व्यायाम में एक ही समय में शरीर की कई मांसपेशियों में तनाव उत्पन्न किया जा सकता है। उदाहरण के लिए सिर्फ हाथ की मांसपेशियों के लिए किए जाने वाले डंबलकर्ल व्यायाम में जितना भार उठाते हैं, इस व्यायाम में उससे अधिक भार उठाकर कई मांसपेशियों को उतने ही समय में सक्रिय कर सकेंगे।

मांसपेशियों में  वृद्धि : कंपाउंड एक्सरसाइज के दौरान चूंकि आप भारी वजन उठा सकते हैं, इससे मांसपेशियों की वृद्धि अन्य व्यायामों के अपेक्षाकृत अधिक होती है।

ज्यादा कैलोरी बर्न : एक ही समय में शरीर की विभिन्न मांसपेशियों के समूहों को लक्षित करके निर्धारित समय में अधिक कैलरी बर्न किया जा सकता है। इन व्यायामों के दौरान वजन उठाकर मांसपेशियों और मेटाबॉलिज्म में वृद्धि का भी अतिरिक्त लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

दिल को बनाता है मजबूत : एरोबिक व्यायामों से अपेक्षाकृत कम समय में कंपाउंड व्यायामों को करते हुए आप हृदय और फेफड़ों की क्षमता को भी बढ़ा सकते हैं।

लचीलेपन में वृद्धि : कंपाउंड का एक अभ्यास करते हुए शरीर के कई जोड़ों का भी व्यायाम हो जाता है। इससे घुटने, कोहनी, कंधे और कूल्हों के जोड़ों की शक्ति में वृद्धि होती है और शरीर में लचीलापन आता है।

बेहतर समन्वय : एक ही व्यायाम में शरीर के कई हिस्सों को शामिल करने से शरीर की गतिविधियों में समन्वय भी अच्छा बना रहता है। इससे आंखों और हाथ के समन्वय में सुधार होता है साथ ही शरीर में संतुलन और स्थिरता बनी रहती है।

जिस किसी भी व्यायाम के दौरान एक ही समय में एक से अधिक मांसपेशियों के समूह सक्रिय अवस्था में आएं, वह कंपाउंड व्यायाम है। मोटे तौर पर, कंपाउंड व्यायाम वजन के साथ या बिना वजन के भी किए जा सकते हैं। दोनों के ही अपने-अपने फायदे हैं।

जो लोग जिम नहीं जा पा रहे हैं, उन्हें भी सप्ताह में दो से तीन दिन वेट ट्रेनिंग के साथ एरोबिक ट्रेनिंग की सलाह दी जाती है। ऐसे लोग बॉडीवेट एक्सरसाइज भी कर सकते हैं। इन अभ्यासों के 10-12 रैप के तीन सेट किए जा सकते हैं। ऐसे ही कुछ बॉडीवेट एक्सरसाइज नीचे दिए जा रहे हैं, जिन्हें करके आप ज्यादा से ज्यादा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

पुश-अप्स

शरीर के कई हिस्सों के लिए बेहद प्रभावी बॉडीवेट अभ्यासों में से एक है पुश-अप्स। वैसे तो इस व्यायाम की कई विविधताएं हैं, लेकिन सबसे सरलतम रूप से किए जाने वाले व्यायाम का एक रूप आज भी फिटनेस प्रेमियों के बीच पसंदीदा बना हुआ है। चूंकि, यह व्यायाम कहीं भी किया जा सकता है, इसलिए इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही है।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

छाती, ट्राइसेप्स, पीठ और कोर

कैसे करें यह व्यायाम

  • पैरों को सीधा करते हुए पेट के बल फर्श पर लेट जाएं। अपनी हथेलियों को कंधों के दोनों ओर रखें।
  • अब जमीन पर दबाव डालते हुए शरीर को तब तक ऊपर की ओर उठाएं जब तक कि दोनों कोहनियां बिल्कुल सीधी न हो जाएं।
  • अब केवल आपके हाथ और पैर की उंगलियां ही जमीन पर होनी चाहिए। सिर से पैरों तक पूरा शरीर एक सीधी रेखा में रखें।
  • अब अपनी कोहनी को मोड़ते हुए शरीर को नीचे लाएं, फर्श से कोई स्पर्श नहीं होना चाहिए। यह एक रैप है।

