बदहजमी यानी अपच को आम गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर माना गया है. इसके चलते पेट के ऊपरी हिस्से में परेशानी या दर्द का अहसास होता है. आमतौर पर अपच की समस्या गलत खान-पान के कारण होती है, लेकिन इसके पीछे कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं. बदहजमी होने पर व्यक्ति को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है. पेट के ऊपरी हिस्से में जलन, सूजन या बेचैनी महसूस होना, भोजन करते समय पेट जल्दी भर जाना या भोजन के बाद पेट लंबे समय तक भरा महसूस होना आदि अपच के लक्षण माने गए हैं. वहीं, आयुर्वेदिक में जड़ी-बूटियों के जरिए तैयार की गईं औषधियां जैसे - बिल्वादि चूर्ण, चित्रकादि वटी व महाशंख वटी आदि अपच में फायदेमंद साबित हो सकती हैं. ये दवाएं पाचन तंत्र को ठीक करने का काम करती हैं.
आज इस लेख में, हम कुछ ऐसी आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में चर्चा करेंगे जिनका उपयोग अपच को ठीक करने के लिए किया जा सकता है -
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अपच के कारण
आयुर्वेद के अनुसार, शरीर को नियंत्रित करने वाले वात, पित्त और कफ हैं. अपच का प्राथमिक कारण पित्त दोष का बढ़ना है. पित्त पाचन अग्नि के लिए जिम्मेदार होता है और जब यह असंतुलित हो जाता है, तो यह अपच का कारण बन सकता है.
इसके अलावा, गलत खान-पान की आदतें, जैसे - जल्दी-जल्दी खाना या अधिक खाना भी अपच का कारण बन सकता है. अपच में योगदान देने वाले अन्य कारकों में तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, गैस्ट्राइटिस और पेप्टिक अल्सर जैसी कुछ मेडिकल कंडीशन भी शामिल हैं.
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अपच के लिए फायदेमंद आयुर्वेदिक दवाएं
यहां हम उन 5 प्रमुख आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में बात रहे हैं, जिन्हें खाने से अपच की समस्या को ठीक किया जा सकता है. ये दवाएं पाचन तंत्र को सही करने में मदद करती हैं. इन दवाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए. आइए, इन दवाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं -
बिल्वादि चूर्ण
बिल्वादि चूर्ण को बिल्वा फल (एगल मार्मेलोस), शुण्ठि, मेडिकल कैनबिस, धातकी व सौंफ आदि जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाया जाता है. यह एक शक्तिशाली दवा है, जो पाचन में सुधार लाने का काम करती है, सूजन को कम करती है और कब्ज से छुटकारा पाने में मदद करती है. बिल्वा फल टैनिन नामक कंपाउंड से भरपूर होता है, जो पेट को शांत करने और सूजन को कम करने में मदद करता है. चूर्ण को भोजन के बाद गर्म पानी के साथ लिया जाता है. इसे रोज नियमित रूप से लेने पर अपच को प्रभावी ढंग से ठीक करने में मदद मिल सकती है.
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चित्रकादि वटी
चित्रकादि वटी को चित्रक (प्लंबैगो जेलेनिका), पिप्पली (पाइपर लोंगम) और सेंधा नमक (रॉक सॉल्ट) जैसी जड़ी-बूटियों से बनी आयुर्वेदिक दवा है. यह एक पाचन उत्तेजक दवा है, जो भूख को बेहतर बनाने में मदद करती है, पेट फूलने की समस्या को कम करती है और पेट की परेशानी से राहत दिलाने में मदद करती है. चित्रक एक शक्तिशाली जड़ी-बूटी है, जो पाचन अग्नि को उत्तेजित करने और पाचन में सुधार लाने में मदद करती है. वटी को भोजन से पहले गर्म पानी के साथ लिया जा सकता है.
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लवनभास्कर चूर्ण
लवणभास्कर चूर्ण को बनाने में काला नमक, अदरक, काली मिर्च और जीरा जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है. यह दवा पाचन में सुधार करने, सूजन को कम करने और पेट की परेशानी से राहत दिलाने में मदद करती है. काले नमक में कई तरह के मिनरल्स होते हैं, जो पाचन अग्नि को उत्तेजित करने में मदद करते हैं, जबकि अदरक और काली मिर्च में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो पेट में सूजन को कम करने में मदद करते हैं. चूर्ण को भोजन के बाद गर्म पानी के साथ लिया जाता है.
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हिंग्वाष्टक चूर्ण
हिंग्वाष्टक चूर्ण को हींग, जीरा, अदरक और काली मिर्च जैसी जड़ी-बूटियों के मिश्रण से तैयार किया जाता है. इसमें प्रमुख रूप से हींग का इस्तेमाल किया जाता है. पेट से जुड़ी समस्याओं के लिए आयुर्वेद में हींग का खासतौर से उल्लेख किया गया है. यह पेट फूलने से राहत देने और सूजन को कम करने में मदद करती है. वहीं, अदरक और काली मिर्च में भी एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो पेट में सूजन को कम करने में मदद करते हैं. चूर्ण को भोजन के बाद गर्म पानी के साथ लिया जाता है.
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महाशंख वटी
बदहजमी जैसी समस्या होने पर महाशंख वटी का भी सेवन किया जा सकता है. इस आयुर्वेदिक दवा को बनाने में शंख भस्म (शंख), शुण्ठि (अदरक) और पिप्पली (लंबी काली मिर्च) जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, शंख भस्म में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो पेट को शांत करने में मदद करता है. वहीं, अदरक और काली मिर्च में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो पेट में सूजन को कम करने में मदद करते हैं. वटी को भोजन के बाद गर्म पानी के साथ लिया जाता है.
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सारांश
अपच एक सामान्य स्थिति है, जो विभिन्न कारकों जैसे कि खराब आहार, तनाव या किसी मेडिकल कंडीशन के कारण हो सकती है. आयुर्वेदिक में अपच के लिए प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे लक्षणों को कम किया जा सकता है और समग्र पाचन स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है. इसके लिए बिल्वादि चूर्ण, चित्रकादि वटी, लवणभास्कर चूर्ण, हिंग्वाष्टक चूर्ण और महाशंख वटी का खासतौर से इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. यहां हम स्पष्ट कर दें कि ये सभी दवाएं आयुर्वेदिक हैं, लेकिन इन्हें लेने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए, खासकर अगर कोई महिला गर्भवती हैं, स्तनपान कराती हैं या कोई दवा ले रही हैं.
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