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मांसपेशियों में अनैच्छिक रूप से व अचानक होने वाले संकुचन को मांसपेशियों में ऐंठन या मरोड़ (Muscle cramp) कहा जाता है। ऐंठन एक प्रकार का दर्द होता है जो बार-बार आता व जाता रहता है और इसकी जगह व गंभीरता में भी बदलाव आ सकता है। पेट में मरोड़ या ऐंठन शब्द का इस्तेमाल पेट में मरोड़ की स्थिति एवं अन्य कई प्रकार की पेट की सनसनी और लक्षणों के लिए किया जाता है। लोग पेट के किसी भी हिस्से में हो रहे दर्द को बताने के लिए ‘पेट में दर्द’ या ‘पेट में ऐंठन’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। 

पेट में मरोड़ एक ऐसा दर्द होता है, जो छाती और पेल्विक के बीच के हिस्से में महसूस होता है। इसमें दर्द मध्यम, तीव्र या बार-बार आने और जाने वाला हो सकता है। इसको अक्सर पेट दर्द के नाम से ही जाना जाता है। इसके ज्यादातर लक्षण चिंताजनक नहीं होते और इस समस्या का आसानी से पता लग जाता है और इसका इलाज हो जाता है। लेकिन, कभी-कभी यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। पेट में मरोड़ होने का कारण अपच, कब्ज, पेट के वायरस या यदि आप एक महिला हैं तो मासिक धर्म आदि हो सकते हैं। पेट में दर्द या ऐंठन आदि का इलाज समस्या के कारण के आधार पर किया जाता है।

(और पढ़ें - पेट दर्द के घरेलू उपाय)

  1. पेट में मरोड़ (ऐंठन) के लक्षण - Abdominal Cramps Symptoms in Hindi
  2. पेट में मरोड़ (ऐंठन) के कारण - Abdominal Cramps Causes in Hindi
  3. पेट में मरोड़ से बचाव के उपाय - Prevention of Abdominal Cramps in Hindi
  4. पेट में मरोड़ का निदान - Diagnosis of Abdominal Cramps in Hindi
  5. पेट में मरोड़ का उपचार - Abdominal Cramps Treatment in Hindi
  6. पेट में मरोड़ की दवा - Medicines for Abdominal Cramps in Hindi
  7. पेट में मरोड़ की दवा - OTC Medicines for Abdominal Cramps in Hindi
  8. पेट में मरोड़ के डॉक्टर

पेट में मरोड़ (ऐंठन) के लक्षण - Abdominal Cramps Symptoms in Hindi

पेट में मरोड़ (ऐंठन)​ के क्या लक्षण हो सकते हैं?

जब पेट में ऐंठन या मरोड़ आती है तो दर्द इसका मुख्या लक्षण होता है। या दर्द काफी अलग-अलग तरह से हो सकता है, जैसे -

  • तीव्र, मध्यम, चुभन, ऐंठन जैसा, मरोड़ जैसा या अन्य प्रकार का हो सकता है।
  • दर्द स्पष्ट हो सकता है, बार-बार आना-जाना या लगातार बना रह सकता है।
  • उल्टी का कारण बन सकता है (और पढ़ें - उल्टी रोकने के घरेलू उपाय)
  • दर्द के दौरान आप स्थिर रहना पसंद कर सकते हैं या सही पॉजिशन और राहत ढूंढने के लिए इधर-उधर हिल-डुल सकते हैं।
  • किसी छोटी सी समस्या से भिन्न होना जिसके लिए सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

(और पढ़ें - सर्जरी से पहले की तैयारी)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर आपको निम्न समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो आपको डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

(और पढ़ें - आंतों में सूजन का इलाज)

पेट में मरोड़ (ऐंठन) के कारण - Abdominal Cramps Causes in Hindi

पेट में मरोड़ के कारण व जोखिम कारक

पेट में दर्द एक सामान्य समस्या है जो कई प्रकार के कारकों के कारण हो सकती है या और जटिल रूप धारण कर सकती है।

सामान्य कारण जिनमें शामिल हैं:

गैस्ट्रोएंटराइटिस (पेट का फ्लू)

इस स्थिति में मतली और उल्टी के साथ सामान्य पेट दर्द जुड़ा होता है और द्रव युक्त मल आता है। मल इसमें सामान्य से अधिक बार आता है और अक्सर खाना खाने के बाद ही आता है।