पुल-अप्स

यह सबसे कठिन बॉडीवेट अभ्यासों में से एक है। पुल-अप्स के दौरान अपने शरीर को सिर्फ हाथों की मदद से ऊपर की ओर उठाना होता है। इस व्यायाम के दौरान एक ही समय में शरीर की कई मांसपेशियों में तनाव उत्पन्न होता है, ऐसे में यह एक बेहतरीन कंपाउंड एक्सरसाइज है। इस व्यायाम को कई सारी विविधताओं के साथ भी कर सकते हैं। इस व्यायाम का सबसे निम्नस्तरीय अभ्यास भी काफी कठिन होता है ऐसे में इसे करते वक्त काफी सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

छाती, पीठ, हाथ और कोर

किन चरणों में करना है व्यायाम

  • अपने सिर के ऊपर की ओर लगे एक समानांतर या पुल-अप बार के नीचे खड़े हो जाएं।
  • अब हाथों से बढ़िया ग्रिप बनाते हुए बार को पकड़ें। आपके हाथ कंधे की चौड़ाई से थोड़ी दूरी पर होने चाहिए।
  • हाथों पर जोर लगाते हुए शरीर को ऊपर की ओर खींचिए और छाती को बार से स्पर्श कराएं।
  • ऊपर की ओर पहुंचने के लिए झटके के साथ कूदें नहीं। शरीर को धीरे-धीरे ऊपर ले जाएं।
  • अब धीरे-धीरे नीचे वापस प्रारंभिक स्थिति में आएं। यह एक रैप है।

डिप्स

डिप्स भी एक ऐसा ही व्यायाम है, जिसमें शरीर को जमीन से ऊपर उठाते वक्त आपकी क्षमता का परीक्षण होता है। डिप्स अभ्यास के जरिए ऊपरी शरीर की सभी मांसपेशियों में वृद्धि की जा सकती है। इस अभ्यास के लिए आपको समानांतर लगे दो बार की आवश्यकता होगी, जिनकी मदद से शरीर को ऊपर की ओर खींचा जा सके।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

कंधे, ट्राइसेप्स, छाती और कोर

किन चरणों में करें व्यायाम

  • सीधे खड़े होकर समानांतर लगे बारों पर अपने दोनों हाथ रखें।
  • हाथों पर जोर देते हुए शरीर को जमीन से ऊपर की ओर उठाएं। संतुलन बनाने के लिए घुटनों को पीछे की ओर मोड़ सकते हैं।
  • अब कोहनियों को मोड़ते हुए शरीर को नीचे की ओर लेकर आएं। नीचे पहुंचने पर आपके कंधे बार के स्तर तक पहुंचने चाहिए। यह एक रैप है।

स्क्वॉट्स

पीठ सहित शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूती देने और उनकी वृद्धि में स्क्वॉट्स बहुत ही असरदार व्यायाम है।

किन मांसपेशियों पर होता है असर :

ग्लूट्स, कूल्हे, पीठ का निचला हिस्सा, कोर, जांघ और पिंडलियां

कैसे करें यह व्यायाम

  • पैरों को कंधे की चौड़ाई से थोड़ी दूरी पर करते हुए सीधे खड़े हो जाएं।
  • संतुलन बनाने के लिए अपने हाथों को सामने की ओर फैलाएं। पीठ को सीधा रखकर घुटनों को मोड़ते हुए बैठने की कोशिश करें।
  • नीचे आते वक्त ऐसी स्थिति बनाएं जैसे आप कुर्सी पर बैठ रहे हैं। जांघों को फर्श के समानांतर रखें। एक या दो सेकंड के लिए ऐसे ही रुकें।
  • अब एड़ी से जोर लगाकर पैरों को सीधा करते हुए प्रारंभिक स्थिति में लौटें। यह एक रैप है।

