आज के समय में हमारी भागदौड़ वाली जिंदगी में हमारे खुद के लिए समय नहीं. यही कारण है कि इसकी वजह से हमारी खानपान की आदतें भी प्रभावित हुई हैं. इसका असर हमारे पाचन तंत्र पर भी पड़ता है. फिर खट्टी डकारें, गैस बनना व पेट फूलना आदि पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं पनपने लगती हैं. पाचन तंत्र बिगड़ने पर इसका असर हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है, लेकिन कुछ आयुर्वेदिक उपचार जैसे कि सौंफ, तुलसी या हींग आदि का सेवन पाचन तंत्र को दुरुस्त कर सकता है.

आज लेख में जानिए पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद आयुर्वेदिक उपचार कौन-कौन से हैं -

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  1. पाचन तंत्र को ठीक करने वाली आयुर्वेदिक दवाएं
  2. ध्यान देने योग्य बातें
  3. सारांश
पाचन तंत्र के लिए आयुर्वेदिक उपचार व दवा के डॉक्टर

जरूरत से ज्यादा खाना, बार-बार खाना, उठने-बैठने का पोश्चर गलत होना, जैसे कारणों की वजह से अपच, सीने में जलन, पेट फूलना जैसी परेशानियां हो सकती हैं. इनको कुछ आयुर्वेदिक दवाओं जैसे त्रिफला या लिवक्लियर हर्बल कैप्सूल से ठीक किया जा सकता है. आइए, इन आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं -

आयुर्वेदिक दवा त्रिफला

कोलन को साफ करने में त्रिफला काफी उपयोगी आयुर्वेदिक दवा है. यह 3 तरह की जड़ी-बूटियों का मिक्सचर है - आंवला, विभतकी और हरीतकी. त्रिफला पेट से टॉक्सिंस को बाहर निकालता है और गैस व एसिडिटी की परेशानी में फायदा पहुंचाता है.

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आयुर्वेदिक दवा डाबर महाशंख वटी

डाबर महाशंख वटी एक उपयोगी आयुर्वेदिक दवा है, जो अपच, एसिड रिफ्लक्स व सीने में जलन जैसी परेशानी को कम करती है. यह काली मिर्च, जौ और पिप्पली का मिश्रण है. इस दवा की डोज उम्र और हेल्थ कंडीशन के आधार पर ली जाती है.

लिवक्लियर हर्बल कैप्सूल

लिवक्लियर पूरी तरह से हर्बल तरीके से बनाई गई कैप्सूल है. इनके साइड-इफेक्ट भी नहीं हैं. यह प्रभावी दवा है, जिसका प्रयोग लिवर से जुड़ी समस्याओं से निजात पाने के लिए किया जाता है, जैसे- एल्कोहलिक लिवर डिजीज, बढ़ा हुआ या फैटी लिवर, कब्ज और अन्य पाचन से जुड़ी समस्याएं. यह दवा भूख न लगने की समस्या को कुछ हद तक कम करती है और अपच समस्याओं से रिकवरी की प्रक्रिया को तेज करती है.

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अविपत्तिकर चूर्ण

अविपत्तिकर चूर्ण एक आयुर्वेदिक हर्बल चूर्ण है, जिसका प्रयोग एसिडिटी, गैस बनने, भूख न लगने, पाचन न होने, बवासीर और पेशाब से जुड़ी समस्याओं से ठीक होने के लिए किया जाता है. यह दवा डाइजेस्टिव सिस्टम में मौजूद ऑर्गन पर असर दिखाती है और काफी प्रभावी मानी जाती है. अगर पेट में एसिड अधिक मात्रा में बनता है, तो उसकी मात्रा को न्यूट्रलाइज करने में भी यह दवा असरदार है.

अग्नितुंडी वटी

अग्नितुंडी वटी भी एक आयुर्वेदिक हर्बल दवा है, जिसका प्रयोग बुखार होने और पाचन न होने पर किया जाता है. यह दवा आंतों की क्षमता मजबूत करने में लाभदायक है. इसमें डाइजेस्टिव हर्ब्स मिले होते हैं. यह आंतों को ठीक करने में व अपच की समस्या से छुटकारा दिलाने में असरकारी है. यह उपयोगी आयुर्वेदिक डाइजेस्टिव टॉनिक में से एक है.

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पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाए रखने के लिए निम्न बातों पर ध्यान देना भी जरूरी है-

  • आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए जरूरी है कि आप केवल तब ही खाना खाएं जब भूख हो और फालतू की ओवर ईटिंग न करें.
  • अगर मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करेंगे, तो लाभदायक रहेगा. 
  • बार-बार खाने की जगह हर 3 घंटे बाद थोड़ा-थोड़ा खाएं.
  • अधिक तीखा और तैलीय खाना भी पाचन तंत्र के लिए अच्छा नहीं होता है.
  • लाइफस्टाइल को हेल्दी रखें और शारीरिक रूप से भी सक्रिय रहने की कोशिश करें.

पाचन तंत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए आयुर्वेद में कई तरह के उपचार उपलब्ध हैं, जैसे - शहद, अदरक, लौंग का सेवन आदि. इनमें कुछ घरेलू उपचार और सप्लीमेंट्स भी शामिल हैं. इसके अलावा, स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए भी आयुर्वेद काफी सारे सुझाव देता है. बस ध्यान रहे कि अपने खानपान में किसी भी तरह के बदलाव से पहले एक बार एक्सपर्ट की राय जरूर जान लें.

(और पढ़ें - पाचन के लिए होम्योपैथिक उपचार)

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