बैक्टीरिया और वायरस ही इसमें ज्यादातर मामलों के कारण होते हैं और इनसे होने वाले लक्षण आमतौर पर कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं। जो लक्षण 2 दिन से अधिक समय तक बने रहते हैं वे एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकते हैं। जैसे संक्रमण या अन्य सूजन व जलन संबंधी स्थितियां

(जैसे की इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज)।

गैस – गैस तब होती है जब छोटी आंत के बैक्टीरिया उन खाद्य पदार्थों को तोड़ते (विघटित करते) हैं, जिन्हें शरीर पचा नहीं पाता। आंत में गैस का दबाव बढ़ने से तीव्र दर्द पैदा हो सकता है। गैस के कारण पेट में खिचाव या रुकावट हो सकती है और इसके कारण पेट में फुलाव व डकार (Belching) आदि की समस्याएं भी हो सकती है।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) – जो लोग आईबीएस से ग्रस्त होते हैं वे कुछ प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचाने में सक्षम नहीं होते हैं।

इस समस्या से ग्रस्त ज्यादातर लोगों को पेट में दर्द इसके मुख्य लक्षण के रूप में होता है और यह आमतौर पर मल त्याग करने के बाद ठीक हो जाता है। इसके अन्य सामान्य लक्षणों में गैस, मतली और पेट में फुलाव आदि शामिल है।

(और पढ़ें - पाचन क्रिया बढाने के उपाय)

एसिड रिफ्लक्स – कभी-कभी पेट के एसिड पीछे की तरफ चले जाते हैं और गले तक पहुंच जाते हैं। रिफ्लक्स की समस्या हमेशा जलन और उसके साथ दर्द पैदा करता है। रिफ्लक्स पेट संबंधी अन्य लक्षण भी दिखा सकता है जैसे पेट में फुलाव या मरोड़।

उल्टी – जैसे एसिड पीछे जाकर पाचन तंत्र में चला जाता है और रास्ते में आने वाले सभी ऊतकों में जलन व दर्द पैदा कर देता है ठीक उसी तरह से उल्टी भी पेट में मरोड़ व दर्द पैदा करने का कारण बनती है। उल्टी भी पेट की मांसपेशियों में दर्द व जलन पैदा करती है।

गैस्ट्राइटिस – जब पेट की परत में सूजन, जलन व लालिमा आ जाती है तो पेट में मरोड़ व दर्द की समस्या होने लगती है।

कब्ज – जब आंतों में मल जमा हो जाता है तो कॉलन (बृहदान्त्र) में दबाव बढ़ जाता है, जिससे पेट में दर्द होने लगता है।

गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डीजीज (GERD) – गर्ड (GERD) के कारण पेट में दर्द हो सकता है और साथ ही साथ छाती में जलन और मतली भी हो सकती है।

पेट या पेप्टिक अल्सर – अल्सर या घाव जो ठीक नहीं हो पाते वे पेट में गंभीर और अस्थिर दर्द पैदा कर सकते हैं। (और पढ़ें - पेट के अल्सर का घरेलु उपाय)

पेट या पेप्टिक में अल्सर का सबसे सामान्य कारण बैक्टीरियल संक्रमण होता है। नॉन स्टेरॉयडल एंटी इंफ्लेमेटरी दवाओं (NSAIDS) का अधिक या लगातार उपयोग करना भी पेप्टिक अल्सर का एक सामान्य कारण माना जाता है।

क्रोहन रोग – क्रोहन रोग पाचन तंत्र की परतों में सूजन व जलन पैदा करता है, जिससे पेट में गैस व दर्द, दस्त, मतली, उल्टी और पेट में फुलाव होने लगता है। लंबे समय तक रहने से यह कुपोषण पैदा कर देती है, जिससे वजन घटना और थकावट जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

सीलिएक रोग – इसमें ग्लूटेन से एलर्जी होने लगती है। ग्लूटेन एक प्रकार का प्रोटीन होता है जो कई प्रकार के अनाजों में पाया जाता है जैसे गेहूं और जौ आदि। ग्लूटेन से एलर्जी होने पर छोटी आंत में सूजन व जलन होने लगती है जिससे दर्द पैदा हो जाता है।

दस्त और पेट में फुलाव भी इसके सामान्य लक्षणों में से एक हैं। समय के साथ-साथ कुपोषण भी हो सकता है जिससे वजन घटना और थकावट जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