ब्रपी व्यायाम

यह व्यायाम काफी चुनौतीपूर्ण जरूर होता है, लेकिन शरीर की लगभग सभी प्रमुख मांसपेशियों के समूहों को सक्रिय करने में काफी सहायक भी है। क्रॉसफिट या एचआईआईटी जैसे उच्च तीव्रता वाले वर्कआउट करने वाले लोगों के लिए इसमें ज्यादा कठिनाई नहीं होती है।

किन मांसपेशियों पर होता है इसका असर

बाजू, छाती, पैर, कूल्हे और ग्लूट्स।

कैसे करें यह व्यायाम

  • कूल्हों की चौड़ाई से थोड़ी दूरी पर पैरों को करते हुए सीधे खड़े हो जाएं।
  • फर्श पर सामने की ओर अपने हाथों को रखते हुए घुटनों को थोड़ा मोड़ लें।
  • अपने पैरों को पीछे ले जाते हुए प्लैंक या पुश-अप जैसी स्थिति बनाएं।
  • हाथों को थोड़ा मोड़ते हुए अपनी छाती को फर्श से बिल्कुल करीब लाने की कोशिश करें।
  • अब अपने पैरों को आगे की ओर लाते हुए शरीर को स्क्वॉट की स्थिति में लेकर आएं।
  • अब अपने हाथों को ऊपर की ओर फैलाते हुए कूदकर खड़े होने की स्थिति में वापस आएं। यह एक रैप है।

लंजेस व्यायाम

स्क्वॉट्स की तरह ही लंजेस व्यायाम भी शरीर के निचले हिस्से की सभी मांसपेशियों के लिए एक बेहतर कंपाउंड एक्सरसाइज है। कूल्हे, कोर, ग्लूट्स की मांसपेशियों को मजबूती देने के साथ शारीरिक संतुलन को बढ़ावा देने में यह काफी कारगर है। लंजेस को आप चाहें तो वजन के साथ या बिना वजन के भी कर सकते हैं।

किन मांसपेशियों पर होता है असर :

पीठ के निचले हिस्से, एब्स, कूल्हे, ग्लूट्स, हैमस्ट्रिंग, सामने की जांघ और पिंडलियां

कैसे करें यह व्यायाम

  • हाथों को कमर पर रखते हुए सीधे खड़े हो जाएं। अब अपने दाहिने पैर के साथ एक कदम आगे बढ़ाएं। इतना ही आगे जाएं जिससे व्यायाम में कोई दिक्क्त न आए।
  • पीठ को सीधा रखकर घुटनों को मोड़ते हुए कूल्हों को नीचे की ओर ले जाएं। सामने की ओर देखें।
  • अपने पिछले पैर को जमीन से स्पर्श न होने दें। सुनिश्चित करें कि दोनों घुटने समकोण पर मुड़े हुए हैं।
  • अब अपने दाहिने पैर को वापस लाते हुए पूर्ववत स्थिति में वापस आ जाएं। इस अभ्यास को ऐसे ही बाएं पैर के साथ भी दोहराएं। यह एक रैप है।

अलग-अलग दिनों में शरीर की अलग-अलग मांसपेशियों के समूह ​के लिए किए जाने वाले व्यायामों के दिन अब पुराने होते जा रहे हैं। ऐसे अभ्यासों में काफी समय भी लग जाता है। इन व्यायामों के विकल्प के तौर पर वेटेड कंपाउंड एक्सराइज अब काफी तेजी से लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन व्यायामों से एक ही समय में कई मांसपेशियों को लक्षित किया जा सकता है, जिससे मांसपेशियों पर असर तो अधिक होता ही है, साथ ही समय की भी बचत होती है। यहां हम आपको वेटेड कंपाउंड एक्सराइज के बारे में बताएंगे, जिन्हें आप दैनिक व्यायामों में शामिल कर लाभ उठा सकते हैं। कंपाउंड बॉडीवेट एक्सरसाइजों की ही तरह इन अभ्यासों के भी 10-15 रैप के 3 के सेट किए जा सकते हैं।