मांसपेशियों में खिंचाव व तनाव – रोजाना की गतिविधियों को पूरा करने के लिए पेट की मांसपेशियों का इस्तेमाल करने की आवश्यकता होती है, जिससे मांसपेशियों में चोट या खिंचाव आदि आम समस्या है। कई लोग पेट की एक्सरसाइज पर अधिक फोकस करते हैं, जिससे पेट की मांसपेशियों में क्षति होने के जोखिम बढ़ जाते हैं। (और पढ़ें - मांसपेशियों में खिंचाव या मोच के घरेलू उपाय)

मासिक धर्म के दौरान ऐंठन या एंडोमेट्रीओसिस (Endometriosis) – मासिक धर्म के कारण भी पेट में दर्द, जलन व सूजन या पेट में मरोड़ हो सकती है। मासिक धर्म के दौरान पेट में फुलाव, गैस, ऐंठन और कब्ज जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ये सभी समस्याएं पेट में तकलीफें पैदा करती हैं। (और पढ़ें - मासिक धर्म बंद करने के उपाय)

मूत्र पथ में संक्रमण या मूत्राशय में संक्रमण – यह संक्रमण अक्सर उस बैक्टीरिया द्वारा फैलाया जाता है, जो मूत्रमार्ग और मूत्राशय में पैदा होते हैं, जिससे सिस्टाइटिस या ब्लैडर संक्रमण भी हो जाता है।  (और पढ़ें - यूरिन इन्फेक्शन क्यों होता है)

इसके लक्षणों में दर्द, दबाव और पेट के निचले हिस्से में फुलाव होना शामिल है। ज्यादातर संक्रमणों के कारण पेशाब के दौरान दर्द और गहरे रंग तथा तीव्र गंध का पेशाब आना आदि जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

असाधारण कारण

कुछ मामलों में पेट में ऐंठन होना किसी मेडिकल स्थिति का संकेत हो सकती है, जिसकी अगर तुरंत देखभाल ना की जाए तो यह घातक हो सकती है।

पेट में मरोड़ होने के कुछ कारण जो कम सामान्य (Less common) हैं:

पेट में मरोड़ से बचाव के उपाय - Prevention of Abdominal Cramps in Hindi

पेट में दर्द (ऐंठन)​ की रोकथाम कैसे करें?

पेट में ऐंठन की मध्यम स्थिति को ठीक करने के लिए आप निम्नलिखित घरेलू तरीके अपना सकते हैं -

  • पानी व अन्य साफ तरल पदार्थ पीएं -  आप थोड़ी मात्रा में कुछ सॉफ्ट ड्रिंक ले सकते हैं। डायबिटीज से ग्रस्त लोग अपने ब्लड शुगर को चेक करते रहें और जरूरत के अनुसार दवाएं लेते रहें। (और पढ़ें - डायबिटीज में परहेज)
  • पहले कुछ घंटों के लिए कठोर खाद्य पदार्थों का सेवन ना करें।
  • यदि आपको उल्टी आ रही है तो 6 घंटे तक इंतजार करें और फिर थोड़ी मात्रा में हल्के खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जैसे चावल, सेब की चटनी या हल्के वाले बिस्कुट आदि। डेयरी उत्पादों का सेवन ना करें। (और पढ़ें - दूध पीने के क्या फायदे हैं)
  • अगर दर्द पेट के उपरी हिस्से में है और खाना खाने के बाद शुरू होता है, तो एंटासिड्स दवाएं मदद कर सकती हैं, खासकर जब आपको छाती में जलन या अपच महसूस हो रही हो। ऐसे में खट्टे फल, उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ, तला हुआ या चिकनाई वाले भोजन, टमाटर के उत्पाद, कैफीन, शराब और कार्बोनेटेड पेय आदि का सेवन करने से बचें। (और पढ़ें - शराब छुड़ाने के उपाय)
  • जब तक आपके डॉक्टर ना लिखे तब तक एस्पिरीन, आईबूप्रोफेन या अन्य एंटी-इन्फ्लेमेट्री दवाएं और अन्य मादक दर्द की गोलियों का उपयोग ना करें। अगर आप जानते हैं कि दर्द आपके लीवर से जुड़ा है, तो आप एसिटामिनोफेन ट्राई कर सकते हैं।

(और पढ़ें - फैटी लीवर का इलाज)

निम्नलिखित अतिरिक्त तरीके कुछ प्रकार की पेट में ऐंठन की रोकथाम कर सकते हैं -

  • रोजाना खूब मात्रा में पानी पीना (और पढ़ें - रोज कितना पानी पीना चाहिए)
  • भोजन को थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाना
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करना
  • गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करना
  • यह सुनिश्चित करना की आपका भोजन अच्छी तरह से संतुलित है और फाइबर युक्त है।
  • खूब मात्रा में फल व सब्जियों का सेवन करना

(और पढ़ें - संतुलित आहार किसे कहते है)

पेट में मरोड़ का निदान - Diagnosis of Abdominal Cramps in Hindi

मांसपेशियों में मरोड़ का परीक्षण कैसे किया जाता है?

मरीज की जांच करने से डॉक्टरों को दर्द के कारण को ढूंढने के लिए कुछ अतिरिक्त सुराग मिल सकते हैं। डॉक्टर निम्न परीक्षण कर सकते हैं -

  • आंतो से आने वाली ध्वनि की उपस्थिति की जांच करना, यह ध्वनि तब आती है जब आंतों में रुकावट होती है।
  • सूजन व जलन के संकेतों की उपस्थिति (परीक्षण के दौरान एक विशेष युक्तिचालन के द्वारा) (और पढ़ें - सूजन के लिए घरेलू उपाय)
  • टेंडरनेस (छूने पर दर्द होना) की जगह का पता लगाना

(और पढ़ें - लैब टेस्ट लिस्ट के बारे में)

अगर परीक्षण और टेस्ट आदि की आवश्यकता पड़ती है, तो इसमें निम्न शामिल हो सकते हैं -

  • रेक्टल परीक्षण – छिपे हुऐ खून या अन्य समस्याओं को चेक करने के लिए (और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट क्या है)
  • लिंग व अंडकोषों की जांच - यदि आप एक पुरूष हैं, तो डॉक्टर आपके लिंग या अंडकोषों की जांच कर सकते हैं। (और पढ़ें - बिलीरुबिन टेस्ट के बारे में)
  • पेल्विक परीक्षण - यदि आप एक महिला हैं तो डॉक्टर आपके गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय में समस्याओं की जांच के लिए आपका पेल्विक परीक्षण कर सकते हैं। (और पढ़ें - लेप्रोस्कोपी क्या है)
  • ब्लड टेस्ट – संक्रमण (जो सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ा देता है) की और खून बहने (जो लो ब्लड काउंट या हीमोग्लोबिन का कारण बनता है) की जांच करने के लिए। (और पढ़ें - टेस्टोस्टेरोन टेस्ट के बारे में)
  • अन्य ब्लड टेस्ट – जो लीवर, अग्नाशय और ह्रदय में एंजाइम्स की जांच करते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें कौन सा अंग शामिल हो सकता है। (और पढ़ें - लिवर फंक्शन टेस्ट के बारे में)
  • यूरिन टेस्ट – मूत्र में संक्रमण या मूत्र में खून आने (अगर किडनी स्टोन है तो मूत्र में खून  सकता है) की जांच करने के लिए। (और पढ़ें - स्टूल टेस्ट के बारे में)
  • ईसीजी (ECG) – हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए। (और पढ़ें - मैमोग्राफी क्या है)
  • अल्ट्रासाउंड – पेट का अल्ट्रासाउंड करना (और पढ़ें - पेट स्कैन टेस्ट के बारे में)
  • एंडोस्कोपी एक ऐसा परीक्षण होता है जिसमें एक लचीली ट्यूब जिसके सिरे पर लाइट तथा वीडियो कैमरा लगा होता है। इसका इस्तेमाल बिना सर्जरी किए पेट के अंदरूनी अंगों का परीक्षण करने के लिए किया जाता है। अलग-अलग अंगों को देखने के लिए एंडोस्कोपी के अलग-अलग नामों का इस्तेमाल किया जाता है।

(और पढ़ें - इको टेस्ट के बारे में)

पेट में मरोड़ का उपचार - Abdominal Cramps Treatment in Hindi

पेट में ऐंठन या मरोड़ का उपचार कैसे करना चाहिए?