बेंच प्रेस व्यायाम

इस अभ्यास के दौरान एक बेंच पर लेटकर डम्बल या बारबेल को उठाना होता है। बेंच प्रेस की सभी विविधताएं, चाहे वो फ्लैट बेंच प्रेस हो या इंक्लाइन या फिर डेक्लाइन, सभी कंपाउंड व्यायामों के अंतर्गत आते हैं। ये सभी व्यायाम एक समय में शरीर की कई मांसपेशियों को लक्षित करते हैं।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

छाती, कंधे, ट्राइसेप्स और कोर

किन चरणों में करें यह व्यायाम

  • सबसे पहले एक सपाट बेंच पर पीठ के बल लेट जाएं। सिर के नीचे तकिया लगा सकते हैं।
  • हाथों को कंधों से थोड़ी चौड़ाई पर रखते हुए बारबेल पर अच्छी ग्रिप बनाएं।
  • अब अपनी बाहों को सीधा करते हुए रैक से बारबेल को उठाएं और अपनी छाती के ऊपर की ओर लाएं।
  • अब धीरे-धीरे अपनी कोहनी को मोड़ते हुए बारबेल को नीचे की ओर लाएं और इसे अपने सीने के मध्य भाग से स्पर्श कराएं।
  • अब अपनी कोहनियों को सीधा करके हुए इसे ऊपर की ओर धक्का दें। पूरे व्यायाम के दौरान अपनी पीठ को बेंच से उठने ने दें। यह एक रैप है।

शोल्डर प्रेस व्यायाम

इस व्यायाम को ओवरहेड या मिलिट्री प्रेस के नाम से भी जाना जाता है। शोल्डर प्रेस एक शानदार कंपाउंड एक्सरसाइज है, खासकर तब जब इसे खड़े होकर किया जाए। सिर के ऊपर की ओर वजन उठाना इतना आसान नहीं होता है। इस अभ्यास के दौरान आपके कंधे, ट्राइसेप्स और कोर मांसपेशियों का एक साथ व्यायाम होता है।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

कंधे, ट्राइसेप्स और कोर

किन चरणों में करें व्यायाम

  • पैरों को कूल्हों की चौड़ाई से थोड़ा दूरी पर रखते हुए सीधे खड़े हो जाएं।
  • कंधों के समानांतर बारबेल को उसी तरह से पकड़ें जैसे फ्रंट स्क्वॉट के दौरान पकड़ते हैं।
  • अब अपनी कोहनियों को सीधा करते हुए बारबेल को ऊपर की उठाएं और उसी अवस्था में एक से दो सेकंड के लिए रुकें। पूरे व्यायाम के दौरान अपनी पीठ को सीधा रखें।
  • धीरे-धीरे बारबेल को कंधे के स्तर तक वापस लाएं। यह एक रैप है।

डेडलिफ्ट्स

यह व्यायाम देखने में तो कठिन लग सकता है, लेकिन शरीर की कई मांसपेशियों के एक साथ व्यायाम के लिए शानदार अभ्यास है। इसको करने के दौरान शरीर की कई मांसपेशियां एक साथ काम कर रही होती हैं, जिससे कोर मांसपेशियों में मजबूती के साथ स्थिरता और शारीरिक मुद्रा में सुधार आता है। इस दौरान शरीर के पीछे की सभी मांसपेशियों में तनाव उत्पन्न होता है।