पेट में दर्द, मरोड़ या ऐंठन का इलाज इसके कारणों के आधार पर किया जाता है। सूजन व जलन, अपच या अल्सर आदि समस्याओं के लिए दवाएं भी दी जाती हैं। कभी-कभी संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक दवाओं की भी आवश्यकता पड़ सकती है। अगर आपको लगता है कि आपके पेट में मरोड़ या ऐंठन होने के कारण कुछ प्रकार के खाद्य या पेय पदार्थ हैं। तो ऐसे में डॉक्टर आपको कुछ दिन के लिए उन खाद्य पदार्थों को छोड़ने की सलाह दे सकते हैं, ताकि दर्द में सुधार है या नहीं यह देखा जा सके। अपेंडिसाइटिस और हर्निया जैसे कुछ मामलों में सर्जरी आवश्यक हो सकती है।

(और पढ़ें - अपच का इलाज)

दवाएं

पेट में मरोड़ के लिए डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली (Prescription) और बिना डॉक्टर की पर्ची के मेडिकल स्टोर से मिलने वाली (Over the counter) दोनो प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। इन दवाओं को पेट में मरोड़ के अंतर्निहित कारणों के आधार पर प्रयोग किया जाता है।

दवाओं के कुछ प्रकार जिनको लेने की सलाह दी जा सकती है -

  • अमीनोसेलीसिलेट और कोर्टिकोस्टेरॉयड – इन दवाओं का प्रयोग इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज का इलाज करने के लिए किया जाता है।
  • एंटासिड्स या प्रोटोन पंप इनहिबिटर (PPIs) – ये दवाएं पेट में एसिड के स्तर को कम करती हैं, जो गैस्ट्राइटिस से जुड़ी पेट की मरोड़ को विकसित कर रहा होता है।
  • एंटीबायोटिक – गैस्ट्राइटिस या गेस्ट्रोएंटेराइटिस का कारण बनने वाले बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज करने के लिए इन दवाओं का उपयोग किया जाता है।
  • एंटीस्पास्मोडिक मेडिकेशन (Antispasmodic medications) – जो इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज से ग्रस्त होते हैं इन दवाओं की मदद से उनकी ऐंठन ठीक होने लगती है।

(और पढ़ें - दवा की जानकारी)

मरीज का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि डॉक्टर किस कारण को पेट में दर्द होने की वजह समझ रहे हैं।

मरीजों को इंट्रावेनस (IV) की मदद से कुछ तरल दवाएं दी जाती हैं। जब तक दर्द के कारण का पता नहीं चल पाता, डॉक्टर तब तक मरीज को कुछ भी ना खाने या पीने के लिए बोल सकते हैं। यह कुछ मेडिकल स्थितियों को और बद्तर होने से उनकी रोकथाम करने के लिए किया जाता है। अगर मरीज को सर्जरी की जरूरत है तो उसके लिए मरीज को तैयार करने के लिए भी यह किया जा सकता है (अगर एक सामान्य अनेस्थेसिया की जरूरत होती है, तो खाली पेट बेहतर होता है)।

(और पढ़ें - छाती में दर्द के कारण)

मरीज को दर्द कम करने की दवाएं भी दी जा सकती हैं।

  • आंतों में ऐंठन के कारण होने वाले दर्द के लिए डॉक्टर कुल्हे, बाजू या टांग में इन्जेक्शन दे सकते हैं।
  • अगर मरीज को उल्टी आने की समस्या नहीं है, तो डॉक्टर उनको एक एंटासिड तरल पीला सकते हैं या अन्य दर्द निवारक दवाएं खिला सकते हैं।

(और पढ़ें - आंतों में सूजन का इलाज)

कुछ प्रकार की पेट में मरोड़ व दर्द की समस्याओं को सर्जिकल प्रक्रिया की आवश्यकता भी पड़ सकती है।

अगर पेट में दर्द, पेट के किसी संक्रमित हिस्से से हो रहा है जैसे अपेंडिक्स या पित्ताशय आदि, तो मरीज को अस्पताल में भर्ती किया जाता है। इनके लिए सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

आंतों में किसी प्रकार की रुकावट के लिए भी सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, यह निर्भर करती है कि आंतों में रुकावट किस कारण से हो रही है, आतों में रुकावट कितनी है और आंतों की यह रुकावट स्थायी है या अस्थायी।