डेडलिफ्ट व्यायाम करते समय सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर इसे सही रूप में नहीं किया गया तो वर्कआउट इंजरी का जोखिम हो सकता है। हल्के वजन के साथ इस व्यायाम की शुरुआत करें और अभ्यस्त हो जाने के बाद ही वजन बढ़ाएं।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

पीठ, कूल्हे, ग्लूट्स, जांघें और कोर

किन चरणों में करें यह व्यायाम

  • सबसे पहले पैरों को कूल्हों की चौड़ाई से थोड़ी दूर करते हुए खड़े हो जाएं।
  • पीठ को सीधा रखते हुए अपने घुटनों को मोड़ें। अब सामने रखे बारबेल पर ग्रिप बनाएं और कूल्हों को पीछे करें।
  • सामने की ओर देखें, पीठ को सीधा रखें और बारबेल को उठाते समय पैरों को जमीन पर स्थिर रखें।
  • अब पीठ या कोहनी को बिना मोड़े सीधे खड़े हो जाएं। इस स्थिति में बारबेल आपकी जांघों के सामने होनी चाहिए। एक या दो सेकंड के लिए ऐसे ही रुकें।
  • धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ते हुए कूल्हे को पीछे करें और पूर्ववत स्थिति में आ जाएं। यह एक रैप है।

बारबेल हिप थ्रस्ट्स

बारबेल हिप थ्रस्ट हाल ही में लोकप्रिय हुआ एक बेहतरीन कंपाउंड व्यायाम है। शरीर के पीछे की मांसपेशियों जैसे पीठ, ग्लूट्स और हैमस्ट्रिंग के लिए यह काफी लाभदायक माना जाता है। तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो अगर डेडलिफ्ट को सही ढंग से नहीं किया जाता तो हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों में अधिक सक्रियता नहीं दिखती है। साथ ही इसका सारा दबाव जांघों के सामने की ओर पड़ता है। हालांकि, हिप थ्रस्ट्स का पूरा प्रभाव ग्लूट्स और हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों पर ही पड़ता हैं। इस अभ्यास के लिए प्रशिक्षक की सहायता लेना बेहतर माना जाता है।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

पीठ, कोर, कूल्हे, हैमस्ट्रिंग और क्वॉड्रिसेप्स

किन चरणों में करें यह व्यायाम

  • एक फ्लैट बेंच पर आधे लेट जाएं। मतलब आपकी पीठ और कंधे बेंच पर रहें, जबकि पैरों को जमीन पर रखें।
  • अब अपने पेड़ू पर एक तकिया रखते हुए उस पर बारबेल को रखें। दोनों हाथों से अच्छी ग्रिप बनाए रखें।
  • अपने ग्लूट्स और कूल्हों की मदद से ऊपर की ओर धक्का दें। कुछ सेकंड के लिए इसी अवस्था में रुकें। फिर पूर्ववत स्थिति में आएं। यह एक रैप है।

फार्मर्स कैरी

इस व्यायाम के दौरान दोनों हाथों में वजन वाले डंबल लेकर चलने से एक ही समय में शरीर की कई मांसपेशियों में तनाव उत्पन्न किया जा सकता है।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

कंधे, पीठ, हाथ, ग्लूट्स और पैर

किन चरणों में करें यह व्यायाम

  • दोनों हाथों में डंबल या केटलबेल लेकर सीधे खड़े हो जाएं।
  • अब कमरे के एक से दूसरे छोर तक तेज गति से चलें। इस दौरान पीठ को बिल्कुल सीधा रखें, कंधों पर पूरा भार रखते हुए सामने की ओर देखें।
  • कम से कम 30 सेकंड या जितना आपकी क्षमता हो, चलते रहें। इस प्रक्रिया को कम से कम तीन बार दोहराएं।

थ्रस्टर्स

स्क्वॉट्स और शोल्डर प्रेस कठिन अभ्यासों में माने जाते हैं। थ्रस्टर इन व्यायामों से दोगुना कठिन हैं। इस व्यायाम में आप स्क्वाट्स और शोल्डर प्रेस दोनों के ही लाभ ले सकते हैं। इस व्यायाम को बारबेल, डम्बल या केटलबेल के साथ किया जा सकता है।