अगर मरीज को दर्द उसके किसी अंदरूनी अंग (जैसे आंत या पेट) के फटने या उसमें छेद होने के कारण हो रहा है, तो उनको तत्काल सर्जरी की आवश्यकता होती है और उनको सीधे ऑपरेशन रूप में ले जाया जाता है।

(और पढ़ें - इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज का इलाज)

घरेलू उपचार

बहुत लोगों को घरेलू उपचारों से ही पेट में ऐंठन की समस्या से राहत मिल जाती है। लेकिन, जो महिलाएं गर्भवती हैं उनको घरेलू उपचारों का उपयोग करने से पहले एक बार डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। क्योंकि कुछ घरेलू उपचार गर्भावस्था के दौरान उपयुक्त या सुरक्षित नहीं होते।

कुछ घरेलू उपचार जो प्रभावी हो सकते हैं, उनमें निम्न शामिल हैं -

  • आराम करना – जो लोग मांसपेशियों में खिंचाव के कारण पेट में मरोड़ की समस्या हुई है, तो वे पेट को आराम देकर और पेट की एक्सरसाइज से बचकर इस समस्या से राहत पा सकते हैं। (और पढ़ें - थकान दूर करने के उपाय)
  • गर्मी – पेट को गर्म पानी की बोतल से सेंकने से पेट की मांसपेशियों को आराम दिया जा सकता है और ऐंठन को शांत किया जा सकता है। (और पढ़ें - मांसपेशियों में खिंचाव का इलाज)
  • मालिश – पेट की मांसपेशियों पर हल्का मसाज या मालिश करने से उनकी खून की आपूर्ति में सुधार होता है, जिससे ऐंठन व मरोड़ में आराम मिलता है। 
  • हाइड्रेशन – खूब मात्रा में पानी पीना निर्जलीकरण (Dehydration) से बचा सकता है। निर्जलीकरण मांसपेशियों में मरोड़ का कारण बन सकता है या उनकी स्थिति को और बद्तर बना सकता है। स्पोर्ट्स ड्रिंक जो इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करते हैं, वे भी काफी मददगार हो सकते हैं, लेकिन इनका सेवन उचित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। क्योंकि इन पेय पदार्थों में शुगर की मात्रा अत्यधिक होती है। (और पढ़ें - शरीर में पानी की कमी को दूर करने के उपाय)
  • एप्सोम साल्ट बाथ – गर्म पानी में एप्सोम नमक मिलाकर नहाना मांसपेशियों में मरोड़ को ठीक करने के लिए काफी प्रचलित घरेलू उपचार है। गर्म पानी मांसपेशियों को शांत करता है और एप्सोम नमक में उच्च मात्रा में मैग्निशियम पाया जाता है, जो मांसपेशियों की मरोड़ में काफी मददगार होता है।

(और पढ़ें - गर्म पानी से नहाने के फायदे)

Dr. Sneh Mohan Soni

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सामान्य चिकित्सा

Dr. Fatma Perween

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सामान्य चिकित्सा

Dr. Nikhil Pise

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पेट में मरोड़ की दवा - Medicines for Abdominal Cramps in Hindi

पेट में मरोड़ के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine Name
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Trigan D खरीदें
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Temfix Spas खरीदें
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Schwabe Sabal Pentarkan खरीदें
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Acispas खरीदें
Radic खरीदें
Cycloran खरीदें
Ranidic खरीदें
Ranitas Dc खरीदें
Schwabe Alstonia scholaris MT खरीदें
Rd S खरीदें
Reden Plus खरीदें
Zidium खरीदें

पेट में मरोड़ की दवा - OTC medicines for Abdominal Cramps in Hindi

पेट में मरोड़ के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine Name
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References

  1. Wieger L Homana ,Theo G Mank. Human giardiasis: genotype linked differences in clinical symptomatology. Volume 31, Issue 8, June 2001
  2. Ronald G. Barr, Melvin D. Levine, John B. Watkins. Recurrent Abdominal Pain of Childhood Due to Lactose Intolerance — A Prospective Study. June 28, 1979 N Engl J Med 1979; 300:1449-1452
  3. SuEllenToth-Fejel, Rodney F Pommier. Relationships among delay of diagnosis, extent of disease, and survival in patients with abdominal carcinoid tumors. Volume 187, Issue 5, May 2004
  4. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Abdominal pain
  5. Better health channel. Department of Health and Human Services [internet]. State government of Victoria; Abdominal pain in adults
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