किन मांसपेशियों पर होता है असर

कंधे, ट्राइसेप्स, पीठ, कोर, कूल्हे और पैर

कैसे करें यह व्यायाम

  • छाती को आगे करते हुए सीधे खड़े हो जाएं, घुटनों को थोड़ा झुकाकर रखें। कंधों पर बारबेल को रखते हुए स्क्वॉट जैसी स्थिति बनाएं।
  • अब अपने घुटनों को झुकाते हुए फ्रंट स्क्वाट की तरह कूल्हों को पीछे करें और पीठ को सीधा रखें। जांघों को फर्श के समानांतर रखें।
  • अब पैरों पर तेज बल का प्रयोग करते हुए घुटनों को सीधा करें और ऊपर की ओर आएं।
  • इसी व्यायाम के दौरान हाथों को सिर के ऊपर ले जाते हुए शोल्डर प्रेस व्यायाम भी करें। यह एक रैप है।

कंपाउंड एक्सरसाइज बेहद फायदेमंद और समय की बचत करने वाली होती हैं। हालांकि, इन व्यायामों के दौरान किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या गलत तकनीक आपके लिए परेशानियां पैदा कर सकती हैं। व्यायाम के दौरान लगने वाले चोट या किसी प्रकार के खिंचाव से बचने के लिए निम्न बातों को अवश्य ध्यान में रखें।

  • किसी भी व्यायाम को करने से पहले उसके चरणों को अच्छी तरह समझ लेना बेहद जरूरी होता है। थ्रस्टर्स अथवा हिप थ्रस्टर्स जैसे जटिल अभ्यासों के दौरान और अधिक सावधानी की जरूरत होती है। शुरुआत में ही वजन के साथ इस तरह के व्यायामों के जटिल चरणों को करने के बजाय बिना वजन के ही इनका अभ्यास करें। व्यायाम के सभी चरणों को अच्छी तरह से समझकर उनसे अभ्यस्त हो जाने के बाद ही वजन के साथ इनको अभ्यास में लाएं।
  • इस तरह के कंपाउंड एक्सरसाइज, विशेष रूप से जिनमें वजन का उपयोग होता है, उन्हें प्रशिक्षकों की देखरेख में ही करें। जिससे व्यायाम के दौरान आपसे तकनीक में कोई गलती न हो और चोट का डर न रहे।

निष्कर्ष -

अन्य व्यायामों की तुलना में कंपाउंड एक्सरसाइज उच्च तीव्रता वाले होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप इसमें अधिक कैलोरी बर्न होती हैं। इनसे मेटाबॉलिज्म और मांसपेशियों की वृद्धि को बढ़ावा भी मिलता है। कंपाउंड एक्सरसाइज के दौरान एक ही समय में कई जोड़ों और मांसपेशियों के समूहों को लक्षित किया जाता है। यही कारण है कि यह व्यायाम प्रभावी और समय की बचत करने वाले होते हैं।

कंपाउंड एक्सरसाइज में कुछ व्यायाम प्रारंभिक स्तर के भी होते हैं, जिन्हें बिना किसी उपकरण के किया जा सकता है। इन व्यायामों के बॉडीवेट संस्करण इसी का उदाहरण हैं। दूसरी ओर वेटेड कंपाउंड एक्सरसाइज अपेक्षाकृत अधिक तीव्रता वाले होते हैं जो आपकी ताकत और फिटनेस को बढ़ाने में सहायक हैं। सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाली बात यह है कि इन अभ्यासों को सही तरीके के साथ-साथ पूर्ण सावधानी से किया जाना चाहिए। व्यायाम के साथ संतुलित आहार और शरीर को पूरा आराम देना भी बहुत आवश्यक होता है।

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References

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